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25 अप्रैल का राशिफल: कुछ राशियों के लिए रहेगा शुभ, कुछ को नई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है

मेष राशि आपका स्वभाव हल्का-फुल्का और मजाकिया रहेगा, जिससे लोग खुश होंगे, लेकिन परिवार में किसी बात को लेकर मनमुटाव हो सकता है। आर्थिक रूप से अप्रत्याशित लाभ के योग हैं, हालांकि जीवनसाथी के खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है। कार्यों के साथ आराम भी जरूरी है, वरना हेल्थ प्रभावित हो सकता है। कार्यक्षेत्र में पुराने तरीकों को बदलने की जरूरत है। किसी बड़े-बुजुर्ग की सलाह आपके लिए मार्गदर्शक साबित होगी। वृषभ राशि आपका व्यक्तित्व आकर्षक रहेगा और लोग आपकी कार्यशैली की सराहना करेंगे। बड़े भाई या परिवार से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। आर्थिक मामलों में उधार चुकाने के लिए दिन अच्छा है। काम में नई तकनीक अपनाना लाभदायक रहेगा। परिवार में खुशियां आएंगी और प्रेम संबंधों में गहराई बढ़ेगी। स्वास्थ्य के लिहाज से वजन और खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। मिथुन राशि कार्यक्षेत्र में व्यस्तता बढ़ेगी जिससे थकान हो सकती है, लेकिन आपके काम की सराहना भी होगी। रुका हुआ धन वापस मिलने और संतान से लाभ के योग हैं, हालांकि खर्च बढ़ सकते हैं। करियर में आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। प्रेम संबंध मजबूत होंगे, लेकिन जीवनसाथी के व्यवहार में बदलाव आपको सोचने पर मजबूर कर सकता है। कर्क राशि ध्यान और योग से स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। आर्थिक रूप से लाभ के संकेत हैं, खासकर पहले दिया गया पैसा वापस मिल सकता है। बिजनेस में आत्मविश्वास से सफलता मिलेगी और आय बढ़ेगी। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। घरेलू जिम्मेदारियों के कारण थोड़ी व्यस्तता रहेगी, लेकिन करियर में नए अवसर भी मिल सकते हैं। सिंह राशि आपको आराम और परिवार के साथ समय बिताने की जरूरत है, हालांकि काम का दबाव आपको व्यस्त रख सकता है। कार्यस्थल की राजनीति से दूर रहें और सतर्कता बनाए रखें। भाई-बहन की मदद से लाभ मिल सकता है। स्वास्थ्य को लेकर आंखों और शरीर की थकान पर ध्यान दें। प्रेम संबंधों में सुधार के लिए धैर्य और समझदारी जरूरी है। कन्या राशि कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन सराहनीय रहेगा और नए अवसर मिल सकते हैं। बिजनेस में नए प्रोडक्ट या रणनीति से लाभ होगा। आर्थिक रूप से लाभ के योग हैं, लेकिन खर्च भी बढ़ सकते हैं। रिश्तों में व्यवहार को मधुर रखना जरूरी है, वरना विवाद हो सकता है। भूमि या संपत्ति में निवेश फायदेमंद रहेगा। तुला राशि आर्थिक मामलों में सतर्क रहना जरूरी है, लेकिन सही निर्णय लेने पर लाभ मिलेगा और कर्ज से राहत भी मिल सकती है। व्यापार में मुनाफा होगा और महत्वपूर्ण संपर्क बनेंगे। पुराने दोस्तों से मुलाकात संभव है। पारिवारिक विवाद में आपकी भूमिका अहम रहेगी। लव लाइफ में उतार-चढ़ाव रह सकते हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखें। वृश्चिक राशि स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और रुका हुआ धन वापस मिलने के संकेत हैं। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा और नए अवसर मिल सकते हैं। परिवार के साथ अच्छा समय बितेगा और कोई आउटिंग प्लान हो सकता है। रिश्तों में मजबूती आएगी, लेकिन भावनाओं पर नियंत्रण रखना जरूरी है। किसी नए व्यक्ति से मुलाकात जीवन में बदलाव ला सकती है। धनु राशि प्रॉपर्टी या कानूनी मामलों में सावधानी बरतें, फैसले आपके पक्ष में नहीं भी जा सकते हैं। व्यापार में नई डील करते समय जल्दबाजी से बचें और पार्टनरशिप में मतभेद हो सकते हैं। कार्यस्थल पर आलस्य नुकसानदायक रहेगा। परिवार और जीवनसाथी से बातचीत में शब्दों का चयन सोच-समझकर करें। सेहत के लिए नियमित व्यायाम जरूरी है। मकर राशि आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और टीमवर्क से कार्य सफल होंगे। निवेश से लाभ के योग हैं। परिवार में कोई शुभ कार्य या आयोजन हो सकता है। प्रेम संबंध मधुर रहेंगे और विद्यार्थी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। खुद को अपडेट करने और नई चीजें सीखने का प्रयास करें। कुंभ राशि