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जदयू में हलचल: Nitish Kumar ने सांसद Girdhari Yadav पर की कार्रवाई

पटना जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी ने बांका से सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ कथित दल-विरोधी गतिविधियों को लेकर लोकसभा अध्यक्ष को अयोग्यता का नोटिस सौंपा है। बताया जा रहा है कि लोकसभा में जदयू के नेता दिलेश्वर कामत ने स्पीकर को पत्र लिखकर गिरधारी यादव की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। आरोप है कि उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ गतिविधियां की हैं। चुनाव के वक्त पार्टी विरोधि गतिविधियों में शामिल रहे। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए गिरधारी यादव ने कहा कि जब मुझसे लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इस संबंध में पूछा जाएगा, तब मैं अपना जवाब दूंगा। मुझे नहीं पता कि दिलेश्वर कामत ने क्या कहा है। मेरे खिलाफ किसी भी तरह की दल-विरोधी गतिविधि का कोई रिकॉर्ड नहीं है। दरअसल, विधानसभा चुनाव के वक्त गिरधारी यादव का बेटा चाणक्य प्रकाश राजद में शामिल हो गए। उन्होंने बेलहर सीट से जदयू प्रत्याशी और विधायक मनोज यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसमें चाणक्य की हार हुई थी। इसके बाद से ही गिरधारी यादव पर सवाल उठने लगे थे। ललन बोले- यह फैसला हमने नहीं लिया इस विवाद पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने कहा कि यह फैसला हमने नहीं लिया है। यह निर्णय उन लोगों की ओर से लिया गया है, जिन्होंने अपने बेटे को विधानसभा चुनाव में आरजेडी के टिकट पर उतारा और खुद उसके लिए प्रचार भी किया। इसी आधार पर हमारे संसदीय नेता दिलेश्वर कामैत ने आवेदन दिया है। अब इस पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष को लेना है। राजद सांसद ने उठाया सवाल राजद सांसद मीसा भारती ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गिरधारी यादव जदयू के सांसद हैं। अगर उनके बेटे ने चुनाव लड़ा है, तो वह वयस्क है और अपने फैसले खुद ले सकता है। ऐसे में इस आधार पर कार्रवाई करना सही नहीं है। अब देखना होगा कि आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

जदयू में बड़ा कड़ा कदम, पार्टी से बाहर किए गए आठ नेता

पूर्णिया बिहार विधानसभा चुनाव में भीतरघात और गठबंधन विरोधी गतिविधियों को लेकर जदयू नेतृत्व ने पूर्णिया जिले में कड़ा अनुशासनात्मक हंटर चलाया है। पार्टी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो पूर्व जिला अध्यक्षों सहित कुल आठ पदाधिकारियों को पदमुक्त कर छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इस कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला नाम दो कद्दावर नेताओं का है, जिन्होंने संगठन में लंबे समय तक जिला कमान संभाली थी। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के निर्देश पर पार्टी ने संगठन की मजबूती और अनुशासन को सर्वोपरि रखते हुए यह फैसला लिया है। इन नेताओं पर गिरी गाज प्रदेश अध्यक्ष ने राकेश कुमार (पूर्व जिला अध्यक्ष), सचिन मेहता (पूर्व जिला अध्यक्ष युवा जदयू, नीलू सिंह पटेल (प्रदेश सचिव) आजाद (प्रदेश महासचिव, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ), पूरन सिंह पटेल (जिला महासचिव) और इसके साथ ही रितेश आनंद (कसबा), मनोज कुमार दर्वे (डगरूआ) और मीडिया संयोजक प्रदीप कुमार मेहता पर भी निष्कासन की गाज गिरी है। रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद कार्रवाई पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा चुनाव के दौरान इन नेताओं द्वारा गठबंधन के प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचाने की गुप्त शिकायतें मिली थीं। मुख्यालय प्रभारी अनिल कुमार द्वारा जारी पत्र के अनुसार, एक तीन सदस्यीय विशेष जांच दल ने इन शिकायतों की जमीनी स्तर पर पड़ताल की। जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद ही इन दिग्गज नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को जदयू की क्लीनअप ड्राइव के रूप में देखा जा रहा है। दो पूर्व जिला अध्यक्षों पर कार्रवाई कर नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा।

