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नीतीश कुमार का सख्त रुख, पटना-राजगीर रोड प्रोजेक्ट में देरी पर अधिकारियों को चेतावनी

राजगीर. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी (Vijay Kumar Choudhary) मंगलवार को एक दिवसीय दौरे पर नालंदा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सालेपुर-राजगीर निर्माणाधीन सड़क परियोजना के प्रथम खंड का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया और मौके पर मौजूद निर्माण एजेंसी तथा वरीय अधिकारियों को कार्य में तेजी लाकर निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने का निर्देश दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सड़क परियोजना बिहार के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद राजगीर से पटना की दूरी और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। लोगों को राजगीर से राजधानी पटना तक का सफर लगभग दो घंटे में तय करने की सुविधा मिलेगी। इस नई सड़क के चालू होने से क्षेत्र के अन्य वैकल्पिक मार्गों पर वाहनों का दबाव भी कम होगा। साथ ही राजगीर का सीधा और बेहतर संपर्क पटना से स्थापित होगा, जिससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री को परियोजना की वर्तमान स्थिति और निर्माण कार्य की प्रगति से अवगत कराया। पूर्व मुख्यमंत्री ने गुणवत्ता के साथ समय पर कार्य पूरा करने पर विशेष जोर दिया। यह सड़क परियोजना नालंदा और आसपास के क्षेत्रों के लिए विकास की नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाली मानी जा रही है।

बिहार में विकास पर जोर, मंत्रियों को नीतीश कुमार ने दिए सख्त निर्देश

 पटना बिहार सीएम की पद छोड़ने से पहले नीतीश कुमार ने कहा था कि वे राज्यसभा जा रहे हैं पर बिहार नहीं छोड़ेंगे। राज्य का विकास और जनता की सुख सुविधाओं का ख्याल रखेंगे। इसका असर दिख रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि सरकार की सभी योजनाओं का असर सीधे जनता तक दिखना चाहिए। सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रियों ने नीतीश कुमार ने निर्देश दिया है कि सरकार की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए अपने विभाग के कार्यों का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन मंत्री अनिवार्य रूप से करें। नीतीश कुमार से रविवार को मिलने गये मंत्रियों को उन्होंने सरकार के आगे के कार्यकलापों को लेकर कई दिशा-निर्देश दिये। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि सभी मंत्री अपने विभाग की योजनाओं को समय पर पूरा करायें। नियमित रूप से योजनाओं की निगरानी करें और जिलों में वह धरातल पर पूरी तरह से उतरे, इसे भी सुनिश्चित करायें। खासकर जदयू के नवनियुक्त मंत्री अपने-अपने विभागों में पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने उनके आवास सात सर्कुलर रोड में रविवार को गये थे। इसके साथ ही पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी वहां पहुंचे थे। हालांकि, कई मंत्री शनिवार को भी अपने नेता नीतीश कुमार से मिले थे। रविवार को मिलने वालों में मंत्री अशोक चौधरी, लेशी सिंह और शीला कुमारी आदि शामिल रहीं। इस दौरान केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ललन सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा भी मौजूद रहे। नीतीश कुमार न बीस सालों के मुख्यमंत्रित्व काल में बिहार की नई दिशा दी। विकास की नई इबारत लिखी। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत हर क्षेत्र में उनके सीएम रहते काफी काम हुआ। सात निश्चय योजना के तहत रोजगार, नागरिक सुविधाएं और पार्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। सम्राट चौधरी भी कहते हैं के नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में काम करेगी। उनके द्वारा शुरू की गई योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। नीतीश कुमार ने भी जदयू नेताओं के साथ मीटिंग में बिहार में एक नई यात्रा का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि राज्यसभा का कार्यों के बाद वे बिहार को ही समय देंगे। रविवार को मंत्रियों ने अपने नेता नीतीश कुमार से मुलाकात की। नीतीश कुमार के बेटे और बिहार से स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार भी कहते हैं कि पिता के कार्यों को जन जन तक पहुंचाएंगे। निशांत बिहार की सद्भाव यात्रा की शुरुआत बाल्मीकिनगर से कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा सरकार के अभिभावक नीतीश कुमार हैं। उनके मार्गदर्शन का पालन किया जाएगा।

