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काम पर लौटने की डेडलाइन तय, 25 मार्च के बाद हड़तालियों पर वेतन कटौती का फैसला

पटना बिहार में हड़ताल कर रहे अंचलाधिकारी (सीओ) और अन्य राजस्व अधिकारियों के खिलाफ राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने अधिकारियों के सामूहिक अवकाश को अवैध घोषित कर दिया है। साथ ही हड़ताल करने वालों को 25 मार्च तक काम पर वापस लौटने को कहा गया है। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि निश्चित समयावधि के अंदर अगर हड़ताल खत्म नहीं होती, तो राजस्व अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज की ओर से जारी विभागीय पत्र के आधार पर उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा 25 मार्च तक कार्य पर नहीं लौटने वाले पदाधिकारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। डिप्टी सीएम सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि बिहार राजस्व सेवा के कुछ पदाधिकारियों की ओर से 9 मार्च 2026 से घोषित सामूहिक अवकाश ना केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे आम जनता के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार जनहित और प्रशासनिक व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा और उनके नेतृत्व में आयोजित होने वाले भूमि सुधार जनकल्याण संवाद जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के मद्देनज़र राजस्व पदाधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे समय में कार्य से अनुपस्थित रहना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। सिन्हा ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित पदाधिकारियों को 25 मार्च 2026 की साम 5:00 बजे तक हर हाल में अपने पद पर योगदान देना होगा। उन्होंने कहा कि निर्धारित समयसीमा के बाद अनुपस्थित रहने वालों के खिलाफ सेवा टूट, वेतन कटौती और अन्य कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो पदाधिकारी निर्धारित अवधि के भीतर कार्य पर लौट आते हैं, उनके मामले में अवकाश अवधि के समायोजन पर नियमों के अनुसार सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। विजय सिन्हा ने सभी अधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि वे हड़ताल समाप्त कर जल्द अपने दायित्वों का निर्वहन करें, जिससे आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना ना करना पड़े। बता दें कि बिहार के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में सीओ और अन्य राजस्व अधिकारी बीते 9 मार्च से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इससे जिलों में निबंधन समेत जमीनों से जुड़े अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सरकार की ओर से लगातार उन्हें काम पर लौटने को कहा जा रहा है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा पहले भी हड़तालियों को अल्टीमेटम दे चुके हैं।  

दलाल-मुंशी सिस्टम पर लगेगी रोक, भू-माफियाओं को नहीं मिलेगी राहत: विजय सिन्हा की दो टूक चेतावनी

पटना बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राजस्व प्रशासन की इकाइयों में दलालों एवं मुंशियों के हस्तक्षेप पर रोक लगाने और भू-माफियाओं के विरुद्ध कड़ी कारर्वाई के निर्देश जारी किए हैं।        विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी समाहर्ताओं को पत्र जारी कर स्पष्ट कहा है कि राजस्व प्रशासन में किसी भी प्रकार की बिचौलिया संस्कृति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पत्र में उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की‘समृद्धि यात्रा'तथा उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद'कार्यक्रमों के दौरान विभिन्न जिलों के भ्रमण में यह तथ्य सामने आया कि नगर क्षेत्रों में कार्य की अधिकता के नाम पर हल्का कर्मचारियों द्वारा अनौपचारिक रूप से ‘सहायक मुंशी' रखे गए हैं। पटना महानगर क्षेत्र में तो संपतचक में समानांतर कार्यालय संचालित होने की जानकारी भी सामने आई। प्रधान सचिव ने इसे प्रशासनिक निरीक्षण एवं नियंत्रण की कमी का संकेत बताते हुए कहा है कि राजस्व प्रशासन पर भू-माफियाओं द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे तत्वों के विरुद्ध‘रूल ऑफ लॉ'के तहत सख्त न्यायिक एवं आपराधिक कारर्वाई की जाएगी। निर्देशानुसार सभी अंचल कार्यालयों में हाई-एंड सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए विभाग द्वारा राशि आवंटित की जा चुकी है। उद्देश्य है कि कार्यालयों की कार्यप्रणाली पारदर्शी हो तथा दलालों का प्रवेश पूरी तरह निषिद्ध किया जा सके।

