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भाजपा की चिंता: TMC नतीजों को नकार सकती है, चुनाव आयोग ने जताई तत्परता

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ रहे हैं। अब तक के रुझानों में भाजपा ने शतक जड़ दिया है और लगातार टीएमसी पर बढ़त बनाए हुए है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक भी भाजपा अब तक 171 सीटों पर बढ़त बना चुकी है, जबकि टीएमसी को 100 सीटों पर ही बढ़त है। ऐसी स्थिति में साफ माना जा रहा है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल कर लेगी। हालांकि आधिकारिक नतीजों के लिए इंतजार करना होगा, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल कर सकती है। इस बीच भाजपा ने नतीजे आने के बाद टीएमसी के रुख को लेकर भी चिंता जता दी है। खड़गपुर सदर सीट से भाजपा कैंडिडेट दिलीप घोष का कहना है कि टीएमसी की ओर से नतीजे मानने से इनकार किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज ही नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में हालात तब से ठीक हुए, जब चुनाव आयोग ने कमान संभाली। उन्होंने कहा कि बंगाल के हालात चिंताजनक ही रहे हैं और खूनखराबा होता रहा है, लेकिन इस बार इलेक्शन शांतिपूर्ण रहे हैं। आयोग ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए, जिससे गड़बड़ी नहीं हो सकी। किसी व्यक्ति का कत्ल नहीं हो पाया। बता दें कि 2021 के चुनाव में हिंसा काफी हुई थी। यहां तक कि भाजपा कार्यकर्ताओं में इसे लेकर असंतोष भी था। ऐसे में इस बार जिस तरह की सुरक्षा की गई, उससे भी माहौल बदला दिखा। दिलीप घोष ने कहा कि चुनाव का नतीजा तो तय है और अब सिर्फ औपचारिक घोषणा होनी है। उन्होंने कहा कि भाजपा कोशिश करेगी कि जनता ने जिस विश्वास के साथ मतदान किया है, उस पर खरा उतरा जाए। नई सरकार और बंगाल अब भारत के साथ आगे बढ़ेंगे, वे बांग्लादेश के साथ नहीं जाएंगे। जनता बदलाव चाहती है और उन्होंने भाजपा को अच्छी संख्या में सीटें देकर सरकार बनाने का मौका दिया है। घोष ने कहा कि बंगाल में कोई कानून नहीं चल रहा था। घोष बोले- चुनाव आयोग ने संभाली व्यवस्था तो संभले हालात उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले जब निर्वाचन आयोग ने व्यवस्था संभाली तो कानून व्यवस्था में सुधार आया। चुनाव शांतिपूर्ण हुए थे और अब काउंटिंग में भी बवाल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि अब नई सरकार भी इसी तरह से शपथ लेगी। घोष ने कहा कि पहले के चुनाव में गड़बड़ियां की जाती थीं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को घरों में ही बंद कर दिया जाता था। उन्हें 15 सालों तक वोटिंग करने से रोका गया। इस बार उन्हें चांस मिला तो उन्होंने बदलाव के लिए मतदान किया है।

चुनाव आयोग ने बंगाल के 8 हजार पोलिंग बूथों को किया सुपर सेंसेटिव घोषित, 135 दबंग गिरफ्तार