दोस्तों के साथ अच्छा समय बितेगा और मानसिक शांति महसूस होगी। कार्यक्षेत्र में भाग्य का साथ मिलेगा और ट्रांसफर या बदलाव के योग बन सकते हैं। अनुभवी व्यक्ति की सलाह से व्यापार में सुधार होगा। प्रेम जीवन में संयम रखें और गुस्से से बचें। परिवार का सहयोग मिलेगा और दिन संतुलित रहेगा। मीन राशि कार्यक्षेत्र में सतर्क रहें, खासकर ऑफिस पॉलिटिक्स से बचें। नई जिम्मेदारियों के साथ सीखने के अवसर मिलेंगे। आर्थिक रूप से खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए संतुलन जरूरी है। परिवार और दोस्तों के साथ अच्छा समय बितेगा। प्रेम जीवन में विश्वास बढ़ेगा। सेहत को लेकर सावधान रहें और मौसम के प्रभाव से बचाव करें।

लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के शुभारंभ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के शुभारंभ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। यह बदलाव वैज्ञानिक तकनीकों, एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीति तथा केंद्र-राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। यूपी में “लैब टू लैंड” की अवधारणा धरातल पर उतर चुकी है, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। कृषि विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि, प्रति हेक्टेयर उत्पादन में रिकॉर्ड सुधार, बहुफसली खेती का विस्तार और वैल्यू एडिशन पर बढ़ता फोकस इस परिवर्तन के स्पष्ट संकेत हैं। मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों, अंतरराष्ट्रीय कृषि केंद्रों की स्थापना, कृषि विज्ञान केंद्रों के सशक्तीकरण और प्रगतिशील किसानों की भूमिका को इस बदलाव का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। भिन्न-भिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप बनें नीतियां अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन होने के कारण नीतियां भी उसी अनुरूप तय की जानी चाहिए। यदि अलग-अलग जोन में इस प्रकार की गोष्ठियां आयोजित की जाएं तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि गत वर्ष ‘विकसित कृषि अभियान’ और ‘खेती की बात, खेत में’ कार्यक्रम के दौरान उन्हें कई जनपदों में जाने का अवसर मिला, जहां किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि शिक्षा से जुड़े प्रशिक्षुओं में अभूतपूर्व उत्साह व जिज्ञासा देखने को मिली। पहली बार इनोवेशन को सीधे व्यावहारिक धरातल पर उतारने का अवसर मिला है। पहले लैब में होने वाले अनुसंधान को लैंड तक पहुंचने में काफी समय लगता था, लेकिन अब “लैब टू लैंड” की अवधारणा साकार हो चुकी है और तकनीक सीधे खेत तक पहुंच रही है। इस अभिनव पहल के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस अवधारणा को व्यवहारिक रूप से देशभर में लागू करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। योजनाओं की सही जानकारी मिले तो किसान स्वयं बेहतर परिणाम देने में सक्षम मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, आवश्यकता केवल प्रभावी नेतृत्व की है, जिसकी शुरुआत भारत सरकार के स्तर से होती है और राज्य उसे तेजी से अपनाते हैं। पहले नीतियां केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित रह जाती थीं, लेकिन अब उनके ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। अन्नदाता किसानों को योजनाओं की सही जानकारी दी जाए, तो वे स्वयं बेहतर परिणाम देने में सक्षम हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 की स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय प्रदेश में मात्र 69 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) थे, जो लगभग निष्क्रिय अवस्था में थे और उनके वैज्ञानिक भी अन्य संस्थानों में अटैच थे। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा 20 नए केवीके की पहल के साथ-साथ मौजूदा केंद्रों को सशक्त बनाने की कार्ययोजना पर काम हुआ। आज स्थिति यह है कि सभी केवीके सक्रिय होकर नवाचारों को बढ़ावा दे रहे हैं और प्रदेश के सभी 9 एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से कृषि विकास को नई दिशा दे रहे हैं। अब कृषि को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ने की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ये वैज्ञानिक स्थानीय स्तर पर डेमोंस्ट्रेशन करते हैं और फिर किसानों के खेत में जाकर उसे लागू करते हैं, लगातार दौरे करते हैं, निरंतर गोष्ठियां चलती हैं और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साथ ही भारत सरकार के साथ उनका सतत संवाद बना रहता है। इसी का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8 से बढ़कर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। परिणाम बताते हैं कि हम इससे भी बेहतर उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। सीएम ने कहा कि मेरा मानना है कि आजादी के समय भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान लगभग 41-42 प्रतिशत था। समय के साथ इसका योगदान घटता गया। यदि कृषि व मैन्युफैक्चरिंग के बीच बेहतर समन्वय हो, तो विकास की गति और तेज हो सकती है। वर्तमान में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान अब भी लगभग 15–16 प्रतिशत के आसपास है, जबकि कृषि का हिस्सा घटकर लगभग 20–21 प्रतिशत तक सीमित रह गया। अब आवश्यकता है कि कृषि को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ा जाए। इसके लिए नए प्रयासों को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने तथा प्रभावी ढंग से विस्तार देने की आवश्यकता है। निर्णायक भूमिका निभा सकती है तकनीक मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आज के दौर में अत्यंत निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में विभिन्न उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र स्थापित करवाए हैं। उदाहरण के तौर पर, वाराणसी में इंटरनेशनल राइस इंस्टीट्यूट की स्थापना हुई है, जो बेहतरीन परिणाम दे रहा है। यहां से नई-नई किस्में विकसित की गई हैं। अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुसार कौन-सी किस्म उपयुक्त होगी, कौन-सी तकनीक अपनाई जानी चाहिए, क्वालिटी सीड किस प्रकार उत्पादन बढ़ा सकते हैं, ये सभी परिणाम अब स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि कुछ क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर धान का उत्पादन 100 कुंतल तक पहुंच गया है, जो पहले 50–60 कुंतल तक सीमित था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अल नीनो के कारण गेहूं और उद्यान फसलों, विशेष रूप से आम पर प्रभाव पड़ा है, लेकिन यह एक सतत चुनौती है। इसके बावजूद, लागत कम करके उत्पादन बढ़ाना, समय पर अच्छे बीज उपलब्ध कराना, केमिकल फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड के उपयोग को कम करते हुए नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देना, इन सभी क्षेत्रों में निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। उत्तर प्रदेश में कृषि के लिए अनुकूल वातावरण मुख्यमंत्री ने बाराबंकी के प्रगतिशील किसान पद्म पुरस्कार से सम्मानित रामशरण वर्मा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि गत वर्ष मुझे उनके खेत पर ‘विकसित कृषि अभियान’ के तहत जाने का अवसर मिला। यदि कोई रामशरण वर्मा से उनकी शैक्षिक योग्यता पूछता है, तो वह स्वयं को “दसवीं फेल” बताते हैं, लेकिन खेती में उनकी दक्षता और वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग अत्यंत प्रेरणादायक है। वह कम लागत में अधिक उत्पादन करने का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भारत … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना विभाग ने शुरू की तैयारी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी की गई है। इसके तहत गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग गन्ने की फसल का जीपीएस सर्वेक्षण कराएगा। यह जीपीएस सर्वेक्षण 1 मई से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगा। इसकी सूचना 3 दिन पहले सभी रजिस्टर्ड गन्ना किसानों को मोबाइल एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी शामिल होंगे। इनको सर्वेक्षण से पहले प्रशिक्षित भी किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान किसान की मौजूदगी जरूरी होगी। टीम किसान के खेत पर पहुंचकर जीपीएस के जरिए उत्पादन का डाटा सीधे विभाग के सर्वर पर फीड करेगी। वहीं सर्वेक्षण के बाद खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म समेत अन्य जानकारी भी किसानों को एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त वीना कुमारी मीना ने बताया कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी कर दी गई है। सर्वेक्षण कार्य 1 मई से प्रारम्भ कर 30 जून तक पूरा किया जाएगा। साथ ही बताया कि किसी भी गन्ना कृषक के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की वेबसाइट www.upbhulekh.gov.in से किया जा सकता है। चीनी मिलें गन्ना सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े सीधे विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन पोर्ट करेंगी और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगी। सर्वेक्षण के दौरान होगा नए किसानों का पंजीकरण विभाग के मुताबिक गन्ना सर्वेक्षण के दौरान नए सदस्यों (किसान) का पंजीकरण भी किया जाएगा। 30 सितम्बर 2026 तक पंजीकृत कृषकों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। उपज बढ़ोत्तरी के लिए गन्ना सर्वेक्षण से लेकर 30 सितम्बर 2026 तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए अनुसूचित जाति व जनजाति के कृषकों, लघु कृषकों और अन्य कृषकों से क्रमशः 10, 100 एवं 200 रुपये प्रति कृषक शुल्क जमा कराया जाएगा।

योगी सरकार में महिलाओं का मजबूत सहारा बनी 181 हेल्पलाइन

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में महिलाओं की सुरक्षा व सशक्तीकरण शीर्ष प्राथमिकता पर है। इसी दिशा में संचालित 181 महिला हेल्पलाइन प्रदेश की महिलाओं के लिए संकट के समय मजबूत सहारा बनकर उभरी है। वर्ष 2025-26 में इस हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण एक बड़ी उपलब्धि है, जो नारी की गरिमा व सुरक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता दर्शाती है। इलाज व राशन दिलाने में भी मदद की हेल्पलाइन ने आंकड़ों पर नजर डाले तो महिला हेल्पलाइन 181 पर 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक 85 हजार से ज्यादा शिकायतें आई। इनमें अधिसंख्य शिकायतें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, साइबर क्राइम, मारपीट से जुड़ी थीं। कुछ ऐसे भी मामले थे, जिनमें महिलाओं ने अस्पताल में इलाज के लिए या जमीन-जायदाद से जुड़े प्रकरणों में मदद मांगी। राशन दिलाने में मदद के लिए भी कई महिलाओं ने हेल्पलाइन से संपर्क किया। ये सभी मामले निस्तारण के लिए सम्बंधित विभागों को ट्रांसफर किए गए। उल्लेखनीय यह है कि हेल्पलाइन इन सभी मामलों का संतुष्टिपरक निस्तारण करने में सफल रही। 24 घंटे सक्रिय रहती है 181 महिला हेल्पलाइन किसी भी प्रकार की समस्या या जानकारी के लिए महिलाएं इस हेल्पलाइन से सीधे संपर्क कर सकती हैं। शिकायत के मामले 2 मिनट के भीतर संबंधित वन स्टॉप सेंटर को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। इसके बाद संबंधित जनपद में स्थापित डैशबोर्ड के माध्यम से तैनात महिला कर्मचारी पीड़िता से संपर्क कर उसकी समस्या को समझती है और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराती है। यह हेल्पलाइन 24×7 सक्रिय रहती है, जहां घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को त्वरित सहायता मिलती है। साथ ही पीड़ित महिलाओं को मनोवैज्ञानिक, कानूनी और सामाजिक सहयोग भी प्रदान किया जाता है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए योगी सरकार प्रतिबद्ध योगी सरकार के कार्यकाल में इस सेवा का दायरा और प्रभाव लगातार बढ़ा है। तेज निस्तारण, संवेदनशील कार्यप्रणाली और तकनीकी सुदृढ़ता के जरिए 181 महिला हेल्पलाइन आज प्रदेश की महिलाओं के सशक्तीकरण की एक मजबूत कड़ी बन चुकी है, जो हर महिला को सुरक्षा और सम्मान का भरोसा दिला रही है। महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 181 महिला हेल्पलाइन इस दिशा में एक सशक्त माध्यम बनकर सामने आई है, जिसके जरिए महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

योगी सरकार का बड़ा फैसला: कम लोड वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए अहम कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने विद्युत उपभोक्ताओं के हित में बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि 1 किलोवाट तक के घरेलू विद्युत कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी गई है। अगर उनका बैलेंस नेगेटिव हो जाता है, तब भी 30 दिनों तक उनका बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं। यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई है। 5-स्तरीय एसएमएस सूचना प्रणाली लागू की गई ऊर्जा मंत्री ने साफ किया कि नेगेटिव बैलेंस की स्थिति में भी एक माह का चक्र पूरा होने से पहले किसी भी स्थिति में कनेक्शन विच्छेद नहीं किया जाएगा। साथ ही पारदर्शिता और उपभोक्ता सुविधा को ध्यान में रखते हुए कनेक्शन काटने से पूर्व उपभोक्ताओं को 5 अनिवार्य एसएमएस अलर्ट भेजे जाएंगे। जिससे उन्हें समय रहते भुगतान का अवसर मिल सकेगा। इसके साथ ही 2 किलोवाट के कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को भी राहत प्रदान की गई है। ऐसे उपभोक्ताओं का विद्युत कनेक्शन 200 रुपए तक के माइनस बैलेंस पर नहीं काटा जाएगा। इनके लिए भी 5 चरणों में एसएमएस सूचना प्रणाली लागू की गई है, जिससे किसी भी असुविधा से बचा जा सके।   अब तक करीब 30 लाख नए बिजली खंभे लगाए जा चुके हैं वहीं बढ़ती गर्मी को देखते हुए ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने सभी जिलों के अधिकारियों को विद्युत अनुरक्षण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में विद्युत आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किए गए हैं। अब तक लगभग 30 लाख नए विद्युत खंभे स्थापित किए जा चुके हैं। साथ ही ट्रांसफार्मरों की क्षमता में भी व्यापक वृद्धि की गई है। ऊर्जा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति करने वाला राज्य बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इस भीषण गर्मी में प्रदेश की जनता को बिजली की दृष्टि से किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। सरकार पूरी तरह से सजग है और निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

नरवाई जलाना खेत और सेहत दोनों के लिए हानिकारक : कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल.  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि प्रदेश में नरवाई जलाने के नुकसान और नहीं जलाने के फायदों को लेकर कृषि विभाग द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप ‘कृषि चौपाल’ के माध्यम से हर विकासखंड के गांवों में किसानों को नरवाई प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी दी जा रही है। कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि रबी कटाई के बाद अप्रैल-मई में यह अभियान तेज कर दिया गया है। वर्तमान में मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल, चंबल और विंध्य क्षेत्र के सभी 313 विकासखंडों में ‘कृषि चौपाल’ आयोजित की जा रही हैं। बड़े स्तर पर नरवाई प्रबंधन पर चर्चा हो रही है। कृषि विज्ञान केंद्र, आत्मा परियोजना और कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से लाइव प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। मंत्री कंषाना ने कहा कि नरवाई जलाने के कई दुष्परिणाम हैं। इसे जलाने से मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती है। लगभग 1 टन नरवाई जलाने से 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फॉस्फोरस, 25 किलो पोटाश व 400 किलो कार्बनिक पदार्थ जल जाते हैं, जिससे मित्र कीट मर जाते हैं। पर्यावरण व स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। धुएं से जहरीली गैसें बढ़ती हैं, जिससे सांस व आंखों के रोग होते हैं। दृश्यता घटने से सड़क हादसे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देश पर नरवाई जलाना दंडनीय अपराध है और जुर्माने का प्रावधान है। मंत्री कंषाना ने कहा कि नरवाई नहीं जलाने के फायदे हैं। इसे खेतों में मिलाने से भूमि की सेहत सुधरती है। हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, मल्चर से नरवाई खेत में मिलाने पर जैविक कार्बन बढ़ता है, पानी रोकने की क्षमता 30 प्रतिशत बढ़ती है। किसानों को अतिरिक्त आय भी होती है। स्ट्रॉ बेलर से गट्ठर बनाकर गोशाला, पेपर मिल, बायो-सीएनजी प्लांट को बेचा जा सकता है। पराली को खेत में मिलाने से अगली फसल में 20 प्रतिशत यूरिया कम लगती है। प्रदेश में नरवाई प्रबंधन यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। कृषि मंत्री कंषाना ने अपील की है कि किसान ‘कृषि चौपाल’ में अवश्य भाग लें और ‘ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल’ से मशीनों के लिए आवेदन करें। उन्होंने कहा कि “नरवाई खेत का सोना है, इसे जलाएं नहीं, अपनाएं।” अधिक जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर या ‘एमपी किसान ऐप’ पर संपर्क कर सकते हैं।  

पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें, गर्मी आते ही UNSC में सिंधु के पानी के लिए मदद की गुहार

इस्लामाबाद गर्मी बढ़ते ही पाकिस्तान की बेचैनी भी बढ़ती दिख रही है. भारत से आने वाले नदियों के पानी को लेकर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गुहार लगानी पड़ रही है. दरअसल, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से अपील की है कि वह भारत से सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को पूरी तरह बहाल करने के लिए कहे. पाकिस्तान का कहना है कि भारत की ओर से इस संधि को ‘स्थगित’ करना क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और मानवीय स्थिति के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।  सिंधु के पानी के लिए गिड़गिड़ाया पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने इस मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाया. उन्होंने पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार का पत्र UNSC के अध्यक्ष जमाल फारेस अलरोवाई को सौंपा. इस पत्र में पाकिस्तान ने अपील की कि सुरक्षा परिषद भारत पर दबाव बनाए ताकि सिंधु जल संधि के तहत सभी प्रावधान जैसे डेटा साझा करना और सहयोग दोबारा शुरू किए जाएं।  भारत ने संधि क्यों की थी सस्पेंड? असल में, भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को ‘स्थगित’ करने का फैसला लिया था. उस हमले में 26 लोगों की जान गई थी. भारत ने इस संधि को सस्पेंड करके संदेश दिया था कि ‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते’. यानी भारत की ओर से यह सख्त संदेश था कि जब तक आतंकवाद जारी रहेगा, तब तक सामान्य समझौते भी प्रभावित होंगे. हालांकि सिंधु पाकिस्तान की लाइफलाइन में से एक है और भारत की ओर से पानी रोकना उसे प्यासा मार सकता है।  पाकिस्तान के लिए क्यों जरूरी है सिंधु का पानी? सिंधु जल संधि पाकिस्तान के लिए सिर्फ एक समझौता नहीं, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी नदियों का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को मिलता है. देश की खेती और सिंचाई इन्हीं पर टिकी है. बिजली उत्पादन और पीने का पानी भी इसी पर निर्भर है. ऐसे में जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, पानी की मांग और संकट दोनों बढ़ जाते हैं. यही पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता बन गई है. इस समझौते के तहत जितना पानी पाकिस्तान को मिलना चाहिए उससे ज्यादा मिलता था. लेकिन पहलगाम हमले के बाद भारत ने सख्ती दिखाई है और इसे रोकने लगा है। 

बंगाल में बंपर मतदान, 10% की बढ़ोतरी: 3 करोड़ से ज्यादा वोटर्स ने डाले वोट, किसे मिलेगा फायदा?

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 152 सीटों पर 1478 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. पहले फेज में मतदाओं का उत्साह देखने के लायक था और वोटिंग के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. आजादी के बाद पहली बार है कि बंगाल में 90 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है. इसे लेकर सियासी दल अपने नफे-नुकसान का आकलन कर रहे हैं।  बंगाल में पहले फेज की 152 सीटों पर 92.88 फीसदी मतदान रहा. अगर यही पैटर्न दूसरे चरण की 142 सीटों पर रहा, तो यह पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा वोटिंग टर्नआउट होगा. हालांकि, 2021 में बंगाल विधानसभा चुनाव 8 चरणों में हुए थे।  2021 के विधानसभा चुनाव में इन 152 सीटों पर 83.2 फीसदी मतदान रहा था जबकि 2026 के विधानसभा चुनाव 92.88 फीसदी वोटिंग हुई. इस लिहाज से 10 फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है. ऐसे में वोटिंग पैटर्न कहता है कि पिछले चुनाव से बढ़ी वोटिंग ने राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी है. ऐसे में सवाल है कि 10 फीसदी ज्यादा वोटिंग बीजेपी या फिर ममता बनर्जी किसे खाते में जाएगी?  