सियासत में हलचल: नीतीश का नया ठिकाना बना शक्ति केंद्र, ‘7 नंबर’ से जुड़ी चर्चा तेज

पटना. बिहार की राजनीति में एक अहम बदलाव के संकेत के बीच नीतीश कुमार अब अपने नए आवास 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो चुके हैं। करीब दो दशकों तक 1 अणे मार्ग में रहने के बाद उनका यह स्थान परिवर्तन सियासी गलियारों में कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीतीश कुमार के साथ उनके बेटे निशांत कुमार भी इसी आवास में रहेंगे। शुक्रवार को नए आवास में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद शनिवार से यहां राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेताओं का आना-जाना शुरू हो गया है, जिससे साफ है कि 7 सर्कुलर रोड अब सत्ता-समीकरणों का नया केंद्र बनने जा रहा है। 20 साल बाद बदला पता, बढ़ी हलचल करीब 20 वर्षों बाद आवास बदलने के फैसले को महज प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब राज्य में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा तेज है, यह बदलाव और भी अहम हो जाता है। ‘7’ नंबर से खास जुड़ाव नीतीश कुमार का ‘7’ अंक से खास लगाव लंबे समय से चर्चा में रहा है। 1977 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा, 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने दोनों ही वर्षों में ‘7’ का संयोग रहा। 2005 में जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने, तब उनकी गाड़ी का नंबर 777 था। रेल मंत्री रहते उनके फोन नंबर का अंतिम अंक भी 7 बताया जाता है। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने ‘7 निश्चय’ योजनाओं की शुरुआत की, जो आज भी उनकी प्रमुख नीतिगत पहचान है। अब 7 सर्कुलर रोड में उनका शिफ्ट होना इस सिलसिले को और मजबूत करता दिख रहा है। दिल्ली में भी नया ठिकाना राज्यसभा सदस्य के रूप में नीतीश कुमार को नई दिल्ली में 9 नंबर का सरकारी बंगला आवंटित हुआ है। यह आवास अमित शाह और राहुल गांधी के आवास के नजदीक स्थित है, जो उनके राष्ट्रीय राजनीतिक कनेक्शन को भी दर्शाता है।

नीतीश कुमार ने 1 अणे मार्ग का मुख्यमंत्री आवास छोड़ा, 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट

पटना  बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास 1 अणे मार्ग खाली कर दिया। वे 7 सर्कुलर रोड स्थित अपने आवास में शिफ्ट हो गए। सुबह से ही सामान की शिफ्टिंग की जा रही थी। दोपहर में वे स्‍वयं भी पहुंच गए। नए आवास को फूलों से सजाया गया था, जहां बौद्ध भिक्षुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इससे पहले भी आंशिक शिफ्टिंग की जा चुकी थी। शिफ्टिंग के दौरान प्लास्टिक कुर्सियां, किताबें, बुक शेल्फ, अलमारी, फाइलें और गमले जैसे सामान ट्रैक्टर के जरिए नए आवास तक पहुंचाए गए। पसंदीदा रहा 7 सर्कुलर रोड, पहले भी रह चुके हैं यहां बताया जाता है कि 7 सर्कुलर रोड स्थित यह बंगला नीतीश कुमार का पसंदीदा रहा है। वे पहले भी कई बार यहां आकर निरीक्षण कर चुके हैं। कुछ समय तक यहीं से कामकाज भी संचालित होता रहा। बंगले के लॉन में विशेष घास कोलकाता से मंगवाकर लगाई गई है। 20 साल में दूसरी बार छोड़ा CM आवास गौरतलब है कि नीतीश कुमार पहली बार 2006 में 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास में आए थे। 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद इस्तीफा देने पर वे इसी 7 सर्कुलर रोड बंगले में शिफ्ट हुए थे। तब जीतन राम मांझी को सत्‍ता सौंपी थी और करीब आठ महीने यहीं रहे। मांझी को हटाए जाने के बाद दोबारा मुख्यमंत्री आवास लौटे थे। अब करीब 20 वर्षों में यह दूसरी बार है जब उन्होंने 1 अणे मार्ग छोड़ा है। वर्तमान में उनके आवास पर Z+ सुरक्षा व्यवस्था तैनात है। लालू परिवार के करीब नया ठिकाना, सियासी चर्चा तेज दिलचस्प यह है कि 7 सर्कुलर रोड से महज 200 मीटर की दूरी पर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का आवास 10 सर्कुलर रोड स्थित है। उन्हें पूर्व में यह आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था और हार्डिंग रोड स्थित बंगला आवंटित किया गया था, लेकिन इस पर सियासी विवाद बढ़ने के बाद फिलहाल प्रक्रिया स्थगित है। क्या हैं राजनीतिक मायने? नीतीश कुमार का 1 अणे मार्ग छोड़ना सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और सत्ता संतुलन के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।  