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होना है। 23 अप्रैल को पहले राउंड की वोटिंग होने जा रही है और 29 को दूसरे चरण में मतदान होगा। उससे पहले कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग पूरी तरह सख्त है। इस बीच बंगाल के कुल 8000 पोलिंग बूथ को आयोग ने सुपर सेंसेटिव घोषित किया है। ये उन इलाकों के ही बूथ हैं, जहां पहले चरण में ही मतदान होना है। इसका अर्थ है कि यहां हिंसा, बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा सकता है। चुनाव आयोग ने इस बीच 135 ऐसे लोगों को पकड़ा है, जो दबंग प्रवृत्ति के माने जाते हैं और उनका अराजकता फैलाने का इतिहास रहा है। चुनाव संपन्न होने तक इन लोगों को हिरासत में रखा जाएगा। पुलिस ने जिन 135 लोगों को उठाया है, उनमें से ज्यादातर मुर्शिदाबाद, मालदा, बलूरघाट, उत्तर और दक्षिण 24 परगना के रहने वाले हैं। दरअसल पहले के चुनावों में भी ऐसे करीब 200 स्थान हैं, जहां पहले हिंसा होती रही है। ऐसे में चुनाव ने इन इलाकों से जुड़े पोलिंग बूथ को सुपर सेंसेटिव की कैटिगरी में डाला है। फिलहाल चुनाव आयोग के निर्देश पर इन सभी इलाकों में डीएम और एसपी भी दौरे कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना की आशंका को टाला जा सके। इसके अलावा जनता के बीच साफ-सुथरे चुनाव होने और डर से परे रहने का भरोसा जगाया जा सके। प्रशासन का कहना है कि कई दबंगों ने तो एक नोटिस मिलते ही खुद सरेंडर कर दिया। कुछ लोगों को पकड़ना पड़ा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक बार फिर से कहा है कि हम बंगाल में भयमुक्त और अपराध मुक्त चुनाव कराएंगे। उनका कहना है कि इसके लिए हरसंभव तैयारी हमने की है। इस चुनाव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी चुनाव आयोग खूब सहारा ले रहा है। चुनाव में सुरक्षा के लिए AI का इस्तेमाल, गड़बड़ी पर करेगा अलर्ट बूथ के अंदर या फिर बाहर किसी तरह की गड़बड़ी होने पर यह सिस्टम तुरंत अलर्ट करेगा। इसके अलावा एक एआई से लैस कंट्रोल कमांड सेंटर भी बनाया जा रहा है। इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारी और राज्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तरों में भी कंट्रोल सेंटर होंगे। यहां से संबंधित जिलों की निगरानी की जाएगी। कुल मिलाकर निगरानी के लिए थ्री-टियर सिस्टम स्थापित किया जाएगा। बता दें कि चुनाव आयोग ने प्रदेश की कुल 55 विधानसभाओं को भी खर्च के लिहाज से संवेदनशील माना है। इन सीटों में ममता बनर्जी की भबानीपुर विधानसभा भी शामिल है। यहां से उन्हें भाजपा के सीनियर नेता शुभेंदु अधिकारी चुनौती दे रहे हैं।

