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“बिहार ने दिखाया कमाल, गरीबी 41% से घटकर 4% पर! नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुआ बदलाव”

पटना. बिहार में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा हर चौक-चौराहे पर हो रही है.  नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार का सीएम कौन होगा, इस सवाल का जवाब भी लोग जानना चाह रहे हैं. वहीं नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की जेडीयू में जॉइनिंग के साथ ही उनके सियासी उदय की भी चर्चा जोरों पर है. लेकिन, इन सबके बीच नए बिहार को लेकर जो आंकड़े सामने आए  हैं, वह सच में नीतीश कुमार के विजन और विजडम दोनों की बेहतरीन मिसाल पेश करते हैं। दरअसल कभी विकास के मामले में देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिने जाने वाले बिहार को लंबे समय तक “बीमारू राज्य” कहा जाता रहा. लेकिन, अब तस्वीर तेजी से बदलती दिख रही है. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य श्यामका रवि ने ‘प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद’ (Economic Advisory Council to the Prime Minister) से जुड़ी अपनी भूमिका के साथ इंडिया एक्स्प्रेस (The Indian Express) में लिखे लेख में बताया है कि पिछले एक दशक में बिहार ने जीवन स्तर, गरीबी और पोषण क्षमता जैसे कई अहम सूचकों पर उल्लेखनीय सुधार किया है। संजय झा ने भी शेयर किया पोस्ट इस आर्टिकल में बताया गया कि गया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान बिहार में राजनीतिक स्थिरता और शासन की निरंतरता का असर विकास के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है. कई मामलों में बिहार ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल को भी पीछे छोड़ दिया है. उपभोग, गरीबी में कमी और पोषण क्षमता जैसे क्षेत्रों में बिहार की प्रगति राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंचती दिख रही है. राज्यसभा सांसद और जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी इस आर्टिकल को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट शेयर इसे आंख खोलने वाली रिपोर्ट बताई है। हैरान करने वाले हैं रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े और तथ्य     2011 से 2024 के बीच बिहार के ग्रामीण इलाकों में रियल मासिक प्रति व्यक्ति खर्च (MPCE) में औसतन 4.5% वार्षिक वृद्धि हुई, जो राष्ट्रीय औसत 3.1% से करीब 50% अधिक है।     शहरी बिहार में रियल MPCE की वृद्धि 4.6% रही, जबकि पूरे भारत में यह 2.6% रही.     ग्रामीण बिहार में मासिक प्रति व्यक्ति खर्च 2011-12 में ₹1,086 से बढ़कर ₹3,531 हो गया.     इसी अवधि में पश्चिम बंगाल में यह ₹1,211 से बढ़कर ₹3,366 तक पहुंचा, लेकिन उसकी वृद्धि दर कम रही.     शहरी बिहार में नॉमिनल MPCE की वृद्धि 10.7% रही, जबकि पश्चिम बंगाल में यह केवल 6.9% दर्ज की गई. राष्ट्रीय औसत के मुकाबले बिहार की स्थिति में सुधार     बिहार का ग्रामीण MPCE राष्ट्रीय औसत के 80.5% से बढ़कर 91.7% तक पहुंच गया.     शहरी क्षेत्रों में यह 58.7% से बढ़कर 75.4% हो गया.     इसके विपरीत पश्चिम बंगाल के आंकड़ों में गिरावट देखी गई.     ग्रामीण अनुपात 89.8% से घटकर 87.5% हो गया.     शहरी अनुपात 97.5% से घटकर 82.8% रह गया. गरीबों की आय में भी तेज वृद्धि     ग्रामीण बिहार में सबसे गरीब 20% आबादी की आय में 4.2% CAGR की वृद्धि हुई.     मध्यम वर्ग में यह 4.6% और अमीर वर्ग में 4.4% रही.     शहरी बिहार में गरीब वर्ग की वृद्धि 5.7% रही, जो सबसे ज्यादा है. गरीबी में भारी गिरावट     2011-12 में बिहार में गरीबी दर 41.3% थी.     2023-24 में यह घटकर 4.4% रह गई, जो राष्ट्रीय औसत 4.0% के लगभग बराबर है.     पश्चिम बंगाल की गरीबी दर इसी अवधि में 30.4% से घटकर 6% रही, जो बिहार से अधिक है। पोषण क्षमता में भी सुधार     2011-12 में बिहार में 64.7% परिवार पोषणयुक्त भोजन खरीदने में सक्षम नहीं थे.     2023-24 में यह घटकर 27.4% रह गया.     पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 56% से घटकर 34.6% तक आया क्या कहता है विश्लेषण? रिपोर्ट के अनुसार बिहार में जीवन स्तर में सुधार, गरीबी में तेज कमी और खपत क्षमता में बढ़ोतरी जैसे संकेत स्पष्ट हैं. विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक स्थिर शासन और नीतिगत निरंतरता ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि जिस बिहार को कभी स्थायी आर्थिक पिछड़ेपन का उदाहरण माना जाता था, अब वही राज्य कई सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर तेजी से आगे बढ़ता नजर आ रहा है।