भामाशाह जयंती पर नीतीश ने दिया संदेश, ‘काम बोलता है’ पर दिया जोर

पटना मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के 12 दिन बाद जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार अपनी पार्टी के प्रदेश कार्यालय पहुंचे। यहां पर जदयू के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। नीतीश कुमार के समर्थकों ने जमकर उनके समर्थन में नारेबाजी की। इसी बीच कुछ कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार पर बनाए गए गीतों को बजाया। इन गीतों को सुनकर नीतीश कुमार ताली बजाने लगे और मंच पर बैठे लोगों से ताली बजवाई। नीतीश कुमार के साथ दोनों डिप्टी सीएम विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव भी मौजूद थे। भामाशाह जयंती पर नीतीश कुमार के पांच संदेश बताया जा रहा कि रविवार यानी 26 अप्रैल को भामाशाह जयंती पर जदयू दफ्तर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें ही नीतीश कुमार शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान जदयू कार्यालय में एक पंपलेट भी बांटा गया। इसमें भामाशाह के परिचय के अलावा नीतीश कुमार का संदेश भी लिखा था। इसमें नीतीश कुमार के हवाले से लिखा गया था कि मैं काम करता हूं, मेरा काम ही बोलता है। राजनीति सेवा के लिए है, मेवा के लिए नहीं। न्याय के साथ विकास यानी हर क्षेत्र और हर तबके का विकास। आधे मन से कोई बड़ा काम नहीं होता है। बिहार को मैं उस ऊंचाई पर ले जाना चाहता हूं, जहां से चाहकर कोई भी नीचे नहीं जा सकता है। निशांत कुमार और मंत्रिमंडल विस्तार पर विजय चौधरी ने क्या कहा? इधर, नीतीश कुमार और अन्य नेताओं की भी जदयू समर्थक निशांत कुमार को भी खोज रहे थे। वह निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी देने की मांग कर रहे थे। कुछ कार्यकर्ता तो उन्हें बिहार का अगला मुख्यमंत्री तक बता रहे थे। इसी बीच डिप्टी सीएम विजय चौधरी से कुछ पत्रकारों और निशांत कुमार और मंत्रिमंडल विस्तार पर सवाल पूछ लिया। उन्होंने कहा कि निशांत पार्टी में आ चुके हैं। वह काफी सक्रिय भी हैं। जदयू की पूरी टीम उन्हें पसंद करती है। मंत्रिमंडल विस्तार पर उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है। एनडीए में सबकुछ ठीक है। जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। 

जेडीयू की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी, नीतीश ने शामिल किए 24 नेता, निशांत का नाम नहीं

