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मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी की शीघ्र होगी पूर्ति : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल. उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा एवं लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने शुक्रवार को मंदसौर जिले को स्वास्थ्य एवं अधोसंरचना विकास की सौगात देते हुए इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय में 29 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने 7 करोड़ 50 लाख रुपए की लागत से निर्मित 100 बिस्तरीय नवनिर्मित वार्ड तथा 17 करोड़ 29 लाख रुपए की लागत से बने 100 बिस्तरीय मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) भवन का लोकार्पण किया। साथ ही 4 करोड़ 73 लाख रुपए की लागत से चांदाखेड़ी फंटा से खजुरिया मार्ग निर्माण कार्य का भूमि-पूजन भी किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी को धीरे-धीरे दूर किया जा सकेगा। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि पहले प्रदेश में सीमित संख्या में मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन अब प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन संस्थानों से प्रशिक्षित होकर निकलने वाले चिकित्सक प्रदेश में ही सेवाएं देंगे, जिससे आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि जिला चिकित्सालय मंदसौर में आज जो सुविधाएं जोड़ी गई हैं, वे क्षेत्र के नागरिकों के लिए बड़ी सौगात हैं और इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। लोक निर्माण मंत्री सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य भवन केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि यह भविष्य की आशाओं का केंद्र है। यह विशेष रूप से माताओं और बहनों की सेवा के लिए समर्पित रहेगा तथा समाज के लिए प्रेरणादायक केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्य पर्यावरण संरक्षण को दृष्टिगत रखते हुए किये जा रहे हैं। बदलते हुए भारत में परिवर्तन को महसूस किया जा रहा है। सकारात्मक परिवर्तन देखा जा रहा है। विकास को नए पंख लगे हैं। विकास की धारा बह रही हैं। विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि सरकार निरंतर विकास कार्यों को गति दे रही है और विभिन्न क्षेत्रों में नई सौगातें प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर बजट आवंटन किया गया।जिसके परिणामस्वरूप सुविधाओं में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है।  सांसद बंशीलाल गुर्जर ने लोक निर्माण विभाग की कार्य प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि विभाग ने एक नई कार्य संस्कृति विकसित की है, जिसमें गुणवत्ता के साथ कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। लोकार्पण कार्यक्रम में ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत मरीजों को फूड बास्केट वितरित किए गए। इसका उद्देश्य टीबी मरीजों को पोषण सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य में सुधार लाना है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी सहित गणमान्यजन उपस्थित रहे।

CM भगवंत मान बोले – AAP के राज्यसभा MP जो BJP में शामिल हुए, वे पंजाब के गद्दार हैं

चंडीगढ़.  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पार्टी छोड़ने वाले राज्यसभा MPs को पंजाब और पंजाबियत का गद्दार बताया है और कहा है कि पंजाब के लोग जल्द ही उन्हें इस हरकत का जवाब देंगे। आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा MPs ने शुक्रवार को दिल्ली में पार्टी से इस्तीफे का ऐलान किया। इन सात MPs में से छह पंजाब के हैं। राजनीतिक घटनाक्रम के बाद चंडीगढ़ में रिपोर्टर्स से बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सात गद्दारों के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। पार्टी पूरी तरह मजबूत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पंजाब में 300 यूनिट फ्री बिजली दे रही है और पंजाब को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया है। पंजाब में 19 टोल टैक्स खत्म कर दिए गए हैं। भगवंत मान ने RDF का फंड रोकने के लिए केंद्र सरकार पर हमला बोला और कहा कि BJP पंजाब में हो रहे विकास के कामों को पचा नहीं पा रही है। BJP शुरू से ही पंजाब के लोगों को धोखा और धमका रही है। हरियाणा और देश के कई दूसरे राज्यों में BJP के गठबंधनों, जिसमें दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी भी शामिल है, का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि BJP जिस भी पार्टी से गठबंधन करती है, उसे खत्म कर देती है। भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में ऐसी घटना पहले भी हो चुकी है, जब सुखपाल सिंह खैरा ने कई MLA को तोड़कर अलग गुट बना लिया था। भारतीय जनता पार्टी ने पहले भी पंजाब में कई MLAs को तोड़ने के लिए ऑपरेशन लोटस चलाया था, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सका। पार्टी छोड़ने वाले राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह भज्जी, विक्रमजीत साहनी और राजिंदर गुप्ता को पंजाब का सबसे बड़ा गद्दार बताते हुए भगवंत मान ने कहा कि ये सभी अपनी जान बचाने के लिए BJP में शामिल हुए हैं, लेकिन इन्हें बहुत जल्द इसका पछतावा होगा। मनप्रीत बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे नेता, जो BJP में शामिल हो गए थे, आज पंजाब की राजनीति में हाशिये पर हैं। भगवंत मान ने ED और दूसरी जांच एजेंसियों को चुनौती देते हुए कहा कि वे जब चाहें उनके खिलाफ जांच कर सकते हैं। पिछले चार सालों में कई कोशिशें की गईं लेकिन जब कुछ नहीं मिला तो उन्होंने अपने लोगों को दबाने की कोशिश शुरू कर दी।