पहले चरण की सीटों पर वोटिंग के टूटे रिकॉर्ड पश्चिम बंगाल के 16 जिलों की 152 सीटों पर गुरुवार को वोटिंग हुई, जिसमें 92.88 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. बंगाल में पुरुष की तुलना में महिला मतदाताओं की भागीदारी ज़्यादा रही. महिला मतदान प्रतिशत 92.69 फीसदी रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का मतदान 90.92 प्रतिशत था. तीसरे लिंग के मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 56.79 प्रतिशत रहा।  आजादी के बाद बंगाल में पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने वोट डाले हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बंगाल के पहले चरण और तमिलनाडु में वोटिंग संपन्न होने के बाद बयान जारी कर मताधिकार का प्रयोग करने वाले वोटरों और उनके जज्बे को सलाम किया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद ये वोटिंग का सबसे ऊंचा ग्राफ है।  बंगाल में इतनी ज्यादा संख्या में मतदान कभी भी नहीं हुआ है. साल 2006 से लेकर अभी तक जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, उसमें  80 फीसदी से ज्यादा ही वोटिंग रही है. हालांकि, इस बार वोटिंग पैटर्न 90 फीसदी की सीमा को भी पार कर गया है, जिसके पीछे मुख्य वजह एसआईआर प्रक्रिया को मानी जा रही है. बंगाल में हुई एसआईआर प्रकिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के वोट काटे गए हैं, जिसके लिए लोग इस बार मतदान न करके जोखिम नहीं लेना चाहते. यही वजह है कि इस बार बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से निकलकर मतदान करने पहुंचे थे।  किसके पक्ष में जाएगा बढ़ा 10 फीसदी वोट पश्चिम बंगाल में गुरुवार को 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग हुई, जिनमें 12 जिलों में मतदान प्रतिशत 90 प्रतिशत या उससे ज्यादा रहा. इनमें भी सबसे ज्यादा वोटिंग दक्षिण दिनाजपुर में हुई, जहां 94.4 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले. दक्षिण दिनाजपुर में हर 100 में से लगभग 95 वोटर्स मतदान केंद्रों पर अपना वोट डालने आए. दक्षिण दिनाजपुर में कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जहां मुसलमानों की आबादी लगभग 25 प्रतिशत है और हिंदुओं की आबादी 73.5 प्रतिशत है. इस तरह हिंदू बहुल इलाके की सीटों पर जबरदस्त मतदान दिखा। दक्षिण दिनाजपुर के बाद कूचबिहार जिले में 94 प्रतिशत मतदान हुआ है, बीरभूम में 93.2 प्रतिशत, जलपाईगुड़ी में 92.7 प्रतिशत और मुर्शिदाबाद ज़िले में भी लगभग 93 प्रतिशत मतदान हुआ है. मुर्शिदाबाद में पश्चिम बंगाल की 22 विधानसभा सीटें आती हैं. इस जिले में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं. यहां मुसलमानों की आबादी 65 प्रतिशत से ज्यादा है जबकि हिन्दुओं की आबादी सिर्फ 33 प्रतिशत है. हालांकि, पश्चिम बंगाल के पहले चरण में जो वोटिंग बढ़ी है, वो किसी एक इलाके में नहीं बल्कि हिंदू और मुस्लिम दोनों ही बेल्ट में देखने को मिल रही है।  पहले चरण में यह वही इलाका है, जहां पर मुस्लिम वोटर बड़ी संख्या में हैं और घुसपैठ का मुद्दा भी काफी हावी रहा.इसके अलावा वोटिंग में बढोत्तरी में एसआईआर (SIR) को भी अहम वजह माना जा रहा है.अब तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टीएमसी इस जिले में सबसे मजबूत थी, लेकिन अब हुमायूं कबीर चुनौती बन गए हैं. वहीं, बीजेपी ने इस इलाके में घुसपैठ का मुद्दा उठाया था, जिसके चलते भी ध्रुवीकरण हुआ है  बीजेपी और टीएमसी किसे मिलेगा सियासी लाभ विधानसभा चुनाव 2021 में बीजेपी ने पहले चरण की 152 में से 59 सीटें जीती थीं, जबकि दूसरे चरण की 142 सीटों में वह केवल 18 पर सिमट गई थी.ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस 2021 में उसने पहले चरण की 152 में से 92 सीटें जीती थीं, जबकि दूसरे चरण में 142 में से 123 सीटों पर कब्जा जमाया था।  2011 से 2024 तक के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें, तो पहले चरण की इन 152 सीटों पर बीजेपी का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है. 2011 में बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. 2016 में यह आंकड़ा सिर्फ 3 तक पहुंचा. लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर बीजेपी ने 86 पर बढ़त बनाई. 2021 विधानसभा चुनाव में 59 सीटें जीतीं. इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में 64 सीटों पर आगे रही।  