अंचल कार्यालयों में सुरक्षा बढ़ाने अब सीसीटीवी से निगरानी: विजय सिन्हा

पटना. राज्य के सभी 537 अंचलों में सीसीटीवी कैमरे लगने के बाद मानिटरिंग में लगे अधिकारी अंचल कार्यालयों की हरेक गतिविधि को आनलाइन देख सकेंगे। उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी अंचलों में उच्च गुणवत्ता वाले 2 एमपी कलर एवं आडियो सपोर्टेड कैमरे, 16 चैनल एनवीआर तथा 30 दिनों की अनिवार्य रिकार्डिंग की व्यवस्था होगी। ये दिशा निर्देश सीसीटीवी कैमरों की गुणवत्ता और कार्यालय की सुरक्षा बनाये रखने के उद्देश्य से जारी किया गया है। इसका सभी स्तर पर सख्ती से पालन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यालय आने वाले आम लोगों के लिए बैठने, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था रहेगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कैमरों को बिहार स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (बिस्वान) अथवा हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़कर रिमोट मानिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी। अंचल अधिकारी कक्ष, प्रशासनिक कक्ष और मुख्य द्वार को अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कवरेज में रखा जाएगा। इसके माध्यम से पटना स्थित सेंट्रल कमांड सेंटर से सभी अंचल कार्यालयों की निगरानी की जा सकेगी। सभी जिलाधिकारी, अपर समाहर्ता, एसडीओ एवं डीसीएलआर मोबाइल ऐप के जरिए किसी भी समय लाइव फीड देख सकेंगे। अंचल अधिकारी को भी अपने मोबाइल पर सभी कैमरों की निगरानी सुनिश्चित करनी होगी।

विधायकों में तीखी भिड़ंत, विजय सिन्हा ने की विवादित टिप्पणी

पटना बिहार विश्वविद्यालयों में और उच्च शिक्षण संस्थाओं में यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन को लागू करने का प्रस्ताव विपक्ष की ओर से माले विधायक संदीप सौरभ ने पेश किया। इस दौरान में उन्होंने 'ब्राह्मणवाद'  शब्द का जिक्र कर दिया। इस पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक हंगामा करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने 'ब्राह्मणवाद' शब्द को फौरन सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। इसके बावजूद पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच आपस में भिड़ंत हो गई। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। विपक्ष की ओर से राजद विधायक आलोक मेहता ने भी पटलवार किया। सदन में क्या-क्या हुआ आइए जानते हैं? पहले जानिए माले विधायक ने क्या कहा?  माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि बिहार समेत विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न का मामला सामने आता है। उन्होंने रोहित वेमुला केस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी की ओर दी गई रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षक संस्थाओं में जाति आधारित उत्पीड़न के मामलों में 2019 से 2024 में 118 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इसके अलोक 2026 में इक्विटी गाइडलाइन की घोषणा की गई। लेकिन, इसे मजबूति से लागू करने की जगह ब्राह्मणवादी मानसिकता से प्रायोजित आंदोलन के बाद इसके स्थगित कर दिया गया। विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण स्थानों में जातीय उत्पीड़न को बिहार सरकार कानून लाकर लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह मांग करती है कि अध्यादेश लाकर इसे कानून का रूप देने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करे। साथ ही यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन को लागू करने का प्रस्ताव पारित करने की मांग करते हैं। डिप्टी सीएम ने कहा- यह लोग गद्दारी करते हैं माले विधायक संदीप सौरभ के बयान का भाजपा विधायक विरोध करने लगे। देखते ही देखते पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच नोंकझों होने लगी। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सदन की कार्यवाही से ब्राह्मण शब्द को हटाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत में सदन में जाति सूचक शब्द का प्रयोग नहीं करें। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि सदस्यों से अपील है कि अगर उन्हें संविधान में विश्वास है तो इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करें। हर समाज का सम्मान होता है। वह संविधान और संवैधानिक संस्था के निर्णय पर प्रश्न कैसे उठा सकते हैं। उनकी मानसिकता साफ झलकती है। हर समाज का मैं सम्मान करता हूं। इस तरह की मानसिकता गलत है। आज देश को कमजोर करने में, समाज में जहर घोलकर वो राष्ट्र के हितैषी नहीं हो सकते हैं। मैं भी टेक्निकल कॉलेज में पढ़ता था। किस तरह से मुजफ्फपुर में रैगिंग करवाई जाती थी। उस समय सत्ता किसकी थी। मैं भूमिहार ब्राह्मण समाज से आता हूं। हॉस्टल से बाहर निकलने पर विवश किया गया। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जातिगत भेदभाव से यह लोग बाबा साहेब के सपनों को तार-तार करना चाहते हैं। यह लोग राष्ट्र के हितैषी नहीं है। यह लोग समाज के साथ गद्दारी करते हैं। विजय सिन्हा की इस बात पर विपक्ष के विधायकों ने जमकर हंगामा किया। राजद और भाजपा विधायक ने क्या कहा? राजद विधायक आलोक मेहता ने कहा कि जातिवादी लोगों की मानसिकता साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि विधायक संदीप सौरभ ने किसी जाति का नाम नहीं लिया। उन्होंने ब्राह्मणवाद का नाम लिया। ब्राह्मणवाद कोई जाति नहीं है। जहां तक जाति की बात है कि पिछड़ा और दलित की बात कही जा रही है। उन्होंने विजय सिन्हा पर तंज कसते हुए कहा कि वह इस तरह की शब्दों का प्रयोग कर बता रहे है कि वह किस तरह की मानसिकता के हैं। जो लोग गलत किए हैं, उन्हें मिर्ची लग रही है। इसके बाद भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि विपक्ष के लोग ब्राह्मणवाद को समझते नहीं हैं। लेकिन, इन्हें ब्राह्मणों से काफी तकलीफ है। उन्होंने जिस ब्राह्मण का पैर तीनों लोकों के स्वामी भगवान कृष्ण अपने आंसुओं से करते हैं। जिस ब्राह्मण के बिना न शादी होती है और न श्राद्ध होती है। जिस ब्राह्मण ने भिक्षा मांगकर कासी हिन्दू विश्वविद्यालय बना दिया। आज इन्हें ब्राह्मण से परेशानी हो रही है।

लालू के ‘लाल’ को NDA का न्योता! विजय सिन्हा के भोज में दिखे तेज प्रताप यादव

पटना मकर संक्रांति के अवसर पर बिहार की सियासत गर्माई हुई है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के पटना स्थित आवास पर मंगलवार को आयोजित दही-चूड़ा भोज में सियासी जमावड़ा देखने को मिला। पूर्व मंत्री एवं जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव भी सिन्हा के भोज में पहुंचे, जो राजनीतिक गलियारे में चर्चा का केंद्र रहा। वहीं, तेज प्रताप को एनडीए से न्योता भी मिलने लगा है। नीतीश सरकार के दो मंत्रियों ने इस मौके पर कहा कि अगर वे एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत है।   डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया। इसमें सूबे के कई नेताओं को न्योता दिया गया था। सिन्हा के भोज में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत अन्य मंत्री, विधायक समेत कई नेता एवं कार्यकर्ता पहुंचे। हालांकि, इसमें चर्चा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप की रही। क्या बोले विजय सिन्हा और तेज प्रताप पत्रकारों से बातचीत में विजय सिन्हा ने कहा कि ‘एक बिहारी सब पर भारी’ का भाव जगाना है। तेज प्रताप की एनडीए में एंट्री के सवाल पर उन्होंने कहा कि आने वाले भविष्य में पता चल जाएगा। वहीं, जेजेडी चीफ ने भी इस पर कहा, “पता चल जाएगा, अभी क्यों बताना है।” तेज प्रताप ने कहा कि दही-चूड़ा भोज का आमंत्रण दिया गया था। हम अपना धर्म निभाने आए हैं। नेता लोग मिलते जुलते रहते हैं राजनीति अलग है। तेज प्रताप को एनडीए में आने का न्योता? रिपोर्ट्स के अनुसार, नीतीश सरकार में मंत्री एवं हम सुप्रीमो जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने कहा कि तेज प्रताप यादव एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत है। हालांकि, यह उनकी मर्जी के ऊपर निर्भर करता है। मंत्री रामकृपाल यादव ने भी तेज प्रताप के एनडीए में आने पर उनका स्वागत करने की बात कही। दरअसल, लालू परिवार और आरजेडी से बेदखल होने के बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई थी। उन्होंने हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर प्रत्याशी भी उतारे। हालांकि, जेजेडी एक भी सीट नहीं जीत पाई। चुनाव के बाद तेज प्रताप ने नीतीश सरकार को अपना नैतिक समर्थन दे दिया। इसके बाद से उनकी एनडीए नेताओं से नजदीकी की चर्चा चलती रही है। अब तेज प्रताप के भोज पर निगाहें तेज प्रताप यादव ने भी बुधवार को दही-चूड़ा भोज रखा है। पिछले दिनों वे विजय सिन्हा को निमंत्रण देने उनके आवास पर भी पहुंचे थे। उन्होंने एनडीए और महागठबंधन के कई नेताओं को दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया है। उनके यहां कौन-कौन नेता पहुंचते हैं। ऐसे में सबकी निगाहें उनके भोज पर टिक गई हैं।  

राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं: दोषी कर्मियों की नौकरी जाएगी और संपत्ति होगी जब्त : विजय सिन्हा

मुजफ्फरपुर बिहार के उपमुख्यमंत्री तथा राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोमवार को सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि सरकारी जमीन में दखिल खारिज या किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई गई, तो दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की बर्खास्तगी के साथ उनकी संपत्ति भी जब्त की जाएगी। विजय सिन्हा ने आज मुजफ्फरपुर में जमीन से जुड़े मामलों के समाधान के लिए जनता दरबार का आयोजन किया। जनता दरबार में कई मामलों में सरकारी जमीन में गलत तरीके से दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और हेराफेरी की शिकायतें भी सामने आईं, जिसके बाद उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी। इस जनता दरबार में जिले के विभिन्न प्रखंडों से बड़ी संख्या में फरियादी अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। मंत्री ने एक-एक कर लोगों की समस्याएं सुनीं और कई मामलों में संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार भी लगाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही, गड़बड़ी या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता दरबार के दौरान एक मामला जाति अंकन को लेकर सामने आया। एक व्यक्ति ने शिकायत की कि उसके खतियान में पहले 'भूमिहार ब्राह्मण' लिखा हुआ था, लेकिन अब उसे केवल 'भूमिहार' कर दिया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि इस संबंध में विभाग की ओर से पर्ची बांटी गई है। "भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' की नीति" इस पर मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ कहा कि यह किसी जाति विशेष की बैठक नहीं है, बल्कि बिहारियों की बैठक है। हम यहां किसी जाति के हित के लिए नहीं, बल्कि बिहार के लोगों के कल्याण के लिए बैठे हैं। मंत्री ने कहा कि खतियान में जो पहले से दर्ज है, वही मान्य होगा। यदि खतियान में 'भूमिहार ब्राह्मण' लिखा है तो वही रहेगा। इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा और न ही किसी अधिकारी को इसमें मनमानी करने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि पहले जो व्यवस्था चलती थी, वही आगे भी चलेगी और इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा साफ है और भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम किया जा रहा है। "फरियादियों को बार-बार चक्कर लगाने पर अधिकारी होंगे जिम्मेदार" मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के साथ न्याय करना उनकी जिम्मेदारी है। यदि किसी फरियादी को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, तो इसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। विजय कुमार सिन्हा ने जनता से अपील की कि किसी भी जमीन संबंधी समस्या के समाधान के लिए वे सबसे पहले स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि पहले अंचल कार्यालय और संबंधित थाने में अपनी शिकायत दर्ज करें। यदि वहां समाधान नहीं होता है, तो मामला अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) और फिर जिलाधिकारी (डीएम) तक ले जाएं। इसके बावजूद अगर समस्या का समाधान नहीं होता है, तभी मंत्री स्तर पर सुनवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों की कहीं भी सुनवाई नहीं हुई है, उनकी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाएगा। ऐसे मामलों में त्वरित कारर्वाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। जनता दरबार के दौरान कई फरियादियों ने मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं, जिनमें भूमि विवाद, दाखिल-खारिज में देरी, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और रिकॉर्ड में त्रुटि जैसे मामले शामिल थे। मंत्री ने कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और जल्द समाधान का भरोसा दिलाया। मंत्री के सख्त तेवर और स्पष्ट निर्देशों से जनता दरबार में मौजूद लोगों को उम्मीद की किरण दिखाई दी। लोगों ने कहा कि यदि इसी तरह जमीन मामलों में सख्ती बरती गई, तो आम लोगों को लंबे समय से चली आ रही परेशानियों से राहत मिल सकेगी।