नईदिल्ली / पटना  जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित की है। इसमें उनके बेटे निशांत कुमार को जगह फिलहाल नहीं मिली है। जेडीयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 24 नेताओं को रखा गया है। राज्यसभा सांसद संजय झा जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने रहेंगे। वहीं, पार्टी के वरीय नेता एवं जहानाबाद से पूर्व सांसद चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। आलोक कुमार सुमन कोषाध्यक्ष होंगे। वहीं, 12 नेताओं को जेडीयू का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। इसमें मनीष कुमार वर्मा, आफाक अहमद खान, श्याम रजक, अशोक चौधरी, रमेश सिंह कुशवाहा, राम सेवक सिंह, कहकशां परवीन, कपिल हरिशचंद्र पाटिल, राज सिंह मान, सुनील कुमार उर्फ इंजीनियर, हर्षवर्धन सिंह, मौलाना गुलाम रसूल और बलियावी का नाम शामिल है। राजीव रंजन सिंह जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने रहेंगे। वहीं, रविंद्र प्रसाद सिंह, विद्या सागर निषाद, दयानंद राय, संजय कुमार, मोहम्मद निसार, रूही तागुंग और निवेदिता कुमारी को राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में निशांत का नाम नहीं नीतीश कुमार द्वारा बुधवार को जारी की गई जेडीयू के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में निशांत कुमार का नाम नहीं है। यह सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। नीतीश कुमार के बिहार का मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने के फैसले के बाद उनके बेटे निशांत ने राजनीति में कदम रखा था। बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार में उनके डिप्टी सीएम बनने की चर्चा थी। हालांकि, जेडीयू से विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को डिप्टी सीएम बनाया गया। बताया गया कि निशांत कुमार अभी सरकार में शामिल होने को तैयार नहीं हैं। पिछले दिनों जब पत्रकारों ने उनसे डिप्टी सीएम नहीं बनने की वजह पूछी थी तो उन्होंने कहा था कि वह अभी संगठन को मजबूत करने का काम करेंगे। बिहार में यात्रा निकालकर लोगों से मिलेंगे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि निशांत कुमार को जेडीयू संगठन में कोई बड़ा पद मिल सकता है। अगले महीने बिहार यात्रा पर निकलेंगे निशांत निशांत ने बीते 8 मार्च को औपचारिक रूप से जेडीयू की सदस्यता ग्रहण की थी। इससे पहले वह सक्रिय राजनीति से दूर ही रहे थे। उन्हें लंबे समय से पार्टी में लाने की मांग कार्यकर्ताओं द्वारा की जा रही थी। जेडीयू ज्वॉइन करने के बाद से निशांत पार्टी में काफी सक्रिय हैं। बीते डेढ़ महीने में उन्होंने पार्टी के प्रवक्ताओं, वरीय नेताओं, युवा लीडर एवं अन्य पदाधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं। आगामी 3 मई से वह बिहार यात्रा पर भी निकने वाले हैं। निशांत की यात्रा पश्चिम चंपारण जिले से शुरू होगी। इसका विस्तृत कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि यात्रा के जरिए निशांत सभी 38 जिलों का दौरा करेंगे और कार्यकर्ताओं एवं जनता से सीधे संवाद करेंगे। राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में निशांत का नाम नहीं होने की एक वजह यह भी मानी जा रही है कि अभी वे पार्टी के क्रियाकलापों को बारीकी से सीख रहे हैं। अनुभव लेने के बाद ही वह कोई पद संभालेंगे।

बिहार की राजनीति में नई चाल: Nitish Kumar साध रहे ‘लव-कुश’ समीकरण, सम्राट पर बड़ा भरोसा

पटना. नीतीश कुमार की एक-एक गतिविधि राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बनती रही है। वह अनायस कोई बात आगे नहीं बढ़ाते। बिहार की राजनीति में इन दिनों वह पूरी सोची-समझी नीति के तहत लव-कुश समीकरण को आगे कर रहे। पिछले दिनों अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान जब वे चंपारण के इलाके में थे, तब वह लव-कुश पार्क गए थे। उस समय सम्राट चौधरी भी बतौर उपमुख्यमंत्री उनके साथ थे। दोनों ने पार्क में अपनी तस्वीर भी करायी। वह अनायास ही नहीं था। यहां से भी लव-कुश समीकरण को आगे किए जाने का साफ संदेश था। नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान नियमित रूप से सम्राट चौधरी साथ में रहे। इस दौरान नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के बारे में कई बार कहा कि अब यही लोग आगे संभालेंगे। कई तरह से उन्होंने इशारे में यह साफ किया था कि सम्राट को वह अपना उत्तराधिकारी बनाने की चाहत रखते हैं। जिस समय नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा को लेकर सक्रिय थे, उस समय उनके एग्जिट प्लान पर विशेष चर्चा नहीं थी। बाद के चरण में जब वह निकले तो राज्यसभा के लिए उनका नाम तय हो गया था। उस समय भी सम्राट चौधरी के साथ उनकी यात्राएं हुईं। बाद में यह चर्चा हुई कि सम्राट चौधरी ही मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार की पसंद हैं। शपथ ग्रहण के दिन सम्राट चौधरी ने जिस तरह से नीतीश कुमार का लोकभवन में अभिवादन किया, उस पर लोगों ने गौर किया। उपेंद्र कुशवाहा पर लगा चुके हैं दांव लव-कुश समीकरण को लेकर नीतीश कुमार अपने आरंभिक दिनों से ही सक्रिय दिखते रहे हैं। आरंभिक दिनों में उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा को आगे किया था। उन्हीं की पहल पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर आए उपेंद्र कुशवाहा को नीतीश कुमार ने नेता प्रतिपक्ष बनाया। बाद के दिनों में कुशवाहा समाज से आने वाले उमेश कुशवाहा को उन्होंने जदयू का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। जदयू के एक राष्ट्रीय महासचिव भी कुशवाहा समाज से बनाए गए। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद शनिवार को नीतीश सबुह 10.30 बजे के करीब सम्राट चौधरी के सरकारी आवास पर पहुंच गए। उनके साथ नीतीश कुमार के विश्वस्त व उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी भी थे। यह भी अनायास नहीं था। जिस तरह से नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के साथ कई फ्रेम में तस्वीर करायी, उसमें उनका लव-कुश समीकरण स्पष्ट तौर पर झलक रहा था।

नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर की झलक, 21 साल में 10 बार बने सीएम, 6 बार इस्तीफा दिया

 पटना नीतीश कुमार मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे और गुरुवार को यानी 15 अप्रैल को बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार बन जाएगी. 2025 विधानसभा चुनाव में दो तिहाई से अधिक बहुमत से जीते NDA की सरकार बने अभी 5 महीने ही हुए थे कि एक बार फिर सरकार बनने की कवायद की जा रही है. इसके साथ बिहार में नीतीश कुमार के युग का अंत माना जा रहा है।  भारतीय राजनीति में नीतीश कुमार का सियासी सफर मील की पत्थर की तरह है, दो दशक से बिहार की राजनीति उनके इर्द-गिर्द सिमटी हुई है. पिछले चार साल से हर साल नीतीश कुमार शपथ ले रहे हैं।  साल 2005 में पहली बार नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, उसके बाद से चार बार चुनाव हुए हैं, लेकिन नीतीश कुमार ने 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. ये अपने आपमें एक रिकॉर्ड है, लेकिन साथ ही छह बार मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने का काम भी किया है, जो किसी भारतीय राजनेता के लिए अनोखा रिकार्ड है।  चार साल में चार बार नीतीश ने ली शपथ नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली है, उससे पहले नंवबर 2025 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. इसके अलावा 2024 लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने विपक्षी इंडिया गठबंधन से नाता तोड़कर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए से हाथ मिला लिया था।  जनवरी 2024 में नीतीश ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. इससे पहले उन्होंने 2022 में उन्होंने बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए से गठबंधन तोड़कर आरजेडी और कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया था. इस तरह चार साल में चार बार शपथ लेने का रिकार्ड है, जिसमें तीन बार सीएम और एक बार राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने का काम किया।   10 बार सीएम बने और 6 बार इस्तीफा नीतीश कुमार साल 2000 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के चलते एक सप्ताह के बाद ही इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद दोबारा 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने अपनी सियासी जड़े ऐसी जमाई कि दो दशक तक बिहार की सत्ता उनके इर्द-गिर्द सिमटी रही है. इस तरह 10 बार सीएम पद की शपथ और 6 बार इस्तीफा देने  का यह दोहरा रिकॉर्ड नीतीश कुमार के नाम दर्ज है. यह सिर्फ सत्ता में बने रहने का ही नहीं बल्कि ऐसा पैटर्न दिखाता है कि पद छोड़ने के बाद भी उनकी राजनीतिक समीकरण ही सत्ता में बनाए रखा।  नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च, 2000 को मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन वह सरकार सिर्फ़ कुछ ही दिनों तक चल पाई. ऐसे में बहुमत साबित करने में नाकाम रहने के बाद, उन्होंने 10 मार्च, 2000 को इस्तीफ़ा दे दिया. हालांकि, इस शुरुआती असफलता से उनके राजनीतिक उभार पर कोई रोक नहीं लगी. 2005 में, वह दोबारा सत्ता में लौटे और तब से लेकर अब तक बिहार की राजनीति में एक केंद्रीय हस्ती बने हुए हैं।  