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पाकिस्तानी मिसाइल दिल्ली की ओर बढ़ी, लेकिन कैसे रास्ते में हुई ढेर? ऑपरेशन सिंदूर ने खोला राज

 नई दिल्ली

ऑपरेशन सिंदूर के वक्त दिल्ली की तरफ बढ़ती उस पाकिस्तानी मिसाइल को शायद यह अंदाज़ा नहीं था कि वह हिंदुस्तान की सरहद नहीं, बल्कि जज़्बे की दीवार से टकराने जा रही है. हरियाणा के आसमान में ही उसे मिट्टी में मिलाकर इंडियन एयरफोर्स ने साबित कर दिया था कि भारत पर आंख उठाने वालों का अंजाम क्या होता है. ऑपरेशन सिंदूर की यह कहानी सिर्फ एक सैन्य सफलता नहीं, बल्कि दुश्मन के लिए सख्त पैगाम है कि अगर कोई हमारे घर की तरफ बढ़ेगा, तो उसका नाम और निशान दोनों नहीं बचेगा। 

इंडियन एयरफोर्स ने मई 2025 में पाकिस्तान की तरफ से दागी गई फतेह या शाहीन सीरीज की बैलिस्टिक मिसाइल को दिल्ली पहुंचने से पहले ही हरियाणा के ऊपर सफलतापूर्वक खत्म कर दिया था. यह कार्रवाई पश्चिमी सीमा के पास रणनीतिक रूप से जरूरी सिरसा एयर बेस पर तैनात वायुसेना की यूनिट ने अंजाम दी थी। 

एयर कोमोडोर रोहित कपिल के नेतृत्व में एयर डिफेंस ग्रिड ने तत्काल जवाब देते हुए बराक-8 (Barak-8) सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम का उपयोग किया. सिरसा से बरामद मलबे ने उस वक्त इस बड़े खतरे का इशारा किया था. यह सफल ऑपरेशन भारत की सैन्य तत्परता और आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है, जिसने युद्ध के दौरान एक बड़े खतरे को टाल दिया था। 

एयर कोमोडोर रोहित कपिल का नेतृत्व
इस निर्णायक ऑपरेशन का नेतृत्व 45 विंग के एयर ऑफिसर कमांडिंग, एयर कोमोडोर रोहित कपिल ने किया था. उनके सटीक फैसलों और त्वरित जवाबी कार्रवाई की वजह से ही दिल्ली पर होने वाला हमला नाकाम हो सका. उनकी इस बहादुरी और रक्षात्मक व आक्रामक योजना के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें साल 2025 में 'युद्ध सेवा मेडल' से सम्मानित किया था। 

सिरसा की यह घटना भारत के विकसित होते एयर डिफेंस आर्किटेक्चर का एक उदाहरण बन गई है. मौजूदा वक्त में 'सुदर्शन प्रोग्राम' के तहत देश भर में एक मल्टी-लेवल सुरक्षा घेरा तैयार किया जा रहा है. इसमें एस-400, बराक-8 और स्वदेशी इंटरसेप्टर सिस्टम को इंटीग्रेटेड किया जा रहा है. सिरसा इंटरसेप्ट आधुनिक युद्ध में सतर्कता और आपसी कोऑर्डिनेशन की अहमियत की याद दिलाता है। 

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