SIR अभियान का असर: 12 राज्यों में 10% से ज्यादा मतदाता सूची से बाहर

नई दिल्ली भारतीय चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट से करीब 5.2 करोड़ अयोग्य मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं जो कि इन राज्यों के कुल मतदाताओं का लगभग 10.2 प्रतिशत है. आयोग का कहना है कि ये अभियान वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा और सटीक बनाने के उद्देश्य से चलाया गया, जिसमें अनुपस्थित, ट्रांसफर, मृत, डबल पंजीकृत और अन्य अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, ताकि फर्जी मतदान की गुंजाइश खत्म हो सके. आयोग ने बताया कि SIR का पहला चरण बिहार में शुरू किया गया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात और तमिलनाडु जैसे 11 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में एसआईआर अभियान शुरू किया गया था. अभियान के दौरान कुल 51 करोड़ मतदाताओं की जांच की गई, जिसमें से 10.2% नाम अनुपस्थित, मृत या फर्जी पाए जाने पर हटाए गए. आयोग ने ये कदम मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने के उद्देश्य से उठाया है. इस प्रक्रिया में अंदमान-निकोबार से लेकर केरल तक के चुनावी डेटा को खंगाला गया और लाखों नए नाम भी जोड़े गए. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कटे सबसे ज्याद नाम आंकड़ों के अनुसार, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे अधिक 16.6% नाम हटाए गए. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 13.2% और गुजरात में 13.1% नामों की छंटनी की गई है. छत्तीसगढ़ में भी 11.3% मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए. बंगाल में ये दर 10.9% रही, जहां न्यायिक प्रक्रिया के जरिए 27 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए. इन राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे जो या तो स्थायी रूप से ट्रांसफर हो चुके थे या उनकी मृत्यु हो चुकी थी. '6.5 करोड़ ने नहीं किया कभी मतदान' SIR अभियान के दौरान पाया गया कि 13 करोड़ लोग अपने पंजीकृत पतों पर अनुपस्थित थे, जबकि 3.1 करोड़ लोग दूसरे राज्यों में चले गए थे. इसके अलावा मतदाता सूची ने करीब 6.5 करोड़ ऐसे मतदाता थे, जिन्होंने कभी मतदान ही नहीं किया. इससे फर्जी वोटिंग की आशंका बनी रहती थी. लिहाजा उन्हें हटाने से एक शुद्ध और सटीक मतदाता सूची तैयार हुई है. अब इन 12 प्रदेशों में शुद्धिकरण के बाद कुल 45.8 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में क्रमशः 20.9% और 10% की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई है, जबकि पुडुचेरी में मतदाताओं की संख्या में 1% की शुद्ध गिरावट देखी गई है. मध्य प्रदेश में 5.7, राजस्थान में 5.4, केरल में 2.5 और लक्षद्वीप में 0.3% मतदाताओं की संख्या में कमी आई है. UP में जोड़े गए सबसे ज्यादा नाम आयोग ने बताया कि नाम हटाने के साथ-साथ निर्वाचन आयोग ने 2 करोड़ नए नाम मतदाता सूची में जोड़े भी हैं. जिसमें उत्तर प्रदेश 92.4 लाख नए मतदाताओं के साथ पहले स्थान पर है. यूपी के बाद तमिलनाडु में 35 लाख, केरल में 20.4 लाख और राजस्थान में 15.4 लाख नए नाम शामिल किए गए. मध्य प्रदेश में 12.9 लाख और गुजरात में 12 लाख से अधिक मतदाताओं ने फॉर्म 6 और फॉर्म 8 के जरिए अपना पंजीकरण कराया, जिससे सूची में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है.

राधा चरण साह के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर चुनाव का एलान, 14 मई को आएंगे नतीजे

 पटना   बिहार विधान परिषद की भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय सीट पर उपचुनाव का बिगुल बज गया है. इलेक्शन कमीशन ने गुरुवार को इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी. इस सीट पर 12 मई को मतदान कराया जाएगा, जबकि 14 मई को मतों की गिनती होगी. यह सीट 16 नवंबर 2025 से खाली है. पहले इस सीट का प्रतिनिधित्व जदयू नेता राधा चरण साह कर रहे थे. लेकिन विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें यह सीट छोड़नी पड़ी. उनका कार्यकाल 7 अप्रैल 2028 तक था, लेकिन समय से पहले सीट खाली हो गई. चुनाव का पूरा शेड्यूल निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार     16 अप्रैल: अधिसूचना जारी     23 अप्रैल: नामांकन की अंतिम तिथि     24 अप्रैल: नामांकन पत्रों की जांच     27 अप्रैल: नाम वापसी की आखिरी तारीख     12 मई: मतदान     14 मई: मतगणना लागू हुई आचार संहिता, बढ़ी सियासी हलचल चुनाव की घोषणा के साथ ही भोजपुर और बक्सर क्षेत्र में आचार संहिता लागू हो गई है. इसके बाद से ही इलाके में पॉलिटिकल एक्टिविटीज तेज हो गई हैं. सभी दल इस सीट पर कब्जा जमाने के लिए रणनीति बनाने में जुट गए हैं. NDA फिर से जीत का कर रहा दावा इस सीट पर पहले जदयू का कब्जा था, जो एनडीए गठबंधन का हिस्सा है. ऐसे में एनडीए एक बार फिर इस सीट को अपने पास बनाए रखने का दावा कर रहा है. वहीं विपक्ष भी इस मौके को भुनाने की तैयारी में है, जिससे मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है. 27 वोट से जीती थी विधानसभा चुनाव राधा चरण साह ने 2025 के विधानसभा चुनाव में संदेश सीट से जदयू के टिकट पर जीत दर्ज की थी. उन्होंने राजद उम्मीदवार दीपू सिंह को महज 27 वोटों के अंतर से हराया था. इस चुनाव में राधा चरण साह को 80,598 वोट मिले थे. यह मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और पूरे राज्य में इसकी काफी चर्चा हुई थी. सियासी मुकाबला होगा दिलचस्प भोजपुर-बक्सर की यह सीट स्थानीय निकाय से जुड़ी होने के कारण यहां का चुनाव समीकरण अलग होता है. ऐसे में सभी पार्टियां अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गई हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि इस उपचुनाव में कौन बाजी मारता है और किसके खाते में यह सीट जाती है.

भारत निर्वाचन आयोग का नया कदम: रायपुर में इंटरनेशनल इलेक्शन विजिटर प्रोग्राम की शुरुआत

रायपुर. भारत निर्वाचन आयोग ने 07 अप्रैल को नई दिल्ली में असम, केरल और पुडुचेरी की विधानसभाओं के आगामी आम चुनावों के लिए अंतर्राष्ट्रीय निर्वाचन आगंतुक कार्यक्रम (IEVP), 2026 की शुरुआत की। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयुक्त  डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान (IIIDEM) में इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) भारत में चुनावों को लोकतंत्र के उत्सव के रूप में लेता है और इसे ‘मिशन मोड’ में सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करता है। उन्होंने प्रतिभागियों से राज्यों के दौरे का आनंद लेने तथा भारत की विविधता को सीखने, देखने व अनुभव करने का आह्वान किया।  कार्यक्रम के प्रथम चरण में प्रतिनिधि 8-9 अप्रैल 2026 को असम, केरल और पुडुचेरी का दौरा करेंगे। द्वितीय चरण में प्रतिनिधि 20 अप्रैल 2026 से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु राज्यों का दौरा करेंगे। कार्यक्रम के पहले चरण में दिल्ली स्थित पांच विदेशी मिशनों के प्रतिनिधियों सहित 23 देशों के 43 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। प्रतिनिधियों को IIIDEM में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का प्रदर्शन दिखाया गया तथा उन्होंने ‘मॉक पोल’ (दिखावटी मतदान) के माध्यम से मतदान प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। प्रतिनिधियों ने भारत की चुनाव प्रक्रिया में तकनीकी हस्तक्षेपों एवं प्रशासनिक सुरक्षा उपायों में गहरी रुचि दिखाई। इस दौरान विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया। प्रतिनिधि 8 अप्रैल  को असम, केरल एवं केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की यात्रा करेंगे। वे प्रेषण एवं वितरण केंद्रों, जिला नियंत्रण कक्षों तथा मीडिया निगरानी केंद्रों सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का अवलोकन करेंगे तथा 9 अप्रैल 2026 की सुबह वास्तविक मतदान प्रक्रिया के साक्षी बनेंगे। अंतर्राष्ट्रीय निर्वाचन आगंतुक कार्यक्रम (IEVP) भारत निर्वाचन आयोग का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य अन्य देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों (EMBs) एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग एवं सहभागिता को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम भारत के चुनावी ढांचे, संस्थागत तंत्र एवं परिचालन व्यवस्था का व्यापक अवलोकन प्रदान करता है तथा विदेशी प्रतिनिधियों को चुनाव प्रबंधन की सर्वोत्तम प्रथाओं एवं नवाचारों से अवगत कराता है। IEVP अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के समक्ष भारत की चुनावी प्रणाली की सुदृढ़ता को प्रदर्शित करता है तथा विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में अपनाई जाने वाली श्रेष्ठ चुनावी प्रक्रियाओं को साझा करने का अवसर प्रदान करता है।