लॉरेंस बिश्नोई पर बनी डॉक्यू सीरीज पर रोक, OTT रिलीज पर विवाद

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई एक बार फिर चर्चा में है. लेकिन इस बार उसने किसी को धमकाया नहीं है, बल्कि उसकी जिंदगी पर एक डॉक्यू सीरीज बनी है. जिसका नाम है- लॉरेंस ऑफ पंजाब. इसे 27 अप्रैल को जी5 पर रिलीज किया जाना है. लेकिन इससे पहले इस डॉक्यू सीरीज पर रोक लग गई है. लॉरेंस की सीरीज पर बवाल पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने X पर इस संदर्भ में एक वीडियो शेयर किया है है. कैप्शन में उन्होंने लिखा- पंजाब पुलिस के साइबर क्राइम डिवीजन ने लॉरेंस की डॉक्यू सीरीज के खिलाफ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ((MoIB) को लेटर लिखा था. उन्होंने आईटी एक्ट सेक्शन 69 के तहत 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' की स्क्रीनिंग पर रोक लगाने की मांग की. मंत्रालय ने इस अपील पर सख्त एक्शन लेते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 को एडवाइजरी जारी की है. जिसके अनुसार, लॉरेंस की डॉक्यू सीरीज को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं करने का निर्देश दिया गया है. वीडियो में पंजाब पुलिस के डीजीपी ने कहा कि हमें जानकारी मिली है कि इस सीरीज में लॉरेंस के कुख्यात कामों को ग्लोरिफाई किया गया है. पंजाब पुलिस पूरी तरह से राज्य में शांति और सौहार्द बनाकर रखना चाहती है. इस तरह की किसी भी एक्टिविटी को मंजूरी नहीं मिलेगी, जिससे शांति भंग हो. दूसरी तरफ, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी को खत लिखकर लॉरेंस की डॉक्यू सीरीज की रिलीज को रोकने की मांग की थी. उनका कहना था कि सीरीज में लॉरेंस का महिमामंडन किया गया है. क्राइम और गैंगस्टर कल्चर को ग्लोरिफाई करना यूथ के दिमाग पर खतरनाक असर छोड़ सकता है. वो क्राइम करने की दिशा में खुद को मोड़ सकते हैं. मेकर्स ने क्या दी दलील? डॉक्यू सीरीज को बैन किए जाने की मांग पर इसके डायरेक्टर राघव दर का भी रिएक्शन आया है. बॉम्बे टाइम्स संग बातचीत में उन्होंने कहा- लॉरेंस ऑफ पंजाब को हमेशा सिर्फ एक क्राइम स्टोरी से कहीं ज्यादा समझा गया था. इस सीरीज के जरिए हमारा मकसद बस यही बताना था कि क्यों लोग खुद की ऐसी पहचान बनाते हैं. उनके आसपास का मौहाल क्या होता है, कौन सी चीज उन्हें इंफ्लुएंस करती है. किस सिस्टम की वजह से वो गैंगस्टर बनते हैं. ये भी बताना जरूरी था कि ऐसी जर्नी अपने पीछे क्या छोड़कर जाती है. इस सीरीज के जरिए हमने एक ऐसी कहानी पेश करने की कोशिश की है जो जानकारी देती है और इंसान के इमोशंस से गहराई से जुड़ी है. विवादों का दूसरा नाम है लॉरेंस गैंगस्टर लॉरेंस का बीते सालों में दबदबा बढ़ा है. वो और उसका साथी गोल्डी बराड़ मिलकर बॉलीवुड सेलेब्स को धमका रहे हैं. लॉरेंस बीते कई सालों से सलमान खान के पीछ पड़ा है. एक्टर के 1998 में काले हिरण शिकार केस को लेकर वो गुस्साया है. क्योंकि उसका बिश्नोई समाज काले हिरण की पूजा करता है. जबसे सलमान का इस केस में नाम आया है लॉरेंस दबंग खान को टारगेट कर रहा है. आए दिन सलमान खान और उनके करीबियों को लॉरेंस अपना निशाना बना रहा है. लॉरेंस ने सलमान के अलावा, कपिल शर्मा, एपी ढिल्लन, रणवीर सिंह, पवन सिंह, बी प्राक, बादशाह, रोहित शेट्टी को धमकाया है. बाबा सिद्दीकी और सिद्धू मूसेवाला की मौत के पीछे लॉरेंस का हाथ बताया गया है. सबसे मजेदार बात ये है कि पंजाब का रहने वाला लॉरेंस जेल से आपराधिक साजिश रच रहा है. वो सलाखों के पीछे रहकर हत्याओं, धमकियों और फायरिंग की जिम्मेदारी ले रहा है.

