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जबलपुर में खराब रिजल्ट पर 33 शिक्षकों को नोटिस, तीन दिन का अल्टीमेटम दिया, जनशिक्षकों ने किया विरोध

 जबलपुर
 कक्षा पांचवीं और आठवीं के हाल ही में घोषित परीक्षा परिणामों को लेकर जिले में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में 33 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें 14 जनशिक्षक और 19 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं।

नोटिस में क्या कहा गया
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों को पहले ही पाठ्यक्रम समय पर पूरा करने, छात्रों से नियमित अभ्यास कराने और बेहतर परीक्षा परिणाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कई स्कूलों के परिणाम जिले में सबसे कमजोर पाए गए।

प्रशासन का मानना है कि इस लापरवाही के कारण जबलपुर जिला राज्य स्तर पर पिछड़े जिलों की श्रेणी में आ गया है, जो चिंता का विषय है। इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित शिक्षकों से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

लापरवाही पर सख्त रुख
शिक्षा विभाग ने इसे केवल सामान्य चूक नहीं, बल्कि जिम्मेदारी में कमी माना है। अधिकारियों के अनुसार, छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। इसलिए कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों और उनसे जुड़े शिक्षकों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

जनशिक्षकों का विरोध, निर्णय पर सवाल
दूसरी ओर, इस कार्रवाई को लेकर जनशिक्षकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अभी घोषित परीक्षा परिणाम अंतिम नहीं हैं। वर्तमान में री-टोटलिंग और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है, जिससे कई छात्रों के अंक बढ़ सकते हैं।

उन्होंने बताया कि कई विद्यार्थी मात्र एक-एक अंक से असफल हुए हैं, ऐसे में पुनर्मूल्यांकन के बाद परिणाम में सुधार संभव है। इसके अलावा 15 जून के बाद आयोजित होने वाली द्वितीय परीक्षा को भी अंतिम परिणाम में शामिल किया जाना चाहिए, तभी वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

कार्रवाई पर उठे सवाल
जनशिक्षकों ने यह भी सवाल उठाया है कि कार्रवाई केवल जनशिक्षकों और कुछ प्राथमिक शिक्षकों तक ही सीमित क्यों रखी गई है। उनका कहना है कि ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (BRC) और संकुल प्राचार्य स्तर के अधिकारियों को इस दायरे से बाहर रखा गया है, जबकि शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सामूहिक होती है। शिक्षकों का तर्क है कि यदि जवाबदेही तय करनी है तो सभी संबंधित स्तरों पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।

अतिरिक्त कार्यों से प्रभावित हुई पढ़ाई
शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले चार महीनों के दौरान उन्हें एसआइआर जैसे प्रशासनिक कार्यों में प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तक व्यस्त रखा गया। इससे नियमित कक्षा शिक्षण प्रभावित हुआ। उनका कहना है कि जब शिक्षक कक्षा में पर्याप्त समय नहीं दे पाएंगे, तो छात्रों के प्रदर्शन पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

फिलहाल शिक्षा विभाग पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है। शिक्षकों के जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि छात्रों के हित में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।

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