2005 के बाद से सत्ता की धुरी बने नीतीश  साल 2005 के बाद से बिहार की राजनीति के नीतीश कुमार सियासी धुरी बने हुए हैं. 2005  से उनकी राजनीतिक यात्रा एक चक्र की तरह चलती रही है इस्तीफ़ा देना, नए गठबंधन बनाना और फिर सत्ता में लौटना. समय के साथ यह पैटर्न और भी साफ़ होता गया. साल 2010 में नीतीश कुमार तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, लेकिन 2013 में बीजेपी के साथ उनके रिश्ते खराब हो गए।  साल 2014 में, लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी के ख़राब प्रदर्शन की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया, लेकिन फ़रवरी 2015 में, जीतन राम मांझी को हटाकर, उन्होंने चौथी बार फिर से मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली.  साल 2015 में, विधानसभा चुनावों के बाद, RJD के साथ गठबंधन करके उन्होंने पांचवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।  2017 में, 'महागठबंधन' से रिश्ते तोड़ने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया,  लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर, NDA के साथ मिलकर छठी बार मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेते हुए वह दोबारा सत्ता में लौट आए. 2020 के विधानसभा चुनावों के बाद उन्होंने 7वीं बार CM पद की शपथ ली. 2022 में, उन्होंने NDA छोड़कर और विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाते हुए फिर से इस्तीफ़ा दे दिया, और 8वीं बार CM पद की शपथ ली।  2024 में भी यही सिलसिला फिर दोहराया गया, जब उन्होंने महागठबंधन छोड़ दिया और वापस NDA में चले गए. इस तरह नीतीश कुमार 9वीं बार CM पद की शपथ ली; और आख़िरकार, 2025 के विधानसभा चुनावों के बाद उन्होंने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने का काम किया. इस तरह उन्होंने एक रिकार्ड अपने नाम किया।  नीतीश कुमार के हर इस्तीफा सियासी चाल नीतीश कुमार ने अपने सियासी सफर में इस्तीफा देने का रास्ता सिर्फ  एक राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चाल भी थी. इसने नीतीश कुमार को अपने गठबंधन नए सिरे से बनाने और सत्ता में बने रहने का मौक़ा दिया. इसीलिए उनका रिकॉर्ड सिर्फ़ आंकड़ों के बारे में नहीं, बल्कि राजनीति की एक अनोखी शैली के बारे में है।  नीतीश के राजनीति में एक और अहम बात इस कहानी को एक नया पहलू देती है. नीतीश कुमार ने कभी भी अपनी पार्टी की ताक़त पर अकेले दम पर पूर्ण बहुमत हासिल नहीं किया है. उनकी पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड), सरकार बनाने के लिए हमेशा अपने गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर रही है. चाहे वह NDA के तहत भारतीय जनता पार्टी के साथ हो, या महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ, गठबंधन ही उनके शासन की रीढ़ रहे हैं।  नीतीश को अकेले दम बहुमत नहीं मिला नीतीश कुमार भले ही 21 साल तक बिहार की राजनीति के बेताज बादशाह रहे हों, लेकिन एक बार भी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं कर सके. 2010 में भी, जब उनकी सरकार को बहुत मज़बूत माना जा रहा था, तब भी जीत गठबंधन की थी, न कि अकेले JD(U) की. 2010 में JD(U) ने 115 सीटें हासिल की थीं. जो पिछले 20 सालों में JD(U) … Read more

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव: नीतीश कुमार आज दे सकते हैं इस्तीफा