फुटबॉल फैंस के लिए झटका, वर्ल्ड कप फाइनल टिकट लाखों-करोड़ों में

 नई दिल्‍ली  FIFA की रीसेल साइट पर वर्ल्‍ड कप फाइनल के चार टिकट करीब 23 लाख डॉलर (लगभग 21.67 करोड़ रुपये) प्रति टिकट की कीमत पर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। न्यू जर्सी के ईस्ट रदरफोर्ड स्थित मेटलाइफ स्टेडियम में 19 जुलाई को होने वाले मैच के लिए 2,299,998.85 डॉलर (लगभग 21,68,46,306.58 रुपये) की सीटें निचले डेक में ब्लॉक 124, पंक्ति 45, सीट 33-36 में एक गोल के पीछे स्थित हैं। फीफा अपने रीसेल/ एक्‍सचेंज मार्केट (विनिमय बाजार) में मांगी गई कीमतों को कंट्रोल नहीं करता, बल्कि प्रत्येक टिकट के खरीदार से 15% खरीद शुल्क और विक्रेता से 15% रीसेल शुल्क लेता है। निचले डेक के ब्लॉक 146 की पंक्ति 32 में स्थित गलियारे वाली सीट 33, जिसे आसान पहुंच वाली मानक सीट के रूप में लिस्‍ट किया गया है, की कीमत 207,000 डॉलर (लगभग 1.9 करोड़ रुपये) रखी गई है, जबकि सबसे ऊपरी तीसरे डेक की आखिरी पंक्ति में स्थित श्रेणी दो की सीट, ब्लॉक 310 की पंक्ति 26 में स्थित सीट 23, की कीमत 138,000 डॉलर (लगभग 1.3 करोड़ रुपये) है। कुछ ही फीट की दूरी पर स्थित सीट 21 की कीमत 23,000 डॉलर (लगभग 21.6 लाख रुपये) रखी गई है।     मार्केटप्‍लेस में गुरुवार को सूचीबद्ध फाइनल के लिए सबसे कम कीमत वाले टिकट 10,923.85 डॉलर (लगभग 10.2 लाख रुपये) के थे, जो ऊपरी डेक के शीर्ष से चार पंक्तियों में गोल के पीछे, ब्लॉक 323, पंक्ति 23, सीट 13-16 में स्थित चार सीटों के लिए थे शासकीय ईकाई ने अपने बयान में कहा, 'फीफा ने टिकट बिक्री और द्वितीयक बाजार का एक ऐसा मॉडल स्थापित किया है जो मेजबान देशों में प्रमुख खेल और मनोरंजन आयोजनों के लिए मानक टिकट बाजार प्रथाओं को दर्शाता है। लागू होने वाले रीसेल सुविधा शुल्क उत्तरी अमेरिकी खेल और मनोरंजन क्षेत्रों में उद्योग मानकों के अनुरूप हैं।' इसमें आगे बताया गया, 'फीफा का परिवर्तनीय मूल्य निर्धारण टिकटिंग दृष्टिकोण विभिन्न खेल और मनोरंजन क्षेत्रों में उद्योग के रुझानों के अनुरूप है, जहां बिक्री और उपस्थिति को अनुकूलित करने और आयोजनों के लिए उचित बाजार मूल्य सुनिश्चित करने के लिए कीमतों में समायोजन किया जाता है।' फीफा का कहना है कि वह खेल के विकास के लिए विश्व कप से प्राप्त राजस्व को अपने 211 सदस्य देशों के बीच दोबारा निवेश करता है। फीफा ने बुधवार को अपनी डायरेक्ट टिकट साइट पर टिकटों के नए बैच की बिक्री शुरू की। फाइनल के लिए उपलब्ध टिकटों की कीमत 10,990 डॉलर (लगभग 10 लाख रुपये) है।

एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में छाया ‘योगी मॉडल’, यूपी की शिक्षा नीति बनी देशभर में चर्चा का विषय

लखनऊ.  देश में शिक्षा सुधार को लेकर आयोजित एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में उत्तर प्रदेश का ‘योगी मॉडल’ प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया। सेंट्रल स्क्वेयर फाउंडेशन (सीएसएफ) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय मंच पर बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलावों को रेखांकित किया। कार्यक्रम में मौजूद विभिन्न राज्यों के नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और प्रशासकों के बीच उत्तर प्रदेश का मॉडल चर्चा का केंद्र रहा। कॉन्क्लेव में मूल्यांकन प्रणाली को भी सुधार के दृष्टिकोण से विकसित परख, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएनएल), प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ईसीई), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और एडटेक के उपयोग जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। ‘निपुण भारत मिशन’ के अंतर्गत राज्यों के अनुभवों और सफल मॉडलों को साझा किया गया। इस दौरान एसीएस शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधार को स्पष्ट लक्ष्य, सतत मूल्यांकन और सशक्त शिक्षक के आधार पर आगे बढ़ाया गया है। राज्य में ‘लक्ष्य’ आधारित शिक्षण, निरंतर आकलन और शिक्षक-केंद्रित दृष्टिकोण ने शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए उन्हें जमीन पर परिणाम में बदला गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार देखने को मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों को सहयोग देने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने पर प्रदेश सरकार ने विशेष जोर दिया है। एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन) जैसे मेंटर कैडर, संकुल बैठकों के माध्यम से संवाद और ‘तालिका’ के जरिए छात्रों की प्रगति की नियमित निगरानी ने सिस्टम को अधिक जवाबदेह और परिणाममुखी बनाया है। मूल्यांकन प्रणाली को सुधारात्मक दृष्टिकोण के साथ विकसित करते हुए इसे पुरस्कार या दंड के बजाय अधिगम की कमियों की पहचान और उनके समाधान के प्रभावी उपकरण के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जिससे वास्तविक सीखने के परिणामों पर फोकस बढ़ा है। निपुणता हासिल करने में जिन विद्यालयों को कठिनाइयां आ रही हैं, उन्हें निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जबकि तकनीक के प्रभावी उपयोग से प्रशासन और शिक्षक के बीच रियल-टाइम कनेक्टिविटी स्थापित होकर त्वरित निर्णय और प्रभावी क्रियान्वयन संभव हुआ है, जो शिक्षा प्रणाली की एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है; साथ ही रणनीति को केवल ‘निपुण विद्यालयों’ की मान्यता तक सीमित न रखते हुए उन सफल प्रक्रियाओं और प्रथाओं की पहचान कर पूरे राज्य में लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे मॉडल के विस्तार और संस्थागत मजबूती को गति मिल रही है।

