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JDU को झटका, वरिष्ठ नेता ने चुनाव से पहले RJD में की शामिल

पटना बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पाला बदलने का सिलसिला शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में जेडीयू को एक बड़ा झटका लगा है।  बिहार सरकार के पूर्व मंत्री लक्ष्मेश्वर राय ने जदयू से इस्तीफा देकर राजद का थामन लिया है। लक्ष्मेश्वर राय बिहार सरकार में आपदा प्रबंधन मंत्री रह चुके है। लक्ष्मेश्वर राय ने आज ही आरजेडी की सदस्यता ग्रहण की है। गौरतलब हो कि 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर लौकहा सीट से भाजपा प्रत्याशी प्रमोद प्रियदर्शी को हराया था। इसके बाद उन्हें बिहार सरकार में आपदा प्रबंधन मंत्री बनाया गया। बता दें कि कल 10 अक्टूबर से पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। गौरतलब है कि बिहार में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होना है। वहीं अभी भी महागठबंधन और एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर पेंच फंसा हुआ है।  

JDU में चुनावी तैयारियों का संकेत, नीतीश कुमार ने की वरिष्ठ नेताओं से चर्चा

पटना बिहार चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। सभी राजनीतिक दल चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। इस बीच जनता दल (यूनाइटेड) के बड़े नेताओं की एक अहम बैठक पटना में हो रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू नेताओं की यह बैठक बुलाई है। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा भी इस बैठक में शामिल हैं। एनडीए में अभी सीटों के बंटवारे का ऐलान नहीं हुआ है। सीट बंटवारे के ऐलान से पहले जदयू नेताओं की यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। चुनाव आयोग ने बिहार में दो चरणों 6 नवंबर और 11 नवंबर को मतदान कराने की बात कही है। वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता दल (यूनाइटेड) के शीर्ष नेताओं के साथ सीट बंटवारे के फॉर्मूले को लेकर चर्चा कर सकते हैं। जेडीयू की इस बैठक में संजय झा भी शामिल हैं। यह भी कहा जा रहा है कि इस बैठक में संगठनात्मक ढांचे और चुनाव प्रचार की रणनीति को लेकर भी नेताओं के बीच बातचीत होगी। एनडीए में शामिल घटक दलों के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला क्या होगा? अभी इसपर कुछ भी स्पष्ट नहीं है लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि जेडीयू इस बार 100 से 105 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। बीजेपी भी इतनी ही सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। बता दें कि साल 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने 115 तथा भारतीय जनता पार्टी ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उम्मीदवारों के चयन पर भी चर्चा संभव जदयू की इस बैठक में पार्टी नेता बिहार चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के नाम पर भी गहन विचार-विमर्श कर सकते हैं। चर्चा है कि इस बैठक में उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लग सकती है। आपको बता दें कि हाल ही में जनसुराज पार्टी ने बिहार चुनाव के लिए अपने कुछ पार्टी प्रत्याशियों ने नामों का ऐलान किया था। जनसुराज की तरफ से कहा गया है कि 9 अक्टूबर को पार्टी उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करेगी। प्रशांत किशोर ने खुद कहा है कि इस लिस्ट में उनका भी नाम होगा। हालांकि, वो किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे अभी सामने नहीं आया है। यह भी बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा में बाद NDA में सीट शेयरिंग को लेकर जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने हाल ही में दावा किया था कि सब कुछ फाइनल हो गया है, जल्द ही घोषणा की जाएगी।

डॉ. संजीव कुमार का बड़ा फैसला: जदयू छोड़ राजद में शामिल, एनडीए को टक्कर

 खगड़िया विधानसभा चुनाव 2025 से दल बदल का खेल जारी है। एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जनार्दन यादव जनसुराज में शामिल हो गए थे। आज जनता दल यूनाइटेड के विधायक डॉ. संजीव कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल का दामन थाम लिया। वह पिछले कुछ महीनों से अपनी पार्टी से नाराज चल रहे थे। राजद के खगड़िया जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि गोगरी स्थित भगवान उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में डॉ. संजीव पार्टी में विधिवत शामिल हो गए। जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव ने बताया कि डॉ. संजीव अपने हजारों समर्थकों के साथ राजद की सदस्यता ग्रहण की। उनके आने से पार्टी को काफी मजबूती मिलगी। इधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. संजीव का एनडीए से मोहभंग होना पहले से तय था। एनडीए द्वारा आयोजित विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलनों से उनकी लगातार गैरमौजूदगी विशेषकर 27 सितंबर को परबत्ता सम्मेलन और 25 सितंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यक्रम से दूरी इस बदलाव के साफ संकेत थे। डॉ. संजीव कुमार अपनी बेबाकी और मुद्दों पर स्पष्ट राय रखने के लिए जाने जाते हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा होते हुए भी उन्होंने कई बार किसानों के हक, जमीन विवाद और निर्माण परियोजनाओं में गड़बड़ियों को लेकर अपनी ही सरकार की आलोचना की है। राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो डॉ. संजीव पूर्व मंत्री और पांच बार के विधायक डॉ. आरएन सिंह के पुत्र हैं, जिनकी पहचान जदयू के मजबूत स्तंभ के तौर पर थी। ऐसे में अगर डॉ. संजीव राजद में शामिल होते हैं, तो यह जदयू के लिए बड़ा झटका होगा और राजद के लिए परबत्ता तथा खगड़िया जिले में नई राजनीतिक संभावनाओं के द्वार खोल देगा।