किसे मिला कौन-सा विभाग? नीतीश के नए मंत्रिमंडल का पूरा ब्योरा

पटना बिहार में नीतीश सरकार के गठन के बाद अब मंत्रियों के विभाग का भी बटवारा कर दिया गया है. विभाग बटवार से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच एक अहम बैठक आयोजित की गई. इस बैठक के बाद बिहार कैबिनेट के सभी विभागों का मंत्रियों में बांट दिया गया. इस सूची को राज्यपाल को भी सौंपा गया है. मिली जानकारी के मुताबिक डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के पास गृहमंत्रालय है जबकि विजय कुमार सिन्हा को भूमि एवं राजस्व, खान एवं भूतत्व विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. खास बात यह है कि विभागों के आवंटन में वरिष्ठता, अनुभव और क्षेत्रीय एवं जातीय संतुलन को बड़ा ध्यान में रखा गया है. आइए जानते हैं कि विभाग बटवारे में किस को क्या मिला है? मुख्य चेहरे और उनकी जिम्मेदारियां – सम्राट चौधरी (डिप्टी सीएम) को गृह मंत्रालय की कमान मिली है, जो उनकी बढ़ती राजनीतिक मौजूदगी और भरोसे का संकेत है. – विजय कुमार सिन्हा (डिप्टी सीएम) को भूमि एवं राजस्व के साथ-साथ खान एवं भू-तत्व मंत्रालय सौंपा गया है- यह उनके प्रशासकीय अनुभव और क्षेत्रीय दायित्व को दिखाता है. – विजय कुमार चौधरीजल संसाधन और भवन मंत्रालय संभालेंगे, जो विकास एवं अवसंरचना दोनों के लिए अहम हैं. – वहीं दिलीप जायसवाल को उद्योग मंत्री बनाया गया है, जिससे बिहार की आर्थिक वृद्धि और औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. – श्रवण कुमारग्रामीण विकास कार्य और परिवहन विभाग की कमान संभालेंगे, ग्रामीण इलाकों में बेहतर संपर्क और विकास को उनकी जिम्मेदारी दी गई है. – अशोक चौधरीग्रामीण कार्य मंत्रालय में रहेंगे, जिससे स्थानीय सुदृढीकरण और सरकारी योजनाओं की पहुंच बनी रहेगी. – मदन सहनीसमाज कल्याण मंत्री होंगे, उनका ध्यान कमजोर वर्गों की सेवा पर रहेगा. – रमा निषाद पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा कल्याण विभाग का नेतृत्व करेंगी, जिससे समाज में समानता और अवसरों का विस्तार सुनिश्चित हो सके. – लखेन्द्र पासवान को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्रालय मिला है, जो सामाजिक न्याय को और मजबूत करेगा. अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालय – मंगल पांडेय स्वास्थ्य एवं विधि विभाग का जिम्मा सौंपा गया है. उनकी जिम्मेदारी सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानूनी सुधार दोनों पर रहेगी. – लेशी सिंह खाद्य उपभोक्ता मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगी, जो खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता हितों के लिए अहम है. – नितिन नवीन पथ निर्माण, नगर विकास और आवास विभाग देखेंगे, जिससे शहरी और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार को बल मिलेगा. – सुनील कुमार शिक्षा मंत्री होंगे, जो विद्यार्थियों की शिक्षा-ज्‍यादा अपनत्व सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे. – रामकृपाल यादव हरित क्रांति को आगे बढ़ाते हुए कृषि मंत्रालय का नेतृत्व संभालेंगे. – जमा खान अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री होंगे, समुदायों के सशक्तिकरण पर ध्यान देंगे. – संजय टाइगर श्रम संसाधन मंत्री होंगे, रोजगार और मजदूरों के हितों की रक्षा करेंगे. – अरुण शंकर प्रसाद पर्यटन, कला और संस्कृति मंत्रालय देखेंगे, जिससे सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. – सुरेन्द्र मेहता पशु एवं मत्स्य विभाग संभालेंगे, जो कृषि से जुड़े पशु-उत्पादन को सुदृढ़ बनाएगा. – नारायण प्रसाद आपदा प्रबंधन मंत्रालय में काम करेंगे- प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की जिम्मेदारी उनकी होगी. – श्रेयसी सिंह सूचना और खेल मंत्रालय की जिम्मेदारी लेंगी, जिससे खेल और संचार दोनों को बढ़ावा मिलेगा. – प्रमोद कुमार चंद्रवंशी सहकारिता, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को संभालेंगे, जो सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है. – दीपक प्रकाश और संजय पासवान को भी मंत्री बनाया गया है, हालांकि उनके विभागों की भूमिका अभी विस्तृत नहीं की गई है. राजनीतिक संतुलन और चुनौतियां इस विभाग-वितरण ने यह दर्शाया है कि नीतीश कुमार की अगुवाई वाली नई सरकार में अनुभव और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को बराबर महत्व मिला है. वरिष्ठ मंत्रियों को उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्र में रखा गया है, जबकि सामाजिक न्याय और विकास मंत्रालयों में पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों को भी भरोसे का दायित्व सौंपा गया है. अब अगला कदम नई कैबिनेट की पहली बैठक होगी, जिसमें सरकार की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी और नई नीतिगत दिशा का खाका तैयार किया जाएगा.

नीतीश कुमार को जदयू विधायक दल की कमान, भाजपा ने सम्राट चौधरी को बनाया नेता—विजय सिन्हा उपनेता

पटना जनता दल यूनाईटेड के नवनिर्वाचित विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को फिर से अपना नेता चुन लिया है। बुधवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री आवास में जदयू के विधायक दल की बैठक हुई। साढ़े 11 बजे जदयू के विधायकों ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुन लिया है। जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि बिहार की जनता उत्साहित है, उन्होंने नीतीश कुमार अपना नेता चुना है। मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी की पहली और अंतिम पसंद नीतीश कुमार ही हैं। नई सरकार में मंत्री बनाए जाने के सवाल पर रजक ने कहा कि इसका फैसला नीतीश कुमार करेंगे। विधायक दल की बैठक से पहले जदयू विधायक मनोरमा देवी ने कहा कि यह बिहार के लिए बहुत अच्छा दिन है। हमारे अभिभावक नीतीश कुमार जी हैं और वह सभी के कल्याण के लिए काम करेंगे। इधर, भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की बैठक पार्टी कार्यालय में हो रही है। भाजपा के विधायकों ने सम्राट चौधरी के विधायक दल का नेता चुन लिया है। यानी वह डिप्टी सीएम बनेंगे। वहीं विजय सिन्हा को उपनेता चुना गया है। वह भी दूसरे डिप्टी सीएम बन सकते हैं। लेकिन, दूसरे डिप्टी सीएम पद के लिए फिलहाल मंथन जारी है। भाजपा दोनों डिप्टी सीएम का पद अपने पास रखना चाहती है। इधर, 19 सीट लाने वाली चिराग पासवान की पार्टी एक डिप्टी सीएम समेत तीन मंत्री का पद चाहती है। इस मुद्दे पर भी बातचीत चल रही है। दोपहर 3.30 बजे विधानसभा के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक होगी। इसमें भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाईटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा, लोक जनशक्ति पार्टी के सभी नव निर्वाचित विधायक और नीतीश कुमार, चिराग पासवान, संतोष सुमन, उपेंद्र कुशवाहा, सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा मौजूद रहेंगे। इधर, कुछ ही देर में गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचेंगे। वह भारतीय जनता पार्टी की बैठक में शामिल होंगे।

बिहार में सियासी बवाल: विजय सिन्हा के काफिले पर हमला, उपमुख्यमंत्री ने RJD पर लगाया आरोप

पटना बिहार चुनाव के बीच लखीसराय से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। दरअसल राजद (RJD) समर्थकों ने उपमुख्यमंत्री और लखीसराय निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा की कार को घेर लिया, चप्पल फेंकी और "मुर्दाबाद" के नारे लगाते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री और  लखीसराय विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा ने कहा, "ये राजद के गुंडे हैं। NDA सत्ता में आ रही है… गुंडे मुझे गांव में जाने नहीं दे रहे हैं। विजय सिन्हा जीतने वाले हैं…उन्होंने मेरे पोलिंग एजेंट को भगा दिया और उसे वोट नहीं देने दिया…उनकी गुंडागर्दी देखिए…।" आरजेडी के गुंडों ने बूथ कैप्चर किया है। आरोपियों पर बुलडोडर एक्शन होगा। हम निर्वाचन आयोग से शिकायत करेंगे।