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पटना में डिप्टी सीएम पद को लेकर भ्रम, विजय कुमार चौधरी ने बताया- पद समाप्त नहीं हुआ

 पटना  उप मुख्यमंत्री से जुड़ी मंत्रिमंडल विभाग की अधिसूचना को लेकर इंटरनेट मीडिया पर बहस चल रही है। यूजर प्रश्न पूछ रहे हैं-क्या राज्य में उप मुख्यमंत्री का पद समाप्त हो गया है? विभागीय सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने साफ किया-उप मुख्यमंत्री का पद समाप्त नहीं हुआ है। वह कायम है। हरेक अधिसूचना में पदनाम का उल्लेख करना जरूरी नहीं होता है। 7 मई की अधिसूचना पर शुरू हुई चर्चा बहस की शुरुआत सात मई की अधिसूचना से हुई है। इसमें मुख्यमंत्री और मंत्रियों के विभागों को अधिसूचित किया गया है। पदनाम में मुख्यमंत्री और मंत्री लिखा हुआ है। विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम के साथ उप मुख्यमंत्री पदनाम का उल्लेख नहीं है। इन दोनों का नाम भी मंत्रियों की श्रेणी में है। नाम के साथ विभागों का विवरण दिया गया है। विभागीय सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने पूछने पर बताया कि 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री के अलावा दो उप मुख्यमंत्रियों का शपथ ग्रहण हुआ था। उस दिन जारी अधिसूचना में दोनों के पदनाम उप मुख्यमंत्री दिए गए हैं। वही मान्य है। वैसे, सोशल मीडिया के यूजर इस तर्क से सहमत नहीं हैं। वे पिछले साल के 21 नवंबर को जारी इसी विभाग की अधिसूचना का हवाला दे रहे हैं। डिप्‍टी सीएम के रूप में व‍िजय कुमार स‍िन्‍हा का नाम उसमें तत्कालनीन उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय कुमार सिन्हा के नाम के सामने उप मुख्यमंत्री लिखा हुआ है। वैसे संविधान में उप मुख्यमंत्री के पद का उल्लेख नहीं है। उसमें मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के अन्य पदधारक मंत्री, राज्य मंत्री, उप मंत्री आदि की चर्चा है। आज भी मुख्यमंत्री को छोड़ कर मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य मंत्री पद की ही शपथ लेते हैं। मुद्रण की भूल हो सकती है: उप मुख्यमंत्री सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नाम के साथ पदनाम का जिक्र नहीं होना मुद्रण की भूल हाे सकती है।विभाग वाले इसमें सुधार कर लेंगे।

दिल्ली पहुंचे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य-ब्रजेश पाठक, यूपी कैबिनेट विस्तार जल्द संभव

  लखनऊ  उत्‍तर प्रदेश में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्‍तार जल्‍द ही हो सकता है। पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद योगी आदित्‍यनाथ सरकार में कुछ नए मंत्री शामिल हो सकते हैं। शनिवार को दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी दिल्ली रवाना हो गए। सूत्रों के अनुसार, तीनों राष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात करेंगे। इससे यूपी में बड़े बदलावों की चर्चा फिर तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कई बदलावों पर मंत्रणा हो सकती है। चुनाव की तैयारी, यूपी मंत्रिमंडल विस्तार के साथ क्षेत्रीय संतुलन पर मंथन हो सकता है। खासतौर से पश्चिमी यूपी के समीकरण साधने और क्षेत्रीय संतुलन पर चर्चा होगी। मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं नए चेहरे पश्चिम बंगाल चुनाव निपटाने के बाद भाजपा का पूरा ध्‍यान अब उत्‍तर प्रदेश पर है। सूत्रों का कहना है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कई मंत्रियों के विभागों में बदलाव हो सके हें। मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों को भी शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही पंकज चौधरी के नेतृत्‍व वाली यूपी बीजेपी संगठन में भी एक नई टीम देखने को मिल सकती है। बताया जा रहा है कि जिन नेताओं ने संगठन को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है, उनको सरकार में जगह मिल सकती है। इसके अलावा संगठन को और मजबूत करने, बूथ स्‍तर पर पकड़ बनाने और चुनावी मुद्दों को धार देने पर चर्चा होगी। अप्रैल में विनोद तावड़े ने सीएम योगी से की थी मुलाकात बीते अप्रैल में भाजपा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े ने सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। माना गया कि तावड़े ने सीएम से प्रदेश भाजपा की नई टीम, निगम-आयोग में खाली पदों पर नियुक्ति के साथ मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल होने वाले संभावित चेहरों को लेकर चर्चा की। वह वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा से भी मिले थे। खराब कामकाज वाले मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है कई मंत्रियों के कामकाज से संगठन खुश नहीं है। माना जा रहा है कि जिनका काम खराब है, उन्हें संगठन में भेजा जा सकता है। कुछ को केंद्रीय संगठन और कुछ को प्रदेश संगठन में मौका मिल सकता है। वहीं, संगठन में जिन्हें एमएलसी या विधायक बनाया जा चुका है, उन्हें संगठन के काम से मुक्त किया जा सकता है।

‘बड़े भाई’ वाले बयान पर विजय सिन्हा ने दी सफाई, कहा- मैं सीएम की रेस में नहीं

पटना. बिहार की राजनीति में इन दिनों नए मुख्यमंत्री को लेकर कयासों का दौर तेज है। सत्ता परिवर्तन की अटकलों के बीच कई वरिष्ठ नेताओं ने यह संकेत दिया है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा से हो सकता है। हालांकि, पार्टी की ओर से अब तक किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। इसी बीच उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने खुद को मुख्यमंत्री पद की दौड़ से अलग बताया है। सेवक की भूमिका में हैं, क‍िसी रेस में नहीं पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह 'सेवक की भूमिका' में हैं, किसी पद की रेस में नहीं। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार पहले भी एनडीए की थी, अब भी है और आगे भी रहेगी। गठबंधन की एकजुटता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें न कोई बड़ा भाई है, न छोटा, सभी बराबरी के भागीदार हैं। उनके अनुसार, यही भावना सामाजिक सद्भाव को मजबूत करेगी और राज्य के विकास को गति देगी। 10 अप्रैल को राज्‍यसभा की शपथ लेंगे नीतीश उधर, मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की तैयारी ने सियासी हलचल और बढ़ा दी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के मुताबिक, नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा की शपथ ले सकते हैं। माना जा रहा है कि इसके बाद वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे राज्य में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ होगा। इधर, उत्तराधिकार को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। निशांत कुमार को राजनीति में सक्रिय करने और उन्हें विधान परिषद के रास्ते आगे बढ़ाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ हलकों में उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी उठ रही है, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति फिलहाल संभावनाओं और अटकलों के दौर से गुजर रही है, जहां आने वाले कुछ दिन बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

न्याय व्यवस्था में बड़ा सुधार: डिप्टी सीएम ने बताए किन जिलों में खुलेंगे नए फास्ट ट्रैक कोर्ट

पटना बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि बिहार में 100 फास्ट ट्रैक न्यायालयों (FTC) का गठन किया जाएगा। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन, न्यायालय का बोझ कम करना और संवेदनशील प्रकृति के मामलों पर उचित ध्यान और समय देना है। उन्होंने कहा- राज्य के विभिन्न न्यायालयों में 18 लाख से अधिक लंबित मामलों के मद्देनज़र ये फास्ट ट्रैक न्यायालय बड़ी राहत देने वाले साबित होंगे। उन्होंने बताया कि पटना में आठ फास्ट ट्रैक अदालतें प्रस्तावित हैं जबकि गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और भागलपुर में चार-चार अदालतें स्थापित की जाएंगी। नालंदा (बिहारशरीफ), रोहतास (सासाराम), सारण (छपरा), बेगूसराय, वैशाली (हाजीपुर), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), समस्तीपुर और मधुबनी में तीन-तीन फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी। इसी तरह पश्चिम चंपारण (बेतिया), सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर, नवादा, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, कैमूर (भभुआ), बक्सर, भोजपुर (आरा), सीतामढ़ी, शिवहर, सीवान, गोपालगंज, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज, कटिहार, बांका, जमुई, शेखपुरा, लखीसराय और खगड़िया में दो-दो फास्ट ट्रैक अदालतें संचालित होंगी। इसके अतिरिक्त नवगछिया और बगहा उप-मंडलीय न्यायालय में एक-एक फास्ट ट्रैक अदालत स्थापित करने का प्रस्ताव है। 900 पदों पर नियुक्ति भी की जाएगी उन्होंने बताया कि जिलापदाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से चिन्हित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन किया जाएगा।  राज्य के 38 जिलों और उप-मंडलों में कुल 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाने के लिए कर्मियों की नियुक्ति भी बड़े पैमाने पर की जाएगी। प्रत्येक अदालत के लिए आठ प्रकार के पदों जैसे, बेंच क्लर्क, कार्यालय लिपिक, स्टेनोग्राफर, डिपोज़िशन राइटर, डेटा एंट्री ऑपरेटर, ड्राइवर, प्रोसेस सर्वर और चपरासी या ऑर्डर्ली के कुल 900 पदों पर नियुक्ति प्रस्तावित है। 79 न्यायालय एक्ट कोर्ट के रूप में नामित उपमुख्यमंत्री चौधरी ने कहा- शस्त्र अधिनियम से संबंधित लंबित मामलों के त्वरित निपटारे हेतु 79 न्यायालयों को एक्ट कोर्ट के रूप में नामित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि शस्त्र अधिनियम जैसे गम्भीर मामलों का शीघ्र समाधान कानून व्यवस्था को मजबूत करेगा।  राज्य सरकार न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है। यही वजह है कि 100 फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन किया जाएगा।

डिप्टी सीएम शर्मा का दावा: चैतू दादा और अनंत के आत्मसमर्पण से नक्सलवाद के बचे 20% का भी अंत तय

रायपुर छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी में हुए बड़े नक्सल हमले के मास्टरमाइंड व नक्सली लीडर चैतू और अनंत ने शुक्रवार को आत्मसमर्पण कर दिया है. प्रदेश के डिप्टी सीएम व गृह मंत्री विजय शर्मा ने प्रशासन की इस बड़ी उपलब्धी समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने बताया कि बस्तर और समूचे देश से नक्सलवाद खत्म होने के कगार पर है. डिप्टी सीएम शर्मा ने आगे कहा कि चैतू और अनंत ने अपने साथियों के साथ पुर्नवास किया है. बस्तर समेत पूरे देश में नक्सलवाद खत्म होने की कगार पर है. इससे प्रदेश में शांति आनी चाहिए और शांति आ रही है. उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के संकल्प का जिक्र करते हुए कहा- “गृहमंत्री बनने के साथ ही अमित शाह ने कहा था कि देश में कहीं समस्या है तो समानता के साथ उसे खत्म किया जाएगा. नक्सलवाद को भी इसी संकल्प के साथ खत्म किया जाएगा. साथ ही निर्धारित समय का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक 80 प्रतिशत नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और मात्र 20 प्रतिशत ही बचा है, जो निर्धारित समय में खत्म हो जाएगा. वहीं बस्तर 2.0 को लेकर उन्होंने कहा कि बस्तर में जल, जंगल, जमीन सब बस्तर के लोगों का है. बस्तर के युवा ही बस्तर को संभालेंगे और वे इसके लिए उत्साहित भी हैं. उन्होंने जीडीपी में बढ़ोतरी को लेकर कहा कि जीडीपी में बढ़ोतरी सुखद है, अमेरिका के टैरिफ के बावजूद जीडीपी में बढ़ोतरी हुई है. ये देश के लोगों के परिश्रम से संभव हुआ है. कांग्रेस जिला अध्यक्ष नियुक्ति पर कसा तंज इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस जिला अध्यक्षों की नियुक्ति में बड़े नेताओं के पसंदीदा लोगों को पद मिलने को भी उन्होंने तंज कसा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस-भाजपा के परंपराओं में फर्क है. कांग्रेस में व्यक्ति प्रमुख होता है. भाजपा में संस्था और संगठन प्रमुख होता है. इसीलिए कांग्रेस में ऐसी स्थिति पैदा होती है. कलेक्टर गाइडलाइन के खिलाफ कांग्रेस के विरोध पर कसा तंज वहीं जमीन गाईडलाईन दर को लेकर लगातार हो रहे कांग्रेस के विरोध को लेकर विजय शर्मा ने कहा कि अगर जनता, किसी आमजन को तकलीफ है, तो जरूर सुनवाई होगी. लेकिन किसी व्यक्ति विशेष को परेशानी है, उसके लिए कांग्रेस आगे आ रही है, तो उसपर कुछ नहीं हो सकता. वहीं दिल्ली में वायू प्रदूषण को लेकर दिए गए राहुल गांधी के बयान पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के चश्मे से या इटली के चश्मे से नहीं, बल्कि भारत के चश्मे से राहुल गांधी को देखना होगा. तब उन्हें पता चलेगी वास्तविक स्थिति.

बिहार में सियासी बवाल: विजय सिन्हा के काफिले पर हमला, उपमुख्यमंत्री ने RJD पर लगाया आरोप

पटना बिहार चुनाव के बीच लखीसराय से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। दरअसल राजद (RJD) समर्थकों ने उपमुख्यमंत्री और लखीसराय निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा की कार को घेर लिया, चप्पल फेंकी और "मुर्दाबाद" के नारे लगाते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री और  लखीसराय विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा ने कहा, "ये राजद के गुंडे हैं। NDA सत्ता में आ रही है… गुंडे मुझे गांव में जाने नहीं दे रहे हैं। विजय सिन्हा जीतने वाले हैं…उन्होंने मेरे पोलिंग एजेंट को भगा दिया और उसे वोट नहीं देने दिया…उनकी गुंडागर्दी देखिए…।" आरजेडी के गुंडों ने बूथ कैप्चर किया है। आरोपियों पर बुलडोडर एक्शन होगा। हम निर्वाचन आयोग से शिकायत करेंगे।

तारापुर से सम्राट चौधरी की चुनौती, भाजपा ने डिप्टी CM को पुश्तैनी सीट से बाहर किया

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए बीजेपी ने बड़ा दांव खेला है। पार्टी ने अपने कद्दावर नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को तारापुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। सम्राट तारापुर से 16 अक्टूबर को नामांकन करेंगे। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की कैंडिडेट लिस्ट अभी नहीं आई है। तारापुर सिर्फ एक चुनावी सीट नहीं, बल्कि सम्राट चौधरी के परिवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ी भूमि है। उनके पिता शकुनी चौधरी यहां से कई बार विधायक रह चुके हैं, जबकि उनकी मां पार्वती देवी भी एक बार इसी सीट से विधानसभा पहुंची थीं। गौरतलब है कि सम्राट चौधरी मौजूदा वक्त में विधान परिषद के सदस्य हैं। सम्राट चौधरी की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प रही है। वे हमेशा से विधान परिषद के सदस्य नहीं रहे, बल्कि पहले राजद (RJD) से दो बार विधायक बन चुके हैं। भाजपा में आने से पहले वो दो बार राजद के विधायक बने हैं। खगड़िया जिले की परबत्ता सीट से सम्राट चौधरी पहली बार 2000 और दूसरी बार 2010 में विधानसभा पहुंचे थे। उनसे हारने और उनको हराने वाले जेडीयू नेता रामानंद प्रसाद सिंह भी परबत्ता से चार के विधायक रहे। रामानंद के बेटे संजीव सिंह 2020 में परबत्ता से जेडीयू के विधायक बने थे लेकिन अब तेजस्वी यादव के साथ हैं और अब राजद के टिकट पर लड़ेंगे। हाल ही में प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी को घेरते हुए एक पुराना मामला उठाया। उन्होंने तारापुर हत्याकांड (1995) का जिक्र किया और उनकी उम्र और रिहाई पर सवाल उठाए। जानकार बताते हैं कि यह केस भी तारापुर के चुनावी माहौल से जुड़ा था, जब उनके पिता शकुनी चौधरी ने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। इस पुराने विवाद ने अब फिर से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है, खासकर तब जब सम्राट खुद उसी सीट से ताल ठोकने जा रहे हैं।  

एक नाम, दो वोटर कार्ड— तेजस्वी का डिप्टी CM पर गंभीर आरोप

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में दो वोटर आईडी कार्ड वाले विवाद को लेकर सियासत काफी गर्म है। दरअसल बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के पास दो ईपिक नंबर होने की जब बात सामने आई थी तब चुनाव आयोग ने तेजस्वी यादव को खत लिख इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा था। अब राजद नेता तेजस्वी यादव ने बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा पर बड़ा आरोप लगाया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के नाम से दो वोटर आईकार्ड है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि लखीसराय और पटना के वोटर लिस्ट में विजय सिन्हा का नाम है और तो क्या प्रशासन या चुनाव आयोग उन्हें नोटिस भेजेगा? रविवार को अपने सरकारी आवास एक पोलो रोड में पत्रकारों से बातचीत में तेजस्वी ने कहा कि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के पास दो मतदाता पहचान पत्र है। एक लखीसराय तो दूसरा पटना का मतदाता पहचान पत्र है। अगर विजय सिन्हा ने खुद फॉर्म नहीं भरा तो आयोग बताए कि उनका दो जगह पहचान पत्र कैसे बना। दिलचस्प यह है की दोनों कार्ड में उनकी उम्र भी अलग-अलग है। इससे साफ है कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया फर्जीवाड़ा है।