डॉ. संजीव के बाद जदयू में उठी सियासी हलचल, एक और MLA पर शक

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले बिहार में राजनीति का बड़ा 'खेला' शुक्रवार को हो रहा है। कई 'पूर्व' और 'दिग्गज' पार्टियां बदल चुके हैं, लेकिन चुनावी साल में किसी चर्चित मौजूदा विधायक का पार्टी-बदल पहली बार हो रहा है। खगड़िया के परबत्ता से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड के विधायक डॉ. संजीव कुमार 'आखिरकार' राष्ट्रीय जनता दल में जा रहे हैं। आखिरकार इसलिए, क्योंकि वह फरवरी 2024 से अब तक कभी भी जा सकते थे, लेकिन अब जा रहे हैं। फरवरी 2024 में बिहार विधानसभा के फ्लोर टेस्ट के समय से कई विधायक जदयू छोड़ने वाले थे, लेकिन डॉ. संजीव के बाद अब उनमें से एक और MLA को लेकर पार्टी अपना मन मजबूत कर चुकी है। फ्लोर टेस्ट के समय हुए 'खेला' का प्रभाव आज तक बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले अब जो हो रहा है, उसकी नींव 11 फरवरी 2024 को पड़ गई थी। 12 फरवरी को फ्लोर टेस्ट होने से एक दिन पहले मंत्री विजय चौधरी के आवास पर जदयू विधायकों की मीटिंग में छह विधायक नहीं पहुंचे थे- पूर्णिया के रूपौली से बीमा भारती, पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह, सीतामढ़ी के सुरसंड से दिलीप राय, शेखपुरा के बरबीघा से सुदर्शन कुमार, खगड़िया के परबत्ता से डॉ. संजीव कुमार, पूर्वी चंपारण के केसरिया से शालिनी मिश्रा। तब मंत्री विजय चौधरी ने कहा था कि सभी संपर्क में हैं और जरूरी कारणों से नहीं आए हैं। लेकिन, इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की देखरेख में तेजस्वी यादव के लिए खेला हो रहा था। फ्लोर टेस्ट में इसी खेला के कारण राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का नंबर 128 से घटकर 125 रहा था। 'अमर उजाला' ने तब सबसे पहले हॉर्स ट्रेडिंग की जानकारी सामने लायी थी। इस साल आर्थिक अपराध इकाई की जांच इस दिशा में आगे बढ़ चुकी है, हालांकि कुछ फाइनल नहीं सामने आया है। जहां तक फ्लोर टेस्ट का सवाल है तो उसका नुकसान ज्यादा विपक्षी महागठबंधन को ही हुआ था। नीतीश कुमार सरकार के फ्लोर टेस्ट के समय अंत में डॉ. संजीव कुमार विधानसभा पहुंच गए थे, लेकिन तब यह माना गया था कि वह राष्ट्रीय जनता दल के गेम-प्लान में शामिल थे। जब लाइव खबरों के जरिए यह पता चलने लगा कि राजद-कांग्रेस के ही कई विधायक टूटकर सत्ता पक्ष में खड़े हो गए हैं तो सरकार गिरने की आशंका नहीं, तब सत्ता पक्ष के कई गायब विधायक आननफानन में विधानसभा पहुंचे थे। उनमें डॉ. संजीव कुमार भी थे। इसके बाद लोकसभा चुनाव के समय भी डॉ. संजीव खगड़िया से राजग प्रत्याशी के खिलाफ लगातार मुखर रहे थे। खुद को लोकसभा प्रत्याशी तक बता दिया था। अब वह अंतत: राजद में औपचारिक रूप से जा रहे हैं। परबत्ता सीट पर उन्होंने राजद के दिगंबर प्रसाद तिवारी को 952 मतों से हराया था। डॉ. संजीव को राजद इसी सीट से प्रत्याशी बनाएगा। पार्टी में भी उन्हें पद दिए जाने की बात चल रही है। कौन पहले छोड़ गए, कौन टिकेंगे, किनपर खतरा है अब पूर्णिया से रूपौली की तत्कालीन विधायक बीमा भारती तो लोकसभा चुनाव के पहले जदयू छोड़ गईं। पूर्णिया से राजद के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़कर हारीं। फिर रूपौली के उप चुनाव में राजद के टिकट पर उतरीं तो तीसरे नंबर पर रह गईं। पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह राजद के कुछ नेताओं से सटे नजर आए थे, लेकिन बिहार चुनाव से पहले उन्होंने लालू प्रसाद की पार्टी के कई नेताओं को जदयू में लाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। शेखपुरा के बरबीघा से सुदर्शन कुमार ने पिछले दिनों सीएम नीतीश कुमार से मिलकर इस सीट को अपने लिए सुरक्षित कर लिया है। पूर्वी चंपारण के केसरिया से शालिनी मिश्रा फ्लोर टेस्ट के समय निजी काम से दिल्ली में थीं, यह उसी समय पार्टी नेतृत्व ने स्वीकार कर लिया था। वह लगातार पार्टी की तरफ से सक्रिय हैं। अब सीतामढ़ी के सुरसंड से दिलीप राय को लेकर संशय है। सीतामढ़ी में जदयू उन्हें पार्टी से बाहर मान चुका है। उन्हें पार्टी के औपचारिक कार्यक्रमों से दूर रखा जा रहा है। इंतजार इसी बात का हो रहा है कि कब वह छोड़कर जाएं।

सीट शेयरिंग पर सस्पेंस खत्म, JDU निभाएगी बिहार में बड़े भाई की भूमिका

  पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, एनडीए में सीट शेयरिंग फॉर्मूला लगभग तय है. कहा जा रहा है कि JDU 102 सीटों पर, भाजपा 101 और चिराग की पार्टी एलजेपी (आर) 20 (बाद में 1 एक एमएलसी , एक राज्यसभा मिल सकता है) सीटों पर चुनाव लड़ेगी, हम-RLM को 10-10 सीटें. मिल सकती हैं. कहा जा रहा है कि इसमें एक दो सीट घट या बढ़ सकता है कुछ सीटों की अदला बदली हो सकती हैं. हाल ही में मंत्री संतोष सुमन ने बयान दिया. उन्होंने कहा कि बस दस दिनों में सीटों का बंटवारा हो जाएगा. चिराग पासवान के सम्मानजनक सीटों की डिमांड और गठबंधन में रहने के सवाल पर कहा कि सबको सम्मानजनक सीटें मिलेंगी. किसी के नाराज होने की बात नहीं है. पटना में होने वाली कांग्रेस की बैठक पर संतोष सुमन ने कहा कि- कांग्रेस को समझ में आ गया है कि पिछलग्गू बनने से काम नहीं चलेगा. क्रेडिट मिलेगा तो एक ही पार्टी को मिलेगा. अगर चिंतन करने के बाद कांग्रेस को सद्बुद्धि आई है तो मैं उनका स्वागत करता हूं. कांग्रेस बहुत बड़ी पार्टी रही है और मुझे लगता है कि पहली बार उनकी बैठक हो रही है. उनके बड़े-बड़े नेता आएंगे. ज्यादा सीटों की डिमांड बता दें कि, बता दें कि, बीते दिनों केंद्रीय मंत्री और हम पार्टी मुखिया जीतनराम मांझी ने ज्यादा सीटों की डिमांड की थी. जिसमें उन्होंने हम पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी के रूप में रजिस्टर्ड कराने का हवाला देते हुए सीटों की मांग की थी. उनके साथ ही एनडीए के अन्य घटक दलों में भी सीटों की डिमांड को लेकर खींचतान थी. ऐसे में हर किसी की नजर सीटों के बंटवारे पर टिकी हुई है. जिस पर एनडीए जल्द ही औपचारिक घोषणा कर सकता है. पिछला चुनाव साल 2020 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल जेडीयू ने कुल 243 विधानसभा सीटों में 115 और बीजेपी ने 110 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. इस चुनाव में भी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की अहम भूमिका में थी. तब जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवामी मोर्चा (सेक्युलर) को सात सीटें मिली थी. बीजेपी के साथ गठबंधन में रही मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने 11 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे.