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सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील रसोइयों के लिए नया नियम, दस्तावेज अनिवार्य किए गए

 दारौंदा (सिवान)  बिहार के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों के लिए शिक्षा विभाग ने नया निर्देश जारी किया है। विभाग ने सभी रसोइयों की पे-आईडी (Pay ID) बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है। इसके लिए स्कूलों को सभी आवश्यक दस्तावेज एकत्र करने का निर्देश दिया गया है। ये दस्तावेज जमा करना होगा अनिवार्य पे-आईडी बनाने के लिए प्रत्येक रसोइया को अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक की छायाप्रति संबंधित विद्यालय में जमा करनी होगी। विद्यालय प्रधानों को इन दस्तावेजों का सत्यापन कर उन्हें स्कूल के अभिलेख में सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। दस्तावेज नहीं तो अटक सकता है मानदेय शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन रसोइयों के पास आधार, पैन कार्ड या बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज नहीं होंगे, उनकी पे-आईडी नहीं बन पाएगी ऐसे में भविष्य में मानदेय का भुगतान प्रभावित हो सकता है। इसलिए जिनके दस्तावेज अधूरे हैं, उन्हें जल्द से जल्द बनवाने की सलाह दी गई है। डिजिटल और पारदर्शी होगी भुगतान व्यवस्था विभाग का उद्देश्य रसोइयों के मानदेय भुगतान को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। पे-आईडी बनने के बाद भुगतान प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और रिकॉर्ड का रखरखाव भी आसान हो जाएगा। इससे भुगतान में होने वाली देरी और तकनीकी समस्याओं को भी कम किया जा सकेगा। स्कूलों में शुरू हुई दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया विभागीय आदेश के बाद प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में रसोइयों से जरूरी दस्तावेज लेने की प्रक्रिया तेज हो गई है। स्कूल प्रबंधन सभी रसोइयों से समय पर दस्तावेज जमा कराने की अपील कर रहा है, ताकि पे-आईडी बनाने का काम तय समय पर पूरा हो सके और भविष्य में मानदेय भुगतान में किसी तरह की परेशानी न आए।  

बेसिक स्कूल रसोइयों के लिए बड़ा फैसला, सेवा शर्तों और छुट्टियों का मिलेगा लाभ

लखनऊ बेसिक स्‍कूलों में मध्याह्न भोजन (MDM) बनाने वाले रसोइयों की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल हो सकती है। हाल ही में कई स्तर पर हुई बैठकों के बाद मध्याह्न भोजन प्राधिकारण इनकी सेवा नियमावली बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। नियमावली बनने के बाद अन्य संविदाकर्मियों की तरह छुट्टियों और नियुक्ति प्रक्रिया सहित कई सेवा शर्तें इन पर भी भी लागू होंगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2004 में कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में बच्चों को पका हुआ भोजन दिए जाने की योजना लागू की गई थी। उसके बाद 2007 में पिछड़े ब्लॉक के अपर प्राइमरी स्कूलों में और 2008 में सभी अपर प्राइमरी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की योजना लागू कर दी गई। वर्तमान में 1.41 लाख स्कूलों के 1.52 करोड़ बच्चों को पका हुआ भोजन दिया जा रहा है। इसके लिए 3.63 लाख रसोइये स्कूलों में कार्यरत हैं। ऐसे बनी सहमति रसोइयों को 2000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाता है, लेकिन इनकी अब तक सेवा शर्तें नहीं बनीं। ग्राम समिति इनका चयन करती हैं। कुछ रसोइये 70-75 साल की उम्र में भी कार्यरत हैं। वहीं, ग्राम समिति चाहती है तो किसी को कभी भी हटा देती है। इनकी सेवानिवृत्ति की कोई आयु सरकार ने तय नहीं की है। वहीं, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को 11 महीने का मानदेय मिलता है, लेकिन रसोइयों को 10 माह का ही मानदेय मिलता है। अब इनकी सेवा शर्ते बनाने की तैयारी की जा रही है। रसोइयों के प्रदर्शन के बाद अफसरों संग हुई बैठक हाल ही में रसाइयों के प्रदर्शन के बाद अधिकारियों के साथ उनकी बैठकें हुईं। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, शिक्षा विभाग और शासन स्तर के अधिकारियों ने भी मंथन किया। उसके बाद प्राधिकरण को इस बाबत प्रस्ताव करने के लिए कहा गया है। इनकी रिटायरमेंट उम्र 62 साल की जा सकती है। सेवा शर्तों से क्या अंतर आएगा? सेवा शर्तें बन जाने से इनकी रिटायरमेंट उम्र तय हो जाएगी। इससे ग्राम समितियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। अभी इनको किसी तरह की कोई छुट्टी का प्रावधान नहीं है। यहां तक कि मातृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर लीव का भी प्रावधान नहीं है। सेवा शर्तें बन जाने से रसोइयों को ये लाभ भी मिल सकेंगे। अन्य संविदा कर्मियों की तरह इनके 11 माह के मानदेय पर भी विचार किया जा रहा है।  

स्कूल में खाना खाते ही बिगड़ी बच्चों की तबीयत, स्वास्थ्य केंद्र में मचा हड़कंप

 सहरसा बिहार के सहरसा जिले में गुरुवार को एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिले के महिषी प्रखंड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय बलुआहा में मिड-डे मील खाने के बाद 250 से अधिक बच्चे अचानक बीमार पड़ गए। खाना खाने के कुछ देर बाद ही बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और बेचैनी की शिकायत की, जिसके बाद स्कूल परिसर में भारी हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सभी बीमार बच्चों को इलाज के लिए महिषी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बीमार बच्चों के पहुंचने से स्वास्थ्य केंद्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और भीड़ जमा हो गई। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चों की जांच और उपचार में जुटी हुई है। छात्रों ने बताई आपबीती पांचवीं कक्षा के छात्र रोहित कुमार ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे स्कूल में भोजन में चावल-दाल दिया गया था। इसे खाने के कुछ ही देर बाद तबीयत खराब होने लगी। पेट में तेज दर्द के साथ उल्टी और चक्कर आने लगे। वहीं, सातवीं कक्षा की छात्रा शिवानी ने भी बताया कि भोजन के तुरंत बाद एक-एक कर कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी थी। कई बच्चे सदर अस्पताल रेफर घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सहरसा के सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम के साथ तुरंत महिषी पहुंचे और बच्चों के इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह फूड प्वाइजनिंग का मामला लग रहा है। सभी बच्चों का तुरंत इलाज किया जा रहा है। एहतियात के तौर पर जिन बच्चों की तबीयत ज्यादा खराब थी, उन्हें सहरसा सदर अस्पताल रेफर किया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल सभी बच्चों का उपचार जारी है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं। घबराने की कोई बात नहीं है। लैब भेजे जाएंगे खाने के नमूने इस घटना के बाद से स्कूली बच्चों के अभिभावकों में प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ काफी आक्रोश देखा जा रहा है। जिला प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि मिड-डे मील के भोजन के नमूने इकट्ठा कर लिए गए हैं और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राजस्थान शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, नागौर स्कूल में बच्चे कर रहे थे सफाई का काम

