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नीतीश कुमार पर राबड़ी देवी का बड़ा बयान: BJP भगा रही, बिहार नहीं छोड़ेंगे सीएम

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर पूर्व सीएम राबड़ी देवी की पहली प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीतीश को बिहार से भगा रही है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के साथ पटना पहुंचीं राबड़ी ने कहा कि उनकी (नीतीश कुमार) की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। उन्हें नहीं जाना चाहिए, बिहार नहीं छोड़ना चाहिए। राबड़ी देवी अपने पति आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के साथ शनिवार दोपहर को दिल्ली से पटना पहुंचीं। पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने यह बयान दिया। इस दौरान लालू ने मीडिया के सवालों से दूरी बनाए रखी। नीतीश की नई राजनीतिक पारी पर बिहार के मुख्य विपक्षी दल आरजेडी के मुखिया लालू की प्रतिक्रिया का लोगों को अभी तक इंतजार है। तेजस्वी ने भी बताया था भाजपा की साजिश हालांकि, आरजेडी की ओर से तेजस्वी यादव सत्ता पक्ष के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले को उन्होंने भी भाजपा की साजिश बताया था। दो दिन पहले गुरुवार को मीडिया से बातचीत में तेजस्वी ने कहा था कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव का जनादेश नीतीश कुमार को मिला था। किसी दूसरे नेता के साथ नई सरकार बनाना पूरी तरह से जनता की भावनाओं और जनादेश के खिलाफ होगा। तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि आरजेडी ने पहले से ही अनुमान लगा लिया था कि भाजपा अपने चुनावी फायदे के लिए नीतीश को सिर्फ मुखौटे की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने सहयोगी दलों को खत्म करने की भाजपा की आदत है। महाराष्ट्र में शिवसेना, तमिलनाडु में एआईएडीएमके को भी भाजपा ने खत्म कर दिया। नीतीश बोले- अपनी इच्छा से जा रहा राज्यसभा दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि वह अपनी इच्छा से राज्यसभा जा रहे हैं। गुरुवार को सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि शुरुआत से उनकी इच्छा रही है कि वह बिहार विधान मंडल के दोनों सदन और संसद के दोनों सदनों के सदस्य बने। वह विधायक, एमएलसी और लोकसभा सांसद रह चुके हैं, अब राज्यसभा सांसद बनने जा रहे हैं। इसके बाद शुक्रवार को पटना के एक, अणे मार्ग स्थित सीएम आवास में हुई जेडीयू विधान मंडल दल की बैठक में भी नीतीश ने यही बात दोहराई। नीतीश के राज्यसभा सांसद बनने के बाद बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा। अगला सीएम भाजपा का बनाए जाने की पूरी संभावना है। हालांकि, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।  

