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राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छोड़ी एमएलसी की सदस्यता

बिहार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद सदस्य यानी एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया है. नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं और नियमानुसार एमएलसी पद छोड़ना जरूरी है. सीएम नीतीश कुमार ने सोमवार को एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया सुबह सवा 10 बजे इसकी आधिकारिक पुष्टि हो गई है. उनके इस इस्तीफे को लेकर सुबह से गहमा-गहमी का माहौल बना हुआ था. पहले JDU की ओर से कहा गया था कि उनका इस्तीफा हमारे पास है. बाद में JDU नेता इस्तीफा लेकर सभापति के पास पहुंचे. उन्होंने कहा- सभापति आएंगे तो इस्तीफा उन्हें सौंपा जाएगा. सामने आया है कि नीतीश के इस्तीफ़े वाला लेटर लेकर एमएलसी संजय गांधी विधान परिषद पहुंचे थे और विधान परिषद में इस्तीफे का पत्र दिया. जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि, जेडीयू एमएलसी संजय गांधी इस्तीफे का पत्र लेकर परिषद पहुंचे हैं. उन्होंने मीडिया के सामने इस्तीफे वाला लेटर भी दिखाया था. नीतीश कुमार आगे आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा देंगे. हालांकि नियम के तहत वह अभी छह महीने सीएम रह सकते हैं. क्यों बना हुआ है सस्पेंस? असल में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है. राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के बाद नियम के मुताबिक उन्हें परिषद की सदस्यता छोड़नी होती है. एमएलसी पद से इस्तीफा देने के बाद भी नीतीश कुमार छह महीने तक मुख्यमंत्री रह सकते है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी तक बिहार विधान परिषद के सदस्य थे. वह हाल ही में राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हो चुके हैं. ऐसे में नीतीश कुमार को नियमानुसार एमएलसी पद से इस्तीफा देना अनिवार्य था. वह राज्यसभा की सदस्यता को अपने पास रखेंगे. मुख्यमंत्री पद कब छोड़ेंगे यह सवाल बना हुआ है. बता दें कि सीएम नीतीश कुमार का एमएलसी पद से इस्तीफा देने की बात से रविवार शाम से ही बिहार की राजनीति में चर्चाएं होने लगी थीं. उनसे मिलने जेडीयू के कई नेता मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, मंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री विजेंद्र यादव मंत्री, अशोक चौधरी सीएम हाउस पहुंचे थे.

बिहार में सियासी हलचल तेज: Nitish Kumar 30 मार्च को MLC पद छोड़ेंगे, 13 अप्रैल के बाद CM कुर्सी पर संकट

पटना बिहार में राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 अप्रैल को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं, जबकि 13 अप्रैल के बाद वे कभी भी मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। मुख्यमंत्री आवास से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। नीतीश कुमार, जो अभी बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं, ने 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में पहले ही जीत हासिल की। नियमों के अनुसार, नीतीश कुमार को संसद के लिए चुने जाने के 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल से इस्तीफा देना होता है। इस स्थिति में राज्य विधानसभा या विधान परिषद सदस्य न होने की स्थिति में नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा देना होगा। राज्यसभा की सदस्यता को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री ने अपनी 'समृद्धि यात्रा' के 5 चरणों के दौरान इस मामले पर एक भी शब्द नहीं कहा। यह यात्रा 26 मार्च को पटना में समाप्त हुई थी। समृद्धि यात्रा के दौरान, बिहार के मुख्यमंत्री ने 32 जिलों में 32 जनसभाओं को संबोधित किया, लेकिन कहीं भी राज्यसभा जाने या मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का जिक्र नहीं किया था। हालांकि, हाल में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में उन्होंने नामांकन दाखिल किया और पहली बार उच्च सदन के सदस्य के रूप में चुने गए। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 30 अप्रैल को इस्तीफा देने की सूचना है। इसके बाद वे अपनी राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।" नीतीश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे की चर्चाओं पर बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, "उनका सदन से जाना पूरे बिहार के लिए अखरेगा। समय और परिस्थितियों के साथ यह उनका (नीतीश कुमार) का निर्णय है। हम लोग नहीं चाहते हैं कि वे दिल्ली जाएं, लेकिन राजनीति में परिस्थितियों के अनुसार उन्होंने अपना फैसला लिया है। सदन का सदस्य रहना या नहीं रहना यह कोई बात नहीं, बल्कि वह व्यक्ति राज्य के लिए कितना इफेक्टिव है, यह मायने रखता है।"