 नागौर  राजस्थान के नागौर जिले के एक सरकारी स्कूल से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां छोटे बच्चों से मिड-डे मील के बर्तन उठवाने और धुलवाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने संज्ञान लिया है और संबंधित स्कूल के खिलाफ आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। यह घटना रियांबी उपखंड के दासावास गांव में स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुई। मिड-डे मील के ब्रेक के दौरान आराम करने या खाना खाने के बजाय, कई बच्चों को भारी स्टील के बर्तन उठाते और एक जगह से दूसरी जगह ले जाते देखा गया। इस फुटेज ने स्कूल में निगरानी और छात्रों के कल्याण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कमरे में सोते दिखें शिक्षक चिंता की बात यह भी है कि उसी समय चार शिक्षक एक कमरे में सोते हुए पाए गए। स्कूल में कुल आठ शिक्षक हैं, जिनमें से घटना वाले दिन सात शिक्षक मौजूद थे। इसके बावजूद, बर्तनों को संभालने की जिम्मेदारी छात्रों पर ही आती दिखी। प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और वीडियो से यह भी पता चलता है कि प्रधानाध्यापक सोहनलाल फडोदा वहां मौजूद थे और अपनी कुर्सी पर बैठे थे, जबकि बच्चे काम कर रहे थे। उन्होंने न तो कोई दखल दिया और न ही कर्मचारियों को बच्चों को रोकने का कोई निर्देश दिया। कुछ बच्चों ने दावा किया कि यह कोई एक बार हुई घटना नहीं है, बल्कि यह उनके रोजाना के काम का ही एक हिस्सा है। मामले की जांच शुरू वीडियो वायरल होने के बाद, स्थानीय अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लिया है। घटना की जांच करने और दोषियों की पहचान करने के लिए एक जांच समिति का गठन किया गया है। SDM सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि हमें एक शिकायत मिली है और पूरे मामले की जांच की जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी रामलाल कराड़ी ने बताया कि यह मामला मीडिया रिपोर्टों के जरिए सामने आया है और उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

बच्चों की सेहत से खिलवाड़! मिड-डे-मील में परोसी जा रही खराब पिन्नी पर उठे सवाल

हिसार. नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है लेकिन मिड डे मील के तहत स्कूलों में दिए जाने वाले खाद्य सामग्री के खराब हालात आज भी ज्यों-की-त्यों हैं। ताजा मामला गांव बुगाना स्थित राजकीय हाई स्कूल, गांव खेड़ी बरखी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सहित अन्य सरकारी स्कूलों का है, जहां नए सत्र के प्रथम माह में ही मिड-डे-मील के तहत फफूंदी युक्त पिन्नी पहुंचाई जा रही है। जिले के पहली से आठवीं कक्षा के कुल सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 61,065 बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडराने लग गया है। जिला के मौलिक शिक्षा अधिकारी रामरतन ने कहा कि संबंधित बीईओ से मामले की जानकारी ली जाएगी। अगर फफूंदी युक्त पीनी स्कूलों में आ रही है तो मुख्यालय को मामले से अवगत कराया जाएगा। किसी भी हाल में बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जाएगा। पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों का आंकड़ा कक्षा     विद्यार्थियों की संख्या पहली     5,296 दूसरी     6,346 तीसरी     6,182 चौथी     5,943 पांचवीं     8,772 छठी     7,123 सातवीं     10,453 आठवीं     10,950 कुल     61,065 कंपनियों से टेंडर नहीं किए रद बीते सत्र में हरियाणा एग्रो इंडस्ट्री कारपोरेशन लिमिटेड व हरहित स्टोर के खिलाफ खराब गुड़ वितरित करने और स्कूलों में जरूरत से ज्यादा खाद्य सामग्री बांटने की घटनाएं सामने आई। लेकिन निदेशालय ने बिना परवाह किए हरहित स्टोर से सामान लेने के आदेश जारी रखें। न कोई कार्रवाई हुई और न ही बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए टेंडर रद किए। खास बात है कि बीते शैक्षणिक सत्र में उपरोक्त को लोकल मार्केट से गुड़ खरीदने की छूट दी। जबकि शेष सामग्री हरियाणा एग्रो इंडस्ट्री कारपोरेशन लिमिटेड व हरहित स्टोर से लेने के लिए ही आदेश दिए गए। लेकिन दोनों कंपनियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। जिसका परिणाम इस बार भी स्कूलों में देखने को मिल रहा है।