RJD के 14 सवालों का बिहार सरकार ने दिया जवाब

पटना. 19 फरवरी को आरजेडी के एक्स अकाउंट के जरिए एक पोस्ट शेयर किया गया था. इसमें लड़कियों के साथ राज्य के अलग-अलग जिलों में 14 आपराधिक घटनाओं का जिक्र किया गया. राजद की ओर से कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे. इस पोस्ट का जवाब आज बिहार सरकार की तरफ से दिया गया.     ज़िंदा ही तो हो, कोई मुर्दा तो नहीं!     कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते?     कुर्सी ही तो है, कोई अर्थी तो नहीं!     बेपरवाह भाजपा नीतीश सरकार     और लचर कानून व्यवस्था का हाल!     बिहार की बच्चियों के लिए एक एक साँस है मुहाल!! pic.twitter.com/BNWoP3vpCu     — Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) February 19, 2026 14 घटनाओं में कार्रवाई का किया जिक्र बिहार सरकार की तरफ से एक प्रेस रिलीज जारी किया गया. इस प्रेस रिलीज में उन 14 घटनाओं का जिक्र किया गया, जिसको लेकर राजद ने सवाल उठाया था. इसके साथ ही सभी मामलों में क्या कुछ कार्रवाई की गई, उसे बताया गया. बिहटा में 4 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में अभियुक्त गुड्डू कुमार की गिरफ्तारी की गई. किशनगंज में 6 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में आरोपी को बाल सुधार गृह भेजा गया. इस तरह से एक-एक कार्रवाई गिनवाई गई. राबड़ी देवी ने आज फिर उठाया सवाल बिहार विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है. विपक्ष का तरफ से लगातार आपराधिक घटनाओं से जुड़े मुद्दे को उठाया जा रहा है. शुक्रवार को भी लड़कियों के साथ अपराध का मुद्दा राबड़ी देवी ने उठाया. राबड़ी देवी ने कहा, बिहार में छोटी-छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म हो रहा है. कई मामलों में तो हत्याएं भी की जा रही हैं. इस दौरान राबड़ी देवी ने दावा किया कि 35 लड़कियों के साथ फरवरी महीने में ही ऐसी घटना हुई. इन मामलों में सरकार ने क्या कार्रवाई की? सरकार ने दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाया? इस तरह से राबड़ी देवी ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया. सदन की कार्यवाही से पहले राजद के विधायकों ने हाथों में पोस्टर-बैनर लेकर हंगामा किया था. आज सत्र की कार्यवाही में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे. लेकिन थोड़ी ही देर बाद वे चले गए.

बिहार विधानसभा में हंगामा, छात्रा की मौत पर राबड़ी देवी का हमला—सम्राट चौधरी पर इस्तीफे का दबाव

पटना राबड़ी देवी ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस बयान पर भी तीखा हमला बोला जिसमें उन्होंने कहा था कि 24 घंटे के भीतर आरोपी पकड़ा जाएगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे इस्तीफा देंगे। राबड़ी देवी ने सवाल उठाया कि अब तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया गया। पटना के फुलवारीशरीफ इलाके में एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला विधान परिषद में गूंजा। शुन्यकाल में इसे उर्मिला ठाकुर ने उठाया। इस घटना पर पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि छात्रा को एक युवक ने छत से नीचे फेंक दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था की नाकामी का ताजा उदाहरण है और सरकार को तुरंत आरोपी को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। इधर एम्स गोलम्बर के पास घटना के विरोध में सड़क पर आगजनी कर प्रदर्शन किया गया। राबड़ी देवी ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस बयान पर भी तीखा हमला बोला जिसमें उन्होंने कहा था कि 24 घंटे के भीतर आरोपी पकड़ा जाएगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे इस्तीफा देंगे। राबड़ी देवी ने सवाल उठाया कि अब तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया गया और अपराध पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है। सरकार के दावे सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गए हैं, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है। घटना गुरुवार फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र के हरिनगर स्थित सुमित्रा हाइट अपार्टमेंट में हुई। 16 वर्षीय छात्रा फुलवारीशरीफ के चकमुसा की रहनेवाली थी। वह 12वीं में पढ़ती थी और अपार्टमेंट के पहले तल्ले पर संचालित कोचिंग में पढ़ने जाती थी। छात्रा के परिजनों ने बालकनी से फेंक कर हत्या करने का आरोप लगाया है। सीसीटीवी फुटेज में अपार्टमेंट की सीढ़ी पर लड़की के पीछे जाते दो युवक समेत चार लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इनमें वहां का गार्ड और उस फ्लैट में काम कर रहा बढ़ई भी शामिल है। पुलिस के अनुसार गुरुवार की सुबह छात्रा कोचिंग आई थी। अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से उसके नीचे गिरने की बात कही जा रही है। घटना के बाद कोचिंग संचालक ने पुलिस को सूचना नहीं दी। छात्रा को इलाज के लिए एम्स ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए घर लेकर चले गए। जब घरवालों ने देखा कि उसके शरीर पर चोट के निशान हैं तो परिवार वाले सीसीटीवी कैमरा देखने पहुंचे। सीसीटीवी में दो युवक छात्रा के पीछे जाते दिखे। इसके बाद परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। पुलिस भी मौके पर पहुंची और छानबीन में जुटी। उधर, घर से वापस शव को पोस्टमार्टम के लिए एम्स ले जाया गया। शाम सात बजे एफएसएल टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। साक्ष्य एकत्रित किए गए। जिस बालकनी से गिरने से यह घटना हुई वहां कोई नहीं रहता है। उस फ्लैट में काम चल रहा है। घटनास्थल के पास ही छात्रा की चप्पल पड़ी मिली  

बिना आवंटी के खाली सरकारी बंगले पर जेडीयू का सवाल, सरकार से सख्त निगरानी की अपील

पटना अभी हाल ही में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पटना स्थित अपने आवास को खाली किया था। पटना स्थित 10 सर्कुलर स्थित सरकारी बंगले को खाली करने के बाद इसपर विवाद भी लगातार हो रहा है। अब जनता दल (यूनाइटेड) ने सवाल उठाया है कि आखिर रात के वक्त आवास को किसके आदेश से खाली किया गया? JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने भवन निर्माण विभाग को लिखे खत में अनुरोध किया है कि वहां पहले से लगे पंखे, कोड टोंटी समेत इत्यादि अन्य सामानों की निगरानी करवाई जाए। JDU प्र्वक्ता की तरफ से जो चिट्ठी भवन निर्माण विभाग को लिखी गई है उसमें कहा गया है कि मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, राबड़ी देवी के आवास को उनके परिवार की अनुपस्थिति में खाली किया गया था। रात के वक्त लालू-राबड़ी की गैरहाजिरी में पिकअप वैन के जरिए आवास से गमले और पौधे बाहर ले जाए जा रहे थे। खत में आगे लिखा गया है कि भवन निर्माण विभाग यह स्पष्ट करे कि आवास परिसर में लगे गमले और पौधे उद्यान विभाग की संपत्ति हैं अथना निजी। यह भी लिखा गया है की गई है कि विभाग यह बताए कि राबड़ी देवी और उनके परिवार की अनुपस्थिति में पिकअप वैन को परिसर के अंदर जाने की अनुमति किसने दी थी। जदयू प्रवक्ता ने राबड़ी आवास में रखे कई सामानों का जिक्र भी अपने खत में करते हुए कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पंखा, एसी, बाथरूम फिटिंग, टोंटी, गीजर, शौचालय में लगा कमोड, खिड़की-दरवाजे के पर्दे सहित अन्य सभी सरकारी सामान पूरी तरह से सुरक्षित हों। नीरज कुमार ने एक्स पर यह खत और अपना वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में उन्होने कहा है कि भवन निर्माण मंत्री को हमने पत्र लिखकर यह अनुरोध किया है कि साल 2006 से पटना में बड़ा भू-भाग, मकान रहने के बावजूद राबड़ी देवी का परिवार 10 सर्कुलर रोड में रहता है। ऐसी स्थिति में उनको कैबिनेट मंत्री का दर्ज प्राप्त है। तो भवन निर्माण विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री की पूरी जानकारी है लिहाजा यह सभी सामान विभाग के सुपुर्द किए जाएं। पंखा, एसी, फर्नीजर, इत्यादि सामग्रियां पूर्णत: सुरक्षित तथा अपने पुराने स्थान पर उपलब्ध हों यह राबड़ी देवी की जिम्मेदारी बनती है। भवन निर्माण विभाग से आग्रह है कि सम्पूर्ण प्रक्रिया की विधिवत निगरानी कराई जाए। बता दें कि बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने 25 नवंबर 2025 को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला खाली करने का नोटिस दिया था। इसके बाद पटना के हार्डिंग रोड स्थित 39 नंबर का नया सरकारी बंगला राबड़ी देवी के नाम आवंटित किया गया है। यह आवास उन्हें विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के पद के आधार पर केंद्रीय पूल से दिया गया है।  

राबड़ी देवी की याचिका पर कोर्ट सख्त, आईआरसीटीसी मामले में 9 दिसंबर को अगली सुनवाई