मंत्री सारंग बोले – सहकारिता किसानों की आय, तकनीक और विश्वास में बढ़ोतरी का आधार बनी

भोपाल. सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि मध्यप्रदेश सहकारिता के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ते हुए देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है। राज्य में पेक्स के डिजिटलीकरण, व्यवसाय विविधिकरण, सदस्यता विस्तार और दुग्ध संघों की प्रगति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी है। पेक्स कम्प्यूटरीकरण में देश में अग्रणी मध्यप्रदेश मंत्री सारंग ने बताया कि प्रदेश की सभी 4536 कार्यशील पेक्स का सफल कम्प्यूटरीकरण किया जा चुका है। ईआरपी सॉफ्टवेयर के माध्यम से कार्यप्रणाली पारदर्शी और आधुनिक बनी है। किसानों को एसएमएस के जरिए लेन-देन की जानकारी देने में मध्यप्रदेश देश में प्रथम है। साथ ही, ऑनलाइन और पेपरलेस सदस्यता सुविधा से किसानों को सरल और सुगम सेवाएं मिल रही हैं। व्यवसाय विविधिकरण से बढ़ रही आय मंत्री सारंग ने बताया कि पेक्स अब पारंपरिक गतिविधियों से आगे बढ़कर नए व्यवसाय अपना रही हैं। आईएफएफसीओ-एमसी आउटलेट, सांची पार्लर, पशुचारा और रिटेल स्टोर जैसे नवाचारों से समितियों की आय में वृद्धि हो रही है। आगामी वर्षों में 1500 से अधिक पेक्स में व्यवसाय विविधिकरण का लक्ष्य रखा गया है। सदस्यता अभियान से बढ़ेगी भागीदारी मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 58 लाख से अधिक सदस्य हैं, जबकि 41 लाख नए सदस्य बनाने की अपार संभावनाएं हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए 10 लाख नए सदस्य बनाने का अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण, सस्ती कृषि सामग्री और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। दुग्ध संघों में ऐतिहासिक प्रगति मंत्री सारंग ने बताया कि एनडीडीबी के साथ हुए समझौते के बाद प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और संग्रहण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दूध उत्पादकों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया गया है और उनकी आय में भी वृद्धि हुई है। नए डेयरी प्लांट और बल्क मिल्क कूलर की स्थापना से डेयरी क्षेत्र को नई गति मिली है। सहकारिता से आत्मनिर्भरता की ओर मंत्री सारंग ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिलाओं और ग्रामीण समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य सहकारिता को जन-जन तक पहुंचाकर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना है। बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता डी.पी. आहूजा, उपसचिव रानी बाटड़, प्रबंध संचालक अपैक्स बैंक मनोज गुप्ता, प्रबंध संचालक राज्य सहकारी संघ ऋतुराज रंजन, प्रबंध संचालक बीज निगम महेंद्र दीक्षित सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

खाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, असुरक्षित तेल उत्पादों की बिक्री पर रोक