बिना आवंटी के खाली सरकारी बंगले पर जेडीयू का सवाल, सरकार से सख्त निगरानी की अपील

पटना अभी हाल ही में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पटना स्थित अपने आवास को खाली किया था। पटना स्थित 10 सर्कुलर स्थित सरकारी बंगले को खाली करने के बाद इसपर विवाद भी लगातार हो रहा है। अब जनता दल (यूनाइटेड) ने सवाल उठाया है कि आखिर रात के वक्त आवास को किसके आदेश से खाली किया गया? JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने भवन निर्माण विभाग को लिखे खत में अनुरोध किया है कि वहां पहले से लगे पंखे, कोड टोंटी समेत इत्यादि अन्य सामानों की निगरानी करवाई जाए। JDU प्र्वक्ता की तरफ से जो चिट्ठी भवन निर्माण विभाग को लिखी गई है उसमें कहा गया है कि मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, राबड़ी देवी के आवास को उनके परिवार की अनुपस्थिति में खाली किया गया था। रात के वक्त लालू-राबड़ी की गैरहाजिरी में पिकअप वैन के जरिए आवास से गमले और पौधे बाहर ले जाए जा रहे थे। खत में आगे लिखा गया है कि भवन निर्माण विभाग यह स्पष्ट करे कि आवास परिसर में लगे गमले और पौधे उद्यान विभाग की संपत्ति हैं अथना निजी। यह भी लिखा गया है की गई है कि विभाग यह बताए कि राबड़ी देवी और उनके परिवार की अनुपस्थिति में पिकअप वैन को परिसर के अंदर जाने की अनुमति किसने दी थी। जदयू प्रवक्ता ने राबड़ी आवास में रखे कई सामानों का जिक्र भी अपने खत में करते हुए कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पंखा, एसी, बाथरूम फिटिंग, टोंटी, गीजर, शौचालय में लगा कमोड, खिड़की-दरवाजे के पर्दे सहित अन्य सभी सरकारी सामान पूरी तरह से सुरक्षित हों। नीरज कुमार ने एक्स पर यह खत और अपना वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में उन्होने कहा है कि भवन निर्माण मंत्री को हमने पत्र लिखकर यह अनुरोध किया है कि साल 2006 से पटना में बड़ा भू-भाग, मकान रहने के बावजूद राबड़ी देवी का परिवार 10 सर्कुलर रोड में रहता है। ऐसी स्थिति में उनको कैबिनेट मंत्री का दर्ज प्राप्त है। तो भवन निर्माण विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री की पूरी जानकारी है लिहाजा यह सभी सामान विभाग के सुपुर्द किए जाएं। पंखा, एसी, फर्नीजर, इत्यादि सामग्रियां पूर्णत: सुरक्षित तथा अपने पुराने स्थान पर उपलब्ध हों यह राबड़ी देवी की जिम्मेदारी बनती है। भवन निर्माण विभाग से आग्रह है कि सम्पूर्ण प्रक्रिया की विधिवत निगरानी कराई जाए। बता दें कि बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने 25 नवंबर 2025 को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला खाली करने का नोटिस दिया था। इसके बाद पटना के हार्डिंग रोड स्थित 39 नंबर का नया सरकारी बंगला राबड़ी देवी के नाम आवंटित किया गया है। यह आवास उन्हें विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के पद के आधार पर केंद्रीय पूल से दिया गया है।  

नीतीश कुमार को जदयू विधायक दल की कमान, भाजपा ने सम्राट चौधरी को बनाया नेता—विजय सिन्हा उपनेता

पटना जनता दल यूनाईटेड के नवनिर्वाचित विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को फिर से अपना नेता चुन लिया है। बुधवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री आवास में जदयू के विधायक दल की बैठक हुई। साढ़े 11 बजे जदयू के विधायकों ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुन लिया है। जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि बिहार की जनता उत्साहित है, उन्होंने नीतीश कुमार अपना नेता चुना है। मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी की पहली और अंतिम पसंद नीतीश कुमार ही हैं। नई सरकार में मंत्री बनाए जाने के सवाल पर रजक ने कहा कि इसका फैसला नीतीश कुमार करेंगे। विधायक दल की बैठक से पहले जदयू विधायक मनोरमा देवी ने कहा कि यह बिहार के लिए बहुत अच्छा दिन है। हमारे अभिभावक नीतीश कुमार जी हैं और वह सभी के कल्याण के लिए काम करेंगे। इधर, भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की बैठक पार्टी कार्यालय में हो रही है। भाजपा के विधायकों ने सम्राट चौधरी के विधायक दल का नेता चुन लिया है। यानी वह डिप्टी सीएम बनेंगे। वहीं विजय सिन्हा को उपनेता चुना गया है। वह भी दूसरे डिप्टी सीएम बन सकते हैं। लेकिन, दूसरे डिप्टी सीएम पद के लिए फिलहाल मंथन जारी है। भाजपा दोनों डिप्टी सीएम का पद अपने पास रखना चाहती है। इधर, 19 सीट लाने वाली चिराग पासवान की पार्टी एक डिप्टी सीएम समेत तीन मंत्री का पद चाहती है। इस मुद्दे पर भी बातचीत चल रही है। दोपहर 3.30 बजे विधानसभा के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक होगी। इसमें भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाईटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा, लोक जनशक्ति पार्टी के सभी नव निर्वाचित विधायक और नीतीश कुमार, चिराग पासवान, संतोष सुमन, उपेंद्र कुशवाहा, सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा मौजूद रहेंगे। इधर, कुछ ही देर में गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचेंगे। वह भारतीय जनता पार्टी की बैठक में शामिल होंगे।

