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राज्यसभा उपचुनाव का बिगुल आज बजेगा, मुरुगन की सीट के लिए नामांकन शुरू; भाजपा में कई नाम चर्चा में

भोपाल  केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट पर उपचुनाव के लिए आज अधिसूचना जारी होगी। इसके साथ ही नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। भाजपा में इस सीट के लिए कई दावेदारों के नाम चर्चा में हैं। मुरुगन अप्रैल 2024 में मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य बने थे। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था, लेकिन इस्तीफे के बाद यह सीट रिक्त हो गई। अब उपचुनाव के जरिए इस सीट पर नए सदस्य का चयन होगा। भाजपा में कई नामों पर चर्चा इस सीट के संभावित दावेदारों में तमिलनाडु भाजपा की पूर्व विधायक वनथी श्रीनिवासन का नाम भी सामने आया है। हालांकि, पार्टी ने अब तक किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ज्यादा संभावना एमपी के बाहर के नेता की ही है। वहीं एमपी के नेताओं में पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक आशीष अग्रवाल, पूर्व उपाध्यक्ष विनोद गोटिया, प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बरुआ और पूर्व मंत्री रंजना बघेल के नाम चर्चा में हैं। 229 विधायकों के वोट से तय होगा चुनावी गणित मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। ऐसे में 229 विधायकों के आधार पर चुनावी गणित देखा जा रहा है। राज्यसभा की एक सीट के लिए जीत का कोटा निर्धारित नियमों के अनुसार तय होगा। बीना विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति भी अहम है। वे खुद को कांग्रेस में बताती हैं, लेकिन भाजपा के कार्यक्रमों में भी नजर आती रही हैं। दलबदल से जुड़े मामले के कारण उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए उनके वोट को लेकर तस्वीर साफ होने के बाद ही दोनों दलों की प्रभावी संख्या का सटीक आकलन हो सकेगा। मुरुगन कब सांसद बने, कब दिया इस्तीफा? मुरुगन सितंबर 2021 में पहली बार तमिलनाडु से राज्यसभा पहुंचे थे। 3 अप्रैल 2024 को वे मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य बने। उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था। अक्टूबर 2026 में उनके इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई है। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की स्थिति प्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं। इनमें भाजपा के सात और कांग्रेस के तीन सांसद थे। मुरुगन के इस्तीफे के बाद एक सीट रिक्त है। उपचुनाव के बाद प्रदेश से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व फिर 11 सदस्यों का हो जाएगा।

मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव की तारीखों का ऐलान, निर्वाचन आयोग ने जारी किया कार्यक्रम

 भोपाल  मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट पर उपचुनाव का एलान (MP Bypoll 2026) हो गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने यह जानकारी 22 अक्टूबर, गुरुवार को दी। आयोग की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद 14 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट रिक्त हुई थी। इस सीट पर उपचुनाव के लिए प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। बता दें डॉ. एल. मुरुगन, केंद्र में भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए सरकार में केंद्रीय मंत्री भी थे। क्या है उपचुनाव का पूरा शेड्यूल? (MP By-Election 2026) चुनाव आयोग के मुताबिक इस सीट पर उपचुनाव के लिए 26 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 2 नवंबर, नामांकन पत्रों की जांच 3 नवंबर और नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 5 नवंबर तय की गई है। इस सीट पर 12 नवंबर 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा, जबकि मतगणना, यदि जरूरी हुई तो उसी दिन शाम 5 बजे से शुरू होगी। चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तारीख 16 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। इस सीट पर निर्वाचित होने वाले सदस्य का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक रहेगा। चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को लेकर भी कुछ अहम निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि बैलेट पेपर पर वरीयता अंकित करने के लिए सिर्फ बैंगनी रंग का स्केच पेन ही इस्तेमाल किया जाएगा। यह पेन रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा दिया जाएगा और पहले से तय मानक का होगा। इसके अलावा किसी भी अन्य पेन का इस्तेमाल किसी भी हालत में नहीं किया जा सकेगा। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त करने का भी फैसला किया है। चुनाव प्रक्रिया की कड़ी निगरानी की जाएगी ताकि चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। बता दें कि राज्यसभा में मध्य प्रदेश से खाली हुई यह सीट काफी अहम मानी जा रही है। डॉ. एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद इस सीट पर नए सदस्य का चुनाव होना है, जिसका कार्यकाल 2030 तक रहेगा। मुरुगन को जुलाई 2021 में पहली बार केंद्रीय राज्यमंत्री बनाया गया था। कौन डालते हैं वोट? राज्यसभा सदस्य का चुनाव आम जनता सीधे नहीं करती है. इसमें संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य यानी विधायक मतदान करते हैं. इसलिए मध्य प्रदेश के विधायक इस उपचुनाव में अपना वोट डालेंगे. अब देखना है कि सबकी नजर किस पर रहेगी. इस सीट के लिए कौन-कौन उम्मीदवार नामांकन दाखिल करता है. नॉमिनेशन और नाम वापसी का प्रोसेस पूरा होने के बाद तस्वीर साफ होगी कि मैदान में कितने कैंडिडेट्स हैं. इसके बाद 12 नवंबर को मतदान और मतगणना के साथ नतीजे सामने आ जाएंगे।  राज्यसभा उपचुनाव में मध्य प्रदेश विधानसभा के विधायक वोट डालेंगे. बता दें, बीजेपी के 164, कांग्रेस के 65 और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) का 1 विधायक है. डॉ. एल. मुरुगन के मुताबिक, उन्होंने प्रधानमंत्री से मंत्रिपरिषद और राज्यसभा की सदस्यता से फ्री करने की अपील की थी. वह तमिलनाडु जाकर अपनी पार्टी को मजबूत करना चाहते हैं. इसलिए पीएम मोदी को लिखे एक लेटर में भी उन्होंने कहा था कि वह गांवों और गलियों तक जाकर पार्टी का संगठन मजबूत करना चाहते हैं. इसके साथ ही, उनका मकसद 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए अभी से मजबूत आधार तैयार करना है।  विधानसभा में क्या है संख्याबल? राज्यसभा उपचुनाव के लिहाज से समीकरणों की बात करें तो मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 विधायक हैं। भारतीय जनता पार्टी के पास 164, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 65 और भारत आदिवासी पार्टी के एक विधायक हैं। ऐसे में इस सीट पर बीजेपी का पलड़ा भारी माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस सीट के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