बच्चों के पोषण पर फोकस, मिड-डे मील को बेहतर बनाने की नई पहल

चंडीगढ़ हरियाणा में मिड-डे मील को और बेहतर बनाने के लिए एक खास प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत अब सीधे कुक-कम-हेल्पर को ट्रेनिंग देने के बजाय पहले शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर आगे कुक-कम-हेल्पर को पोषण, स्वास्थ्य और साफ-सफाई के बारे में ट्रेनिंग देंगे। योजना के अनुसार, हर जिले के हर ब्लॉक से 4-5 टीजीटी शिक्षकों के नाम मंगवा लिया गया है। खास बात यह है कि इसमें गृह विज्ञान (होम साइंस) के अध्यापकों को प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि उन्हें खान-पान और पोषण की बेहतर समझ होती है। इन शिक्षकों को पहले विशेषज्ञों द्वारा ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे सही जानकारी और तरीके आगे पहुंचा सकें इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि स्कूलों में बनने वाला खाना ज्यादा पौष्टिक और सुरक्षित होगा। साफ-सफाई के बेहतर नियम अपनाए जाएंगे, जिससे बच्चों की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ेगा। साथ ही, खाना बनाने वालों की स्किल भी बढ़ेगी, जिससे भोजन की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ खाना खिलाना नहीं, बल्कि बच्चों को स्वस्थ और मजबूत बनाना है। बेहतर पोषण से बच्चों की पढ़ाई में भी सुधार होगा और उनकी उपस्थिति बढ़ेगी। कुल मिलाकर, यह कदम शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।  

स्कूलों में बदला मिड डे मील मेनू, अब शनिवार को परोसी जाएगी पौष्टिक माह की दाल

लुधियाना. पंजाब स्टेट मिड-डे-मील सोसाइटी की ओर से पी.एम. पोषण स्कीम के तहत स्कूलों में दिए जाने वाले दोपहर के भोजन (मिड-डे-मील) के लिए साप्ताहिक मेन्यू जारी आकर दिया है। यह नया मेन्यू 1 से 30 अप्रैल तक लागू रहेगा। सोसाइटी के जनरल मैनेजर द्वारा जारी पत्र के अनुसार, स्कूल के विद्यार्थियों को कतार में बिठाकर मिड-डे-मील इंचार्ज की निगरानी में मेन्यू के अनुसार खाना खिलाना यकीनी बनाया जाए। आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी स्कूल में मेन्यू का पालन नहीं किया जाता या नियमों की अनदेखी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल मुखी की होगी। इसके अलावा 'तिथि भोजन' के तहत गांव के सरपंच या दानी सज्जनों के सहयोग से विशेष अवसरों, त्यौहारों या जन्मदिन पर विद्यार्थियों को फल, मिठाई या विशेष भोजन देने के प्रयास करने के लिए भी कहा गया है। साप्ताहिक मेन्यू सोमवार : दाल और रोटी। मंगलवार : राजमाह-चावल और खीर। बुधवार : काले या सफेद चने (आलू के साथ) और पूरी या रोटी। गुरुवार : कढ़ी (आलू और प्याज के पकौड़ों के साथ) और चावल। शुक्रवार : मौसमी सब्जी, रोटी और मौसमी फल। शनिवार : साबुत माह की दाल और चावल। पी.टी.एम. के दौरान विद्यार्थियों को मिलेंगे आयुर्वेद के टिप्स पंजाब स्टेट मिड-डे-मील सोसाइटी की ओर से सरकारी स्कूलों के लिए नए निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुसार अब स्कूलों में पेरैंट्स-टीचर मीटिंग वाले दिन विद्यार्थियों और अध्यापकों को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष लेक्चर आयोजित किए जाएंगे। पंजाब स्टेट फूड कमीशन के सुझाव पर आधारित इन निर्देशों में कहा गया है कि आयुर्वैदिक मैडीकल ऑफिसर अपने नजदीकी स्कूलों में जाकर बच्चों को आयुर्वेद के अनुसार खान-पान और रहन-सहन की जानकारी देंगे। स्कूल मुखियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आयुष डॉक्टरों या आयुर्वेद के माहिर व्यक्तियों के माध्यम से ऐसे लेक्चर करवाने के प्रयास करें।