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मानक के विपरीत बिक्री पर 14 फर्मों के खाद्य तेलों एवं अन्य उत्पादों पर पाबंदी लगा दी गई है। ये फर्में खाद्य तेल और वसायुक्त किसी भी उत्पाद को नहीं बना सकेंगी। इनके उत्पाद की बिक्री, भंडारण और वितरण प्रतिबंधित किया गया है। यह प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त डा. रोशन जैकब ने लगाया है। प्रदेश में खाद्य तेलों में मिलावट की शिकायत पर 23 फरवरी को प्रदेशभर में 58 टीमों ने 64 खाद्य तेल इकाइयों की जांच की। इसमें 56 इकाइयों से 206 नमूने लिए गए। नमूनों की जांच भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा अधिकृत प्रयोगशालाओं में कराई गई। जांच में संबंधित नमूने असुरक्षित और अधोमानक पाए गए हैं। कुछ उत्पादों में लेड तत्व की अधिक मात्रा पाई गई है, जो मानव जीवन के लिए खतरनाक है। कई उत्पादों में अनधिकृत रूप से एक से अधिक खाद्य तेलों का मिश्रण किया गया। फोर्टिफाइड तेलों में विटामिन की मात्रा कम पाई गई, जिससे उपभोक्ताओं को धोखा दिया जा रहा था। ऐसे में इन कंपनियों के तेल और वसायुक्त उत्पादों पर प्रतिबंध लगा लगा दिया गया है। इन कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध     हिंद वेज ऑइल प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ     संकट मोचन एंटरप्राइसेस, लखनऊ     भीम श्री, प्रोडक्ट कानपुर एनआर उद्योग, कानपुर     कटारिया एडिबल्स, कानपुर     वैभव एडिबल्स, कानपुर देहात     मंटोरा ऑयल प्रोडक्शन प्राइवेट लि., कानपुर देहात     आगरा ऑयल जनरल इंडस्ट्री लि, हाथरस     एनएम ऑयल कॉरपॉरेशन, आगरा     जीएस एग्रो फूड्स, मेरठ     जेपी एग्रो ऑयल, मेरठ     राजेन्द्र कुमार सुशील चंद, मेरठ     केएल वेजिटेबल ऑयल प्रोडक्ट, प्रा लि, हापुड़     जय लक्ष्मी सोलवेंटस प्रा लि, गोरखपुर सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं खाद्य पदार्थ एवं वसा तेल में लेड तत्व की अधिक मात्रा सेहत के लिए हानिकारक है। इसी तरह अलग- अलग पैरामीटर पर अधोमानक पाए गए उत्पादों की फर्मों पर प्रतिबंध लगाया गया है। डॉ. रोशन जैकब, आयुक्त एफएसडीए  

प्रदेश में 6 लाख घरों पर लगेंगे सौर ऊर्जा संयंत्र : मंत्री शुक्ला

भोपाल.  नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया है कि मध्यप्रदेश में 6 लाख घरों पर पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत सौर ऊर्जा संयंत्र लगाये जायेंगे। इसके लिये वेंडर्स से डिजिटल एग्रीमेंट भी किया जायेगा। इससे सौर संयंत्र की स्थापना लागत में कमी आयेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिये सरकार कृत-संकल्पित होकर कार्य कर रही है। मंत्री शुक्ला ने बताया कि हितग्राही एवं वेंडर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा विभिन्न शुल्कों में कमी लाने के लिये डिजिटल एग्रीमेंट किये जाने संबंधी याचिका मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग में लगाई थी। रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रोसेसिंग शुल्क, मीटर जांच शुल्क और इंस्टॉलेशन/कमीशनिंग शुल्क एवं अलग-अलग भौतिक अनुबंधों के स्थान पर डिजिटल एग्रीमेन्ट लागू करने के संबंध में मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने याचिका की सुनवाई के बाद डिजिटल एग्रीमेंट के लिये आदेश पारित कर दिया है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा भौतिक अनुबंधों के स्थान पर डिजिटल एग्रीमेन्ट करने संबंधी आदेश पारित करने से घरों की छत पर सौर संयंत्र स्थापना लागत में कमी आएगी। साथ ही स्थापना संबंधी कार्य शीघ्र गति से हो सकेगा।  

निशांत कुमार का सियासी सफर शुरू, जेडीयू संगठन पर रहेगा फोकस

पटना बिहार में इन दिनों सबसे ज्यादा सियासी चर्चा में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार है, जो सियासत के पिच पर कदम तो रख दिए हैं, लेकिन सरकार में कोई भी जिम्मेदारी न लेने का फैसला किया है. निशांत कुमार 3 मई से बिहार की यात्रा पर निकल रहे हैं, लेकिन उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला जून में होगा. इसके बाद ही तय होगा कि उनका भूमिका सत्ता में होगा या फिर संगठन में होगा अहम रोल? निशांत कुमार 3 मई से बिहार की यात्रा पर निकल रहे हैं और इसकी शुरुआत पश्चिमी चंपारण से करेंगे. यह वही क्षेत्र है, जहां से पहले भी नीतीश कुमार अपनी कई प्रमुख यात्राएं शुरू करते रहे हैं. चंपारण से यात्रा शुरू करना निशांत के लिए सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रयोग माना जा रहा है. निशांत कुमार अपने पिता के राजनीतिक मॉडल को ही आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. नीतीश कुमार लंबे समय तक 'यात्रा' के जरिए सीधे जनता से जुड़ते रहे हैं, और अब निशांत कुमार उसी रास्ते पर चल रहे हैं. यात्रा के एक महीने गुजर जाने के बाद निशांत के सियासी भविष्य और रोल को लेकर फैसला होगा? निशांत यात्रा से तैयार करेंगे 'पावर ग्राउंड' नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार 3 मई से राज्यव्यापी यात्रा पर निकलेंगे. खास बात यह है कि वे इस दौरे पर किसी बड़े पदाधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि एक साधारण जेडीयू कार्यकर्ता के रूप में उतरेंगे. उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क स्थापित करना है. निशांत कुमार यात्रा के दौरान पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर के पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे और संगठन की जमीनी हकीकत को समझने की कोशिश करेंगे. बताया जा रहा है कि यह यात्रा तीन से चार महीने तक चलेगी, जिससे उन्हें पूरे राज्य में संगठन की स्थिति का व्यापक अनुभव मिल सके.इसलिए यह यात्रा उनके लिए पावर से पहले ग्राउंड तैयार करने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है. राजनीतिक जानकारों की नजर में यह सिर्फ एक सामान्य यात्रा नहीं है, बल्कि राजनीतिक लॉन्च का अगला चरण, संगठन को मजबूत करने की कोशिश और बिहार में नए नेतृत्व की तैयारी है.  नीतीश कुमार ने पिछले कई दशकों में देश-प्रदेश की राजनीति में अपनी जो साख बनाई है, निशांत कुमार उसे ही आगे बढ़ाने की तैयारी पर बढ़ रहे हैं. जून होगा निशांत के राजनीति का डिसाइडर नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद से चर्चा थी कि निशांत कुमार को बिहार सरकार में कोई बड़ा पद मिल सकता है. सम्राट सरकार में डिप्टीसीएम बनाने के भी कयास लगाए जा रहे थे, जिसके लिए तैयार नहीं हुए. निशांत ने फिलहाल सरकार में कोई ज़िम्मेदारी न लेने का फैसला किया है. सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय उनका व्यक्तिगत है और वे किसी पद को संभालने से पहले खुद को पूरी तरह तैयार करना चाहते हैं. इसीलिए उन्होंने यात्रा के जरिए संगठन और जमीनी काम पर फोकस करने का रास्ता चुना है. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि निशांत कुमार जून महीने में विधान परिषद के सदस्य बन सकते हैं. जून में बिहार में 9 एमएलसी की सीटों पर चुनाव हैं, जिसमें से तीन सीटें जेडीयू के खाते में आ सकती हैं. इन्हीं में से एक सीट को निशांत कुमार को एमएलसी के लिए चुना जा सकता है. इसके बाद  निशांत कुमार खुद यह तय करेंगे कि उनकी भूमिका सरकार में होगी या संगठन में रोल अदा करेंगे. पहले संगठन पर फोकस करेंगे निशांत निशांत कुमार जिस तरह से कोई पद लेने से पहले यात्रा का रास्ता चुना है, उससे उनके राजनीतिक प्लान को बहुत आसानी से समझा जा सकता है. सत्ता के बजाय संगठन शक्ति पर भरोसा. निशांत का मानना है कि अगर जनता के बीच सीधे पैठ बना ली जाए, तो सत्ता खुद-ब-खुद कदम चूमेगी. चंपारण से शुरुआत करना यह बताता है कि वे अपने पिता के उसी 'गांधीवादी और विकासवादी' मॉडल को 2.0 वर्जन में पेश करने जा रहे हैं. नीतीश कुमार की नक्शेकदम पर चलते हुए निशांत कुमार तीन से चार महीने तक बिहार के अलग-अलग इलाके की यात्रा करेंगे. जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि निशांत पार्टी का भविष्य हैं और आने वाले समय में उनकी भूमिका बेहद अहम हो सकती है. ऐसे में सरकार और संगठन में किसी पद को लेने से पहले अपनी सियासी जमीन को तैयार करने का प्लान बनाया है. एनडीए में मंत्रिमंडल का फॉर्मूला तय सम्राट चौधरी के अगुवाई में बिहार सरकार बनने के बाद अभी सीएम और दो डिप्टीसीएम है. बिहार में अधिकतम 36 मंत्री बन सकते हैं. ऐसे में सम्राट के कैबिनेट विस्तार को लेकर भी हलचल तेज है. सूत्रों के मुताबिक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद कैबिनेट विस्तार हो सकता है. इसके लिए 4 से 10 मई के बीच मंत्रिमंडल विस्तार संभव है बिहार में एनडीए की सरकार है, मंत्रिमंडल में 16-16 सीटें बीजेपी और जेडीयू को मिल सकती हैं. इसके अलावा 2 पद चिराग पासवान की पार्टी को, जबकि जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को एक-एक पद दिए जाने की संभावना है.राज्य की राजनीति में इन घटनाक्रमों को आगामी चुनावों से पहले बड़े रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.

महिला सामर्थ्य योजना से अवध में डेढ़ हजार से ज्यादा गांवों का कायाकल्प

लखनऊ.  योगी सरकार की महिला सामर्थ्य योजना अवध क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने वाली बड़ी पहल बनकर उभरी है। अयोध्या, सुल्तानपुर, रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़, फतेहपुर और कानपुर नगर के डेढ़ हजार से अधिक गांवों में इस योजना के तहत एक लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं हैं। वहीं, लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी में योजना का विस्तार किया जा रहा है। इस योजना की सबसे बड़ी बात यह है कि इस पहल के जरिए एक लाख से अधिक महिलाएं डेयरी नेटवर्क से जुड़ चुकीं हैं और अब तक 1380 करोड़ रुपये से अधिक सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर भी किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री का फोकस : आत्मनिर्भर महिला, सशक्त परिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती ही मजबूत परिवार और समृद्ध समाज की नींव है। महिला सामर्थ्य योजना इसी सोच का विस्तार है, जहां महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार और भुगतान तक सीधे जोड़ा गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनीं महिलाएं अवध क्षेत्र के इन जिलों में आज महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रहीं हैं। रोज करीब 4 लाख लीटर दूध का संग्रह इस बात का प्रमाण है कि डेयरी अब केवल परंपरागत काम नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधि बन चुकी है। यह नेटवर्क गांव-गांव में रोजगार, आय का नया आधार तैयार कर रहा है। व्यवसाय की रफ्तार : 8000 से एक लाख पार का सफर मार्च 2023 में 340 गांवों और 8000 महिलाओं से शुरू हुआ यह अभियान आज 1550 गांवों और एक लाख से भी अधिक महिलाओं तक पहुंच चुका है। दुग्ध व्यवसाय का तेजी से हुआ यह विस्तार दर्शाता है कि योगी सरकार की योजनाएं अब सीधे जमीन पर असर डाल रही हैं। बिचौलिया खत्म, सीधे खाते में पैसा जाने से बढ़ा भरोसा योजना की सबसे बड़ी ताकत है डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी)। महिलाओं को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में मिल रहा है, जिससे पर्ची-खर्ची और बिचौलिया तंत्र पूरी तरह खत्म हो गया है। इस पारदर्शिता ने महिलाओं के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। सुल्तानपुर की अनीता वर्मा बनीं सफलता का मॉडल सुल्तानपुर के दूबेपुर ब्लॉक के मुकुंदपुर गांव की अनीता वर्मा इस योजना की सफलता की सशक्त मिसाल हैं। दो गायों से उन्होंने छोटा सा प्रयास शुरू किया। गत वर्ष उन्हें  करीब साढ़े छह लाख रुपये का भुगतान हुआ है। उनकी कहानी न सिर्फ आर्थिक बदलाव की है, बल्कि यह दिखाती है कि सही अवसर और समय पर योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं कैसे अपने परिवार और समाज का भविष्य बदल सकती हैं।