नीतीश कुमार के 10 क्रांतिकारी कदम: बिहार में बदलाव की कहानी, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने किया फॉलो

पटना नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में बिहार के सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने कार्यकाल में खासकर महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर कई ठोस कदम उठाए गए, जिसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहना हुई। उनकी योजनाओं ने बिहार की महिलाओं के साथ ही पिछड़ा,अति पिछड़ा, दलित, महादलित और अल्पसंख्यक समाज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर करने में काफी मदद की। पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण नीतीश सरकार ने देश में पहली बार बिहार की महिलाओं को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और नगर निकायों में 50 फीसदी आरक्षण दिया। इससे निचले स्तर पर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 55 फीसदी तक हो गई है। बाद में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा, उत्तराखंड आदि ने भी इस फैसले का अनुसरण किया। नौकरी/पढ़ाई में महिलाओं को 35 प्रतिशत रिजर्वेशन 2013 में नीतीश कुमार ने बिहार पुलिस में 35 फीसदी महिला आरक्षण लागू किया। इसका प्रभाव हुआ कि आज बिहार में कुल पुलिस बल का लगभग 30 फीसदी महिलाएं हैं और महिला पुलिस की संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। नीतीश सरकार ने 2016 से सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 35 फीसदी क्षैतिज आरक्षण लागू कर दिया। राज्य के इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों के नामांकन में भी लड़कियों को 33 फीसदी आरक्षण लागू है। जीविका योजना ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण और गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य के साथ 2006 में बिहार में जीविका (बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी) परियोजना की शुरुआत की। आज इससे एक करोड़ 40 लाख से अधिक महिलाएं जुड़कर ‘जीविका दीदी’ के रूप में कार्य कर रही हैं। यह महिलाएं 11.03 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में गोलंबद हैं। इसकी तर्ज पर केंद्र सरकार ने पूरे देश में आजीविका मिशन लागू किया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 2025 में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं को उनके बैंक खाते में 10-10 हजार रुपये भेजे गए हैं। इनमें रोजगार बढ़ाने की इच्छा रखने वाली महिलाओं को दो-दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। कन्या उत्थान/ जननी बाल सुरक्षा योजना स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नीतीश कुमार ने काफी काम किया। उनके कार्यकाल के दौरान 2008-09 में कन्या उत्थान योजना शुरू की गई। इसके परिणाम स्वरूप जन्म पंजीकरण में भारी वृद्धि हुई। एनएफएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, जन्म पंजीकरण दर 54.9% बढ़कर 5.8 से 60.7 हो गया है। जननी बाल सुरक्षा योजना से संस्थागत प्रसव में वृद्धि हुई। आशा और ममता जैसी प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्य कर्ताओं से गर्भवतियों व स्तनपान कराने वाली माताओं को स्वास्थ्य सुरक्षा दी गई। वर्ष 2006-07 में केवल चार प्रतिशत महिलाएं ही संस्थागत प्रसव के लिए अस्पताल आती थीं, जो बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो गया है। वर्ष 2016 में पूर्ण शराबबंदी, कड़े कानून बनाए अप्रैल 2016 से पूरे राज्य में देशी शराब और विदेशी शराब पर प्रतिबंध लगाने का कड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया। गांधी जयंती पर दो 2 अक्टूबर, 2016 को नया मद्य निषेध अधिनियम पूरे राज्य में लागू किया गया। यह सामाजिक सुधार की दिशा में बहुत बड़ा कदम रहा। शराबबंदी ने महिलाओं के लिए सामाजिक क्रांति लाई। इससे घरेलू हिंसा में 35 से 40 फीसदी कमी आई और परिवारों में शांति स्थापित हुई। महिलाओं की बचत बढ़ी। अपराध की दर घटी। कानून व्यवस्था से बदली बिहार की छवि नीतीश कुमार ने 2005 के बाद अपराध पर नियंत्रण के लिए स्पीडी ट्रायल और सख्त पुलिसिंग को बढ़ावा दिया। इससे बिहार की छवि में बड़ा बदलाव आया। बाहुबलियों को जेल भेजा गया और शाम होते ही घरों में दुबक जाने वाले लोग रात-बेरात सड़कों पर निकलने लगे। मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान भी अपनी इस उपलब्धि का लगातार बखान किया। बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान बाल विवाह और दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए 2017 से एक व्यापक राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की। शुरुआत में ही करीब ढाई करोड़ लोगों ने बाल विवाह और दहेज प्रथा को समाप्त करने की शपथ ली। इसमें पंचायत प्रतिनिधि, स्कूली छात्रों, सरकारी अधिकारी, गैर-सरकारी कार्यकर्ता व आम जनता भी शामिल हुए। लड़कियों की शैक्षणिक स्थिति में सुधार, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा उपायों के चलते पिछले वर्षों में बाल विवाह की दर में भारी कमी आई है। मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में महिला हेल्पलाइन स्थापित किया। यह हेल्पलाइन घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और अन्य सामाजिक बुराइयों से पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक परामर्श, चिकित्सा और कानूनी सहायता प्रदान करती है। पिछड़ा वर्ग की साक्षरता को चलाया अभियान 2009-10 से अक्षर अंचल योजना चलायी, जिससे 67 लाख से अधिक महिलाएं साक्षर हुईं। 2013 में महादलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़ा वर्ग को भी इस योजना से जोड़ा गया। इसके कारण बिहार में महिलाओं और एससी-एसटी की साक्षरता में पूरे देश की तुलना में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इस उपलब्धि के कारण बिहार को राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार प्राप्त हुआ। हुनर और औजार ‘हुनर’ के तहत अल्पसंख्यक समुदायों की हजारों लड़कियों को विभिन्न व्यवसायों का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया गया है। फिर उन्हें ‘औजार’ कार्यक्रम के तहत टूल-किट दी गई, ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। महादलित टोलों के विकास को लेकर इनकी बहुलता वाली पंचायत और शहरी वार्डों में समुदाय से ही विकास मित्र बहाल किए गए।

