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लालू-नीतीश विवाद पर सम्राट चौधरी का बयान, पुराने मामलों का किया जिक्र

पटना

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि उनकी पाठशाला है। उन्हें सलाह है कि बपौती वाली सोच से से बाहर निकलिए। सत्ता किसी की बपौती नहीं है। मुख्यमंत्री का पद 14 करोड़ बिहारियों का आशीर्वाद है और इसीलिए आज मैं यहां बैठा हूं। नीतीश कुमार, पीएम नरेंद्र मोदी जी, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जितनराम मांझी का आशीर्वाद प्राप्त है तब यहां बैठा हूं। किसी गलतफहमी में नहीं रहिए। इससे पहले तेजस्वी यादव ने कहा था कि सम्राट चौधरी लालू यादव की पाठशाला से निकले हैं। वे ऑरिजनल भाजपाई नहीं हैं इसलिए बीजेपी और आरएसएस के लोगों की नजर में खटक रहे हैं।

सम्राट चौधरी ने कहा कि 1994 में समता पार्टी का गठन हुआ। नीतीश कुमार जी का मुख्यमंत्री बनना था। मेरे पिताजी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं। मैं उसमें 1995 में सदस्य बना और लालू यादव जी ने मुझे जेल में डाल दिया। सिर्फ मुझे नहीं बल्कि मेरे परिवार के 22 लोगों को जबरदस्ती सलाखों के पीछे भेज दिया। मैं आधिकारिक रूप से कह रहा हूं कि मिलर स्कूल के मैदान में लाल यादव जी ने इसके लिए माफी मांगी थी कि गलती हो गई।

नीतीश कुमार ने लालू जी को सीएम बनाया
सम्राट चौधरी ने अपने ऊपर मुकदमा के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार नहीं होते तो लालू यादव कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाते। लालू जी को नीतीश कुमार जी ने ही मुख्यमंत्री बनाया। यह जानकारी इन लोगों को होना चाहिए। मेरी राजनीति में लालू यादव जी का अत्याचार नहीं होता तो मैं बिहार का मुख्यमंत्री नहीं बन पाता।

कोई गलतफहमी में नहीं रहे
उन्होंने कहा कि भाजपा के बारे में कोई बात नहीं करे। पार्टी ने मुझे विपक्ष का नेता बनाया, फिर पार्टी का अध्यक्ष बनाया, दो-दो बार डिप्टी सीएम बनाया और आज मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया। किसी गलतफहमी में ना रहें, पूरी पार्टी एक है। हमारे दल में कोई किसी के विरोध में नहीं है। पूरा एनडीए एक साथ मिलकर बिहार के विकास के लिए काम कर रहा है।

आप काफी पीछे छूट गए…
अपनी उम्र पर उठे विवाद को लेकर सम्राट चौधरी ने कहा कि 1995 में अगर मैं नाबालिग होता तो जेल नहीं भेजा जाता। मुझे बाल सुधार में रखा जाता। कानूनी मामलों में लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई हुई और कोर्ट ने जो आदेश दिया उसी के अनुकूल काम कर रहा हूं। अपनी पढ़ाई को लेकर मुख्यमंत्री ने तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा कि डिग्री में आप काफी पीछे छूट गए। मेरी डिग्री पर जब तक यूजीसी ने मान्यता नहीं दे दी तब तक एफिडेविट भी नहीं किया। लोग मेरे एफिडेविट बोलने पर भी आलोचना करते हैं। उन्हें पता होना चाहिए कि बिहार में सामान्य बोलचाल में इसे हाफिडिफीट ही कहा जाता है।

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