पीएम मोदी और अमित शाह की अगुवाई में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत इस चरण में झोंक दी है. हालांकि, TMC के लिए भी यह इलाका किसी दुर्ग से कम नहीं है. 2011 में उसने 68 सीटें जीतीं, 2016 में 86 सीटों पर कब्जा किया था जबकि 2021 में 92 सीटों पर पहुंच गई थी. 2019 लोकसभा चुनाव में 57 सीटों पर टीएमसी को बढ़त बनाई. TMC ने 2021 में 92 सीटें जीतकर बड़ा संदेश दिया और 2024 लोकसभा चुनाव में 76 सीटों पर आगे रही. TMC के लिए यह चरण परंपरागत तौर पर मजबूत रहा है, हालांकि 2019 में उसे झटका भी लगा था।  पहले चरण की सीटों में मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिले अहम हैं, जहां 50 से 66 फीसदी तक मुस्लिम हैं. इन तीन जिलों की 43 सीटों में से पिछली बार TMC ने 35 सीटें जीती थीं, जबकि BJP को 8 सीटें मिली थीं. इस बार बीजेपी को हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण पर भरोसा है और ममता बनर्जी की … Read more

CAF फायर फाइटिंग व्हीकल 300 मीटर ऊंचाई तक बुझाएगा आग

नोएडा दिल्ली से सटे नोएडा में तेजी से बढ़ रही हाईराइज बिल्डिंग्स में आग लगने की घटनाओं से निपटने के लिए फायर विभाग लगातार नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है. इसी क्रम में नोएडा में कम्प्रेश्ड एयर फोम (CAF) आधारित हाईराइज फायर फाइटिंग व्हीकल का सफल ट्रायल किया गया. यह ट्रायल दिल्ली NCR की सबसे ऊंची बिल्डिंग सुपरनोवा की 45वीं मंजिल पर किया गया है, जहां इस अत्याधुनिक व्हीकल की क्षमता को परखा गया. ट्रायल के दौरान यह देखा गया कि यह वाहन तकरीबन 300 मीटर की ऊंचाई तक आसानी से पानी और फोम पहुंचाने में सक्षम है, जिससे ऊंची इमारतों में लगी आग पर तेजी से काबू पाया जा सकता है. अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक में पानी और कंप्रेस्ड एयर को मिलाकर एक विशेष प्रकार का फोम तैयार किया जाता है. यह फोम आग बुझाने में अधिक प्रभावी होता है और 100 मंजिल तक की ऊंचाई पर लगी आग को भी नियंत्रित करने की क्षमता रखता है. इस हाईराइज फायर फाइटिंग व्हीकल की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसके जरिए अग्निशमन कर्मियों को इमारत के अंदर जाकर आग बुझाने में काफी सहायता मिलती है, जिससे रिस्क कम होता है और रेस्क्यू ऑपरेशन अधिक सुरक्षित बनता है. ट्रायल के दौरान डीजी फायर सुजीत पांडे भी मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने इस तकनीक को हाईराइज इमारतों के लिए बेहद उपयोगी बताया. DG फायर ने कहा कि इस तरह की आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में इमरजेंसी सेवाओं को और मजबूत किया जा सकेगा.

बच्चों के पोषण पर फोकस, मिड-डे मील को बेहतर बनाने की नई पहल

चंडीगढ़ हरियाणा में मिड-डे मील को और बेहतर बनाने के लिए एक खास प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत अब सीधे कुक-कम-हेल्पर को ट्रेनिंग देने के बजाय पहले शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर आगे कुक-कम-हेल्पर को पोषण, स्वास्थ्य और साफ-सफाई के बारे में ट्रेनिंग देंगे। योजना के अनुसार, हर जिले के हर ब्लॉक से 4-5 टीजीटी शिक्षकों के नाम मंगवा लिया गया है। खास बात यह है कि इसमें गृह विज्ञान (होम साइंस) के अध्यापकों को प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि उन्हें खान-पान और पोषण की बेहतर समझ होती है। इन शिक्षकों को पहले विशेषज्ञों द्वारा ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे सही जानकारी और तरीके आगे पहुंचा सकें इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि स्कूलों में बनने वाला खाना ज्यादा पौष्टिक और सुरक्षित होगा। साफ-सफाई के बेहतर नियम अपनाए जाएंगे, जिससे बच्चों की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ेगा। साथ ही, खाना बनाने वालों की स्किल भी बढ़ेगी, जिससे भोजन की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ खाना खिलाना नहीं, बल्कि बच्चों को स्वस्थ और मजबूत बनाना है। बेहतर पोषण से बच्चों की पढ़ाई में भी सुधार होगा और उनकी उपस्थिति बढ़ेगी। कुल मिलाकर, यह कदम शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।