राज्यसभा जाने से नीतीश कुमार की भूमिका यूपी में कैसे बदल सकती है, 2027 चुनाव के लिए तैयार?

लखनऊ/बदायूं  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा ना केवल प्रदेश, बल्कि पूरे देश में हो रही है. बिहार में तो जेडीयू कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए. पटना में जेडीयू दफ्तर के सामने भी इसको लेकर प्रदर्शन किया गया. नीतीश के इस रुख को लेकर उत्‍तर प्रदेश में पार्टी क्‍या सोच रही है. उसके प्रदेश नेतृत्‍व का इस बारे में क्‍या मानना है, ये भी जानना जरूरी है.  अनूप पटेल का इस बारे में कहना है कि नीतीश कुमार अगर केंद्र की राजनीति में आते हैं तो कहीं ना कहीं इसका फायदा उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों के कार्यकर्ताओं और पार्टी को मिलेगा. उत्तर प्रदेश में भी जेडीयू की स्थिति मजबूत होगी।  दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के कदम के बाद बिहार की राजनीति को लेकर तमाम सवाल उठने लगे, क्योंकि अभी कुछ समय पहले ही नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं.. लेकिन अभी कुछ दिनों से उनके बेटे निशांत कुमार की भी सक्रिय राजनीति में भागीदारी देखी जा रही है. तमाम मंचों पर उनका चेहरा दिखाया जाता है. इसके बाद कहा जा रहा है कि बिहार में इस बार जदयू के दो उप मुख्यमंत्री होंगे, जिसमें से निशांत कुमार एक हो सकते हैं. वहीं अगर मुख्यमंत्री की बात की जाए तो वह बीजेपी का ही कोई चेहरा होगा।  पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश जनता दल यूके प्रदेश अध्यक्ष अनूप पटेल ने बदायूं में कहा कि हम लोग के सीनियर नेता का निर्णय देशहित में और पार्टी हित में हमेशा सही होता है. जैसा उनका निर्णय होगा हम सभी लोग उस निर्णय में उनके साथ हैं. उन्होंने कभी भी कोई ऐसा निर्णय नहीं लिया, जो देश हित में ना हो या पार्टी हिट में ना हो. उन्होंने कहा कि जो फार्मूला पहले था, पार्टी उसी लाइन पर काम करेगी. इस बार दो डिप्टी सीएम जदयू के होंगे और मुख्यमंत्री का चेहरा बीजेपी का होगा। उन्होंने कहा कि हम लोगों की बहुत समय से मांग थी कि निशांत को सक्रिय राजनीति में लाया जाए. हमें उम्मीद है कि अब वह सक्रिय राजनीति में आएंगे. बिहार में समर्थकों के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि 2025 के चुनाव में हम लोगों ने घर-घर जाकर वोट मांगे और प्रचंड बहुमत से हमारी सरकार बनी तो स्वाभाविक बात है कि पब्लिक को बुरा तो लगेगा ही. कार्यकर्ताओं में पीड़ा है और वह पीड़ा रहेगी. नीतीश कुमार के केंद्रीय राजनीति में आने से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा अन्य कई और प्रदेशों की राजनीति में हमारी पार्टी को फायदा मिलेगा।