नई दिल्ली आईआरसीटीसी घोटाला मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी को शनिवार को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। राबड़ी देवी ने स्पेशल जज विशाल गोंगने (जो इस मामले की नियमित सुनवाई कर रहे हैं) को हटाकर किसी दूसरे जज की बेंच में केस ट्रांसफर करने की मांग की थी। राबड़ी देवी की मांग पर अदालत में सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में इस ट्रांसफर याचिका पर अगली सुनवाई अब 9 दिसंबर (मंगलवार) को होगी। शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान राबड़ी देवी के वकील ने जज विशाल गोंगने पर गंभीर आरोप लगाए। वकील का दावा था कि जज पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहे हैं और जून 2026 तक जल्दबाजी में फैसला सुना देने का इरादा रखते हैं। उन्होंने कहा कि जज कई कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं कर रहे हैं। वकील ने यह भी कहा कि आरोप तय करने के समय उनके मुवक्किल को चुनाव के बीच दिल्ली बुलाया गया, जिससे उन्हें भारी असुविधा हुई। जज द्वारा आरोप तय करने के आदेश के तरीके पर भी सवाल उठाए गए। राबड़ी देवी के वकील ने दलील दी कि इस मामले में कुल 103 आरोपी हैं, जिनमें ज्यादातर पटना सहित दूर-दराज के इलाकों से हैं। इनकी परेशानियों पर कोर्ट ध्यान नहीं दे रहा। शुक्रवार को एक आरोपी कोर्ट नहीं आ सका तो सीबीआई ने तुरंत जमानत रद्द करने की मांग शुरू कर दी। वकील का कहना था कि लालू परिवार को विशेष रूप से टारगेट किया जा रहा है। इस मामले के एक अन्य आरोपी, सुजाता होटल्स के मालिक विनय कोचर ने भी राबड़ी देवी की ट्रांसफर याचिका का समर्थन किया और सहमति जताई। जांच एजेंसी के अनुसार, लालू यादव पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आईआरसीटीसी के कई अधिकारियों की मिलीभगत से कोचर ब्रदर्स को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है। इसके एवज में पटना स्थित एक कीमती भूमि को कोचर ब्रदर्स ने एक ऐसी कंपनी को बेच दिया जो लालू प्रसाद यादव के करीबी और राजद के राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता से जुड़ी थी। यह जमीन मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (डीएमसीपीएल) के नाम से खरीदी गई थी, जिसे बाद में लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी के नाम से परिवर्तित कर दिया गया। यह कंपनी लालू परिवार के हित में संचालित की जा रही थी और अंततः इस संपत्ति का नियंत्रण राबड़ी देवी और तेजस्वी प्रसाद यादव के हाथों में चला गया।

राजनीति और सरकारी सुविधाएं अस्थायी: तेज प्रताप यादव के बाद राबड़ी देवी को बंगला छोड़ना पड़ेगा

पटना बिहार में सत्ता परिवर्तन का असर अब नेताओं के सरकारी आवासों पर दिखने लगा है. नई सरकार के गठन के बाद भवन निर्माण विभाग ने पुराने आवंटन की समीक्षा शुरू कर दी है और कई नेताओं को अपने सरकारी घर खाली करने पड़ रहे हैं. इस सूची में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके बेटे तेज प्रताप यादव का नाम भी शामिल हो गया है. बता दें कि तेज प्रताप यादव बिहार सरकार में पूर्व मंत्री भी रहे हैं और फिलहाल पटना के 26 M स्ट्रैंड रोड वाले आवास में रह रहे थे. यह बंगला उन्हें हसनपुर से जीत के बाद 2020 में आवंटित किया गया था. लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सीट बदली और महुआ से चुनाव लड़ा. परिणाम उनके पक्ष में नहीं गया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा. विधायक पद समाप्त होने के साथ अब उनका आवास भी उनसे वापस ले लिया गया है और इसे नई सरकार में मंत्री बने लखिन्दर कुमार रौशन को आवंटित कर दिया गया है. राबड़ी देवी को भी बदलना होगा आवास तेज प्रताप के बाद उनकी मां और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पर भी आवास बदलाव का निर्देश लागू हुआ है. वे लगभग दो दशकों से 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले में रह रही थीं. हालांकि अब बतौर नेता प्रतिपक्ष उन्हें नया आवास दिया जा रहा है. भवन निर्माण विभाग के आदेश के अनुसार उन्हें हार्डिंग रोड स्थित केंद्रीय पूल आवास में बंगला नंबर 39 नए आधिकारिक निवास के रूप में आवंटित किया गया है. नीतिगत नियमों के तहत हो रही कार्रवाई भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया नियम आधारित है. पद और दायित्व बदलने पर आवास पुनः आवंटित करना अनिवार्य होता है. हाल ही में जारी सूची में मंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं के लिए नए आवास तय किए गए हैं. साफ है कि बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन का प्रभाव अब मिलने वाली सरकारी सुविधाओं तक पहुंच चुका है. राबड़ी देवी को बंगला खाली करना पड़ेगा  . सत्ता परिवर्तन के बाद बिहार में केवल मंत्रिपरिषद ही नहीं बदला, बल्कि अब नेताओं के सरकारी ठिकानों का पता भी बदलने लगा है. राज्य सरकार के भवन निर्माण विभाग ने फैसला लिया है कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला छोड़ना पड़ेगा. प्रशासन की ओर से इसके निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं और उनके लिए नया बंगला भी आवंटित कर दिया गया है. बता दें कि राबड़ी देवी विधान परिषद् में विपक्ष की नेता हैं और करीब 16 जनवरी 2006 से 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में रह रही थीं. अब सरकारी आदेश के तहत उन्हें हार्डिंग रोड स्थित केंद्रीय पूल आवास बंगला नंबर 39 में स्थानांतरित किए जाने का निर्णय हुआ है. भवन निर्माण विभाग ने कहा है कि विधान परिषद् में विपक्ष के नेता के लिए यह बंगला निर्धारित किया गया है. ऐसे में सवाल है कि जब वह पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं और वर्तमान में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष भी तो उन्हें बंगला क्यों खाली करना पड़ा. दरअसल, इसके पीछे की वजह तेजस्वी यादव का आठ साल पहले उठाया गया वह कदम है जो इस फैसले का कारण बना है. जो लड़ाई शुरू की थी, वही भारी पड़ी राबड़ी देवी के बंगले को लेकर राजद समर्थकों में यह चर्चा है कि राबड़ी देवी के पता में बदला होना सत्ता में बदलाव का असर है, लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी आदेश की जड़ अदालत का वह फैसला है जिसे तेजस्वी यादव ने खुद आगे बढ़ाया था. वास्तविकता तो यह है कि जिस ‘सिस्टम सुधार’ की लड़ाई तेजस्वी यादव ने लड़ी आज वही सिस्टम उनके परिवार के लिए कड़ा साबित हो गया है. दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता राबड़ी देवी को 10, सर्कुलर रोड का सरकारी बंगला खाली करना पड़ेगा तो इसकी वजह मौजूदा नीतीश सरकार नहीं, बल्कि उनके बेटे तेजस्वी यादव द्वारा दायर वह याचिका है जिसके आधार पर पटना हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास देने की व्यवस्था खत्म कर दी थी. कब और कैसे मिला था 10, सर्कुलर रोड? राबड़ी देवी जिस बंगले में वर्तमान में रह रही हैं, वह उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते आवंटित किया गया था. बता दें कि वर्ष 2005 में नीतीश कुमार के सत्ता में लौटने के बाद एक बड़ा निर्णय लिया गया था, वह यह कि बिहार के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास, सुरक्षा और अन्य सुविधाएं मिलेंगी. इसी व्यवस्था के तहत यह आवास राबड़ी देवी को मिला और वे 16 जनवरी 2006 से यहां रह रही हैं. लेकिन, जब बिहार की सियासत आगे बढ़ी तो तेजस्वी यादव के एक कदम ने इसके नियम बदल दिए. तेजस्वी का केस जिसने परंपरा बदल दी मामला 2017 का है. तेजस्वी यादव उस समय बिहार के उपमुख्यमंत्री थे और 5, देशरत्न मार्ग स्थित आधिकारिक आवास में रहते थे. लेकिन जब नीतीश कुमार ने आरजेडी से अलग होकर बीजेपी के साथ फिर से सरकार बनाई, तब तेजस्वी यादव को बंगला खाली करने का आदेश दिया गया. सरकार की ओर से कहा गया कि वह बंगला उपमुख्यमंत्री के पद का है, न कि किसी व्यक्ति का. सरकारी नोटिस के बाद तेजस्वी यादव हाईकोर्ट पहुंचे और दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों और उच्च पदों से जुड़े लोगों के आवास और सुविधाओं में नियमों का स्पष्ट निर्धारण होना चाहिए. हाईकोर्ट की जांच और बड़ा खुलासा हाईकोर्ट की डबल बेंच में मुख्य न्यायाधीश एपी शाही और जस्टिस अंजना मिश्रा ने मामले की सुनवाई के दौरान भवन निर्माण विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी. दस्तावेजों में खुलासा हुआ कि- 2010 में सरकारी नियमों में बदलाव किया गया था और उसके बाद राबड़ी देवी, लालू यादव, जीतन राम मांझी, डॉ. जगन्नाथ मिश्रा और सतीश प्रसाद सिंह को आजीवन सरकारी आवास, सुरक्षा और स्टाफ की सुविधा दी गई थी. यही वह बिंदु था जिससे अदालत असहमत हुई. 2019 का वो फैसला जिसका असर अब दिख रहा 19 फरवरी 2019 को पटना हाईकोर्ट ने तेजस्वी यादव की याचिका खारिज करते हुए उनका आवास खाली कराने का आदेश दिया. लेकिन इसके साथ ही अदालत ने एक बड़ा बदलाव लागू किया- पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन बंगला और … Read more

RJD नेता का आवास पर प्रदर्शन: रोने के साथ कुर्ता फाड़ा, लगाए बड़े आरोप

पटना/ मोतिहारी पूर्वी चंपारण जिले की मधुबन विधानसभा सीट से राष्ट्रीय जतना दल के पूर्व प्रत्याशी मदन साह का दर्द रविवार को राबड़ी आवास के बाहर फूट पड़ा। उन्होंने पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर अपना कुर्ता फाड़ लिया और फूट-फूटकर रोने लगे। इस दौरान उन्होंने तेजस्वी यादव के राजनीतिक सलाहकार संजय यादव पर टिकट बेचने का गंभीर आरोप लगाया। मदन साह का आरोप है कि कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के करीबी व राज्यसभा सांसद संजय यादव ने मुझसे दो करोड़ सत्तर लाख रुपये की मांग की थी। पैसे नहीं देने पर मेरा टिकट काट दिया गया। मैं बर्बाद हो गया हूं। बेटा-बेटी की शादी तक टाल दी थी चुनाव के लिए। लालू यादव ने खुद कहा था कि तैयारी करो, पिछली बार कम वोटों से हारे थे। इधर, पार्टी की ओर से इस पूरे मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मधुबन से लड़े से विधानसभा चुनाव बता दें कि मदन साह 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद के टिकट पर मधुबन से चुनाव लड़े थे, जहां उन्हें भारतीय जनता पार्टी के राणा रणधीर सिंह ने मात्र 5,878 वोटों के अंतर से हराया था। उस हार के बाद पार्टी ने उन्हें प्रोत्साहित किया और अगली बार मौका देने का भरोसा दिया था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मदन साह पर यह आरोप लगा कि उन्होंने राजद उम्मीदवार की जगह NDA प्रत्याशी को अंदरखाने से मदद की। आरोप है कि उनकी भूमिका के चलते ही जदयू की लवली आनंद ने राजद उम्मीदवार ऋतु जयसवाल को करीब 30,000 वोटों से हरा दिया। इसी वजह से पार्टी नेतृत्व उनसे नाराज चल रहा था।