महंगी गैस का असर: स्कूलों में LPG की जगह चूल्हों पर पक रहा Mid Day Meal

अमृतसर. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब पंजाब के सरकारी स्कूलों तक पहुंच गया है। LPG गैस की कमी के चलते राज्य के कई स्कूलों में मिड-डे मील अब पारंपरिक चूल्हों पर तैयार किया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी हाल में बच्चों के भोजन में बाधा नहीं आनी चाहिए। अमृतसर के सरकारी हाई स्कूल इब्बण कलां में पिछले चार दिनों से गैस की बजाय लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाया जा रहा है। स्कूल की प्रिंसिपल सिम्मी बेरी के अनुसार, रोजाना करीब 10 से 15 किलो लकड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद बच्चों को समय पर मिड-डे मील दिया जा रहा है। दरअसल, मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण LPG गैस की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत के कई हिस्सों के साथ-साथ पंजाब में भी देखने को मिल रहा है। स्थिति को भांपते हुए शिक्षा विभाग ने पहले ही स्कूलों को वैकल्पिक इंतजाम करने के निर्देश जारी कर दिए थे। नए निर्देशों के अनुसार, यदि किसी स्कूल में गैस उपलब्ध नहीं है तो लकड़ी, इलेक्ट्रिक या अन्य माध्यमों से मिड-डे मील तैयार किया जाए। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बच्चों के भोजन के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। मिड-डे मील वर्कर हरजिंदर कौर ने बताया कि वे पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सरकार और प्रशासन की ओर से किए जा रहे ये प्रयास दिखाते हैं कि संकट के समय में भी बच्चों की भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

बिहार के सरकारी स्कूलों में नहीं बंद होगा मिड-डे मील

पटना. राज्य के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 1 करोड़ 30 लाख बच्चों को मध्याह्न भोजन की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करते रहने का आदेश सभी जिलों को दिया गया है। इस संबंध में मध्याह्न भोजन निदेशालय के निदेशक विनायक मिश्र ने सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (मध्याह्न भोजन) को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है। उन्होंने सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि किसी भी हालत में बच्चों को दोपहर का भोजन बंद नहीं होना चाहिए। प्रारंभिक विद्यालयों में एलपीजी से ही बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन बनेगा। एलपीजी की आपूर्ति के संबंध में भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और इंडियन आयल कॉरपोरेशन लिमिटेड से यह बात भी हुई है। इंडियन आयल ने प्राथमिकता के आधार पर विद्यालयों को एलपीजी की सतत आपूर्ति बनाए रखने का आश्वस्त किया है। विनायक मिश्र के मुताबिक एलपीजी की आपूर्ति करने वाली सभी आयल कंपनियों ने कहा है कि राज्य में एलपीजी स्टाक की कोई कमी नहीं है। इसलिए सभी 38 जिलों को पूर्व की भांति विद्यालयों को मध्याह्न भोजन बनाने हेतु गैस सिलिंडर की आपूर्ति होती रहेगी। मध्याह्न भोजन निदेशक ने यह भी बताया कि आकस्मिक कारण से किसी विद्यालय में एलपीजी खत्म भी हो जाती है तो पूर्व के वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में संबंधित विद्यालय में लकड़ी से मध्याह्न भोजन बनेगा और उसे बच्चों को खिलाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यालय के स्तर से किसी भी जिले को विद्यालयों में लकड़ी से खाना पकाने का निर्देश नहीं दिया गया है। यह विकल्प तो पहले से विशेष परिस्थति में किसी-किसी विद्यालय में यदाकदा अपनाया जाता है।

मेन्यू वाला मिड-डे मील ही इंचार्ज की निगरानी में परोसें: निर्देश

लुधियाना. पंजाब स्टेट मिड डे मील सोसायटी ने पीएम पोषण स्कीम के तहत स्कूलों में परोसे जा रहे मिड-डे मील के साप्ताहिक मेन्यू को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।  जारी निर्देशों के अनुसार यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी स्कूलों में विद्यार्थियों को लाइन में बिठाकर मिड-डे मील इंचार्ज की निगरानी में निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन परोसा जाए। सोसाइटी ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी स्कूल में तय मेन्यू के अनुसार भोजन तैयार नहीं किया जाता या निर्देशों का उल्लंघन होता है, तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित स्कूल प्रमुख (हेड) की होगी।  यह व्यवस्था 01 मार्च 2026 से 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। जनरल मैनेजर ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।