भाजपा-झेडीयू के बीच स्पीकर पद की जंग, दिल्ली पहुंचे ललन सिंह और संजय झा

नई दिल्ली बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की कवायद चल रही है. मंगलवार को जेडीयू और भाजपा दोनों दलों के विधायक दलों की बैठक होने वाली है. इन बैठकों में दोनों दल अपने-अपने विधायक दल के नेता का चुनाव करेंगे. इस बीच मंत्रिमंडल के स्वरूप और मंत्री पद को लेकर दोनों दलों के बीच चर्चा चल रही है. अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दल बिहार सरकार में बराबर मंत्री पद लेंगे. इस बीच सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि दोनों दल विधानसभा अध्यक्ष पद चाहते हैं. इसी के मद्देनजर जेडीयू-बीजेपी के शीर्ष नेता आज दिल्ली में मीटिंग करेंगे. जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और जेडीयू कोटे के केंद्रीय मंत्री ललन सिंह बीती रात पटना से दिल्ली रवाना हुए थे. मंगलवार को ये दोनों नेता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर सकते हैं. स्पीकर के अलावा सरकार में महत्वपूर्ण विभागों को लेकर भी दोनों दलों की ओर से दावेदारी चल रही है. बीजेपी हर हाल में स्पीकर का पद अपने पास रखना चाहती है. सोमवार देर रात तक पटना में प्रदेश बीजेपी के नेताओं ने इस पर चर्चा की थी. इसके अलावा चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा से बातचीत का जिम्मा धर्मेंद्र प्रधान संभाल रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों सहयोगी दलों के साथ सरकार गठन को लेकर सहमति बन चुकी है. छोटे दलों से बात कर रहे हैं धर्मेंद्र प्रधान इस बीच बुधवार 19 नवंबर को बीजेपी और जेडीयू विधानमंडल दल की अलग–अलग बैठकें बुलाई गई हैं. दोनों दलों की बैठक के बाद एनडीए विधानमंडल दल की बैठक भी 19 नवंबर को होगी. 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह होगा. मौजूदा विधानसभा में तीन बार स्पीकर बदल चुके हैं. फिलहाल यह पद भाजपा के नंदकिशोर यादव के पास है. इससे पहले जेडीयू और राजद के बीच गठबंधन के वक्त स्पीकर पद राजद के अवध बिहारी चौधरी के पास था. उससे पहले भाजपा के विजय सिन्हा विधानसभा अध्यक्ष थे. हालांकि, इससे पहले यानी 2020 से पहले नीतीश कुमार की जेडीयू ने हमेशा अपने पास विधानसभा अध्यक्ष का पद रखा. विधायकों की अदला-बदली या फिर कमजोर बहुमत वाली सरकार होने की स्थिति में विधानसभा अध्यक्ष का पद राजनीतिक रूप से काफी अहम हो जाता है. वैसे एक मजबूत सरकार होने की स्थिति में इस पद को पार्टियां अपने किसी वरिष्ठ नेता को समायोजित करने का जरिया मानती हैं.  