बिहार में सत्ता बदलाव की अटकलें: नीतीश कुमार कब देंगे इस्तीफा, कब होगा नए सीएम का शपथ ग्रहण?

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधायक, विधान पार्षद रह चुके हैं। लोकसभा सांसद भी। अब राज्यसभा भी जा रहे हैं। मतलब, बिहार के सीएम की कुर्सी खाली हो रही है। कुर्सी कब खाली होगी और अगला चेहरा उस कुर्सी पर कब विराजमान होगा, इन सवालों का जवाब भी समझना अब जरूरी हो गया है। नीतीश कुमार का तुरंत इस्तीफा देना मजबूरी नहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन करने जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि नामांकन के साथ ही उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देनी होगी। भारतीय जनता पार्टी जल्द से जल्द वह कुर्सी हासिल करना चाहेगी, ताकि माहौल उलटा न बन जाए। जबकि, नीतीश कुमार के पास फैसला लेने के लिए समय रहेगा। 5 मार्च, यानी आज राज्यसभा के लिए नामांकन होगा और 16 मार्च को उनका निर्विरोध निर्वाचित होना तय है। इसके बाद चूंकि 9 अप्रैल तक मौजूदा राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल है तो इस समय तक मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के बने रहने में कोई तकनीकी परेशानी नहीं। खरमास के नाम पर भाजपा दिखा सकती है तेजी भाजपा के लिए नीतीश कुमार को पदच्युत करना बहुत आसान नहीं था और न आगे रहेगा। फिर भी, चूंकि नीतीश कुमार ने खुद राज्यसभा जाने की बात को लेकर भाजपा के दबाव की चर्चा नहीं की है तो आगे भारतीय जनता पार्टी अपना सीएम और जदयू के दो डिप्टी सीएम के प्रस्ताव को लेकर जल्द से जल्द नीतीश कुमार से इस्तीफा लेने का प्रयास भी करेगी। 15 मार्च के बाद खरमास शुरू हो रहा है और 16 मार्च को निर्विरोध राज्यसभा के लिए जीत का एलान होना है। चूंकि, 202 सदस्यों के कारण विधानसभा कोटे से राज्यसभा के रास्ते में कोई दिक्कत नहीं है, इसलिए भाजपा खरमास से पहले ही नई सरकार के गठन का रास्ता तय करना चाहेगी। जानिए, सीएम नीतीश कुमार ने क्या कहा? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है। संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं। मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।

अमित शाह ने नीतीश के RS नामांकन की सराहना की, नॉमिनेशन के बाद CM हाउस में मुलाकात

पटना  नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए आज नामांकन दाखिल कर दिया है. सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि पिछले दो दशक से ज्यादा समय से राज्यसभा जाना चाह रहा हूं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि जो नई सरकार बनेगी, उसे पूरा मार्गदर्शन रहेगा. इन सबके बीच पटना में भारी बवाल की स्थिति बन गई है. मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में जेडीयू के कार्यकर्ता जमा हो गए हैं. जेडीयू कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना अपनी पार्टी के नेताओं को भी करना पड़ रहा है. जेडीयू एमएलसी संजय गांधी को वहां से भागना पड़ा. वहीं, बीजेपी कोटे से मंत्री सुरेंद्र मेहता की गाड़ी जेडीयू समर्थकों ने रोक दी. नीतीश की अमित शाह ने दिल खोलकर की तारीफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने वाले हैं. ऐसे में उन्होंने पटना पहुंचकर नामांकन भरा. इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे. नीतीश कुमार के सियासी सफर पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा, "नीतीश कुमार ने अपने शासन काल में बिहार को जंगल राज से मुक्त करने का काम किया. बिहार की सड़कों को गांव तक जोड़ा. इनके दामन पर कोई दाग नहीं है. नॉमिनेशन के बाद CM हाउस पहुंचे नीतीश, शाह ने की मीटिंग नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन कर दिया है. नॉमिनेशन के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए हैं. वहीं, गृह मंत्री अमित शाह स्टेट गेस्ट हाउस में बीजेपी और जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ की मीटिंग . तेजस्वी बोले- सबको पता था, बीजेपी यही करेगी तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर कहा कि पहले से ही कह रहा था कि उनको बीजेपी ने हाईजैक कर लिया है. उनके साथ जो हो रहा है, सबको पता था कि यही होगा. हम लोग अगर वहां होते, तो उनको ये दिन नहीं देखना पड़ता. उनके साथ सहानुभूति है. बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता ने इसे जनता के साथ धोखा बताते हुए कहा कि चुनाव में नारा दिया 25 से 30, फिर से नीतीश और अभी देखिए. पटना के जेडीयू दफ्तर में तोड़फोड़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की बात पर जेडीयू समर्थक भड़क उठे. भड़के जेडीयू समर्थकों ने पटना के जेडीयू दफ्तर में जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की. 'मैं राज्यसभा का सदस्य बनना चाहता हूं…', नीतीश ने किया ऐलान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सक्रिय राजनीति में अपने अगले कदम का खुलासा कर दिया है. उन्होंने राज्यसभा सदस्य बनने की ख्वाहिश जताते हुए साफ कर दिया है कि वे अब दिल्ली की राह पकड़ेंगे और बिहार की नई सरकार को अपना मार्गदर्शन देंगे.

नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा, आज करेंगे नामांकन

पटना. बिहार की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल सुबह 11:30 बजे बिहार विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल करेंगे. उनके साथ जदयू उम्मीदवार के रूप में रामनाथ ठाकुर भी नामांकन दाखिल करेंगे. जानकारी के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व की ओर से जदयू के प्रमुख नेताओं को नामांकन के दौरान मौजूद रहने के लिए कहा गया है. इस बीच, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर पर अब लगभग मुहर लग गई है. इसी क्रम में भाजपा की ओर से भी उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश कुमार भी अपना नामांकन दाखिल करेंगे. वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करेंगे. बीजेपी का होगा मुख्यमंत्री? नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन के साथ ही बिहार में नए सिरे से सरकार गठन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक हलकों में इस कदम को बड़े बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर को लेकर जदयू के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच नाराजगी की संभावना भी जताई जा रही है. इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मंथन किया. नामांकन के वक्त अमित शाह मौजूद रहेंगे  नामांकन के बाद सीएम नीतीश कुमार और एनडीए के अन्य नेताओं के साथ अमित शाह की बैठक हो सकती है. इसी बैठक में नई सरकार के गठन के फार्मूले पर चर्चा होगी. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा. जेडीयू को दो डिप्टी सीएम के पद मिल सकते हैं. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई. इस बैठक में मौजूदा राजनीतिक हालात और नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर चर्चा की गई. कौन होगा अगला मुख्यमंत्री सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में नई सरकार के गठन को लेकर फॉर्मूला तय किया जा सकता है. चर्चा है कि बीजेपी का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि जेडीयू को दो डिप्टी सीएम पद दिए जा सकते हैं. पार्टी में हलचल! बैठक के बाद संजय झा के आवास से बाहर निकलते हुए जदयू नेता विजय कुमार चौधरी ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपनी मर्जी से राज्यसभा जा रहे हैं. पार्टी की ओर से यही संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि यह फैसला उनका अपना है. इस दौरान विजय कुमार चौधरी ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत की संभावित राजनीतिक एंट्री को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की. नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर के बाद बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर पर सबकी नजर बनी हुई है.

नीतीश सरकार ने 25 लाख महिलाओं के खातों में किए ₹2,500 करोड़ ट्रांसफर

पटना. बिहार में महिला सशक्तिकरण को नई राजनीतिक और आर्थिक धार देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को 25 लाख महिलाओं के खातों में ₹10-10 हजार की राशि ट्रांसफर की। कुल ₹2,500 करोड़ की यह मदद महिला रोजगार योजना के तहत सीधे बैंक खातों में भेजी गई। कार्यक्रम मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित हुआ, जहां कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे। सरकार ने इसे केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता अभियान का हिस्सा बताया। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए राशि सीधे लाभुकों तक पहुंचाई गई। इस कदम को आगामी चरणों की बड़ी तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार के अनुसार योजना का उद्देश्य महिलाओं को छोटे व्यवसाय से जोड़ना है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उन्हें पूंजी उपलब्ध कराई जा रही है। योजना का संचालन मुख्य रूप से जीविका नेटवर्क के जरिए हो रहा है। ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर आय के स्थायी स्रोत तैयार किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। अब तक राज्य में 1.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को ₹10 हजार की सहायता मिल चुकी है। अब अगला लक्ष्य ₹2 लाख तक की सहायता सरकार अगले चरण में पात्र महिलाओं को ₹2 लाख तक की सहायता देने की तैयारी में है। हालांकि इस बार प्रक्रिया को और सख्त बनाया गया है। राशि वितरण से पहले वार्ड स्तर पर विस्तृत जांच अनिवार्य होगी। राज्य के 3398 वार्डों में विशेष कर्मियों की तैनाती की जाएगी। ये कर्मी आवेदन, दस्तावेज और पात्रता का भौतिक सत्यापन करेंगे। सरकार का कहना है कि पारदर्शिता से ही योजना की विश्वसनीयता बनी रहेगी। समयबद्ध अभियान, तय डेडलाइन के साथ पूरी प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सभी वार्डों से सत्यापित आवेदन जीविका को सौंपे जाएंगे। अंतिम तिथि 15 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन प्रक्रिया को कुल नौ चरणों में पूरा किया जाएगा। सरकार इसे रोजगार विस्तार और महिला उद्यमिता से जोड़कर देख रही है। दावा है कि इससे राज्य में स्वरोजगार आधारित आर्थिक मॉडल को मजबूती मिलेगी।

समृद्धि यात्रा पर सीतामढ़ी पहुंचे नीतीश

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज समृद्धि यात्रा पर सीतामढ़ी पहुंच गए हैं। उन्होंने करोड़ों की लागत वाली याजनों का शिलान्यास और उद्घाटन किया। नीतीश कुमार के बेटे निशांत के पॉलिटिक्स जॉइन करने पर घमासान छिड़ गया है। नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अपने पुस्तैनी गांव पुहंचे और एक निजी समारोह में शामिल होने के बाद विकास कार्यों की जानकारी ली। उनकी सक्रियता से एक बार फिर पॉलिटिक्स में उनकी एंट्री पर चर्चा तेज हो गई है। इस मसले पर राजनीति भी गर्म हो गई है। कांग्रेस ने जहां उन्हें अपनी पार्टी से राजनीतिक पारी शुरू करने की सलाह दी है। इधर पटना में NEET छात्रा की मौत के मामले को लेकर बिहार में हंगामा जारी है। सोमवार को इस घटना के विरोध में बिहार कांग्रेस के नेताओं ने पटना में विरोध मार्च निकाला। बिहार कांग्रेस के नेता सड़क पर उतरे और उनके हाथों में तख्तियां थीं। इस प्रदर्शन में बिहार कांग्रेस चीफ राजेश राम और बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू भी मौजूद थे। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में न्याय की मांग की है। प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं का कहना था कि पुलिस का रवैया शुरू से ही संदेह के घेरे में रहा है। कांग्रेस नेताओं ने नीट छात्रा की मौत की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है। इधर बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा है कि बिहार के डीजीपी और पटना के आईजी खुद इस केस पर नजर रख रहे हैं। सम्राट चौधरी ने कहा कि घटना की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी अपना काम कर रही है। पुलिस को भी इस केस में पूरी छूट दी गई है। इस केस में जो भी दोषी होंगे वो किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे।

मुख्यमंत्री नितीश ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भवन का किया निरीक्षण