पटना  बिहार की राजनीति में मंगलवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. बीते 20 साल से मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार आज अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. वे अब राज्यसभा सांसद बन चुके हैं. इससे पहले उन्होंने अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक बुलाई, जिसमें सरकार को भंग करने की सिफारिश की गई. दोपहर 3:15 बजे इस्तीफा देंगे सीएम जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार दोपहर 3:15 बजे राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं. इसके साथ ही मौजूदा सरकार का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा. कैबिनेट बैठक के बाद मंत्रियों की भावुक प्रतिक्रिया बैठक खत्म होने के बाद कई मंत्रियों ने इसे भावुक क्षण बताया. सभी ने नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल और उनके नेतृत्व की सराहना की. लखेंद्र पासवान बोले- बिहार को मजबूत बनाने का काम हुआ मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के लोगों का भरोसा जीता है और राज्य को सशक्त बनाने की दिशा में काम किया है. उन्होंने कहा कि आगे भी नई सरकार में उनकी भूमिका मार्गदर्शक के रूप में रहेगी. लेसी सिंह ने बताया भावुक और गौरव का पल मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि यह पल भावुक होने के साथ-साथ गौरव का भी है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जैसे नेता के साथ लंबे समय तक काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही. रामकृपाल यादव हुए भावुक बैठक के बाद मंत्री रामकृपाल यादव भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि यह पूरे बिहार के लिए भावुक क्षण है. उन्होंने नीतीश कुमार के 20 साल के कार्यकाल को राज्य के विकास में महत्वपूर्ण बताया. बीजेपी विधायक बोले- बिहार के इतिहास में दर्ज होगा नाम बीजेपी विधायक विनोद नारायण झा ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि उनका नाम बिहार के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा और वे आगे भी मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे.

JDU सांसद का दावा,नई सरकार में मुख्यमंत्री बीजेपी से हो सकता है

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। नीतीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के सांसद रामप्रीत मंडल ने नई सरकार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी (BJP) का होगा, यह लगभग फाइनल हो चुका है। उन्होंने कहा कि जदयू से दो डिप्टी सीएम बनाए जाने हैं, जिनमें से एक नीतीश के बेटे निशांत कुमार का नाम भी करीब-करीब फाइनल है। झंझारपुर से जदयू सांसद रामप्रीत मंडल ने शनिवार को एक चैनल से बातचीत में बिहार में नई एनडीए सरकार का यह फॉर्मूला बताया। उन्होंने कहा कि नया सीएम भाजपा से बनना तय है। अभी मुख्यमंत्री जदयू का है और भाजपा से दो डिप्टी सीएम हैं। इसी तरह, नई सरकार में भाजपा का मुख्यमंत्री होगा, तो जदयू से दो डिप्टी सीएम होने हैं। हालांकि, नई सरकार को लेकर अभी तक कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है। नीतीश कुमार जल्द देंगे इस्तीफा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देने वाले हैं। वह राज्यसभा सांसद बन गए हैं। सत्ताधारी दलों के नेताओं का कहना है कि सीएम नीतीश के द्वारा एनडीए विधान मंडल की बैठक बुलाई जाएगी। इसमें सभी के सामने नीतीश अपने इस्तीफे का औपचारिक ऐलान करेंगे। फिर राज्यपाल के पास जाकर अपना त्यागपत्र दे देंगे। इसके बाद बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। नए सीएम का चयन नीतीश के इस्तीफे के बाद होने वाली एनडीए विधायक दल की बैठक में होगा। बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री का नाम उसी बैठक में घोषित किया जाएगा। नई सरकार का शपथ ग्रहण 15 अप्रैल को होने की संभावना है। नीतीश के राज्यसभा जाने पर निशांत का पॉलिटिकल डेब्यू मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने एक महीने पहले ही राजनीति में कदम रखा था। इससे पहले वह सक्रिय राजनीति से दूर ही थे। नीतीश के राज्यसभा चुनाव में नामांकन के बाद निशांत ने जदयू की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद से वह पार्टी के क्रियाकलापों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। निशांत कुमार ने पार्टी के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं और उनसे फीडबैक लिया। पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी लगातार की जा रही है। भाजपा से सीएम रेस में ये नेता भाजपा से मुख्यमंत्री की रेस में सबसे पहले डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम चल रहा है। उनके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, मंत्री दिलीप जायसवाल, विधायक संजीव चौरिया, सांसद संजय जायसवाल, पूर्व डिप्टी सीएम रेणु देवी समेत अन्य का नाम भी रेस में है। एक-दो दिन में इस पर स्थिति साफ होने की संभावना है।