बीजेपी और जेडीयू में मंत्रिपद साझा करने को लेकर चर्चा, पुराने फार्मूले को किया जाएगा बदल

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। चुनाव से पहले बीजेपी और जेडीयू ने बराबर सीटों (101) पर अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला किया था। ऐसे में दोनों ही दलों को बराबर मंत्रिपद भी मिल सकते हैं। सरकार गठन के फार्मूले पर बात करें तो चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को दो मंत्रिपद और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को 01 वह उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा पार्टी को एक मंत्रिपद दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि एनडीए के घटक दलों के बीच सरकार बनाने को लेकर बातचीत चल रही है और कई पहले के मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदलने पर भी विचार हो रहा है।  सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को बीजेपी के विधायक दल की बैठक संभावित है। बता दें कि 243 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने अकेले 89 सीटें जीती हैं। दूसरे नंबर पर जेडीयू के खाते में 85 सीटें गई हैं। एलजेपी (आरवी) को 19, HAM (S) को पांच और आरएमएम को चार सीटें मिली हैं। 2020 की बात करें तो बीजेपी को 74 सीटें मिली थीं और जेडीयूके पास 43 सीटें थीं। वहीं सरकार में बीजेपी के 22 और जेडीयू के 12 मंत्री थे। बता दें कि बिहार की मौजूदा विधानसबा का कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है। ऐसे मे बुधवार या फिर गुरुवार को ही शपथ ग्रहण हो सकता है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को बिहार चुनाव परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और महासचिव बीएल संतोष के बीच संक्षिप्त बैठक हुई थी जिसमें सरकार बनाने पर चर्चा की गई थी। जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। वहीं उपमुख्यमंत्रियों को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है। मौजूदा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भ्रष्टाचारा के आरोपों और फिर नामांकन पेपर में गड़बड़ी के बाद सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा या नहीं, इसपर अभी असमंजस की स्थिति है। बता दें कि गांधी मैदान में बिहार की नई सरकार का शपथ ग्रहण कार्यक्रम हो सकता है। 2015 में नीतीश कुमार ने गांधी मैदान में ही शपथ ली थी। 17 से 20 नवंबर तक गांधी मैदान को आम लोगों के लिए बंद किया गया है। माना जा रहा है कि गांधी मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा शपथ ग्रहण के लिए भव्य मंच तैयार किया जाएगा।

RJD में शामिल हुआ JDU का दिग्गज नेता, नीतीश कुमार की मुश्किलें बढ़ीं

छपरा बिहार में जैसे-जैसे चुनाव  नजदीक आ रहे हैं, विभिन्न दलों में नेताओं का आना-जाना जारी है। राजनीतिक गतिविधियों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू  को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, जनता दल (यूनाइटेड) के निवर्तमान जिलाध्यक्ष और मढौरा से पूर्व प्रत्याशी अल्ताफ आलम राजू .ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दामन थाम लिया है। शनिवार को पटना में तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर आयोजित कार्यक्रम में अल्ताफ आलम राजू ने राजद की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर मढौरा के विधायक और पूर्व मंत्री जितेंद्र यादव भी मौजूद रहे। अल्ताफ आलम राजू वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में मढौरा सीट से जदयू के प्रत्याशी रह चुके हैं। इस बार एनडीए गठबंधन में सीट बंटवारे के दौरान मढौरा सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खाते में चली गई और अभिनेत्री सीमा सिंह को उम्मीदवार बनाया गया। इस फैसले से नाराज होकर अल्ताफ आलम राजू ने पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) के दौरान लोजपा उम्मीदवार सीमा सिंह और अल्ताफ आलम राजू दोनों के नामांकन रद्द कर दिए गए थे। राजद को मिला मढौरा में मजबूत चेहरा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मढौरा क्षेत्र में अल्ताफ आलम राजू की पकड़ मजबूत है, जिससे राजद को स्थानीय स्तर पर लाभ मिल सकता है।  

नीतीश का सीधा वार चिराग पर, JDU की पहली लिस्ट में उठा सियासी खेल; NDA में खलबली?

पटना बिहार की राजनीति में आज नई हलचल देखी गई जब नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) ने विधानसभा चुनाव 2025 के लिए पहली 57 उम्मीदवारों की सूची जारी की। इस सूची ने चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कुछ प्रमुख दावों पर सीधे चुनौती दी, जिससे गठबंधन के भीतर तनाव और नाराजगी की स्थिति बन सकती है। चिराग पासवान के लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पांच प्रमुख दावों वाली सीटों – मोरवा, सोनबरसा, राजगीर, गायघाट और मटिहानी पर जेडीयू ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। ऐसा बताया जा रहा था कि ये सीटें पहले चिराग की झोली में जाने वाली थीं। एनडीए में बढ़ेगा तनाव? पिछले चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि मोरवा और गायघाट पर 2020 में आरजेडी का दबदबा था, राजगीर और सोनबरसा पर जेडीयू जीता था, जबकि मटिहानी पिछली बार लोक जनशक्ति पार्टी ने जीती थी, लेकिन विजयी राजकुमार सिंह बाद में जेडीयू में शामिल हो गए थे। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के चलते इन सीटों पर सियासी निगाहें खास हैं और उम्मीदवारों की हर चाल का चुनावी मायने बढ़ गया है। इन सीटों पर जेडीयू का उम्मीदवार उतारना गठबंधन में संतुलन बदल सकता है और चिराग समर्थक ताकतों के साथ टकराव के अवसर बढ़ा सकता है जिससे एनडीए की मौजूदा स्थिति जटिल हो सकती है। जेडीयू की लिस्ट में 3 बाहुबली भी शामिल जेडीयू के उम्मीदवारों की सूची में तीन बाहुबली और कई अनुभवी नेता शामिल हैं। विशेष रूप से, मौजूदा सरकार के पांच कैबिनेट मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों से फिर मैदान में उतारे गए हैं। इसमें ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार (नालंदा), जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी (सरायरंजन), सूचना व जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी (कल्याणपुर), समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी (बहादुरपुर) और मद्य निषेध मंत्री रत्नेश सदा (सोनबरसा) शामिल हैं। जेडीयू ने 30 नए चेहरों को उतारा गौरतलब है कि जेडीयू की पहली सूची में 30 नए चेहरे और 27 पुराने प्रत्याशी शामिल हैं। चार महिला उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारा गया है, जिनमें मधेपुरा से कविता साहा, गायघाट से कोमल सिंह, समस्तीपुर से अश्वमेध देवी और विभूतिपुर से रवीना कुशवाहा का नाम शामिल है।  

बिहार चुनाव 2025: जेडीयू की पहली सूची घोषित, 57 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपने 57 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने इन नामों का ऐलान किया। इस सूची पर अंतिम मुहर खुद जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने लगाई। पार्टी के अंदर कई दौर की चर्चाओं और मैराथन बैठकों के बाद उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पूरी की गई। जदयू ने इस बार भी भाजपा और अन्य एनडीए घटक दलों के साथ समन्वय पर खास ध्यान दिया है। एनडीए में हुए सीट बंटवारे के मुताबिक, जदयू 101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने वाली है। बाकी सीटों पर भाजपा और सहयोगी दलों के प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे।

मोकामा सीट से JDU उम्मीदवार बाहुबली अनंत सिंह ने नामांकन से पहले की पूजा

पटना बिहार चुनाव को लेकर हलचल काफी बढ़ी हुई है। इस बीच मोकामा के पूर्व विधायक और बाहुबली अनंत सिंह भगवान की शरण में नजर आए हैं। अनंत सिंह मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान पहले ही कर चुके हैं। एक दिलचस्प बात यह भी है कि अभी जनता दल यूनाइटेड ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान नहीं किया है। लेकिन अनंत सिंह को जदयू का सिम्बल मिला है। इस सीट पर नामांकन से पहले अनंत सिंह ने मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की है। मोकामा विधानसभा सीट अनंत सिंह की पारंपरिक सीट रही है। वो यहां से विधायक रह चुके हैं। इस सीट पर उनके नामांकन से पहले अनंत सिंह ने पूजा की है। जो तस्वीरें सामने आई हैं उसमें नजर आ रहा है कि अनंत सिंह के सैकड़ों समर्थक इस दौरान वहां मौजूद हैं। छोटे सरकार के नाम से चर्चित अनंत सिंह के आवास पर आज उनके समर्थकों के लिए विशेष तौर से खाने की भी व्यवस्था की गई है। जानकारी के मुताबिक, अनंत सिंह ने अपने समर्थकों से यह भी अपील की है कि नामांकन के दौरान भारी संख्या में वो इसमें शामिल हों। अनंत सिंह मोकामा से पांच बार विधायक रह चुके हैं। अनंत सिंह मीडिया से बातचीत में इस सीट पर एक बार फिर अपनी जीत को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रहे हैं। यहां आपको बता दें कि साल 2020 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह की पत्न नीलम देवी राजद के टिकट पर यहां से विधायक बनी थीं। हालांकि, 2024 में नीलम देवी ने एनडीए सरकार का समर्थन किया था। इस बार अनंत सिंह ने खुद यहां से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।