पटना. मुख्यमंत्री नीतीष कुमार ने आज राजवंषी नगर स्थित लोकनायक जयप्रकाष नारायण सुपर स्पेषयलिटी अस्पताल के भवन निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देष दिया कि इस 400 बेड के हड्डी रोग के अति विषिष्ट अस्पताल भवन के निर्माण कार्य को तेजी से पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि हमलोगों का उद्देष्य है कि मरीजों को एक ही छत के नीचे व्यापक और इलाज की अत्याधुनिक सुविधायें उपलब्ध हो। इसी के तहत लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल, राजवंशी नगर, पटना को हड्डी रोग के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किया गया है और इस अति विषिष्ट अस्पताल का नया भवन बनाया जा रहा है। यहां हड्डी रोग से संबंधित बीमारियों के इलाज की आधुनिक सुविधाओं से युक्त बेहतर व्यवस्था की गयी है। मुख्यमंत्री ने लोकनायक जयप्रकाष नारायण अस्पताल का भी निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली। वहां उपस्थित मरीजों एवं उनके अभिभावकों से स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों निर्देष दिया कि मरीजों का इलाज बेहतर ढंग से हो, इसमें किसी प्रकार की कोताही न हो। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2012 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल, राजवंशीनगर, पटना को हड्डी रोग के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने की घोषणा की गयी थी, जहां पर हड्डी रोग से संबंधित सभी प्रकार के इलाज की अच्छी व्यवस्था रहे। इसके आलोक में इस अस्पताल परिसर में ही 215 करोड़ रुपये की लागत से 400 बेड के अति विशिष्ट अस्पताल भवन के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गयी। इस 6 मंजिला अस्पताल भवन का निर्माण कार्य जारी है जो मार्च 2026 तक पूरा हो जाएगा। इसमें 250 वाहनों के पार्किंग, 6 लिफ्ट, 6 ऑपरेशन थियेटर, 42 आई0सी0यू0 बेड, 15 प्राइवेट वार्ड इत्यादि की व्यवस्था है। इस अति विशिष्ट अस्पताल में समुचित इलाज के लिए 66 चिकित्सकों सहित कुल 140 पदों का सृजन किया गया है। इस अति विशिष्ट अस्पताल के शुरू हो जाने से हड्डी रोग के मरीजों को काफी फायदा होगा। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेष कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के सचिव डाॅ. चन्द्रषेखर सिंह, जिलाधिकारी डाॅ. त्यागराजन एस0एम0 सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।    

जदयू में बड़ा कड़ा कदम, पार्टी से बाहर किए गए आठ नेता

पूर्णिया बिहार विधानसभा चुनाव में भीतरघात और गठबंधन विरोधी गतिविधियों को लेकर जदयू नेतृत्व ने पूर्णिया जिले में कड़ा अनुशासनात्मक हंटर चलाया है। पार्टी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो पूर्व जिला अध्यक्षों सहित कुल आठ पदाधिकारियों को पदमुक्त कर छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इस कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला नाम दो कद्दावर नेताओं का है, जिन्होंने संगठन में लंबे समय तक जिला कमान संभाली थी। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के निर्देश पर पार्टी ने संगठन की मजबूती और अनुशासन को सर्वोपरि रखते हुए यह फैसला लिया है। इन नेताओं पर गिरी गाज प्रदेश अध्यक्ष ने राकेश कुमार (पूर्व जिला अध्यक्ष), सचिन मेहता (पूर्व जिला अध्यक्ष युवा जदयू, नीलू सिंह पटेल (प्रदेश सचिव) आजाद (प्रदेश महासचिव, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ), पूरन सिंह पटेल (जिला महासचिव) और इसके साथ ही रितेश आनंद (कसबा), मनोज कुमार दर्वे (डगरूआ) और मीडिया संयोजक प्रदीप कुमार मेहता पर भी निष्कासन की गाज गिरी है। रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद कार्रवाई पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा चुनाव के दौरान इन नेताओं द्वारा गठबंधन के प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचाने की गुप्त शिकायतें मिली थीं। मुख्यालय प्रभारी अनिल कुमार द्वारा जारी पत्र के अनुसार, एक तीन सदस्यीय विशेष जांच दल ने इन शिकायतों की जमीनी स्तर पर पड़ताल की। जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद ही इन दिग्गज नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को जदयू की क्लीनअप ड्राइव के रूप में देखा जा रहा है। दो पूर्व जिला अध्यक्षों पर कार्रवाई कर नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा।