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नई सरकार की तैयारी, 15 अप्रैल को बिहार को मिल सकता है नया मुख्यमंत्री और दिल्ली में भाजपा की अहम बैठक

 पटना    बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होता दिख रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही पद छोड़ सकते हैं और राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. इसे लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है और दिल्ली से लेकर पटना तक बैठकों का दौर जारी है. मंत्री विजय चौधरी के मुताबिक, नीतीश कुमार 9 अप्रैल को दोपहर 3:20 बजे एयर इंडिया की फ्लाइट से दिल्ली रवाना होंगे. 10 अप्रैल को वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे. इसके बाद 12 अप्रैल को उनके पटना लौटने की संभावना है. 14 अप्रैल को इस्तीफा, 15 को नई सरकार? सूत्रों के अनुसार, 13 अप्रैल को नीतीश कैबिनेट की आखिरी बैठक हो सकती है. इसके अगले दिन यानी 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की संभावना जताई जा रही है. इसके बाद 15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार का गठन हो सकता है. नए CM के नाम पर सस्पेंस बरकरार बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. हालांकि मंत्री विजय चौधरी ने संकेत दिए हैं कि वही नाम आगे बढ़ेगा, जिसकी चर्चा मीडिया में चल रही है. फिलहाल सबसे आगे सम्राट चौधरी का नाम बताया जा रहा है. लेकिन, बीजेपी कई राज्यों में सीएम को लेकर चौंकाते आई है. दिल्ली में BJP की अहम बैठक 10 अप्रैल को दिल्ली में बिहार भाजपा की कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है. इस बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर आम सहमति बनाई जाएगी. बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की भी संभावना है. NDA विधायकों की बैठक होगी निर्णायक नीतीश कुमार के पटना लौटने के बाद एनडीए विधानमंडल दल की बैठक बुलाई जा सकती है. इस बैठक में वे अपने इस्तीफे की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं. इसके बाद एनडीए के सभी घटक दल अपने-अपने विधायक दल की बैठक कर नेता का चयन करेंगे. फिर संयुक्त बैठक में एनडीए के नेता का ऐलान होगा, जो राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे. इस्तीफे से पहले बड़े फैसलों की तैयारी चर्चा है कि इस्तीफे से पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक होगी, जिसमें कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं. यह बैठक मौजूदा सरकार की आखिरी बैठक मानी जा रही है. नीतीश कुमार पहले ही 30 मार्च को विधान परिषद सदस्य पद से इस्तीफा दे चुके हैं. करीब 20 साल तक सदन में रहने के बाद उन्होंने बेहद कम शब्दों में अपना इस्तीफा सौंपा था.

बिहार की राजनीति में नए युग की शुरुआत, 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य पद की शपथ लेंगे नीतीश कुमार

 पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को कैबिनेट बैठक बुलाई है. इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक उनके कार्यकाल की आखिरी कैबिनेट बैठक भी हो सकती है. यह बैठक मुख्य सचिवालय में होगी. इसमें सभी मंत्री और उपमुख्यमंत्री शामिल रहेंगे. इसमें कुछ महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लग सकती है. नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं. इसके बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा भी दे दिया है. जानकारी के अनुसार, 10 अप्रैल को वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे. इसके बाद वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मिल सकते हैं. सत्ता परिवर्तन की आहट राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि बिहार में जल्द ही सत्ता परिवर्तन हो सकता है. बताया जा रहा है कि एनडीए के अंदर नई रणनीति बन रही है और मुख्यमंत्री पद किसी नए चेहरे को दिया जा सकता है. भाजपा के सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय, दिलीप जायसवाल और विजय कुमार सिन्हा के नाम इस दौड़ में सामने आ रहे हैं. अभी तक किसी भी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है. कब मिलेगा बिहार को नया सीएम? सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 13 अप्रैल के आसपास मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और इसके बाद 14 अप्रैल को एनडीए की बैठक में नए नेता का चयन हो सकता है. यह भी कहा जा रहा है कि 16 अप्रैल के बाद बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है. इन सभी बातों पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि बिहार में बड़ा बदलाव होने वाला है.

मिशन ‘प्रगति यात्रा’, मुख्यमंत्री आज वाल्मीकि नगर में करेंगे गंडक नहर और लव-कुश पार्क का निरीक्षण, पर्यटन को लगेंगे पंख

 वाल्मीकि नगर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज यानी रविवार को वाल्मीकि नगर के दौरे पर आ रहे हैं। उनके इस दौरे को लेकर पूरे इलाके में जबरदस्त हलचल है। माना जा रहा है कि सीएम आज उत्तर बिहार के इस अहम पर्यटन केंद्र को करोड़ों रुपये की योजनाओं की सौगात देंगे। इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण वाल्मीकि नगर हवाई अड्डे के विस्तार का शिलान्यास हो सकता है, जिससे अब बड़े विमानों की उड़ान का रास्ता भी साफ हो जाएगा। हवाई अड्डे के लिए 38.64 करोड़ का प्लान सीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए 38.64 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इसके तहत हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। वर्तमान में उपलब्ध जमीन के अलावा करीब 12 एकड़ अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण होना है। जैसे ही जमीन की प्रक्रिया पूरी होगी, निर्माण कार्य में तेजी आएगी। इससे न सिर्फ कनेक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि पर्यटकों के लिए वाल्मीकि नगर पहुंचना और भी आसान हो जाएगा। 2:30 बजे पटना हवाई अड्डे से रवाना होंगे CM तय कार्यक्रम के मुताबिक, मुख्यमंत्री दोपहर करीब 2:30 बजे पटना हवाई अड्डे से रवाना होंगे और सीधे वाल्मीकि नगर पहुंचेंगे। वहां पहुंचकर वे 'मुख्यमंत्री प्रगति यात्रा' के तहत दोन नहर सेवा पथ के बहाली कार्यों का जायजा लेंगे। इसके साथ ही गंडक नहर शाखा के निरीक्षण का भी प्रोग्राम है। इसके अलावा वे लव-कुश पार्क का निरीक्षण करेंगे और वाल्मीकि नगर सभागार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। सीएम इको टूरिज्म पार्क और गिद्ध संरक्षण केंद्र का उद्घाटन भी करेंगे। क्या बगहा बनेगा नया राजस्व जिला? सीएम के आगमन के साथ ही बगहा को 'राजस्व जिला' बनाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव से पहले सीएम इस पर कोई बड़ा संकेत दे सकते हैं। फिलहाल, शनिवार को ही डीएम और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हवाई अड्डे और कन्वेंशन सेंटर का बारीकी से निरीक्षण कर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

नीतीश कुमार का दिल्ली दौरा और राज्यसभा की शपथ,क्या बिहार में पहली बार बनेगा भाजपा का मुख्यमंत्री?

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद बिहार में नई सरकार के गठन पर अटकलें तेज हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश अगले सप्ताह दिल्ली जाएंगे और राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। इसके बाद वे पटना लौटकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद बिहार में नई सरकार का गठन होगा और राज्य को नया मुख्यमंत्री मिलेगा। 14 अप्रैल तक नए सीएम की शपथ होने की चर्चा भी चल रही है। हालांकि, इस बारे में किसी तरह की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि नीतीश कुमार के 9 अप्रैल को दिल्ली जाने का कार्यक्रम है। 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में उनका शपथ ग्रहण होने की संभावना है। इसके अगले दिन 11 अप्रैल को वे पटना लौट सकते हैं। फिर 12 अप्रैल को नीतीश मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देकर राज्यपाल को सौंप सकते हैं। बिहार को कब मिलेगा नया मुख्यमंत्री? नीतीश के इस्तीफे के तुरंत बाद बिहार में एनडीए की नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। रिपोर्ट्स में 14 अप्रैल को नए सीएम के शपथ ग्रहण की संभावित तारीख बताई जा रही है। हालांकि, इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई सूचना नहीं दी गई है। बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। वहीं, अभी खरमास चल रहा है, जो 14 अप्रैल तक रहेगा। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, खरमास में कोई शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। ऐसे में चर्चा है कि नए सीएम का शपथ ग्रहण खरमास खत्म होने के बाद भी हो सकता है। चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद पूरे कैबिनेट को नए सिरे से गठित किया जाएगा। ऐसे में नए सीएम के साथ मंत्रियों का भी शपथ ग्रहण संभावित है। भाजपा से होगा नया सीएम? सियासी गलियारों में चर्चा है कि नीतीश के बाद बिहार का मुख्यमंत्री भाजपा से हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारतीय जनता पार्टी बिहार में पहली बार अपना सीएम बनाएगी। भाजपा से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम प्रमुखता से चल रहा है। रेस में केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, दूसरे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा, मंत्री दिलीप जायसवाल, मंगल पांडेय जैसे नेताओं का नाम भी चल रहा है। एनडीए के नेताओं का कहना है कि गठबंधन के शीर्ष नेता मिलकर नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगाएंगे। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पिछले दिनों कहा था कि अभी यह भी तय नहीं हुआ है कि अगला मुख्यमंत्री किस पार्टी से होगा।

राजनीतिक हलचल तेज: नीतीश कुमार देंगे इस्तीफा, 14 अप्रैल को नया मुख्यमंत्री संभालेगा पद

पटना. बिहार में नई सरकार (Bihar New Government Formation) के गठन की प्रक्रिया अगले दस दिनों बाद शुरू हो जाएगी। नीतीश कुमार 12 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। संभावना है कि 14 अप्रैल को बिहार में नए मुख्यमंत्री पद का शपथ होगा। नए मुख्यमंत्री के साथ नए मंत्रिमंडल का भी शपथग्रहण होगा। नौ अप्रैल को दिल्ली के लिए हो रहे रवाना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नौ अप्रैल को दिल्ली के लिए रवाना होंगे। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार, दस अप्रैल को वह राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद 11 अप्रैल को वह दिल्ली लौटेंगे और अगले दिन यानी 12 अप्रैल को उनका इस्तीफा होगा। 13 अप्रैल को एनडीए की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर एनडीए सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 13 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर विधिवत मुहर लग जाएगी। इस दौरान भाजपा के कई दिग्गज भी मौजूद रहेंगे। उसी दिन एनडीए के नए विधायक दल के नेता राज्यपाल को अपनी सरकार बनाने का दावा भी पेश करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष के नए कार्यकाल का इसी महीने आरंभ जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चौथा कार्यकाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी महीने आरंभ करेंगे। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार देश भर के विभिन्न प्रदेशों से जदयू के पदाधिकारी पटना पहुंचेंगे और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेंगे। राष्ट्रीय परिषद की बैठक भी होनी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार का संबोधन होगा। यह पहली बार होगा जब वह मुख्यमंत्री पद पर रहे बिना जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करेंगे। 16 मार्च को राज्यसभा का सदस्य चुने गए थे नीतीश नीतीश कुमार इसी महीने की 16 तारीख को राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित हुए थे। संवैधानिक प्राविधानों के अनुसार राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के बाद उन्हें अगले 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देना था। इस संवैधानिक वजहों से 30 मार्च को नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उसी दिन कुछ ही घंटे के भीतर उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया गया था।

नीतीश सीएम की कुर्सी छोड़ने को तैयार, BJP के इशारे का इंतजार! कब होगा बिहार में सरकार का बदलाव?

पटना  बिहार में सरकार का बदलना तय है. नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने को तैयार हैं. विधान परिषद से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. यानी अब अगर-मगर की कोई गुंजाइश नहीं बची है. जल्द ही इस आशंका पर भी विराम लग जाएगा कि वे संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्यसभा की शपथ लेने के बाद 6 महीने तक सीएम रह सकते हैं. नीतीश ने अब दिल्ली की राजनीति में जाने का पक्का मन बना लिया है. यही वजह रही कि उन्होंने ससमय विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के लिए भी वे तारीख तय होने का इंतजार कर रहे हैं. अनुमान है कि सीएम पद से इस्तीफा की औपचारिकता भी अप्रैल के दूसरे सप्ताह में पूरी हो जाएगी।  इस्तीफा शपथ के पहले या बाद में? यह सवाल जरूर बनता है कि नीतीश कुमार सीएम पद कब छोड़ेंगे. राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के पहले पद छोड़ देंगे या बाद में, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है. चूंकि नीतीश कुमार ने मीडिया से मुखातिब होना बंद कर दिया है, इसलिए इसे लेकर संशय बना हुआ है. तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. कोई कह रहा कि वे इस्तीफा अभी नहीं देंगे. 6 महीने की संवैधानिक व्यवस्था का लाभ लेते हुए वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे. हालांकि जेडीयू के सूत्र बता रहे हैं कि नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता की शपथ लेने के पहले ही इस्तीफा दे सकते हैं, बशर्ते भाजपा चेहरा घोषित कर दे. चर्चा यह भी है कि सरकार के स्वरूप पर एनडीए में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, इसीलिए विलंब हो रहा है. इतना तो तय है कि मुख्यमंत्री भाजपा का ही बनेगा. लेकिन, कौन बनेगा, इसे लेकर भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. जेडीयू के बड़े नेता लगातार कहते रहे हैं कि सीएम भाजपा से ही बनेगा, लेकिन वह नीतीश के मन मुताबिक होगा।  अगला सीएम नीतीश की पसंद का? सीएम के लिए नीतीश कुमार की पसंद की बात करें तो उन्होंने अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान इशारों-इशारों में अपनी पसंद जाहिर कर दी है. यात्रा के दौरान जनसंवाद के दौरान वे मंच पर सम्राट के कंधे पर हाथ रखते रहे. इतना ही नहीं, उन्होंने कई जगह कहा भी कि अब ये ही सब काम देखेंगे. अब इससे बड़ा संकेत क्या हो सकता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नीतीश के चयन पर मुहर लगाती है या पुरानी परिपाटी निभाते हुए कोई चौंकाने वाला नाम घोषित करती है. भाजपा ने 2014 से ही यह परिपाटी शुरू की है कि सीएम वह नहीं बनता, जिसकी सर्वाधिक चर्चा होती है. हरियाणा में मनोहर खट्टर और झारखंड में रघुवर दास के नाम चौंकाने वाले थे. मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में भी भजपा ने यही किया।  बिहार की राजनीति में सम्राट फिट बिहार का मिजाज जातीय समीकरण को पसंद करता है. नीतीश कुमार ने भले जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिया, लेकिन उनके उत्थान के पीछे लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण सहायक बना. इस समीकरण को अक्षुण्म रखते हुए नीतीश ने हर जाति में अपने रणनीतिक कौशल से वोट बैंक बनाया. कुर्मी-कोइरी की 10 फीसद से भी कम आबादी के बावजूद वे 20 साल तक बिहार के सीएम बनते रहे. चूंकि सम्राट चौधरी कोइरी जाति से आते हैं, इसलिए नीतीश के पैटर्न में दूसरों के मुकाबले ज्यादा फिट बैठेंगे. नीतीश अगर उन्हें अपना उत्तराधिकारी बता रहे हैं तो इसकी बड़ी वजह यही हो सकती है. भाजपा भी वोट बैंक की राजनीति में माहिर है. संभव है, वह दूसरे राज्यों के प्रयोग से बिहार में बचे।  भाजपा भी बढ़ाती रही है सम्राट को सम्राट का पलड़ा एक और वजह से भारी दिखता है. भाजपा में आने के बाद उन्हें बड़ा फलक मिला है. भाजपा ने उन्हें पहले प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी. उन्हें दूसरी बार डेप्युटी सीएम बनाया. इस बार तो भाजपा ने नीतीश के पास शुरू से ही रहने वाला गृह विभाग भी उनसे लेकर सम्राट को सौंप दिया है. सम्राट के प्रमोशन के संकेत उस वक्त भी मिले थे, जब लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मंच साझा करने के अलावा बोलने का भी अवसर दिया. मसलन भाजपा सम्राट को प्रमोट करने का काम शुरू से ही इसीलिए कर रही है कि समय आने पर उन्हें सूबे की कमान सौंपी जा सके।  नीतीश कर रहे BJP का इंतजार जेडीयू के सूत्र बताते हैं कि नीतीश ने अब सीएम पद का मोह छोड़ दिया है. वे इंतजार कर रहे हैं कि भाजपा नए सीएम का ऐलान करे तो वे बागडोर सौंप कर मुक्त हो जाएं. यानी वे भाजपा के ग्रीन सिग्नल का इंतजार कर रहे हैं. जानकारी तो यह भी मिल रही है कि राज्यसभा की शपथ के पहले ही भाजपा नाम की घोषणा कर देगी. चूंकि लंबे इंतजार के बाद भाजपा को बिहार में सरकार बनाने का मौका मिल रहा है, इसलिए वह इस आयोजन को भव्य बनाना चाहती है. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत केंद्रीय स्तर के नेता नए सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत कर सकते हैं. 5 राज्यों में चुनाव प्रचार तेज होने के कारण सबका शिड्यूल देखा जा रहा है. नए नेता के चुनाव की औपचारिकताएं भी पूरी करनी हैं. अनुमान है कि अप्रैल के दूसरे हफ्ते के आरंभ में नेता चयन की रस्म पूरी कर ली जाएगी. इसके साथ ही शपथ ग्रहण की तैयारी भी शुरू हो जाएगी. बंगाल चुनाव शुरू होने से पहले भाजपा बिहार में नई सरकार का गठन कर लेगी। 

खेला हो गया: बीजेपी जुटा रही बहुमत का जादुई आंकड़ा, जेडीयू के बिना सरकार बनाने का प्लान तैयार, कांग्रेस में बड़ी टूट की आहट

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद सदस्यता से इस्तीफा देकर राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है, लेकिन सीएम की कुर्सी अभी तक नहीं छोड़ी है. ऐसे में नीतीश ने पूरी तर खामोशी अख्तियार कर रखी है, जिसके चलते मुख्यमंत्री को लेकर कशमकश बनी हुई है. ऐसे में बीजेपी सीएम चेहरे पर पत्ते खोलने के बजाय बिहार की सियासत में खुद को 'आत्म निर्भर' बनाने से आगे की दिशा में जुट गई है. बीजेपी पहली बार बिहार की राजनीति में अपना मुख्यमंत्री बनाने की स्थिति में खड़ी नजर आ रही है. अभी तक नीतीश कुमार की बैसाखी के सहारे ही सत्ता में भागीदार बनती रही है, लेकिन पहली बार सत्ता की स्टैरिंग उसके हाथ में होगी. नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने और विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद यह तय है कि बीजेपी जल्द ही अपना मुख्यमंत्री बना लेगी. इससे पहले बीजेपी अपने सीटों के समीकरण को दुरुस्त करने की स्टैटेजी पर काम कर रही है ताकि आगे की राह में किसी तरह की कोई मुश्किल न आ सके, ऐसे में बीजेपी की नजर कांग्रेस के बागी विधायकों पर है, जिन्हें अपने पाले करने की है. बिहार में बना रहा नया दिलचस्प समीकरण बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव के दौरान एक नया सियासी समीकरण बनाकर उभरा है. पांच राज्यसभा सीटों में से विपक्ष एक सीटें जीत सकता था, लेकिन बीजेपी ने ऐसी रणनीति चली कि आरजेडी चारो खाने चित हो गई. नंबर गेम के बाद भी विपक्ष नहीं जीत सका और एनडीए सभी पांचों सीटें जीतने में कामयाब रहा. बीजेपी ने कांग्रेस के बागी विधायकों को अपने साथ मिलाने की स्टैटेजी पर इन दिनों काम कर रही है. राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के तीन विधायक और आरजेडी के एक विधायक ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था. इसके चलते ही एनडीए सूबे की पांचों राज्यसभा सीटे जीतने में सफल रही थी. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इन तीनों विधायकों के खिलाफ़ कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन पार्टी चाहकर भी उनके खिलाफ एक्शन नहीं ले पा रही है. हालांकि, इसके पीछे कुछ तकनीकी पहलू ऐसे हैं कि कांग्रेस के लिए इन तीनों विधायकों के खिलाफ़ कार्रवाई करना आसान नहीं है, जिसने बीजेपी को एक नई उम्मीद जगा दी है. ऐसे में कांग्रेस के विधायक अगर पाला बदल कर बीजेपी के साथ भी चले जाते हैं तो भी पार्टी कुछ नहीं कर पाएगी. इसके चलते बिहार में सीटों का नया समीकरण बन सकता है? कांग्रेस MLA पाला बदलते ही बदलेगा गेम बिहार में पिछले साल नवंबर में हुएविधानसभा चुनाव में कांग्रेस के छह विधायक जीते थे. चुने गए विधायकों का एक नेता चुना जाता है, जिसको विधायक दल का नेता कहा जाता है. चार महीने बीत जाने के बाद भी आजतक बिहार में कांग्रेस विधायक दल के नेता का चयन नहीं हो पाया है. विधायक दल का नेता नहीं चुने जाने के चलते यह हुआ कि आजतक बिहार में पार्टी विधायक दल का कोई सचेतक या व्हिप भी नियुक्त नहीं हो सका है. विधायक दल के नेता और व्हिप की नियुक्ति की औपचारिक और विधिवत जानकारी विधानसभा स्पीकर को देनी होती है. व्हिप का काम ही होता है तमाम मौकों पर अपने विधायकों को वोट देने के लिए आदेश या व्हिप जारी करना. ऐसे में राज्यसभा चुनाव में वोटिंग से दूर रहने वालों तीनों विधायक अगर बीजेपी में शामिल हो जाएं तो सदस्यता नहीं जाएगी. इसके अलावा बीजेपी की नजर एक और भी विधायक पर है. बिहार में कांग्रेस के छह में से चार विधायक अलग होकर बीजेपी में शामिल हो जाते हैं तो वे दलबदल क़ानून के दायरे में नहीं आएंगे. इस तरह बीजेपी के विधायकों की संख्या भी बढ़ जाएगी और कांग्रेस से बगावत करने वाले विधायकों की सदस्यता भी बची रह सकती है.   बीजेपी का आत्म निर्भर बनने से आगे का प्लान बीजेपी बिहार की राजनीति में लंबे समय से आत्म निर्भर बनने की कवायद में है, लेकिन अभी तक सफल नहीं हो सकी है. नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव जाने के बाद ये तो साफ है कि बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बना लेगी, लेकिन जेडीयू पर उसकी निर्भरता बनी रहेगी, क्योंकि नंबर गेम अभी उसके पक्ष में नहीं है. 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 89 और जेडीयू को 85 सीटें मिली थी. इस तरह दोनों के बीच में सिर्फ चार सीटों का अंतर है, लेकिन एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के पास 28 विधायक हैं. जेडीयू के अलावा एनडीए के सहयोगी चिराग पासवान की पार्टी के पास 19, जीतनराम मांझी के पास 5 और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के पास 4 विधायक हैं. दिलचस्प बात ये है कि चिराग, मांझी और कुशवाहा की वफादारी बीजेपी के पक्ष में है, क्योंकि एनडीए में उन्हें जेडीयू नहीं बल्कि बीजेपी लेकर आई है. ऐसे में बीजेपी के ही करीबी माने जाते हैं, इस तरह 28 विधायकों को बीजेपी के 89 विधायकों के साथ जोड़ लिया जाता है तो यह संख्या 117 हो जाती है. बीजेपी कैसे जुटा रही बहुमत का नंबर गेम चिराग-मांझी-कुशवाहा के विधायकों को मिलने के बाद बहुमत के आंकड़े से बीजेपी सिर्फ पांच सीटें पीछे है. ऐसे में कांग्रेस के चार विधायकों को बीजेपी अपने साथ जोड़ती है तो फिर जेडीयू के बिना एनडीए बहुमत के आंकड़े से केवल एक दूर रह जाएगी. ऐसे में अगर ज़रूरत पड़ने पर बीजेपी की जेडीयू पर निर्भरता नहीं रहेगी, लेकिन केंद्र में मोदी सरकार की जेडीयू पर निर्भरता है. सके बारह सांसदों के समर्थन की बीजेपी को ज़रूरत रहेगी, लेकिन बीजेपी ने बिहार में आत्म निर्भर बनने की दिशा में अपने कदम बढ़ा रही है.

नीतीश कुमार और नितिन नवीन का इस्तीफा, राज्यसभा में उनके नए सफर की शुरुआत

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज से अपने राजनीतिक जीवन के एक नए चैप्टर की शुरुआत किए। बिहार विधान परिषद की सदस्यता से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया। उनके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी अपनी विधानसभा सदस्यता छोड़ दिया। 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद, इन दोनों नेताओं का अब उच्च सदन में जाना का फैसला किया। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना इसलिए भी खास है क्योंकि वो अब उन गिने-चुने नेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए, जिन्होंने लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद इन चारों सदनों का प्रतिनिधित्व किया है। चारों सदनों के सदस्य बनने का गौरव नीतीश कुमार का विधायी सफर 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से शुरू हुआ था। इसके बाद 1989 में वे नौवीं लोकसभा के सदस्य बने। 2006 से वे लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। अब पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में वे अपनी नई पारी की शुरुआत करने वाले है।इस्तीफे से ठीक पहले रविवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर सरगर्मी तेज रही। जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे कद्दावर नेता मौजूद रहे। सीएम आवास में भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की गई। नीतीश कुमार का राजनीति करियर     नीतीश कुमार ने 1985 में हरनौत (नालंदा) से पहली बार विधायक बनकर करियर की शुरुआत की। 1989 में बाढ़ (पटना) से पहली बार लोकसभा पहुंचे।     नीतीश कुमार ने केंद्र में रेल मंत्री, कृषि मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे, जहां उन्होंने रेलवे में व्यापक सुधार लागू किए।     साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं। नीतीश कुमार ने 'सुशासन बाबू' के रूप में अपनी पहचान बनाई।     शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50% आरक्षण जैसे क्रांतिकारी फैसलों का श्रेय नीतीश कुमार को दिया जाता है।     2026 में राज्यसभा निर्वाचित होने के साथ ही उन नेताओं में शामिल हो गए, जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा चारों के सदस्य रहे हैं। नितिन का बांकीपुर से राज्यसभा तक का सफर भाजपा नेता नितिन नवीन भी आज विधानसभा की सदस्यता त्याग दिया। साल 2006 से लगातार बांकीपुर सीट (पटना) का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के कारण अब वे राज्य की राजनीति से केंद्र की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे बांकीपुर सीट पर अब उपचुनाव की स्थिति बनेगी। माना जा रहा है कि इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। उनका वर्तमान विधान परिषद कार्यकाल 2030 तक था, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका के लिए उन्होंने समय से पहले ये पद छोड़ने का फैसला लिया। नीतीश कुमार का अनोखा रिकॉर्ड इस इस्तीफे के साथ ही नीतीश कुमार ने भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल कर ली है। वह अब देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्होंने संसद और राज्य विधानमंडल के चारों सदनों (लोकसभा, राज्य सभा, विधानसभा और विधान परिषद) की सदस्यता ग्रहण की है। नितिन नवीन ने भी छोड़ी विधायकी इधर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी अपनी बांकीपुर विधानसभा सीट से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्याग पत्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को रविवार को ही दे दिया था, जो संजय सरावगी आज विधानसभा में जमा कराएंगे। नितिन नवीन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि वह अब राज्य सभा में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनके इस्तीफे के साथ ही बांकीपुर सीट अब रिक्त हो गई है, जहां जल्द ही उपचुनाव कराए जाएंगे। नितिन नवीन का राजनीतिक करियर     नितिन नवीन ने अपने पिता स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की राजनीतिक विरासत को संभाला और पटना की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई।     2006 में पहली बार बांकीपुर सीट से विधायक बने। तब से लेकर 2026 में राज्यसभा के लिए चुने जाने तक, वे लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे।     नितिन नवीन ने भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठन का अनुभव हासिल हुआ।     बिहार में पथ निर्माण मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे और छत्तीसगढ़ के प्रदेश सह-प्रभारी के रूप में भी सक्रिय रहे, जहां जबर्दस्त कामयाबी मिली।     मार्च 2026 में बिहार से राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद, अब वे विधानसभा की सदस्यता छोड़कर उच्च सदन में अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं। रविवार को इस्तीफे का प्रोग्राम नितिन ने टाला नितिन नवीन के रविवार को ही इस्तीफा देने की सूचना थी। इसके लिए बिहार विधानसभा सचिवालय ने मीडिया को सूचना भी जारी कर दी। इसमें कहा गया कि सुबह 8:40 बजे नितिन नवीन विधानसभा अध्यक्ष के ऑफिस में इस्तीफा सौपेंगे। मीडिया में खबरें भी आ गई। नितिन नवीन के इस्तीफे के लिए विधानसभा ऑफिस को रविवार को खोला गया।  नीतीश अब भी 6 महीने रह सकते हैं सीएम संविधान के मुताबिक राज्यसभा सदस्य बनने के 14 दिन में राज्य की सदस्यता छोड़नी होती है. इस हिसाब से उन्हें विधान परिषद से इस्तीफा देना पड़ रहा, क्योंकि अगर वह इस्तीफा नहीं देते तो फिर उनकी एक सदस्यता खुद ही समाप्त हो जाती. एमएलसी पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार सीएम की कुर्सी पर बने रह सकते हैं. एक सांसद मुख्यमंत्री बन सकता है, लेकिन 6 महीने के भीतर राज्य की सदस्यता लेना जरूरी होता है।  बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा, संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति बिना निर्वाचन के भी 6 महीने तक बिहार का मुख्यमंत्री रह सकता है.नीतीश कुमार को केवल विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना जरूरी है, मुख्यमंत्री पद से नहीं. वे चाहें तो अगले छह महीने तक सीएम पद पर बने रह सकते हैं. बावजूद इसके नीतीश ने अब दिल्ली की राजनीति करने का फैसला कर लिया है।  बीजेपी को लेना होगा तुरंत फैसला नीतीश के विधान परिषद से इस्तीफा देने के साथ ही उनके सियासी उत्तराधिकारी के चुनने … Read more

राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छोड़ी एमएलसी की सदस्यता

बिहार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद सदस्य यानी एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया है. नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं और नियमानुसार एमएलसी पद छोड़ना जरूरी है. सीएम नीतीश कुमार ने सोमवार को एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया सुबह सवा 10 बजे इसकी आधिकारिक पुष्टि हो गई है. उनके इस इस्तीफे को लेकर सुबह से गहमा-गहमी का माहौल बना हुआ था. पहले JDU की ओर से कहा गया था कि उनका इस्तीफा हमारे पास है. बाद में JDU नेता इस्तीफा लेकर सभापति के पास पहुंचे. उन्होंने कहा- सभापति आएंगे तो इस्तीफा उन्हें सौंपा जाएगा. सामने आया है कि नीतीश के इस्तीफ़े वाला लेटर लेकर एमएलसी संजय गांधी विधान परिषद पहुंचे थे और विधान परिषद में इस्तीफे का पत्र दिया. जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि, जेडीयू एमएलसी संजय गांधी इस्तीफे का पत्र लेकर परिषद पहुंचे हैं. उन्होंने मीडिया के सामने इस्तीफे वाला लेटर भी दिखाया था. नीतीश कुमार आगे आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा देंगे. हालांकि नियम के तहत वह अभी छह महीने सीएम रह सकते हैं. क्यों बना हुआ है सस्पेंस? असल में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है. राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के बाद नियम के मुताबिक उन्हें परिषद की सदस्यता छोड़नी होती है. एमएलसी पद से इस्तीफा देने के बाद भी नीतीश कुमार छह महीने तक मुख्यमंत्री रह सकते है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी तक बिहार विधान परिषद के सदस्य थे. वह हाल ही में राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हो चुके हैं. ऐसे में नीतीश कुमार को नियमानुसार एमएलसी पद से इस्तीफा देना अनिवार्य था. वह राज्यसभा की सदस्यता को अपने पास रखेंगे. मुख्यमंत्री पद कब छोड़ेंगे यह सवाल बना हुआ है. बता दें कि सीएम नीतीश कुमार का एमएलसी पद से इस्तीफा देने की बात से रविवार शाम से ही बिहार की राजनीति में चर्चाएं होने लगी थीं. उनसे मिलने जेडीयू के कई नेता मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, मंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री विजेंद्र यादव मंत्री, अशोक चौधरी सीएम हाउस पहुंचे थे.

बिहार में सियासी हलचल तेज: Nitish Kumar 30 मार्च को MLC पद छोड़ेंगे, 13 अप्रैल के बाद CM कुर्सी पर संकट

पटना बिहार में राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 अप्रैल को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं, जबकि 13 अप्रैल के बाद वे कभी भी मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। मुख्यमंत्री आवास से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। नीतीश कुमार, जो अभी बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं, ने 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में पहले ही जीत हासिल की। नियमों के अनुसार, नीतीश कुमार को संसद के लिए चुने जाने के 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल से इस्तीफा देना होता है। इस स्थिति में राज्य विधानसभा या विधान परिषद सदस्य न होने की स्थिति में नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा देना होगा। राज्यसभा की सदस्यता को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री ने अपनी 'समृद्धि यात्रा' के 5 चरणों के दौरान इस मामले पर एक भी शब्द नहीं कहा। यह यात्रा 26 मार्च को पटना में समाप्त हुई थी। समृद्धि यात्रा के दौरान, बिहार के मुख्यमंत्री ने 32 जिलों में 32 जनसभाओं को संबोधित किया, लेकिन कहीं भी राज्यसभा जाने या मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का जिक्र नहीं किया था। हालांकि, हाल में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में उन्होंने नामांकन दाखिल किया और पहली बार उच्च सदन के सदस्य के रूप में चुने गए। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 30 अप्रैल को इस्तीफा देने की सूचना है। इसके बाद वे अपनी राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।" नीतीश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे की चर्चाओं पर बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, "उनका सदन से जाना पूरे बिहार के लिए अखरेगा। समय और परिस्थितियों के साथ यह उनका (नीतीश कुमार) का निर्णय है। हम लोग नहीं चाहते हैं कि वे दिल्ली जाएं, लेकिन राजनीति में परिस्थितियों के अनुसार उन्होंने अपना फैसला लिया है। सदन का सदस्य रहना या नहीं रहना यह कोई बात नहीं, बल्कि वह व्यक्ति राज्य के लिए कितना इफेक्टिव है, यह मायने रखता है।"