‘तीन नहीं 403 पर नजर…’ सपा तीसरा राज्यसभा उम्मीदवार नहीं उतारेगी? अखिलेश के ट्वीट से मिले संकेत

 नई दिल्ली समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के एक पोस्ट ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है. अखिलेश ने एक्स पर लिखा, "अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है." उनके इस बयान को राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि सपा अब राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कोई और उम्मीदवार नहीं उतारेगी और उसका पूरा फोकस विधानसभा चुनाव पर रहेगा।  दरअसल, उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है और एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के वोट चाहिए. मौजूदा तौर पर विधानसभा की प्रभावी संख्या 396 है. सपा के पास 98 विधायक हैं।  जेल में बंद रमाकांत यादव को वोटिंग की इजाजत नहीं मिलती है तो यह संख्या 97 रह सकती है. कांग्रेस के दो विधायकों का समर्थन मिलने पर सपा के पास 99 वोट हो सकते हैं. ऐसे में दो राज्यसभा सीटों के लिए जरूरी 74 वोट उसके पास आसानी से हैं।  तीसरी सीट के लिए 111 वोट की जरूरत सपा अगर तीसरे उम्मीदवार को उतारती तो तीनों सीटें जीतने के लिए 111 प्रथम वरीयता वोट चाहिए होते. दो सीटें जीतने के बाद करीब 25 वोट बचते. ऐसे में तीसरी सीट जीतने के लिए कम से कम 12 और विधायकों के समर्थन  इसी नंबर को पूरा करने के लिए सपा की नजर विपक्षी और तटस्थ विधायकों पर थी. सुभासपा के तीन ऐसे विधायक, जिनकी पृष्ठभूमि सपा से जुड़ी रही है, उनके समर्थन की उम्मीद थी. सपा के कुछ बागी विधायकों के वापस आने की भी चर्चा थी. इसके अलावा आरएलडी, अपना दल और कुछ दूसरे गैर-बीजेपी विधायकों के रुख पर भी नजर थी।  अखिलेश के पोस्ट से बदल गया गेम अखिलेश यादव पहले कह चुके थे कि तीसरा उम्मीदवार तभी उतारा जाएगा, जब जरूरी नंबर पूरा हो. लेकिन अब "तीन नहीं, चार सौ तीन" वाले पोस्ट के बाद संकेत मिल रहे हैं कि सपा ने तीसरी राज्यसभा सीट की दौड़ से पीछे हटने का फैसला कर लिया है।  ऐसे में राज्यसभा चुनाव में सपा की रणनीति फिलहाल दो सीटों तक सीमित होती दिख रही है, जबकि अखिलेश यादव की नजर अब उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर है। 

राज्यसभा चुनाव के लिए BJP की बड़ी घोषणा, UP से 8 उम्मीदवारों के नाम जारी; हरदीप पुरी बाहर

लखनऊ  भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी लिस्ट जारी कर दी है। इसमें कुल आठ उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। हालांकि इसमें हरदीप सिंह पुरी का नाम शामिल नहीं है। इस लिस्ट में दो ब्राह्मण चेहरे हैं, जबकि एक राजपूत चेहरा भी है। वहीं, दो महिलाओं को भी जगह दी गई है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 8 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है. पार्टी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रत्याशियों को जीत की अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं।  बीजेपी की ओर से जारी सूची में 3 OBC, 2 SC और 3 सामान्य वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं. इनमें 2 महिलाएं भी हैं. वहीं, उम्मीदवारों में 2 ब्राह्मण और 1 राजपूत शामिल हैं. OBC वर्ग में 1 लोधी, 1 पाल और 1 कुर्मी उम्मीदवार हैं।  भाजपा के केंद्रीय कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में इन आठ नामों की घोषणा की गई। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में संगठनात्मक अनुभव के साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है। भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह का नाम प्रमुख है। इसके अलावा राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यसागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया गया है। धर्मपाल सिंह लोधी बिरादरी से आते हैं. वह योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. प्रकाश पाल संगठन में क्षेत्रीय मंत्री हैं और पाल बिरादरी से आते हैं. ओबीसी समुदाय में पाल को गडेरिया बिरादरी माना जाता है. विद्यासागर सोनकर दलित बिरादरी से हैं और पार्टी के अहम पदों पर रह चुके हैं. वह पूर्व MLC और मछलीशहर से पूर्व सांसद रह चुके हैं. इसके अलावा वह पार्टी के पूर्व महामंत्री भी हैं. इस लिस्ट में  मंत्री हरदीप पुरी-बीएल वर्मा का नाम नहीं का नाम नहीं आया है।  16 अक्टूबर को वोटिंग उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की अंतिम तिथि छह अक्टूबर है। 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों की स्थिति मजबूत है। चुनाव में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के मतों की जरूरत है। भाजपा गठबंधन के पास आठ सीटों पर जीत की स्थिति बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल है, हालांकि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में आठवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। धर्मपाल सिंह धर्मपाल सिंह बरेली के आंवला से बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं. वह कई बार विधायक रह चुके हैं और फिलहाल यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. उनके पास पशुपालन और डेयरी विकास विभाग की जिम्मेदारी है।  विद्यासागर सोनकर विद्यासागर सोनकर जौनपुर और पूर्वी यूपी के वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं. वह 1996 में 11वीं लोकसभा के लिए सैदपुर (SC) से सांसद चुने गए थे।  प्रियंका सिंह रावत प्रियंका सिंह रावत बीजेपी की पूर्व लोकसभा सांसद हैं. उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव बाराबंकी से जीता था. उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया को हराया था।  राम प्रताप सिंह चौहान राम प्रताप सिंह चौहान यूपी बीजेपी के वरिष्ठ संगठन नेता हैं. जून 2026 में यूपी बीजेपी में हुए बदलाव के दौरान उन्हें प्रदेश महामंत्री बनाया गया था. अगस्त 2026 में उन्हें पश्चिमी यूपी के संगठनात्मक क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई।  प्रकाश पाल प्रकाश पाल बीजेपी के वरिष्ठ संगठन नेता और यूपी बीजेपी OBC मोर्चा के अध्यक्ष हैं. वह पहले बीजेपी के कानपुर-बुंदेलखंड संगठनात्मक क्षेत्र की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।  इस बार नए चेहरों को मिला मौका इस बार बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए सभी नए चेहरों को मौका दिया है. पुराने चेहरों को इस बार उम्मीदवार नहीं बनाया गया है. इनमें अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, बीएल वर्मा, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, बृजलाल, दिनेश शर्मा और गीता शाक्य शामिल हैं. दिनेश शर्मा अब अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल हैं।  सपा का तीसरी सीट पर जोर समाजवादी पार्टी ने पहले ही प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। सपा के पास अपने संख्या बल के आधार पर दो सीटें जीतने की स्थिति है। हालांकि पार्टी तीसरी सीट के लिए भी प्रयास कर सकती है, जिससे चुनाव में राजनीतिक जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राज्यसभा चुनाव को अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों दलों की नजर अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ दूसरे खेमे में सेंध लगाने पर भी है। मजबूत संख्याबल का संकेत भाजपा ने आठ उम्मीदवार उतारकर जहां अपने मजबूत संख्या बल का संकेत दिया है, वहीं उम्मीदवारों के चयन में अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी दिखाई दे रही है। अब निगाहें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और सपा की आगे की रणनीति पर हैं। राज्यसभा चुनाव में यदि सभी 10 सीटों पर मुकाबला होता है तो 16 अक्टूबर को मतदान के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। फिलहाल भाजपा ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुनावी मैदान को औपचारिक रूप से सजा दिया है।

UP राज्यसभा चुनाव में बढ़ी सियासी हलचल, BJP-सपा के उम्मीदवारों का आज हो सकता है ऐलान

  लखनऊ उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है और इससे पहले आज बीजेपी और एनडीए अपने राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर सकते हैं. वहीं, समाजवादी पार्टी भी अपने तीसरे उम्मीदवार को लेकर पत्ते खोल सकती है।  राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों खेमों की तैयारियों का अंदाजा नामांकन पत्रों की खरीद से भी लगाया जा सकता है. समाजवादी पार्टी ने चार नामांकन पत्र खरीदे हैं, जबकि बीजेपी की तरफ से नौ पर्चे खरीदे गए हैं. ऐसे में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतारे जाने की स्थिति में राज्यसभा चुनाव में मुकाबला देखने को मिल सकता है।  तीसरे उम्मीदवार को लेकर अभी भी स्थिति साफ नहीं समाजवादी पार्टी पहले ही रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है और दोनों अपना नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं. हालांकि, तीसरे उम्मीदवार को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं हुई है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले कह चुके हैं कि अगर पार्टी पर्याप्त संख्या का इंतजाम कर लेती है तो तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतारा जाएगा।  तीसरे उम्मीदवार के लिए सपा को अपने मौजूदा संख्याबल से करीब आधा दर्जन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है. ताजा रिपोर्टों में भी तीसरे उम्मीदवार को लेकर सपा की तैयारियों का जिक्र है।  दूसरी तरफ बीजेपी ने भी उत्तर प्रदेश से अपने उम्मीदवारों के नामों का अभी ऐलान नहीं किया है. पार्टी की तरफ से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम प्रमुखता से चर्चा में है. पुरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल भी समाप्त होने वाला है. उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है।  9 अक्टूबर तक नाम लिए जा सकेंगे वापस नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. ऐसे में आज बीजेपी के उम्मीदवारों और सपा के संभावित तीसरे प्रत्याशी के नाम सामने आने के बाद यह तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है कि राज्यसभा की अतिरिक्त सीट के लिए सीधा मुकाबला होगा या नहीं।  बता दें कि विधानसभा में विधायकों के मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी सात सीटें आसानी से जीत लेगी और सपा की दो सीटों पर जीत तय मानी जा रही है. असली मुकाबला 10वीं राज्यसभा सीट को लेकर है, जिस पर काबिज होने के लिए सपा और बीजेपी के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है।  क्या है सीटों का गुणा-गणित? यूपी विधानसभा के कुल 403 सदस्यों में से वर्तमान में 397 विधायक हैं. ऐसे में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 38 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास कुल 292 विधायक हैं, जबकि सपा गठबंधन के पास 103 विधायक हैं. एनडीए में बीजेपी के 256, अपना दल (एस) के 13, आरएलडी के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं. दो विधायक राजा भैया की पार्टी के हैं. इन्हें मिलाकर यह आंकड़ा 291 विधायकों का होता है।  वहीं, सपा और कांग्रेस को मिलाकर कुल 103 विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट के लिए 38 विधायकों की जरूरत के आधार पर बीजेपी को सात सीटें जीतने के लिए 266 विधायक चाहिए होंगे, जिसके बाद उसके पास 26 सरप्लस (अतिरिक्त) वोट बचेंगे. इसके बाद बीजेपी को आठवीं सीट जीतने के लिए 12 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।  वहीं, राज्यसभा की 2 सीटों को जिताने के लिए सपा को 76 वोटों की जरूरत है, जिसके बाद सपा के पास भी करीब 27 सरप्लस वोट बचते हैं. सपा को तीसरी सीट जीतने के लिए 11 एक्स्ट्रा वोटों की जरूरत है. यही 11-12 वोटों का अंतर इस चुनाव को बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर बना रहा है।  

राज्यसभा की 10 सीटों पर यूपी में सियासी हलचल, सपा को 2 सीटों की उम्मीद

लखनऊ यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों और विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. अगले दो महीने में इन सीटों के लिए चुनाव और चयन की पूरी प्रक्रिया पूरी होगी. राज्यसभा की इन 10 सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है, जिनमें बीजेपी की 8, सपा की 1 और बसपा की 1 सीट शामिल है. बसपा के राज्यसभा से पूरी तरह खाली होने के बीच अब सबकी नजर बीजेपी और एनडीए के अतिरिक्त वोटों पर टिकी है, जबकि सपा के खाते में 2 सीटों का गणित बनता दिख रहा है।  लखनऊ से मिली जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर में त्योहारों के साथ-साथ सियासी समीकरण भी तेजी से बदलेंगे. जिन बीजेपी सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं. डॉ. दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी 25 नवंबर तक था, लेकिन अंडमान-निकोबार के एलजी बनने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया, इसलिए उनकी सीट पर भी अब चुनाव होगा. इसके अलावा सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।  सूत्रों की मानें तो अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो सकता है. आमतौर पर अधिसूचना जारी होने से लेकर मतगणना तक पूरी प्रक्रिया में करीब 20 दिन का समय लगता है. यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन पिछले एक साल में 6 विधायकों के निधन के बाद अभी विधायकों की संख्या 397 रह गई है. मौजूदा गणित के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के वोट चाहिए होंगे।  बसपा विधानसभा में पहले ही शून्य हो चुकी है और रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म होते ही पार्टी राज्यसभा में भी शून्य हो जाएगी. सपा के पास 101 विधायक हैं, जिससे उसे 2 सीटें मिलने का रास्ता बनता है और करीब 7 वोट अतिरिक्त बच जाएंगे. वहीं बीजेपी के पास 256 विधायक हैं और सहयोगी दलों को जोड़कर एनडीए का आंकड़ा करीब 289 बताया जा रहा है।  तीन निर्दलीय विधायकों और राजा भैया की पार्टी के 2 विधायकों के समर्थन से यह आंकड़ा 294 तक पहुंच जाता है, हालांकि सुभासपा के 2 विधायकों के सपा की तरफ झुकाव के चलते एनडीए की असल ताकत करीब 292 ही मानी जा रही है. इस हिसाब से बीजेपी और उसके सहयोगी दल 7 सीटें आसानी से जीत सकते हैं, लेकिन उसके बाद भी एनडीए के पास वोट बचेंगे जिससे दूसरी पसंद के वोट 10वीं सीट का फैसला कर सकते हैं। 

UP की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव तय, 8 BJP सांसद होंगे रिटायर

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनावों के तारीखों की घोषणा कर दी है। उत्तर प्रदेश की 10 सीटों सहित 12 राज्यसभा सीटों पर आगामी 16 अक्टूबर को मतदान होंगे। वहीं वोटों की गिनती भी 16 अक्टूबर को ही शुरू हो जाएगी और देर शाम तक नतीजे घोषित होने की संभावना है। सबसे अहम बात यह है कि 12 में से 10 सीटें उत्तर प्रदेश की हैं। यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव पर निगाहें टिकी हुई हैं। वहीं एक सीट उत्तराखंड की है। यहां से भाजपा के श्री नरेश बंसल रिटायर हो रहे हैं। इसके अलावा टीएमसी सांसद रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के बाद बंगाल की एक सीट पर भी उपचुनाव होगा। गौरतलब है कि आगामी 25 नवंबर को राज्यसभा के कुल 11 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें भाजपा के कुल 8 सांसद हैं। वहीं एक बहुजन समाज पार्टी और एक समाजवादी पार्टी के एक सांसद शामिल हैं। भाजपा के नरेश बंसल, बृजलाल, सीमा द्विवेदी, चंद्रप्रभा, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, अरुण सिंह, बीएल वर्मा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। वहीं, सपा से राम गोपाल यादव और बसपा के एकमात्र सांसद रामजी भी रिटायर हो रहे हैं। चुनाव का पूरा शेड्यूल चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक राज्यसभा चुनावों के लिए आगामी 29 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। इसके बाद 6 अक्टूबर को नामांकन जमा करने की आखिरी तारीख होगी। उम्मीदवार 9 सितंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। चुनाव 16 अक्टूबर, शुक्रवार को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक संपन्न कराया जाएगा। 16 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी। विधान परिषद चुनाव का भी ऐलान इसके अलावा आयोग ने चार राज्यों की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों पर भी चुनाव की घोषणा की है। इनमें उत्तर प्रदेश की 11 सीटें, बिहार की 8 सीटें, महाराष्ट्र की 5 सीटें और कर्नाटक की 4 सीटें शामिल हैं। सभी 28 सीटों पर 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। वहीं 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। चुनाव आयोग ने संबंधित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लागू कर दी है। UP में NDA खेमे के पास करीब 292 विधायक यूपी में एनडीए खेमे के पास करीब 292 विधायक हैं. इस लिहाज से बीजेपी गठबंधन आसानी से 7 से 8 सीटें जीत सकता है. वहीं, सपा के पास विधानसभा में 100 से अधिक विधायक हैं. इस संख्या बल के साथ सपा 2 सीटें बेहद आसानी से अपने पाले में कर लेगी. वहीं, उत्तराखंड से खाली हो रही सीट पर सत्ताधारी दल का मजबूत दबदबा है. मौजूदा समीकरणों को देखते हुए यह सीट भी भाजपा के पाले में जाएगी।  बंगाल की 1 सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा? पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि हाल ही में टीएमसी सांसद रुक्मिणी मलिक ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था. इसी साल अप्रैल में वह राज्य सभा के लिए चुनी गईं थीं. अब यहां उपचुनाव हो रहा है।  चुनाव का टाइम टेबल राज्यसभा चुनाव के लिए नोटिफिकेशन 29 सितंबर को जारी किया जाएगा और नॉमिनेशन 6 अक्टूबर को बंद होंगे। नॉमिनेशन की जांच 7 अक्टूबर को होगी और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 9 अक्टूबर है। वोटिंग 16 अक्टूबर को सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक होगी और उसी दिन शाम 5:00 बजे वोटों की गिनती शुरू होगी। कौन-कौन हो रहा रिटायर? उत्तर प्रदेश से रिटायर होने वाले राज्यसभा सदस्यों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, बीएल वर्मा, राम गोपाल यादव, नीरजा शेखर, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, रामजी, सीमा और डॉ दिनेश शर्मा शामिल हैं। नरेश बंसल उत्तराखंड से एकमात्र सेवानिवृत्त सदस्य हैं। आयोग ने निर्देश दिया है कि मतपत्रों पर प्राथमिकताएं अंकित करने के लिए केवल रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए पहले से तय विनिर्देशों वाले एकीकृत बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही उपयोग किया जाए।  

राज्यसभा में भाजपा की नई स्थिति क्या है, दो-तिहाई बहुमत से NDA कितनी दूर?

नई दिल्ली राज्यसभा में NDA अब ताकतवर नजर आ रही है। हालांकि, अब भी सत्तारूढ़ गठबंधन दो तिहाई बहुमत से दूर है, लेकिन ताजा चुनाव नतीजों ने सीटों की संख्या में खासा इजाफा कर दिया है। 18 जून तक 10 राज्यों की 27 सीटों पर चुनाव हुए थे। वहीं, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस सांसदों के इस्तीफे के बाद कहा जा रहा है कि एनडीए का आंकड़ा और बढ़ सकता है। NDA किसकी ताकत कितनी उच्च सदन में एनडीए का सबसे बड़ा दल भाजपा है। वहीं, गठबंधन अब 152 सीटों पर पहुंच गया है। सबसे पहले 24 सीटों पर जब सांसद निर्विरोध चुने गए, तो उनमें 19 एनडीए के थे। वही, गुरुवार को झारखंड में परिमल नथवानी की जीत ने एनडीए सांसदों की संख्या 20 पर पहुंचा दी है। खास बात है कि अब गठबंधन दो तिहाई बहुमत से महज 11 सीटें दूर है। बहुमत मिलने के आसार, पर कैसे? दरअसल, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के 4 राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया है। इनमें सुष्मिता देव, प्रकाश बरिक, सुखेंदु शेखर रे और कोयल मलिक का नाम शामिल है। हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कहा जा रहा है कि इन सभी सीटों पर भाजपा आसानी से जीत दर्ज कर सकती है। अटकलें ये भी हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और सांसद भी इस्तीफा दे सकते हैं। वहीं, राज्यसभा में बीजू जनता दल के 5 और YSRCP के 7 सांसद हैं। खास बात है कि ये दोनों ही दल किसी गठबंधन में शामिल नहीं हैं और कई मौकों पर एनडीए का साथ देते रहे हैं। हालांकि, ओडिशा विधानसभा चुनाव के बाद बीजद और भाजपा के समीकरणों में कुछ बदलाव देखा जा रहा है। क्यों जरूरी है दो तिहाई बहुमत संसद में संविधान संशोधन संबंधी विधेयकों को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। अब जब एनडीए यह आंकड़ा हासिल कर लेती है, तो परिसीमन से जुड़े बिल को लेकर राह आसान हो जाएगी। कहा जा रहा है कि सरकार आगामी मॉनसून सत्र के दौरान ही यह बिल दोबारा पेश कर सकती है। फिलहाल, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। विपक्ष के आंकड़े विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास अभी 64 सांसद हैं। आठ सांसदों वाली डीएमके और तीन सांसदों वाली आप इस समूह से अलग हो गई हैं। लोकसभा में एनडीए की संख्या 300 पार जा सकती है, क्योंकि टीएमसी के लगभग 20 और सांसद एक अलग समूह बनाकर उसका समर्थन कर सकते हैं। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत पाने के लिए 363 सांसदों की जरूरत होती है। इधर, शिवसेना यूबीटी के बागी भी उनके साथ जा सकते हैं।

झारखंड राज्यसभा चुनाव में नथवानी फैक्टर! जीत का रिकॉर्ड बरकरार रहेगा या हेमंत सोरेन की रणनीति पड़ेगी भारी?

 नई दिल्ली झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. इन राज्यसभा दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं, जिसके चलते गुरुवार को वोटिंग होगी. बीजेपी के समर्थित प्रत्याशी परिमल नाथवानी के उतरने से मुकाबला रोचक बन गया है. इसके साथ ही क्रॉस वोटिंग का खतरा भी बन गया है।  कारोबारी और सांसद के रूप में पहचान रखने वाले नथवानी की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनके चुनावी जीत का रिकॉर्ड है. नथवानी अब तक तीन चुनाव जीत चुके हैं और कोई चुनाव नहीं हारे हैं. चौथी बार राज्यसभा चुनाव के लिए मैदान में उतरे हैं, लेकिन जीत के लिए बीजेपी का समर्थन ही काफी नहीं है।  झारखंड की सियासत में सीएम हेमंत सोरेन के अगुवाई में जेएमएम और कांग्रेस ने दोनों राज्यसभा सीटें जीतने की रणनीति बनाई है. जेएमएम-कांग्रेस के चक्रव्यूह को तोड़कर क्या परिमल नथवानी एक बार फिर इतिहास रच पाएंगे?  झारखंड की दो सीट पर 3 प्रत्याशी झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में है. जेएमएम से बैजनाथ राम और कांग्रेस से प्रणव झा चुनाव लड़ रहे हैं तो निर्दलीय तौर पर परिमल नथवानी किस्मत आजमा रहे हैं. नथवानी को बीजेपी का समर्थन है, जिसके चलते मुकाबला रोचक हो गया है. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 28 विधायकों का प्रथम वरीयता के आधार पर वोट चाहिए।  झारखंड विधानसभा में महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जिनमें जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और लेफ्ट के दो विधायक हैं. वहीं, एनडीए के पास 24 विधायक है, जिसमें बीजेपी से 21, आजसू 1, जेडीयू 1, एलजेपी के 1 विधायक हैं. इस तरह से परिमल नथवानी को जीत दर्ज करने के लिए 4 अतरिक्त वोटों की जरूरत है।  क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडरा रहा विधानसभा में नंबर गेम के लिहाज से जेएमएम की जीत तय है, लेकिन कांग्रेस के लिए महागठबंधन को एकजुट रखना होगा. विधानसभा में महागठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन है, जिसके लिहाज से दोनों ही सीटें जीत सकती है, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नथवानी के उतरने व बीजेपी के समर्थन से मुकाबला रोचक हो गया है. इसके साथ ही क्रॉस वोटिंग का खतरा बनता दिख रहा है।  राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए महागठबंधन के पास नंबर पूरे हैं, लेकिन परिमल नथवानी को बीजेपी के समर्थन करने के बाद भी 4 अतरिक्त वोटों की जरूरत है. ऐसे में क्रॉस वोटिंग का खतरा साफ नजर आ रहा है. नथवानी अपनी जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी है तो कांग्रेस और जेएमएम अपने खेमे को बचाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है।  परिमल नथवानी कभी चुनाव नहीं हारे  परिमल नथवानी का झारखंड के साथ पुराना और गहरा नाता है और मंझे हुए सियासी खिलाड़ी हैं. नथवानी मुख्य तर पर कारोबारी हैं और रिलाइंस से जुड़े हुए हैं, लेकिन सियासी पिच पर उतरे तो अपना पहला राज्यसभा चुनाव 2008 में झारखंड से लड़ा. परिमल नथवानी ने निर्दलीय उम्मीदवार को रूप में किस्मत आजमाया था,  लेकिन उन्हें विभिन्न दलों के विधायकों का समर्थन मिला. उस समय क्रॉस वोटिंग ने उनकी राह आसान की और वे राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे. आरजेडी के विधायकों का समर्थन उन्हें मिला था, जिसके दम पर जीतने में सफल रहे।  जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती से जूझ रहा है. नथवानी की उम्मीदवारी को लेकर एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि वे झारखंड की राजनीति में दलगत सीमाओं से ऊपर स्वीकार्यता रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं. ऐसे में सवाल यही है कि क्या परिमल नथवानी अपने अजेय चुनावी रिकॉर्ड को बरकरार रखते हुए चौथी बार राज्यसभा पहुंचेंगे, या फिर झारखंड की बदलती राजनीतिक गणित उनके विजय अभियान पर विराम लगाएगी।  2014 में नथवानी ने दूसरी बार झारखंड से राज्यसभा का चुनाव लड़ा. भाजपा और आजसू के समर्थन से उन्होंने नामांकन दाखिल किया और निर्विरोध निर्वाचित हो गए. इस जीत ने उन्हें झारखंड से लगातार दूसरी बार राज्यसभा पहुंचाने का रिकॉर्ड दिया. वे झारखंड से दूसरी बार राज्यसभा पहुंचने वाले एकलौते निर्दलीय सांसद बने।  परमिल नथवानी का तीसरा बड़ा चुनाव 2020 में हुआ, लेकिन इस बार मैदान झारखंड नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश को चुनाव. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के समर्थन से वे राज्यसभा के लिए चुने गए और संसद के उच्च सदन में अपना तीसरा कार्यकाल शुरू किया. इस तरह लगातार तीसरी बार राज्यसभा सांसद बने।    नथवानी क्या चौथी बार जीत दर्ज करेंगे अब 2026 के राज्यसभा चुनाव में परिमल नथवानी ने झारखंड से लड़ने का फैसला किया. एक बार फिर निर्दलीय प्रत्याशी उतरे, लेकिन बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन हासिल है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा की रणनीति केवल सीट जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता पक्ष में संभावित क्रॉस वोटिंग की संभावना को भी भुनाने की है। 

AAP को बड़ा झटका: 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से बदला राजनीतिक समीकरण

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्य सभा सांसद बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इसको लेकर राज्य सभा सचिवालय ने भी अधिसूचना जारी कर दी है। इसी के साथ उच्च सदन में भाजपा की ताकत भी बढ़ी है और सांसदों की संख्या 113 हो गई है। जिन सात सांसदों ने बीजेपी का दामन थामा है, उनमें से 6 पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं और स्वाती मालिवाल दिल्ली से है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राज्य सभा सांसदों का बीजेपी में जाना अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, दिल्ली हारने के बाद अब आम आदमी पार्टी की पंजाब में ही सरकार है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली चुनाव हारने के बाद पूरा ध्यान पंजाब पर लगा दिया है। AAP के बागी सांसदों के शामिल होने से बीजेपी खुश नजर आ रही है। दरअसल, राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने विधासनभा चुनाव 2022 में AAP की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। जो सांसद बीजेपी में शामिल हुए हैं उनमें- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, राजिंदर गुप्ता और स्वाति मालीवाल शामिल है। क्या बीजेपी को मिलेगा फायदा? AAP के सातों राज्य सभा सांसदों के विलय के बाद उच्च सदन में भले ही बीजेपी का संख्या बल बढ़ा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर फायदा कम होता नजर आ रहा है। अपनी रणनीति से 2022 में राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने AAP को जीत दिलाई हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नेताओं का कोई जनाधार नहीं है। ऐसे में बीजेपी के लिए इनका कितना उपयोगी साबित होना संभव है, यह आने वाला समय बताएगा। पंजाब में चड्ढा का इस्तेमाल करेगी बीजेपी वहीं पंजाब में बीजेपी अब राघव चड्ढा का इस्तेमाल करेगी, क्योंकि प्रदेश में कायदे से पार्टी अपनी उपस्थिति भी दर्ज नहीं करा पाई है। इसके अलावा बीजेपी पर पंजाब में किसान विरोधी होने का आरोप भी लगता है। खासकर केंद्र के कृषि कानूनों के विवाद के बाद। संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों ने बीजेपी पर किसानों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इसलिए अकाली दल भी अब बीजेपी के साथ नहीं है। चड्ढा के सामने भी होगी चुनौती राघव चड्ढा AAP की तरफ से राज्य सभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते थे, लेकिन अब बीजेपी में जाने के बाद उनके सामने कई चुनौतियां होगी। दरअसल, इससे पहले तक वे बीजेपी के मुखर विरोधी रहे है और कई मौके पर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। खासतौर पर कृषि कानूनों को लेकर। ऐसे में प्रदेश की जनता और बीजेपी में अपनी जगह कैसे बनाते है, यह आने वाला समय बताएगा। उन्हें न केवल पार्टी की विचारधारा के साथ तालमेल बैठाना होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा भी जीतना होगा।