पहली बार EC ने बंगाल के 90 लाख से ज्यादा वोटरों का जिलेवार डेटा जारी किया

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच वोटर लिस्ट को लेकर नया अपडेट आ गया है। चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा और अहम डेटा जारी किया है। इस बार खास बात यह रही कि आयोग ने पहली बार जिलावार तरीके से नाम जोड़ने और हटाने की पूरी जानकारी सार्वजनिक की है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर काफी बड़ी और जटिल दिखती है। आयोग के मुताबिक, अब तक कुल 90.66 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यह बड़ा डेटा माना जा रहा है। अबतक 90.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए  चुनाव आयोग ने पहली बार जिलेवार तरीके से नाम जोड़ने और हटाने की भी जानकारी शेयर की है. आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में एसआईआर की इस प्रक्रिया में अब तक कुल 90.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. पहले चरण में दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट लिस्ट के दौरान 58.2 लाख नाम हटाए गए थे, जबकि फरवरी 2026 की अंतिम सूची तक 5.46 लाख अतिरिक्त नाम हटाए गए हैं।  चुनाव आयोग के मुताबिक लॉजिकल विसंगति यानी डेटा में तकनीकी गड़बड़ियों के आधार पर 60 लाख से ज्यादा वोटरों को जांच के दायरे में रखा गया था. इन मामलों को अंडर एडजुडिकेशन की कैटेगरी में रखा गया था ताकि अधिकारी गहराई से इनकी जांच कर सकें. आयोग के मुताबिक, अब तक लगभग 59.84 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है. इस जांच के बाद करीब 32.68 लाख पात्र लोगों के नाम दोबारा जोड़े गए हैं, जबकि अपात्र मिले 27.16 लाख लोगों के नाम काटे गए।  ECI के इतिहास में पहली बार हुआ ये काम इलेक्शन कमीशन के इतिहास में ये पहली बार है जब पश्चिम बंगाल को लेकर एसआईआर के संबंध में जिलेवार नाम जोड़ने और हटाने का डेटा सार्वजनिक किया गया है. आयोग का मकसद पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और चुनावी सूचियों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है. बता दें कि ये डेटा अब सार्वजनिक तौर पर भी उपलब्ध है।  न्यायिक अधिकारियों के ई-हस्ताक्षर होते ही जारी होंगे आंकड़े जबकि पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक निर्णय के लिए भेजे गए कुल 60,06,675 मामलों में से 59,84,512 मामलों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिन पर न्यायिक अधिकारियों के ई-हस्ताक्षर भी हो चुके हैं। इसके अलावा, 59,84,512 मामलों में से, जिन मतदाताओं को न्यायिक अधिकारियों द्वारा हटाए जाने योग्य माना गया है। उनके नामों को हटा दिया गया है। उनकी संख्या 27,16,393 है। 91 लाख वोटरों के कट जाएंगे नाम इसका मतलब यह है कि पश्चिम बंगाल में हटाए गए मतदाताओं की कुल संख्या वर्तमान में 90,83,345 है। मालूम हो कि पिछले साल नवंबर में पश्चिम बंगाल के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की अधिसूचना जारी होने से पहले, राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 7,66,37,529 थी। पिछले साल दिसंबर में प्रकाशित मतदाताओं की मसौदा सूची में, कुल 58,20,899 नाम हटाए गए थे। 28 फरवरी को जारी की गई अंतिम वोटर लिस्ट में, हटाए गए नामों की संख्या बढ़कर 63,66,952 हो गई। अब, न्यायिक अधिकारियों ने 27,16,393 मामलों को हटाने लायक पाया है। इसके बाद, पूरे SIR प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल में हटाए गए वोटरों की कुल संख्या बढ़कर 90,83,345 हो गई है। इसके अलावा CEO कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि जिन वोटरों के नाम न्यायिक जांच प्रक्रिया में "हटाने लायक" पाए गए हैं। उन्हें अपनी बात रखने का और अपील करने का एक अवसर मिलेगा। वहीं, विपक्षी दल (खासकर तृणमूल कांग्रेस) इस बड़े पैमाने पर नाम हटाने को वोटरों को बाहर करने की साजिश बता रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि अल्पसंख्यक और सीमावर्ती इलाकों पर ज्यादा असर पड़ा है. वहीं, बीजेपी और चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने का जरूरी कदम बता रहे हैं।  दो चरणों में मतदान पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों- 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है. ऐसे में इस SIR प्रक्रिया और नाम हटाने के आंकड़ों पर सियासी घमासान तेज हो गया है।  एक बार अपील करने का मिलेगा मौका CEO कार्यालय से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक जांच अभ्यास के दौरान "हटाने लायक" पाए गए मामलों की सबसे अधिक संख्या अल्पसंख्यक-बहुल मुर्शिदाबाद जिले से थी। मुर्शिदाबाद से हटाए गए नामों की कुल संख्या 4,55,137 है। इसके बाद उत्तर 24 परगना का नंबर आता है। जहां 3,25,666 नाम हटाए गए। बता दे कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे। पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होगा और दूसरे चरण में बाकी 142 सीटों पर मतदान होगा। इसके बाद चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डेटा जारी बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट आज मंगलवार तक हर हाल में पब्लिश करने के आदेश दिए थे. साथ ही यह भी कहा था कि अगर सभी दस्तावेजों पर डिजिटल साइन नहीं भी हुए तो भी लिस्ट निकाली जाए. इसके अलावा कलकत्ता हाईकोर्ट को 3 पूर्व जजों की एक कमेटी बनाने के आदेश दिए. वोटर लिस्ट पब्लिश करने की आखिरी तारीख सोमवार थी, लेकिन काम न पूरा होने के चलते संभव नहीं सका. लिहाजा आज मंगलवार को चुनाव आयोग ने डेटा जारी किया है। 

EC की नई गाइडलाइन: 100 मिनट में शिकायतों का समाधान, निगरानी के लिए 5000 उड़नदस्ते मैदान में

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों के लिए 5 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी) में सख्त आदर्श आचार संहिता के निर्देश जारी किए हैं। 16 मार्च को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन क्षेत्रों में एमसीसी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। चुनाव आयोग ने सुनिश्चित किया है कि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से हों, इसलिए केंद्रीय सरकार सहित सभी संबंधित पक्षों पर MCC के प्रावधान लागू किए गए हैं। मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। इस बार कुल 824 विधानसभा सीटों पर चुनाव होंगे, जहां लगभग 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे और लगभग 25 लाख कर्मी चुनाव प्रक्रिया में तैनात रहेंगे। चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघनों पर त्वरित कार्रवाई के लिए 5,000 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड्स (उड़नदस्ते) और 5,200 से ज्यादा स्टेटिक सर्विलांस टीमों की तैनाती की है। शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के अंदर करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों की शिकायतों के लिए 1950 टोल-फ्री नंबर और सी-विजिल ऐप के माध्यम से रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है। राजनीतिक दलों को रैलियां, जुलूस या सभाओं के लिए पहले से पुलिस को सूचित करना अनिवार्य है, लाउडस्पीकर आदि की इजाजत लेनी होगी। सार्वजनिक स्थलों जैसे मैदानों या हेलीपैड के उपयोग के लिए सुविधा पोर्टल पर पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवेदन करना होगा। EC का सख्त निर्देश मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आधिकारिक कार्यों को चुनाव प्रचार से न जोड़ें व सरकारी मशीनरी, वाहनों या कर्मचारियों का दुरुपयोग न होने दें। निजी संपत्तियों पर बिना मालिक की अनुमति के पोस्टर, बैनर या झंडे नहीं लगाए जा सकेंगे। नागरिकों की निजता का सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा व निजी आवासों के बाहर प्रदर्शन या धरना प्रतिबंधित रहेगा। चुनाव आयोग ने सभी स्तर के अधिकारियों से निष्पक्षता बरतने और सभी दलों के साथ समान व्यवहार करने का आह्वान किया है। मतदान की तिथियां चार चरणों में निर्धारित की गई हैं। 9 अप्रैल को केरल, असम और पुडुचेरी में एक ही चरण में, 23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल का पहला चरण और तमिलनाडु, जबकि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल का दूसरा चरण होगा। सभी राज्यों में मतगणना 4 मई 2026 को होगी। साथ ही 6 राज्यों में उपचुनाव भी घोषित किए गए हैं। चुनाव आयोग का उद्देश्य है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और कानून के अनुसार चले, जिससे लोकतंत्र की मजबूती बनी रहे।  

म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग की टीम ने जाना बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के नवाचार

भोपाल स्थानीय निकाय निर्वाचनों में राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार द्वारा किए गए तकनीकी नवाचारों एवं संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के आधुनिकीकरण का अध्ययन करने के लिये राज्य निर्वाचन आयोग, मध्यप्रदेश के उप सचिव डॉ. सुतेश शाक्या, अवर सचिव  एन. के. लच्छवानी, विधिक सलाहकार  प्रदीप शुक्ला एवं आईटी कंसल्टेंट  राकेश शुक्ला ने बिहार का दौरा किया। बैठक में राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार के सचिव  मुकेश कुमार सिन्हा, विशेष कार्य पदाधिकारी  संजय कुमार सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने बिहार में निर्वाचन प्रक्रिया में किए गए तकनीकी विस्तार और सुधारों का विस्तृत अध्ययन किया। अध्ययन के दौरान संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के पूर्ण डिजिटलीकरण, बायोमेट्रिक/एफ.आर.एस. के माध्यम से मतदाता सत्यापन, ईवीएम द्वारा मतदान, मतदान केंद्र एवं मतगणना केंद्रों की वेबकास्टिंग द्वारा लाइव मॉनिटरिंग, वज्रगृह में डिजिटल लॉक की व्यवस्था, ओसीआर (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन) के माध्यम से मतगणना, जीआईएस मैपिंग, ई-वोटिंग प्रणाली तथा व्यापक जन-जागरुकता एवं प्रचार-प्रसार अभियान की जानकारी प्राप्त की गई। राज्य निर्वाचन आयोग, मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार तकनीक के प्रभावी उपयोग से निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग, मध्यप्रदेश ने बिहार में लागू विभिन्न चुनावी नवाचारों एवं आधुनिक तकनीकी व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए इसे एक उल्लेखनीय उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि "हम AI SUMMIT में राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार द्वारा प्रस्तुत ई-वोटिंग के प्रयासों की प्रशंसा से प्रेरित होकर इसके सफल क्रियान्वयन को देखने बिहार आए थे। यहाँ चुनाव सुधारों की दिशा में तकनीकी नवाचार अत्यंत प्रभावी एवं सुव्यवस्थित ढंग से लागू किए गए हैं। प्रत्येक चरण में कार्य सफलतापूर्वक संपादित किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार ने न केवल ई-वोटिंग को अपनाया है, बल्कि संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया को डिजिटाइज कर एआई के माध्यम से सुदृढ़ बनाया है। उन्होंने यह भी कहा है कि मध्यप्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में इस प्रकार तकनीक प्रक्रियाओं एवं नवाचारों को अपनाने पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जायेगा।  

वोटर लिस्ट पुनरीक्षण का असर: नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में 1.70 करोड़ मतदाताओं की कमी

 नई दिल्ली भारत के छह राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम पूरा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिन्हें अयोग्य पाया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या मिलाकर 1 करोड़ 70 लाख से ज्यादा घट गई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह हटाए गए मतदाताओं और नए जोड़े गए योग्य मतदाताओं के अंतर के आधार पर नेट बदलाव है। कितने घटे मतदाता? मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार द्वीप, गोवा और केरल समेत कुल नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर शुरू होने से पहले मतदाताओं की संख्या लगभग 21.45 करोड़ थी। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद यह घटकर करीब 19.75 करोड़ रह गई, यानी कुल मिलाकर 1.70 करोड़ से अधिक मतदाता कम हो गए। गुजरात में 68 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे सबसे ज्यादा नाम गुजरात में हटाए गए हैं। यहां कुल 68 लाख 12 हजार 711 मतदाताओं के नाम सूची से हटे, जिससे कुल मतदाता संख्या लगभग 5.08 करोड़ से घटकर 4.40 करोड़ रह गई, यानी करीब 13.40% की कमी दर्ज हुई। इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर रहा, जहां करीब 34.25 लाख नाम हटाए गए और मतदाता संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.39 करोड़ हो गई। राजस्थान में 31 लाख तो छत्तीसगढ में 25 लाख मतदाता के नाम हटे अन्य राज्यों में भी बड़ी कटौती देखी गई। राजस्थान में लगभग 31.36 लाख मतदाताओं के नाम हटे, छत्तीसगढ़ में करीब 24.99 लाख, जबकि केरल में करीब 8.97 लाख नाम कम हुए। छोटे राज्यों में गोवा में लगभग 1.27 लाख नाम हटे। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान-निकोबार, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भी मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई। किस वजह से हटाए गए मतदाताओं के नाम? चुनाव आयोग के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटाने के मुख्य कारणों में मौत, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना, एक से अधिक जगह पंजीकरण होना या पात्रता से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करना लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और पात्र नागरिक अब भी नाम जुड़वाने, हटवाने या सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। यूपी, बंगाल और तमिलनाडु में SIR जारी आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के आंकड़े इस महीने के अंत तक जारी किए जाएंगे। देशभर में 12 राज्यों में चल रहे इस अभियान का अगला चरण अप्रैल से शुरू होगा, जिसके तहत पूरे देश में मतदाता सूचियों का सत्यापन जारी रहेगा। विवाद और कानूनी चुनौती,  असम में अलग प्रक्रिया इस पूरे अभियान के दौरान कई जगह शेड्यूल में बदलाव भी किए गए। बिहार की तरह ही तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह अभियान मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट रखने के लिए किया जा रहा है। असम में एसआईआर की जगह स्पेशल रिविजन प्रक्रिया अपनाई गई थी, जो 10 फरवरी को पूरी हो चुकी है। देशभर में चल रहा है अभियान चुनाव आयोग का यह विशेष पुनरीक्षण अभियान देश के कई हिस्सों में जारी है। बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अभी 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह काम चल रहा है, जहां लगभग 60 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके बाद अगले चरण में 17 राज्यों और 5 केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 40 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जाएगा।

बंगाल में चुनाव आयोग का सख्त रुख: चुनाव ड्यूटी में लापरवाही पर 7 वरिष्ठ अधिकारी सस्पेंड

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही चुनाव आयोग (ECI) पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। चुनावी तैयारियों और ड्यूटी में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोपों के चलते आयोग ने विभिन्न जिलों के 7 राजपत्रित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता के साथ समझौता कर रहे थे। मुख्य सचिव को कड़ा आदेश: तुरंत शुरू करें विभागीय जांच चुनाव आयोग ने इस मामले में केवल निलंबन पर ही संतोष नहीं किया, बल्कि पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि इन सभी 7 अधिकारियों के खिलाफ बिना किसी देरी के अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। आयोग ने राज्य सरकार से इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। माना जा रहा है कि वोटर लिस्ट रिवीजन और ग्राउंड लेवल की तैयारियों में बरती गई अनियमितताओं के कारण यह गाज गिरी है। इन अधिकारियों पर गिरी गाज: मुर्शिदाबाद से लेकर डेबरा तक कार्रवाई निलंबित किए गए अधिकारियों में राजस्व, कृषि और विकास खंडों के महत्वपूर्ण पदों पर तैनात 'असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स' (AERO) शामिल हैं। कार्रवाई की जद में आए प्रमुख नाम इस प्रकार हैं: मुर्शिदाबाद जिले के समसेरगंज से सहायक निदेशक डॉ. सेफौर रहमान और फरक्का के राजस्व अधिकारी नीतीश दास को सस्पेंड किया गया है। वहीं, मयनागुड़ी की दलिया रे चौधरी, सुती विधानसभा क्षेत्र के एसके मुर्शिद आलम, और कैनिंग पुरबो के संयुक्त बीडीओ सत्यजीत दास व जॉयदीप कुंडू पर भी कड़ी कार्रवाई हुई है। इसके अलावा, डेबरा के संयुक्त बीडीओ देबाशीष विश्वास को भी कर्तव्य में लापरवाही का दोषी पाया गया है। चुनाव पूर्व सफाई अभियान की शुरुआत पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए आयोग किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। वोटर लिस्ट में सुधार और मतदान केंद्रों की समीक्षा का काम जोरों पर है। आयोग का मानना है कि यदि जमीनी स्तर के अधिकारी ही निष्पक्ष नहीं रहेंगे, तो लोकतंत्र के इस महापर्व की शुचिता प्रभावित हो सकती है।