क्या नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने वाले हैं? ताबड़तोड़ परियोजनाओं के उद्घाटन के बीच खरमास का इंतजार

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य चुने जा चुके हैं, लेकिन सीएम पद की कुर्सी नहीं छोड़ी है. दो दशकों से सत्ता की बागडोर संभाल रहे नीतीश ने  केंद्र की राजनीति में लौटने का फैसला किया है और राज्यसभा जा रहे हों, लेकिन बिहार में अपनी सियासी पकड़ को कमजोर नहीं होने देना चाहते. ऐसे में नीतीश बिहार के अलग-अलग जिलों की यात्रा कर रहे और ताबड़तोड़ विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे हैं।   नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद पूरी तरह से एक्टिव रहने के चलते सवाल यही है कि मुख्यमत्री पद कब छोड़ेंगे? क्या खरमास के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन होना. बिहार के नए सीएम को लेकर बीजेपी के कई नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन सबके मन में एक ही सवाल है कि नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे? उसके बाद ही मुख्यमंत्री और सरकार गठन की असल तस्वीर साफ हो सकेगी?  नीतीश कुमार 21 साल बाद दिल्ली करेंगे कूच नीतीश कुमार अपने राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं, 21 साल पहले सांसद रहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार ने अपने बेटे निशांत को राजनीतिक पारी शुरू कराने के साथ ही बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के व्यापक दौरे कर विकास परियोजनाओं का लगातार उद्घाटन कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य सीधे जनता से संवाद स्थापित करना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करना है।  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का फैसला किया और सदस्य चुन लिए भी गए हैं. इसके बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने हुए हैं और बिहार के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ेंगे, चर्चा है कि नीतीश एक साथ बिहार की राजनीति नहीं छोड़ेंगे, बल्कि दो किस्तों में इस्तीफा देंगे।   नीतीश अभी मुख्यमंत्री होने के साथ ही बिहार विधान परिषद के सदस्य भी हैं. वे राज्यसभा सदस्य भी चुन लिए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद की कुर्सी नहीं छोड़ा. ऐसे में सवाल यही है कि कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे।  नीतीश कुमार कब देंगे सीएम पद से इस्तीफा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101(2)के तहत प्रावधान है कि कोई व्यक्ति एक ही समय में एक ही सदन का सदस्य रह सकता है. संसद के लोकसभा, राज्यसभा और राज्य के विधानमंडल के विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य एक साथ नहीं सकता है.अगर ऐसा होता है तो उसे एक निश्चित समयसीमा के अंदर एक सदन से त्यागपत्र देना होगा. समयसीमा का निर्धारण राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम से तय होगा।  प्रोहिबिशन ऑफ सिमुल्टेनियस मेंबरशिप रूल्स 1950 में तय की गई है. इस नियम के तहत दो सदनों के सदस्य निर्वाचित होने की स्थिति में व्यक्ति को 14 दिनों के अंदर अपना पद छोड़ना होगा. चुनाव नतीजों के परिणाम के केंद्रीय या राज्य गजट में प्रकाशन की तारीख से से समय तय होता है. निर्वाचन की तारीख और गजट का प्रकाशन का समय अलग-अलग होता है।  नियम कहता है कि कोई भी व्यक्ति गजट नोटिफिकेशन के 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देने के लिए बाध्य होता है, न कि निर्वाचन की तारीख से. राज्यसभा चुनाव के परिणामों का गजट प्रकाशन अब तक नहीं हुआ है, ऐसे में नीतीश कुमार पर विधान परिषद की सदस्यता त्यागने की बाध्यता फिलहाल नहीं है. इसके चलते नीतीश कुमार विधान परिषद सदस्य के साथ-साथ राज्यसभा सदस्य हैं. इसके चलते मुख्यमंत्री भी बने हुए हैं।   नीतीश कुमार ने 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव जीता था. इसीलिए कहा जा रहा है कि नीतीश 30 मार्च तक बिहार विधान परिषद की सदस्यता नहीं छोड़ते हैं, तो संसद के उच्च सदन के सदस्य नहीं बन पाएंगे. इसलिए उनका एमएलसी पद से इस्तीफा की बात कही जा रही थी, लेकिन अभी तक गजट ही जारी नहीं हुआ है तो वो एक साथ दोनों पद पर बने हुए हैं।  खरमास के बाद क्या छोड़ें सीएम की कुर्सी नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद न छोड़ने की पीछे कहीं खरमास वजह तो नहीं है, जिसके चलते वो किसी नए सफर की तरफ अपने कदम नहीं बढ़ा रहे. खरमास का महीना 13 अप्रैल को खत्म हो रहा है. इसके बाद 14 अप्रैल की सुबह से सभी मांगलिक और शुभ कार्य किए जा सकेंगे. बीजेपी नया और शुभ काम खरमास के महीने में नहीं करती है. नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद बीजेपी को फौरन अपने किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाना है, जिसके चलते ही खरमास खत्म होने का इतंजार किया जा रहा है।  बिहार के पांच राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो रहा है, जिनकी सीटों पर 16 मार्च को चुनाव हुए हैं और नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद चुने गए हैं. इसके चलते ही माना जा रहा है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से खरमास खत्म होने के साथ ही इस्तीफा दे देंगे ताकि दूसरे दिन बीजेपी बिहार में सरकार गठन कर लगे।  बिहार में सरकार गठन का क्या होगा फॉर्मूला नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलती है तो पहली बार होगा जब बीजेपी का अपना सीएम होगा. बीजेपी से कई नेताओं के नाम सीएम की रेस में चल रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी नाम पर फाइनल मुहर नहीं लगी है. सम्राट चौधरी से लेकर नित्यानंद राय तक के नाम चर्चा में है. देखना है कि बीजेपी किसे सीएम बनाती है।  बिहार में बीजेपी का सीएम बनता है तो फिर जेडीयू से बिहार में डिप्टी सीएम पद मिलेगा. सियासी गलियारे में ऐसी चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. इसके अलावा पार्टी के किसी सीनियर लीडर को दूसरा उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है. बीजेपी से 15 और जेडीयू से 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। 

जदयू में हलचल: Nitish Kumar ने सांसद Girdhari Yadav पर की कार्रवाई

पटना जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी ने बांका से सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ कथित दल-विरोधी गतिविधियों को लेकर लोकसभा अध्यक्ष को अयोग्यता का नोटिस सौंपा है। बताया जा रहा है कि लोकसभा में जदयू के नेता दिलेश्वर कामत ने स्पीकर को पत्र लिखकर गिरधारी यादव की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। आरोप है कि उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ गतिविधियां की हैं। चुनाव के वक्त पार्टी विरोधि गतिविधियों में शामिल रहे। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए गिरधारी यादव ने कहा कि जब मुझसे लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इस संबंध में पूछा जाएगा, तब मैं अपना जवाब दूंगा। मुझे नहीं पता कि दिलेश्वर कामत ने क्या कहा है। मेरे खिलाफ किसी भी तरह की दल-विरोधी गतिविधि का कोई रिकॉर्ड नहीं है। दरअसल, विधानसभा चुनाव के वक्त गिरधारी यादव का बेटा चाणक्य प्रकाश राजद में शामिल हो गए। उन्होंने बेलहर सीट से जदयू प्रत्याशी और विधायक मनोज यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसमें चाणक्य की हार हुई थी। इसके बाद से ही गिरधारी यादव पर सवाल उठने लगे थे। ललन बोले- यह फैसला हमने नहीं लिया इस विवाद पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने कहा कि यह फैसला हमने नहीं लिया है। यह निर्णय उन लोगों की ओर से लिया गया है, जिन्होंने अपने बेटे को विधानसभा चुनाव में आरजेडी के टिकट पर उतारा और खुद उसके लिए प्रचार भी किया। इसी आधार पर हमारे संसदीय नेता दिलेश्वर कामैत ने आवेदन दिया है। अब इस पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष को लेना है। राजद सांसद ने उठाया सवाल राजद सांसद मीसा भारती ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गिरधारी यादव जदयू के सांसद हैं। अगर उनके बेटे ने चुनाव लड़ा है, तो वह वयस्क है और अपने फैसले खुद ले सकता है। ऐसे में इस आधार पर कार्रवाई करना सही नहीं है। अब देखना होगा कि आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

जदयू की कमान फिर संभालेंगे नीतीश कुमार, चौथी बार निर्विरोध चुने जाने की तैयारी

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर से जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। आज शाम बाद प्रदेश कार्यालय में इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। मुमकिन है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आज समृद्धि यात्रा से लौटने के बाद प्रदेश कार्यालय में आएं ताकि कार्यकर्ता और नेता उनको चौथी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने बधाई दे सकें। इस वजह से बनेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वर्तमान में भी जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। अब एक बार फिर चौथी बार भी वह निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। 22 मार्च को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन किया गया था और आज 24 मार्च तक नामांकन वापस लिए जाने का दिन था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावे किसी अन्य ने इस पद के लिए अपना नामांकन पर्चा नहीं भरा, इस वजह से यह साफ़ हो चुका है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। अगर इनके अलावे कोई अन्य नामांकन दाखिल करता तो 27 मार्च चुनाव होता, लेकिन ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी। अब राज्यसभा सदस्य रहते हुए वह पार्टी की बागडोर अपने ही हाथ में रखेंगे। इस बात की आधिकारिक घोषणा कुछ ही देर में कर दी जाएगी। निर्वाचन अधिकारीजारी करेंगे निर्वाचन प्रमाण पत्र जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि आज. मंगलवार 24 मार्च, 2026 को सुबह 11 बजे थी। नामांकन वापस लेने का समय समाप्त होने के बाद, निर्वाचन अधिकारी के पास केवल नीतीश कुमार का नामांकन ही शेष है, इसलिए निर्वाचन अधिकारी और राज्यसभा के पूर्व सांसद अनिल प्रसाद हेगडे आज दोपहर 2:30 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्वाचित होने का निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी करेंगे। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्य सभा में संसदीय दल के नेता संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। संजय झा ने भी जमा कराया था अपना नामांकन बताया जाता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रस्तावकों में से एक संजय झा ने भी पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में अपना नामांकन जमा कराया था। बिहार के मुख्यमंत्री नामांकन दाखिल करने के लिए दिल्ली नहीं आए थे। इस पद के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 22 मार्च थी, जबकि उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच 23 मार्च को की गई थी। राजीव रंजन सिंह के दिसंबर 2023 में पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद कुमार ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले जेडीयू की कमान संभाली। क्या कहा था संजय झा और विजय चौधरी ने? इधर, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय चौधरी ने कई बार कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा जाने की इच्छा हुई। इसलिए वह जा रहे हैं। यह नीतीश कुमार के खुद का फैसला है। हालांकि इस दौरान उनका मार्गदर्शन हमें मिलता रहेगा और पार्टी भी उनकी छाया में ही काम करेगी। मुख्यमंत्री ने पार्टी को क्या कहा? दरअसल, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव दिसंबर 2025 में ही होना था। लेकिन, विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव नहीं हो पाया। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महीने में राज्यसभा जाने की घोषणा कर दी। ऐसे में कयास लगने लगे कि सीएम नीतीश कुमार अब बिहार और पार्टी की बागडोर संभालना नहीं चाहते हैं। हालांकि, सीएम नीतीश कुमार ने अपने कार्यकर्ताओं से स्पष्ट कहा था कि आपलोग चिंता नहीं करें। मैं अब भी सक्रिय हूं और दिल्ली जाने के बाद भी आप सभी का मार्गदर्शन करता रहूंगा।

CM फेस पर सस्पेंस बरकरार: नीतीश कुमार ने फिर दिए संकेत, बड़े नेता की पीठ थपथपाई

जमुई. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि केंद्र का पूरा सहयोग मिल रहा है। पिछले 20 वर्षों के कार्यकाल में जो थोड़ी बहुत कमी रह गई है, उसे अगले पांच वर्षों के एनडीए सरकार में पूर्ण कर लिया जाएगा। वह बुधवार को समृद्धि यात्रा पर भगवान महावीर की धरती लछुआड़ पहुंचे थे। यहां उन्होंने चिर प्रतीक्षित कुंडघाट जलाशय परियोजना सहित 914 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने 2005 के पहले के बिहार की चर्चा करते हुए लोगों को विरोधियों से सावधान किया और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए के लिए समर्थन देते रहने का भरोसा लिया। 40 मिनट लंबा संबोधन नीतीश ने तकरीबन 40 मिनट के संबोधन में लगभग सभी बिंदुओं को रेखांकित करते हुए बताया कि किस प्रकार उन लोगों ने बिहार को बदहाली के दलदल से बाहर निकाला। उन्होंने यह भी बताया कि शाम होते कैसे दरवाजे बंद हो जाते थे और लोगों का घरों से निकलना मुश्किल होता था। सड़कों की क्या हालत थी और अब क्या है। 24 नवंबर 2005 को सत्ता संभालने के साथ हमने न्याय के साथ विकास करना प्रारंभ किया। नीतीश ने गिनाई अपनी उपलब्धियां मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति पर नमन करते हुए अपना संबोधन प्रारंभ किया। इसके बाद वह कब्रिस्तान से लेकर मंदिरों की घेराबंदी सुनिश्चित कर सांप्रदायिक सौहार्द बहाल करने में सरकार की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम शिक्षा पर काम शुरू किया और आज सरकारी शिक्षकों की संख्या 5.24 लाख हो गई। पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिमाह 39 मरीज आते थे। आज यह आंकड़ा 11600 तक पहुंच गया है। 2005 से पहले सिर्फ छह मेडिकल कॉलेज थे। अब 12 हो गए। छह पूर्ण होने वाले हैं और 21 को भी शीघ्र पूरा किया जाएगा। पुराने को भी अपग्रेड कर दिया गया है। पीएमसीएच 5400 बेड का बन गया। इसके अलावा, पांच अन्य पुराने मेडिकल कॉलेज को ढाई हजार बेड का बनाया गया। अगले 5 साल में देंगे 1 करोड़ नौकरी नीतीश कुमार ने कहा कि आईजीएमएस भी 3000 बेड का अस्पताल हो गया। 2018 में ही उन्होंने हर घर बिजली पहुंचाने का काम किया 50 लाख घरों पर सोलर की स्वीकृति दी जा चुकी है। अगले पांच वर्षों में एक करोड़ को नौकरी और रोजगार दिया जाएगा। अल्पसंख्यक कल्याण की कई योजनाओं को प्रारंभ किया गया। जाति आधारित गणना, पेंशन राशि बढ़ोतरी और 125 यूनिट बिजली फ्री के साथ ही रोजगार के लिए जीविका दीदी को सहायता पहुंचने की भी उन्होंने चर्चा की। जीविका दीदियों की चर्चा नारी सशक्तिकरण में जीविका दीदियों से लेकर पंचायत और नगर निकाय में महिलाओं को 50 प्रतिशत तथा पुलिस एवं सभी सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को भी उन्होंने महत्वपूर्ण कदम बताया। 25 से 30 का संकल्प दोहराते हुए उन्होंने कहा औसत आय को दोगुना करना तथा प्रत्येक जिले में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना सरकार की प्राथमिकता में है। पुरानी बंद चीनी मीलें चालू होंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि डेयरी और मछली पालन के क्षेत्र में भी विशेष काम करने की योजना है। उन्नत शिक्षा और उज्जवल भविष्य के तहत प्रत्येक प्रखंड में आदर्श विद्यालय और डिग्री कॉलेज खुलेंगे। सुलभ स्वास्थ, सुरक्षित जीवन के तहत विशिष्ट चिकित्सा केंद्र की स्थापना होगी। डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाएगी। सम्राट की पीठ पर रखा हाथ, मांगा समर्थन अंत में उन्होंने सम्राट चौधरी के करीब जाकर उनकी पीठ पर हाथ रख जनता से समर्थन देते रहने का भरोसा भी लिया। सभा को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी, 20 सूत्री प्रभारी मंत्री संजय सिंह खेल व सूचना प्रविधि की मंत्री श्रेयसी सिंह ने भी संबोधित किया

CM फेस पर सस्पेंस: नीतीश कुमार ने सम्राट की पीठ थपथपाई, ‘जिंदाबाद’ के नारों से गरमाई सियासत

भागलपुर. राज्यसभा चुनाव में जीत के बाद की पहली समृद्धि यात्रा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने उत्तराधिकारी के बारे में संकेत दे दिया। उनकी सभा बैजानी में थी। नीतीश ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाई। केंद्र सरकार के सहयोग का बखान किया।लोगों को भरोसा दिया कि राज्य में आगे भी सबकुछ अच्छा रहेगा। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने भीड़ से हाथ उठाने का आग्रह किया। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संसदीय कार्य मंत्री मंच पर अगल-बगल में खड़े थे। अन्य नेता भी खड़े थे। पीठ पर रखा हाथ, दूसरा हाथ हवा में लहराया मुख्यमंत्री मंच पर तेज कदम बढ़ाते हुए बढ़े। कई नेताओं को किनारे करते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास पहुंचे। उनकी पीठ पर एक हाथ रखा। दूसरा हाथ हवा में लहरा दिया। सम्राट के दोनों हाथ जुड़ गए। भीड़ ने भीड़ से सम्राट चौधरी जिंदाबाद का नारा बुलंद किया। सम्राट के बगल में विजय चौधरी खड़े थे। इस सभा में एक तरह से नीतीश ने अपने उत्तराधिकारी का साफ संकेत दिया। भीड़ से उस पर मुहर भी लगवा दी। संयोग यह कि मंच का संचालन कर रही महिला ने भी सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री कह कर संबोधित किया। प्राय: सभी समृद्धि यात्रा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ सम्राट चौधरी चोधरी जाते रहे हैं, लेकिन राज्यसभा के लिए नामांकन के बाद की समृद्धि यात्रा के हरेक मंच पर सम्राट को पहले की तुलना में अधिक तरजीह मिल रही है। सीमांचल की यात्रा में भी दिखी थी ऐसी तस्वीर इससे पहले, सीमांचल की समृद्धि यात्रा में भी नीतीश ने सम्राट की पीठ पर हाथ रखकर भीड़ का अभिवादन करवाया था। जदयू के मंत्रियों में संसदीय कार्य एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी को तरजीह मिल रही है। शपथ ग्रहण के क्रम के अनुसार नीतीश मंत्रिमंडल में सम्राट चौधरी को दूसरा स्थान प्राप्त है। वे नीतीश मंत्रिमंडल के पहले गृह मंत्री हैं।

Rajya Sabha Certificate मिला नीतीश कुमार को, संजय का दावा- अब बिहार को मिलेगी नई दिशा

पटना. बिहार में राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने एक बार फिर अपनी मजबूत स्थिति साबित कर दी है। पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने राजनीतिक बढ़त को और मजबूत किया है। पहले से ही संख्या बल एनडीए के पक्ष में होने के कारण नतीजे लगभग तय माने जा रहे थे। इस जीत के साथ मुख्यमंत्री Nitish Kumar अब राज्यसभा के सदस्य बन गए हैं। उन्हें निर्वाचित होने का प्रमाण-पत्र जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha ने औपचारिक रूप से सौंपा। इस दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। ‘गौरव का क्षण’ बताया संजय झा ने Sanjay Jha ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसे गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का पूरा राजनीतिक जीवन जनता की सेवा और बिहार के विकास को समर्पित रहा है। संजय झा के अनुसार, राज्यसभा में नीतीश कुमार की मौजूदगी से बिहार के विकास को नई दिशा और गति मिलेगी। साथ ही उनके अनुभव का लाभ राज्य सरकार को भी मिलता रहेगा। पहले श्रवण कुमार ने लिया था प्रमाण-पत्र इससे एक दिन पहले Shravan Kumar मुख्यमंत्री की ओर से प्रमाण-पत्र लेने पहुंचे थे। इसके बाद आज औपचारिक रूप से यह प्रमाण-पत्र सौंपा गया, जिससे पूरी प्रक्रिया पूरी हो गई। विपक्ष पर भी साधा निशाना दिल्ली रवाना होने से पहले संजय झा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि एनडीए को अपनी जीत पर शुरू से ही भरोसा था। जिन दलों के विधायक वोटिंग में नहीं पहुंचे, उन्हें अपने अंदर झांकने की जरूरत है। ‘संख्या बल में कोई चुनौती नहीं’ उन्होंने कहा कि एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत था और किसी तरह की परेशानी नहीं थी। कुछ दल अपने ही विधायकों को संभालने में लगे रहे, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर नजर आई। आगे की राजनीति पर नजर इस जीत के बाद बिहार की राजनीति में एनडीए का मनोबल और बढ़ गया है। आने वाले समय में इसका असर राज्य की सियासी दिशा और फैसलों पर भी साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

राज्यसभा चुनाव में आज चुने जाएंगे सीएम नीतीश कुमार, पहले भी बना चुके हैं अनोखा राजनीतिक रिकॉर्ड

नई दिल्ली बिहार की राजनीति में फिर एक बड़ा दिन। राज्यसभा चुनाव तो भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी लड़ रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर है। नितिन विधायक रहते सांसदी का यह चुनाव लड़ रहे तो नीतीश विधान परिषद् सदस्य रहते। नीतीश कुमार की चर्चा इसलिए सबसे ज्यादा हो रही है, क्योंकि दिल्ली जाने के लिए उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ेगा और पहली बार भारतीय जनता पार्टी इस कुर्सी पर अपना आदमी बैठाएगी। ऐसे में रोचक है कि नीतीश कुमार आज के बाद फैसला क्या लेते हैं? बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार को समझना असंभव जब 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री के रूप में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम प्रचारित होना शुरू होता, इससे पहले नीतीश कुमार ही ऐसे बड़े नेता थे जिन्होंने पुराने रिश्ते छोड़ दिए थे। नीतीश कुमार अटल-आडवाणी के समय से भाजपा से जुड़े थे, लेकिन नमो युग की शुरुआत से पहले एनडीए से निकल गए थे। तब भी अंदाजा नहीं लग रहा था। फिर 2017 में लौटे तो 2022 में छोड़ गए। फिर 2024 में वापस साथ आए। इस साल होली के एक दिन पहले जिस तरह से वह बिहार चुनाव 2025 के तीन महीने बाद ही राज्यसभा जाने के लिए तैयार हुए, वह भी अचरज में डालने वाला था। और, अब खरमास शुरू होने से पहले उनका इस्तीफा नहीं आना भी भाजपा के लिए सिरदर्द बना हुआ है। खरमास में वह फैसला लेते भी हैं तो यही माना जा रहा है कि 15 अप्रैल तक भाजपा नए सीएम की कुर्सी पर अपना आदमी बैठाने का 'जतरा' नहीं बनाएगी। केंद्रीय मंत्री रहे नीतीश एक बार सांसद रहते विधायक भी बने थे नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं। वह केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। वह पटना जिले की बाढ़ सीट से लोकसभा सदस्य हुआ करते थे। नालंदा जिले की हरनौत विधानसभा सीट से विधायक हुआ करते थे। इस सदी में वह कभी विधानसभा चुनाव में नहीं उतरे। विधान पार्षद ही चुने जाते रहे। अब राज्य सभा के चुनाव में हैं। नीतीश कुमार के बारे में यह जानना बेहद रोचक है कि वह 1991 में तत्कालीन जनता दल के टिकट पर बाढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर सांसद बने थे। इसके बावजूद उन्होंने 1995 में तत्कालीन समता पार्टी के चुनाव चिह्न पर हरनौत से विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीते भी। विधायक चुने जाने के बाद जब लोग सांसद के रूप में उनके इस्तीफे का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्होंने विधायक की शपथ नहीं ली। नतीजतन हरनौत सीट के लिए 1996 में उप चुनाव हुआ, जिसमें फिर समता पार्टी के अरुा कुमार सिंह विधायक बने। कब केंद्र में मंत्री बने और कब-कब बिहार की राजनीति का रुख किया? नीतीश कुमार 1985 में हरनौत विधायक चुने गए थे। इसके बाद दिल्ली की राजनीतिक यात्रा के लिए पहली बार 28 नवंबर 1989 को पटना जिले के बाढ़ संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। तब, सांसद के रूप में उनका कार्यकाल 2 दिसंबर 1989 से 13 मार्च 1991 तक रहा था। अप्रैल 1990 में तत्कालीन विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में उन्हें केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बनाया गया था। बाद में वीपी सिंह सरकार सदन में बहुमत साबित नहीं कर सकी तो केंद्रीय राज्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार का कार्यकाल भी 10 नवंबर 1990 को खत्म हो गया। 13 मार्च 1991 को लोकसभा भंग हुआ तो फिर अगले चुनाव में नीतीश कुमार फिर बाढ़ से ही सांसद चुने गए। इसके बाद, बिहार की राजनीति में वापस वह सक्रिय होते दिखे। 1995 के बिहार विधानसभा चुनाव में वह हरनौत से फिर उतरे और विधायक चुने गए, हालांकि उन्होंने लोकसभा सदस्य रहना ही उचित समझा। इसके बाद, 1996 में फिर बाढ़ से ही नीतीश कुमार सांसद बने। तब अटल बिहारी वाजपेयी 7 दिन के लिए पीएम बने और फिर मौजूदा विपक्ष सत्ता में आ गया। 15 मार्च 1998 को अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो नीतीश कुमार की समता पार्टी उनके साथ थी। नीतीश कुमार को केंद्रीय रेल एवं भूतल परिवहन मंत्री बनाया गया। अगस्त 1999 में गैसाल में रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने मंत्रीपद से इस्तीफा दे दिया। फिर करगिल युद्ध के बाद 1999 के लोकसभा चुनाव कराना पड़ा तो भाजपा बड़े दल के उभरी। पहली बार पांच साल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार रही। नीतीश केंद्रीय मंत्री रहे। नई सदी में पहली बार जब वह चुनाव में उतरे तो 2004 के बाढ़ ने उन्हें हरा दिया। इसके बाद परिस्थितियां देख वह बिहार को सुधारने के लिए यहां उतर गए। फिर तो 2005 से बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार बतौर मुख्यमंत्री अब तक कुर्सी पर हैं। बीच में एक बार जीतन राम मांझी को उन्होंने ही सीएम बनाया था, वह भी लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए।  

भरी सभा में नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाई, क्या मिल गया अगले CM का संकेत?

पटना बिहार की विकास यात्रा को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए राज्य सरकार ने आने वाले 5 सालों के लिए एक comprehensive action plan पेश किया है। सीएम नीतीश कुमार ने गुरुवार (12 मार्च) को अपनी 'समृद्धि यात्रा' के तहत पूर्णिया और कटिहार का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जनसभाओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि केंद्र के सहयोग से राज्य अब विकास की एक नई इबारत लिखने के लिए तैयार है। कटिहार में जनसभा के दौरान एक भावुक पल भी देखने को मिला, जब मंत्री लेशी सिंह अपने संघर्षों को याद करते हुए मंच पर ही आंसू नहीं रोक पाईं। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति अपना पूरा भरोसा जताया। मंच पर सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाते हुए सीएम ने यह संदेश दिया कि बिहार में एनडीए गठबंधन पूरी मजबूती के साथ विकास कार्यों को गति दे रहा है। ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष फोकस सरकार की नई रणनीति का सबसे अहम हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार करना है। अब राज्य के प्रत्येक प्रखंड में एक 'आदर्श विद्यालय' और एक 'डिग्री कॉलेज' स्थापित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण प्रतिभाओं को उच्च शिक्षा के लिए अपने घर से दूर न जाना पड़े। स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। प्रखंड स्तर के अस्पतालों को अब स्पेशलाइज्ड (विशेष) अस्पतालों में तब्दील किया जाएगा। इसके अलावा, गांवों की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कों को भी अपग्रेड करने की योजना हैग्रामीण सड़कों को अब दो लेन में बदला जाएगा, जिससे आवागमन सुलभ और तेज हो सके। खेल और युवाओं के लिए बड़ा ऐलान राजधानी पटना को खेल जगत के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए वहां एक अत्याधुनिक स्पोर्ट्स सिटी के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार केवल बुनियादी ढांचा ही नहीं, बल्कि करियर की सुरक्षा भी प्रदान करेगी। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी देने की योजना को प्राथमिकता दी जा रही है। मखाना किसानों के लिए विशेष पहल सीमांचल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले मखाना किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी विशेष रोडमैप तैयार किया गया है। केंद्र और राज्य के साझा प्रयासों से मखाना उत्पादन और उसके बाजार को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा।