samacharsecretary.com

₹6000 करोड़ ड्रग्स केस के जांच अधिकारी रहे निरंजन सिंह की सियासी एंट्री

जालंधर एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) के पूर्व अधिकारी निरंजन सिंह आज पंजाब के खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होंगे। दोपहर 12 बजे वो चंडीगढ़ में पार्टी जॉइन करेंगे। निरंजन सिंह ने इसकी पुष्टि की।  उन्होंने अपने कार्यकाल में करीब 6 हजार करोड़ रुपए के चर्चित ड्रग केस की जांच की थी। इसी केस की जांच के दौरान उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से भी पूछताछ की थी। मजीठिया से पूछताछ के कुछ समय बाद निरंजन सिंह के ट्रांसफर को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। उन्होंने ट्रांसफर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती भी दी थी। वह जालंधर में ED ऑफिस में लंबे समय तक तैनात रहे। यहां से उन्होंने रिटायरमेंट ली। निरंजन सिंह की अहम बातें…     मेरे पास कोई और ऑप्शन नहीं थी: निरंजन कुमार ने कहा कि मेरे पास कोई और ऑप्शन नहीं थी। 10 साल पहले अकालियों की सरकार रही, उस वक्त भी लोगों को कोई रिलीफ नहीं मिला। उनसे भी पंजाब नहीं संभला। कैप्टन की सरकार आई लेकिन वह भी माफिया की सरकार थी। उन्होंने ड्रग वाले लोगों को प्रोटेक्ट किया।     सांसद अमृतपाल के पिता आए थे घर: उन्होंने कहा कि सभी सरकारें अपने वादे में फेल हुई हैं। सिर्फ नशा ही नहीं बल्कि करप्शन और लॉ एंड ऑर्डर का भी इश्यू है। अमृतपाल पर लगे आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा। कोर्ट फैसला करेगा। उन्होंने कहा कि सांसद अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह आज ही मेरे घर आए थे। उन्होंने मुझे अपने साथ आने की अपील की।     चुनाव लड़ने पर कहा- कोई विचार नहीं: निरंजन सिंह ने कहा कि अभी चुनाव लड़ने का मेरा कोई विचार नहीं है। अमृतपाल की कट्‌टरपंथी विचारों को लेकर उन्होंने कहा कि मैं कानून को मानने वाला हूं। पार्टी की विचारधारा भी कानून को मानने वाली है। कौन हैं निरंजन सिंह निरंजन सिंह ED के जालंधर ऑफिस में लंबे समय तक तैनात रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पंजाब से जुड़े कई मनी लॉन्ड्रिंग और FEMA मामलों की जांच की। 2013-14 के आसपास वह जगदीश सिंह भोला से जुड़े ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच से भी प्रमुख रूप से जुड़े रहे। 2016 में उन्हें असिस्टेंट डायरेक्टर से डिप्टी डायरेक्टर के पद पर पदोन्नत किया गया। 2018 में उन्होंने ED छोड़ने का फैसला किया, जबकि उस समय उनकी सेवानिवृत्ति में करीब तीन साल बाकी थे। बाद में वे 31 मई 2021 को औपचारिक रूप से सेवानिवृत्त हुए। राजा कंदोला से भोला ड्रग रैकेट तक जांच जानकारी के अनुसार, निरंजन सिंह ने 2012 में ड्रग तस्कर राजा कंदोला के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद 2013 में उन्होंने अनूप काहलों से जुड़े ड्रग मामले की जांच संभाली। आगे की जांच में यह मामला करीब 6,000 करोड़ रुपए के भोला ड्रग रैकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में तब्दील हो गया। ED ने 2013 में PMLA के तहत मामला दर्ज करके ड्रग कारोबार से कमाए पैसे, संपत्तियों और लेन-देन की जांच शुरू की। 2024 में इसी PMLA मामले की विशेष अदालत ने जगदीश सिंह भोला सहित 17 लोगों को दोषी ठहराया। निरंजन सिंह इस मामले में इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर (IO) रहे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 2013-14 से 2016 तक उन्होंने मामले की जांच की। बाद में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर पदोन्नति होने के बाद भी वह मामले की जांच की निगरानी करते रहे। 73 लोगों को चार्जशीट किया गया था निरंजन सिंह की जांच के दौरान 73 लोगों को चार्जशीट किया गया था। इनमें भोला के 11 परिवारजन भी शामिल थे। जांच के दौरान करीब 24 आरोपियों की 200 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां अटैच की गई थीं। 2024 में लंबे समय से चल रहे इस PMLA मामले में विशेष अदालत ने 23 आरोपियों में से 17 को दोषी ठहराया। ट्रायल के दौरान 4 आरोपियों की मौत हो गई, जबकि 2 को घोषित अपराधी यानी प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर घोषित किया गया। 2014 में बिक्रम मजीठिया से पूछताछ 26 दिसंबर 2014 को ED ने तत्कालीन पंजाब राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से भोला ड्रग-मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में जालंधर ऑफिस में पूछताछ की। पूछताछ में निरंजन सिंह के साथ ED के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। भोला ने मजीठिया का नाम लिया था। मजीठिया ने इन आरोपों से इनकार किया था। 2015 में कोलकाता ट्रांसफर विवाद 16 जनवरी 2015 को मजीठिया से पूछताछ के करीब तीन सप्ताह बाद ED ने निरंजन सिंह का जालंधर से कोलकाता ट्रांसफर कर दिया। उन्हें पश्चिम बंगाल के शारदा चिटफंड मामले में काम करने को कहा गया था। इसके बाद निरंजन सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी और दावा किया कि मजीठिया से पूछताछ करना ही उनके ट्रांसफर का कारण था। उनके वकील ने अदालत में यही तर्क रखा था। हाईकोर्ट का दखल और ट्रांसफर रद्द पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले में दखल दिया। कोर्ट में यह सवाल भी उठा कि जिस ड्रग केस की निगरानी अदालत कर रही थी, उस जांच के प्रमुख अधिकारी को अचानक बाहर कैसे भेजा जा सकता है। आखिरकार नवंबर 2015 में ED ने उनका ट्रांसफर रद्द कर दिया। ED के तत्कालीन निदेशक कर्नल सिंह ने पुष्टि की कि निरंजन सिंह जालंधर में रहकर ड्रग केस की जांच जारी रखेंगे। 2016 में मजीठिया को दोबारा समन निरंजन सिंह के अनुसार उन्होंने जांच छोड़ी नहीं। 2016 में उन्होंने मजीठिया को दोबारा समन किया। इस बार मजीठिया व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए और उन्होंने लिखित जवाब दिया। इसी साल निरंजन सिंह को असिस्टेंट डायरेक्टर से डिप्टी डायरेक्टर के पद पर पदोन्नत किया गया। पदोन्नति के बाद तकनीकी कारणों से उनके IO के रूप में काम करने की स्थिति बदली, क्योंकि ED में असिस्टेंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारी जांच अधिकारी होते हैं। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आगे की जांच असिस्टेंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारियों को दी गई, लेकिन निरंजन सिंह को मॉनिटरिंग रोल में रखा गया। 2017 में हाईकोर्ट ने ED को निर्देश दिया कि दो असिस्टेंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारियों के माध्यम से जांच आगे बढ़ाई जाए और निरंजन सिंह उसकी निगरानी करें। 2018 में निरंजन सिंह ने अदालत में कहा कि उन्होंने 2013 … Read more

उत्तर प्रदेश की सियासत में हर समीकरण बेअसर, अब सामने खड़ा सबसे बड़ा सवाल

हर समीकरण की सीमा लांघने वाला उत्तर प्रदेश का यक्ष प्रश्न लखनऊ  राजनीति में प्रायः चुनावी अंकगणित, जातिगत गोलबंदी, क्षेत्रीय समीकरण और घोषणापत्रों के बड़े-बड़े दावे ही जीत-हार का मुख्य आधार माने जाते हैं। चुनावी मंचों से गूंजने वाले नारों, रैलियों में उमड़ती भीड़ और मीडिया के विश्लेषकों की बहसों का अपना एक निश्चित गणितीय हिसाब होता है। परंतु इतिहास साक्षी है कि जब किसी राज्य के राजनीतिक क्षितिज पर कुछ ऐसी अभूतपूर्व संरचनाएं और सांस्कृतिक प्रतीक उभर आते हैं, तो उन्हें केवल आंकड़ों के पारंपरिक तराजू पर नहीं तौला जा सकता। उत्तर प्रदेश का आगामी चुनावी संग्राम जब-जब आकार लेगा, तब-तब एक मौलिक और यक्ष प्रश्न सतह पर आएगा—आखिर वह क्या है, जो इस विशाल प्रदेश में केवल योगी आदित्यनाथ कर सकते हैं, कोई अन्य राजनेता नहीं? पारंपरिक राजनीति के व्याकरण को चुनौती देती छवि उत्तर प्रदेश का राजनीतिक इतिहास गवाह रहा है कि यहां का जनादेश अधिकांशतः जातियों के जोड़-तोड़, कुनबे के हिसाब-किताब और सामाजिक ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द ही सिमटता रहा है। दशकों तक दलों ने केवल जातिगत जनगणना और क्षेत्रीय क्षत्रपों के गठजोड़ के आधार पर सरकारें बनाई और चलाई हैं। परंतु जब भगवा वस्त्रधारी गोरक्षपीठाधीश्वर सत्ता संभालते हैं तो राजनीति का यह पारंपरिक व्याकरण पूरी तरह बदलने लगता है। जिस व्यक्ति ने अपना व्यक्तिगत जीवन, कुनबा और पारिवारिक मोह से पूरी तरह ऊपर उठकर संन्यास का मार्ग चुना हो, उसकी सामाजिक और राजनीतिक छवि स्वतः ही जाति के संकीर्ण दायरों को लांघ जाती है। जब विपक्षी दल अलग-अलग जातियों और उप-जातियों का गणित साधने में व्यस्त होते हैं, तब योगी आदित्यनाथ एक सर्वव्यापी और व्यापक सांस्कृतिक पहचान खड़ी कर देते हैं। यह एक ऐसा मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक प्रभाव है, जिसे कोई भी पारंपरिक राजनेता अपनी अंतर्निहित जातिगत सीमाओं और पारिवारिक दायित्वों के कारण आसानी से नहीं दोहरा सकता। संन्यास और समर्पण की यह छवि उन्हें राजनीतिक जोड़-तोड़ से परे एक अलग ही आधार प्रदान करती है। शासन की "कठोर मुद्रा" और सुरक्षा का मनोवैज्ञानिक भाव उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक शब्दावली में अपराध के प्रति “जीरो टॉलरेंस” और “बुलडोजर कार्रवाई” केवल एक प्रशासनिक नीति का हिस्सा मात्र नहीं रही, बल्कि वह एक मजबूत राजनीतिक ब्रांड का रूप धारण कर चुकी है। अतीत के उस उत्तर प्रदेश को याद कीजिए, जहां कानून-व्यवस्था पर निरंतर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते थे, व्यापारी पलायन के लिए विवश थे और माफिया का अपना समानांतर शासन चलता था। उस पृष्ठभूमि के विपरीत, एक कठोर प्रशासक की भांति खड़े होकर अपराधियों और माफिया तंत्र के मन में कानून का भय पैदा करना, यह वह अभेद्य राजनीतिक पत्ता है, जिसे केवल योगी आदित्यनाथ ही पूर्ण नैतिक अधिकार के साथ खेल सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जब विपक्षी दल इस आक्रामक नीति की प्रक्रियागत और संवैधानिक आलोचना करते हैं, तो वे अनजाने में योगी की इसी “दृढ़ संकल्प और सख्त प्रशासक” वाली छवि को जनता के बीच और अधिक सशक्त बना देते हैं। जनता सुरक्षा के इस अहसास को किसी भी राजनीतिक तर्क से ऊपर रखती है। 'विकास' और 'विरासत' का अभूतपूर्व समन्वय भारतीय राजनीति में लंबे समय से दो स्पष्ट और परस्पर विरोधी धाराएं विद्यमान रही हैं। एक तरफ वे नेता रहे हैं जो केवल आधुनिकता, अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और आर्थिक विकास की बात करते थे, तो दूसरी तरफ वे जो केवल परंपरा, धर्म और सांस्कृतिक अस्मिता के पक्षधर थे। योगी आदित्यनाथ ने इन दो विपरीत धाराओं को एक ही धरातल पर लाकर खड़ा कर दिया है। उनके एक हाथ में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गंगा एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और डिफेंस कॉरिडोर का आधुनिक खाका है, तो दूसरे हाथ में भव्य अयोध्या का राम मंदिर, काशी का दिव्य विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन का कायाकल्प और महाकुंभ का अभूतपूर्व सांस्कृतिक वैभव है। वे “विरासत” को बिना किसी हिचकिचाहट के सार्वजनिक रूप से स्वीकारते हैं और उसे 'विकास' के आधुनिक पहियों पर आरूढ़ कर देते हैं। यह समन्वय किसी ऐसे राजनेता के लिए अत्यंत कठिन है, जिसे सांस्कृतिक प्रतीकों को छूने में राजनीतिक संकोच होता हो, धर्मनिरपेक्षता का आवरण या वोटबैंक खिसकने का भय सताता हो। सशक्तीकरण का नया मानक: आधी आबादी का अटूट विश्वास चुनावी बहसों में अक्सर मुफ़्त योजनाओं, वित्तीय रेवड़ियों और कैश ट्रांसफर के मुद्दे छाये रहते हैं। विभिन्न दल महिलाओं को आकर्षित करने के लिए कई तरह के आर्थिक वादे करते हैं। परंतु राज्य की “आधी आबादी”, यानी महिला मतदाताओं के लिए, वास्तविक और धरातलीय सशक्तीकरण का अर्थ क्या है? उत्तर प्रदेश के छोटे कस्बों, गांवों और सुदूर ग्रामीण अंचलों में शाम ढलने के बाद महिलाओं का निडर होकर बाहर निकलना, बेटियों का बिना किसी भय के स्कूल और कॉलेज जाना—यह वह प्रत्यक्ष अनुभूति है, जिसे योगी सरकार अपने सुशासन की सबसे बड़ी पूंजी मानती है। चुनावी मैदान में आर्थिक वादे तो कई दल कर सकते हैं, परंतु सार्वजनिक जीवन में निर्भयता और गरिमा का जो वातावरण महिलाओं के बीच स्थापित हुआ है, उस अटूट विश्वास को चुनौती देना किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए सहज नहीं होगा। सुरक्षा का यह अहसास महिलाओं को एक स्वतंत्र और निर्णायक वोटबैंक में बदल चुका है। निर्णायक नेतृत्व की विश्वसनीयता और भावी चुनौतियां अंततः, यह प्रश्न एकाधिकारी, स्वतंत्र और निर्णायक नेतृत्व की विश्वसनीयता का भी है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविध राज्य में जनता प्रायः एक ऐसे “मजबूत और सख्त” चेहरे को चुनना पसंद करती है, जिसकी कमान किसी गठबंधन के जोड़-तोड़, आंतरिक अंतर्विरोधों या किसी रिमोट कंट्रोल के हाथ में न दिखे। लगातार दो कार्यकाल के बाद भी, योगी आदित्यनाथ की पहचान एक ऐसे बेबाक प्रशासक की बनी हुई है, जो राज्य के हित में कड़े और अप्रिय फैसले लेने से भी पीछे नहीं हटता। फिर भी, राजनीति का एक अटल नियम यह भी है कि जीत का रथ कई पहियों पर चलता है। सरकार की सफल योजनाओं और उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना सरकार व संगठन का युद्धस्तर पर सक्रिय होना। अतीत की प्रतिष्ठा सफलता का दरवाजा अवश्य खोलती है, लेकिन भविष्य का भरोसा संस्थागत निरंतरता, व्यापक जन-संपर्क और जमीनी समाधानों पर टिकता है। 2027 के चुनाव का अंतिम फैसला कई वास्तविक और व्यावहारिक मानदंडों पर निर्भर करेगा। लेकिन, इतना तय है कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा मानक स्थापित कर दिया है, जो … Read more

सरकारी हवाई जहाज के इस्तेमाल पर उठे सवाल, ‘शास्त्री’ के सफर को लेकर बैज ने साधा निशाना

रायपुर  पं धीरेंद्र शास्त्री के सरकारी हवाई जहाज के निजी इस्तेमाल पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सरकार फिजूल खर्च कर बाबाओं को घूमा रही है. सरकारी हवाई जहाज हवाई टैक्सी बन चुका है. बैज ने पूछा कि सरकारी हवाई जहाज का उपयोग क्या किसी साधु संत के लिए करना चाहिए? ये भी बताया जाए सतना में कौन से कार्यक्रम में शामिल हुए थे. केवल चाय पी कर वह से वापिस आ गए? सरकारी हवाई जहाज को हवाई टैक्सी बना दिया है. रेल किराए की वृद्धि पर बैज ने कसा तंज रेल मंत्रालय द्वारा रेल किराया बढ़ाए जाने को लेकर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने तंज कसा है. कहा कि भारतीय रेलवे भगवन भरोसे है. 8 से 12 घण्टे ट्रेने लेट चल रही है. कोई सुविधा नहीं है फिर भी किराया बढ़ाया गया. सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी जनता की जेब को लूटने का काम कर रही है. किसानों के मुद्दे पर बैज मुखर किसानों के मुद्दे को लेकर एक बार फिर पीसीस चीफ दीपक बैज ने बीजेपी पर साधा निशाना है. उन्होंने कहा कि किसान परेशान है. डीएपी यूरिया की कमी और रकबा काटना जैसी परेशानियों से किसान जूझ रहे हैं. धान खरीदी नहीं हो पा रही है. मॉल तोड़फोड़ मामले पर सरकार मूकदर्शक बनी रही : बैज राजधानी के मैग्नेटो मॉल में तोड़फोड़ मामले में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के विरोध में बजरंग दल ने शनिवार को प्रदर्शन और चक्काजाम किया था. इस मामले पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म की आस्था को ठेस पहुचना गलत है. मैग्नेटो मॉल में तोड़ फोड़ हुई. सरकार को तत्काल FIR करनी थी. लेकिन वह इस बात को टालती रही. बजरंग दल ने पुरे राजधानी में उत्पात मचाया, सड़कों को जाम किया और सरकार मूकदर्शक बनी रही.

टीपू-अकबर से ‘ग्रेट’ हटाने पर सियासी घमासान, CM हिमंता का बयान सुर्खियों में

  एनसीईआरटी ने इतिहास के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। एनसीईआरटी ने बादशाह अकबर और टीपू सुल्तान  जैसे महत्वपूर्ण मुगल शासकों  के सामने से महान (ग्रेट) शब्द को हटा दिया है। यह फैसला लंबे समय से चल रही उस बहस को आगे बढ़ाता है, जिसमें भारतीय इतिहास को सही और संतुलित नजरिए से दिखाने की मांग की जा रही थी। एनसीईआरटी के इस फैसले का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) नेता सुनील आंबेकर और असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने स्वागत किया है। वहीं एनसीईआरटी के इस फैसले का विपक्ष ने विरोध किया है। हालांकि अभी ये सिर्फ दावा किया जा रहा है। एनसीईआरटी ने फिलहाल इसपर कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी खुशी जताते हुए कहा कि बहुत अच्छा हुआ है… मैंने अभी देखा नहीं है कि ऐसा हुआ। लेकिन अगर ये काम कर दिया गया है तो NCERT को मेरी ओर से धन्यवाद। आगे वह बोले- “टीपू-इपू को मारो एकदम, जहाँ भेजना है उधर भेज दो। समुद्र में फेंक दो। वहीं RSS नेता सुनील आंबेकर ने कहा कि कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में ये संशोधन अगले साल से लागू होंगे। इन बदलावों से नई पीढ़ी को इतिहास की पूरी सच्चाई बताने में मदद मिलेगी। RSS नेता ने साफ किया कि किसी भी ऐतिहासिक व्यक्ति को किताबों से पूरी तरह हटाया नहीं गया है। इसके बजाय उनके अच्छे और बुरे.. यानी सकारात्मक और क्रूर, दोनों कामों का सही मूल्यांकन पेश किया गया है।   इतिहास की किताबों में सकारात्मक बदलाव RSS नेता सुनील आंबेकर के दावे के अनुसार, NCERT की इतिहास की पाठ्यपुस्तकों से अब मुगल शासक अकबर और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के नाम के साथ जुड़े ‘महान’ जैसे विशेषण हटा दिए गए हैं। यह फैसला इस विचार पर आधारित है कि किसी भी शासक को ‘महान’ कहने से पहले उसके सभी तरह के कामों और भारतीय समाज पर पड़े उनके प्रभाव का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए। किस क्लास की किताबों में हुआ बदलाव? दावा किया गया है कि NCERT ने कुल 15 कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों में से 11 कक्षाओं की किताबों में ये सकारात्मक बदलाव लागू कर दिए हैं। कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में ये संशोधन अगले शैक्षणिक वर्ष से पूरी तरह से लागू किए जाएंगे। यह बदलाव धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है। इससे छात्रों और शिक्षकों को नए सिलेबस के साथ तालमेल बिठाने में आसानी होगी।

हलफनामे पर उठे सवाल: कसबा विधानसभा में नया राजनीतिक बवाल

पूर्णिया पूर्णिया जिले के 058-कसबा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी हलचल के बीच एनडीए उम्मीदवार और नव निर्वाचित विधायक नितेश कुमार सिंह के लिए नई मुश्किल खड़ी हो गई है। उनके चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर गलत या अधूरी जानकारी दिए जाने को लेकर एक गंभीर शिकायत दर्ज की गई है, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है। भूभूमि सुधार उप समाहर्ता सह 58-कसबा की निर्वाची पदाधिकारी प्रीति कुमारी ने शिकायत की गंभीरता को देखते हुए इसे तात्कालिक प्रभाव से उप निर्वाचन पदाधिकारी, पूर्णिया को विस्तृत जांच के लिए अग्रसारित कर दिया है। डीसीएलआर कार्यालय द्वारा 12 नवंबर को जारी पत्रांक-87 में उप निर्वाचन पदाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे शिकायत पर गहन जांच करते हुए निष्कर्ष के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस पूरे मामले पर विधायक नितेश कुमार सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें इस शिकायत की जानकारी नहीं थी। एक एप्लीकेशन आया जिसमें कहा गया कि कुछ डिटेल्स पर्याप्त नहीं हैं। हम अपने हलफनामे में दी गई सभी जानकारी पर पूरी तरह आश्वस्त हैं, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है।” यह शिकायत जिला अधिवक्ता संघ, पूर्णिया के अधिवक्ता अनिल कुमार झा द्वारा दर्ज कराई गई है। हालांकि शिकायत के विस्तृत बिंदु सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन पत्र के विषय से स्पष्ट होता है कि यह मामला नितेश कुमार सिंह के नामांकन के साथ संलग्न शपथ पत्र में दी गई सूचनाओं की सत्यता से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, जांच में हलफनामे में अंकित संपत्ति, देनदारियों या आपराधिक विवरण जैसी जानकारियों की सत्यता की पुष्टि की जाएगी। जांच रिपोर्ट के परिणाम का कसबा सीट की चुनावी राजनीति पर सीधा असर पड़ सकता है।

धान खरीदी विवाद गर्माया: डिप्टी CM साव ने कांग्रेस की समिति को लेकर साधा निशाना

रायपुर राज्य में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू हो चुकी है और इसके साथ ही राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। धान खरीदी प्रक्रिया को सुचारू रखने और किसानों की समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने एक राज्यस्तरीय निगरानी समिति गठित की है। इस फैसले को उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस पर किसानों को बोनस न देने, भुगतान में देरी करने और वादे पूरा न करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने बिहार चुनाव में कांग्रेस की हार का ज़िक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को ‘पनौती’ तक कह दिया। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस की निगरानी समिति बनाए जाने को लेकर कहा कि “कांग्रेस क्या निगरानी करेगी? वही कांग्रेस जिसने किसानों से बोनस का वादा किया था और कभी पूरा नहीं किया। किसानों को धान का पैसा चार-चार किस्तों में दिया गया। इनके वादों की विश्वसनीयता ही खत्म हो चुकी है।” साव ने बताया कि धान खरीदी के पहले दिन ही 20 हजार क्विंटल धान खरीदा गया है और सभी खरीद केंद्रों में पर्याप्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। बिहार चुनाव में कांग्रेस नेताओं की भूमिका पर भी सियासत अरुण साव यहीं नहीं रुके। उन्होंने बिहार चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी कटाक्ष करते हुए उन्हें ‘पनौती’ कहा। साव ने आरोप लगाया कि “जहां-जहां भूपेश बघेल प्रचार करने जाते हैं, वहां कांग्रेस की हार तय हो जाती है। बिहार में भी यही हुआ।” अरुण साव ने यह भी कहा कि “बिहार में जाकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नकारा नेताओं ने प्रचार किया था। जिन पर अपने राज्य में भरोसा नहीं, उन पर बिहार वाले कैसे भरोसा करेंगे? कांग्रेस के साथ सहयोगी दल भी डूब जाते हैं।” उन्होंने हाल ही में बेगूसराय में मछुआरा समुदाय से मुलाकात के दौरान राहुल गांधी के तालाब में कूदने वाले वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि “राहुल गांधी जहां डुबकी लगा दें, वहां से कांग्रेस का डूबना तय है।” साव ने यह भी दावा किया कि बिहार संगठन की मदद छत्तीसगढ़ BJP के नेताओं ने की, न कि कांग्रेस नेताओं ने जैसा कांग्रेस दावा कर रही है।

बिहार चुनाव परिणाम: डॉ. रमन सिंह ने कहा—नीतीश कुमार संभालेंगे नेतृत्व

रायपुर बिहार विधानसभा चुनाव में NDA को मिले जनादेश के बाद अब मुख्यमंत्री के शपथ और मंत्रिमंडल गठन की चर्चा तेज है. इस बीच छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्य योजना बनाकर काम किया है. बिहार में जंगल राज को खत्म कर लोगों के जीवन में परिवर्तन लाया है. बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है. बिहार चुनाव में भूपेश बघेल की भूमिका पर टिप्पणी बिहार चुनाव में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सीनियर ऑब्ज़र्वर बनाया गया था. उनके चुनावी प्रभाव को लेकर पूछे गए सवाल पर विधानसभा स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने कहा कि भूपेश बघेल को जब-जब जिम्मेदारी मिली है, तब सभी जानते हैं कि क्या होता है. नीतीश कुमार की ईमानदारी और उनके नीतियों की यह जीत है. 28 से 30 नवंबर तक डीजी कॉन्फ्रेंस डीजी कॉन्फ्रेंस को लेकर डॉ. रमन सिंह ने कहा कि डीजी कॉन्फ्रेंस में पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ अन्य राज्य के डीजी शामिल होंगे. नक्सल समस्या को लेकर एक निर्णायक दौर आया है. नक्सलवाद से देश आगे बढ़ चुका है. 2026 मार्च तक नक्सलवाद खात्मे की डेडलाइन तय हो चुकी है. शत प्रतिशत नक्सल समाप्ति करने में सफलता मिलेगी. 18 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के 18 नवंबर को बुलाए गए विशेष सत्र को लेकर जानकारी दी कि पुराने विधानसभा में एक दिन का सत्र होगा. जहां 25 साल बिताए उसका यह सत्र है. पुराने विधानसभा में सभी की यादें है. पुराने विधानसभा में यह अंतिम सत्र रहेगा. उन्होंने यह भी बताया कि शीतकालीन सत्र नए विधानसभा में आयोजित होगा.

धान खरीदी को लेकर राजनीति तेज: डिप्टी सीएम बोले—‘ठगने और लूटने वाली पार्टी कांग्रेस है’

रायपुर छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी की शुरुआत होने वाली है. लेकिन इसकी शुरुआत से पहले ही विपक्ष और सरकार के बीच सियासत तेज हो गई है. डिप्टी सीएम अरुण साव ने आज मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्व सीएम भूपेश बघेल के दावों को खारिज करते हुए जमकर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि “ठगने और लूटने वाली पार्टी कांग्रेस है. हमारी सरकार किसान हितैषी है और सभी वादों को पूरा कर रही है. बता दें, पूर्व सीएम बघेल ने धान खरीदी को लेकर दावा किया है कि धरातल पर धान खरीदी की कोई तैयारी नहीं है. इधर एग्री स्टैक पोर्टल में पंजीयन की दिक्कतों से पंजीयन के लिए 7 लाख किसान परेशान हैं. पंजीयन के लक्ष्य से ही समझ आ रहा है कि सरकार ही नहीं चाहती कि पूरे किसान धान बेचें, इसलिए पेचीदगियां पैदा की गई हैं. डिप्टी सीएम अरुण साव ने पूर्व सीएम बघेल के इस बयान का पलटवार करते हुए कहा कि “कांग्रेस ने बोनस देने का वादा किया था, लेकिन उसे 5 साल तक निभाया नहीं. किस्तों में पैसा दिया और चौथी किस्त में कटौती कर पैसा खा गई.” उन्होंने आगे कहा कि धान खरीदी निर्धारित तिथि पर सुचारू रूप से शुरू होगी, किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी. देर रात हुई मंत्रियों की बैठक भाजपा प्रदेश कार्यालय में बीती रात मंत्रियों की एक अहम बैठक बुलाई गई. बैठक को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी के कई कार्यक्रम लगातार जारी हैं और कार्यकर्ताओं व नेताओं का कार्यालय आना-जाना नियमित रूप से चलता रहता है. SIR पर कांग्रेस की निगरानी को लेकर कसा तंज इस बीच, SIR प्रक्रिया को लेकर आज कांग्रेस की निगरानी समिति की बैठक प्रस्तावित है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अरुण साव ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी को न संविधान पर भरोसा है, न संवैधानिक संस्थाओं पर. उनका भरोसा सिर्फ एक परिवार और उसके आदेशों पर है. SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है, पहले भी होती रही है. कांग्रेस अपने ही जनाधार पर सवाल उठा रही है.” उन्होंने आगे कहा- “कांग्रेस अब वोट चोरी, मतदाता सूची और EVM में गड़बड़ी जैसे मुद्दे उठाकर जनता को गुमराह कर रही है. कांग्रेस अब जनता से कट चुकी है, उसके अपने कार्यकर्ता भी उससे दूर जा रहे हैं,”

‘चुनाव आयोग BJP का पाप धो रहा’ — तेजस्वी का तीखा हमला, कहा बिहार बदलेगा अब की बार

पटना दूसरे चरण के मतदान से पहले तेजस्वी यादव ने एनडीए और डबल इंजन सरकार पर जोरदार हमला किया है। सोमवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चुनाव प्रचार समाप्त हो गया। कल दूसरे चरण का मतदान होगा। हमने 171 जनसभा की। हर जगह लोगों में बदलाव का मूड दिखा। बेरोजगारी, पलायन से लोग परेशान हैं। 20 साल राज करने पर भी एनडीए ने बिहार को अंतिम पायदान पर कर दिया। अब बिहार के लोगों को बिहार में ही सुविधा चाहिए। कोई छठ और दीपावली में ही घर न आये, हमेशा साथ रहे। उन्होंने नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी पर बिहार की जनता को पीछे रखने का आरोप लगाया और कहा कि 14 नवम्बर के बाद सब बदल जाएगा। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार इस बार इतिहास रचेंगे। कलम राज ला रहे हैं। विकसित राज्य बनेगा। बीस सालों में मुख्यमंत्री केवल सुर्खियों में रहे। लेकिन अब बिहार केवल सुर्खियों में नहीं रहेगा। पढ़ाई, दवाई, कमाई, सिंचाई की सुविधा होगी। दूसरे राज्य न जाना पड़े, ऐसा बिहार बनाएंगे। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी गंभार आरोप लगाया। कहा कि बीजेपी पाप करती है और इलेक्शन कमीशन उसे धोने का काम करता है। नाव आयोग पहले चरण के मतदान के 4 दिन बाद भी आंकड़े सार्वजनिक नहीं किये कि कितने महिला और पुरुषों ने मतदान किया। यह मजाक है। तकनीक के इस युग में ये हाल है। भाजपा के पाप को आयोग धो रहा है। आयोग मर चुका है। चुनाव आयोग बताए कि समस्तीपुर में इतनी वीवीपैट परचियां कहाँ से आई। कहा कि सत्ता में बैठे लोग घबराये हुए हैं। गृह मंत्री अमित शाह पटना में अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं। यह बता रहे हैं कि किन किन को उठाना है। जिला को रिटायर्ड अधिकारी निर्देश दे रहे हैं। लेकिन हमारी पैनी नजर है। तेजस्वी यादव ने का कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में उद्योग-धंधों की बात नहीं करते,बस नकारात्मक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी अपराधियों के साथ मंच साझा कर रहे हैं, जिनमें आनंद मोहन, अनंत सिंह और हुलास पांडे जैसे नाम शामिल हैं। ये लोग कोई संत हैं क्या। तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी में शामिल हो जाने पर किसी के भी सारे पाप धुल जाते हैं।  

सियासी भूचाल: BJP ने एक झटके में 4 नेताओं को दिखाया दरवाज़ा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) में अनुशासनहीनता का बम फट पड़ा है। पार्टी ने अपने चार वरिष्ठ नेताओं को निष्कासित कर यह साफ कर दिया है कि NDA के साझा उम्मीदवारों के खिलाफ जाने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। चुनावी मौसम में यह कार्रवाई बीजेपी के अंदर बढ़ती असंतोष की आवाज़ों को शांत करने की रणनीति मानी जा रही है। पार्टी लाइन से हटे, तो हुई कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, जिन चार नेताओं पर गाज गिरी है, उनमें वरुण सिंह, अनूप कुमार, पवन यादव और सूर्य भान सिंह शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये चारों नेता NDA समर्थित उम्मीदवारों के विरुद्ध अलग-अलग सीटों से स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर गए थे। पार्टी नेतृत्व ने इसे सीधी अवज्ञा मानते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। कहां-कहां से थे उम्मीदवार वरुण सिंह बहादुरगंज, अनूप कुमार गोपालगंज, पवन यादव कहलगांव और सूर्य भान सिंह बड़हरा विधानसभा सीट से चुनावी अखाड़े में थे। इन चारों पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी के फैसले और अनुशासन का उल्लंघन करते हुए गठबंधन के उम्मीदवारों के खिलाफ ताल ठोंकी। JDU ने भी की सख्ती इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यू) ने भी बागी सुर अपनाने वाले 16 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया था। पार्टी के प्रदेश महासचिव चंदन कुमार सिंह ने उनके निष्कासन की घोषणा की थी। JDU का कहना था कि गठबंधन के खिलाफ जाकर चुनाव लड़ना या संगठन को कमजोर करना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। कौन-कौन हुए बाहर जिन नेताओं पर कार्रवाई हुई, उनमें कई पूर्व विधायक, मंत्री और एमएलसी शामिल हैं — जैसे मुंगेर के पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, सीवान के श्याम बहादुर सिंह, भोजपुर के रणविजय सिंह, शेखपुरा के सुदर्शन कुमार, और गोपालपुर के विधायक नरेन्द्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल आदि। इन सभी को पार्टी से बाहर कर गठबंधन में एकता का संदेश देने की कोशिश की गई है। चुनावी रणनीति पर बड़ा असर बीजेपी और जेडीयू दोनों की यह सख्ती इस बात का संकेत है कि NDA इस बार बगावती सुरों को किसी भी कीमत पर दबाना चाहता है। अमित शाह के हालिया बिहार दौरे के बाद यह स्पष्ट है कि पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को मज़बूत करने और विरोधी खेमे को एकजुटता का संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है।