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गुरुग्राम में फूड आउटलेट्स को सख्त निर्देश, लापरवाही से बढ़ सकता है बीमारियों का खतरा

 गुरुग्राम  शहर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और जन-स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खाद्य प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में सेक्टर-31 स्थित खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर संचालकों को स्वच्छता मानकों और सुरक्षित खाद्य प्रबंधन के प्रति जागरूक किया गया। खाद्य पदार्थों को दूषित होने से बचाना मेट्रोपालिटन सर्विलांस यूनिट (एमएसयू), गुरुग्राम से जुड़े खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ राकेश ने ट्विन ब्रदर्स, एएए फूड्स और मुंबई एक्सप्रेस पाव भाजी सहित अन्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित किया। निरीक्षण का उद्देश्य खाद्य पदार्थों को दूषित होने से बचाना, खाद्य जनित बीमारियों का जोखिम कम करना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। निरीक्षण के दौरान रसोई और खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाली सतहों की सफाई, बर्तनों एवं उपकरणों का रखरखाव, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण और कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया। अनदेखी से हो सकता है खतरा खाद्य पदार्थों की तैयारी और भंडारण में स्वच्छता की अनदेखी से भोजन दूषित होने और खाद्य जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में प्रतिष्ठानों में सुरक्षित पेयजल, साफ-सुथरी रसोई, नियमित सैनिटाइजेशन और कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता सुनिश्चित करना जरूरी है। खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ राकेश ने खाद्य व्यवसाय संचालकों को स्वच्छता संबंधी प्रक्रियाओं का नियमित पालन करने के महत्व से अवगत कराया।

पनीर में फॉर्मलिन की आशंका से बढ़ी चिंता, भागलपुर में खाद्य पदार्थों की जांच धीमी

भागलपुर  जिले के लोगों को मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचाने के लिए करीब छह साल पहले उपलब्ध कराया गया फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स वाहन अब चालक के अभाव में परेशानी का सामना कर रहा है। श्रावणी मेला समेत महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की जांच के लिए मुख्यालय से इस वाहन के इस्तेमाल का निर्देश दिया जाता है। वाहन के लिए तकनीशियन की व्यवस्था है, लेकिन चालक के सेवानिवृत्त होने से इसके नियमित संचालन पर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच प्रभावित होने की आशंका है। संविदा पर चालक की नियुक्ति के लिए निकला विज्ञापन खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजहंस कुमार ने बताया कि वाहन चालक के सेवानिवृत्त होने से संचालन में परेशानी हो रही है। हालांकि, सरकार की ओर से संविदा पर चालक की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया है। चालक की नियुक्ति होने के बाद वाहन का नियमित संचालन आसान हो सकेगा। सप्ताह में दो दिन जांच का निर्देश खाद्य निरीक्षक अशोक कुमार सिन्हा ने बताया कि मुख्यालय से इस वाहन के माध्यम से सप्ताह में दो दिन खाद्य पदार्थों की जांच करने का निर्देश है। चालक नहीं रहने से इसमें परेशानी आ रही है। जब तक नए चालक की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उपलब्ध संसाधनों के आधार पर काम करने का प्रयास किया जाएगा। अशोक कुमार सिन्हा के पास भागलपुर के साथ मुंगेर जिले का भी प्रभार है। मौके पर होती है सामान्य जांच, रासायनिक जांच पटना में फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स वाहन में उपलब्ध प्रयोगशाला से खाद्य पदार्थों की सामान्य जांच की जाती है। राजहंस कुमार ने बताया कि वाहन से सभी तरह की जांच संभव नहीं है। मौके पर मिठाई में फफूंद, असामान्य गंध और खराब होने के अन्य लक्षणों की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर रासायनिक जांच के लिए पटना भेजा जाता है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। अगस्त से अब तक आधा दर्जन दुकानदारों पर कार्रवाई राजहंस कुमार के अनुसार, अगस्त से अब तक जिले में करीब आधा दर्जन दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जांच के दौरान विभिन्न इलाकों में खराब खाद्य पदार्थ बेचने के मामले सामने आए। खाद्य पदार्थों में मिलावट की पुष्टि होने पर नियमानुसार मामला आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। मामले की प्रकृति और मिलावट की गंभीरता के आधार पर सक्षम प्राधिकारी जुर्माना लगा सकते हैं। गंभीर मामलों में न्यायालय की प्रक्रिया भी अपनाई जाती है। नियमों के तहत खाद्य कारोबार का लाइसेंस निलंबित या रद करने की कार्रवाई भी हो सकती है। पनीर में फॉर्मलिन मिलाने की आशंका खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजहंस कुमार ने बताया कि जांच के दौरान पनीर में मिलावट का मामला सामने आया है। उनके अनुसार, कुछ दुकानदार पनीर को अधिक दिनों तक खराब होने से बचाने के लिए फॉर्मलिन समेत अन्य रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। इससे पनीर सामान्य परिस्थितियों में जितने समय तक सुरक्षित रह सकता है, उससे अधिक समय तक खराब होने के लक्षण स्पष्ट नहीं दिखते। हालांकि, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही की जा सकती है। फॉर्मलिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके संपर्क या सेवन से गंभीर नुकसान हो सकता है। ऐसे रसायनों का खाद्य पदार्थों में अवैध इस्तेमाल लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है। इसके अलावा मिठाइयों में अनधिकृत रंगों के इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए भी नमूने लिए जाते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि नियमानुसार नमूने लेकर जांच कराई जाती है और गड़बड़ी की पुष्टि होने पर कार्रवाई की जाती है।  

दिल्ली में मिठाइयों की गुणवत्ता पर शिकंजा, बिना लाइसेंस चल रही रसगुल्ला इकाइयों पर छापेमारी

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर विभाग की टीमों ने निहाल विहार में बिना लाइसेंस चल रही रसगुल्ला निर्माण इकाइयों पर औचक छापेमारी की। इस दौरान 402 किलोग्राम खाद्य उत्पाद नष्ट किए गए। वहीं, मोरी गेट स्थित खोया मंडी में 520 किलोग्राम खराब खोया और छेना भी नष्ट कराया गया। बिना लाइसेंस चल रही इकाइयों पर छापेमारी खाद्य सुरक्षा विभाग ने निहाल विहार में रसगुल्ला बनाने वाली उन इकाइयों को निशाना बनाया, जो बिना लाइसेंस संचालित हो रही थीं। छापेमारी के दौरान 402 किलोग्राम खाद्य उत्पाद नष्ट किए गए। इस कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ रोकना है। मोरी गेट खोया मंडी में भी कार्रवाई विभाग की टीम ने इसी अभियान के तहत मोरी गेट स्थित खोया मंडी में भी जांच की। यहां 520 किलोग्राम खराब खोया और छेना नष्ट कराया गया। खोया और छेना मिठाइयां बनाने में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं। ऐसे में इनकी गुणवत्ता पर निगरानी खाद्य सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। जांच के लिए लिए गए सैंपल कार्रवाई के दौरान खाद्य पदार्थों के नमूने भी एकत्र किए गए हैं। इन्हें आगे की जांच के लिए भेजा जाएगा, ताकि उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा का पता लगाया जा सके। विभाग की यह कार्रवाई खाद्य पदार्थों में अनियमितताओं पर निगरानी रखने और लोगों तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाने के प्रयासों का हिस्सा है।  

पटना में होटल, मिठाई दुकानों और ऑनलाइन स्टोर पर छापेमारी, खराब पनीर से एक्सपायरी दूध तक मिला

पटना बिहार में लोगों को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए खाद्य संरक्षा विभाग ने राज्यव्यापी जांच अभियान तेज कर दिया है। अब तक 531 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया है, जिनमें पटना के 87 प्रतिष्ठान शामिल हैं। जांच के दौरान खराब, दुर्गंधयुक्त और एक्सपायरी खाद्य पदार्थ मिलने पर जब्ती और नष्ट करने की कार्रवाई की गई। विभाग ने दो प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए हैं, जबकि 15 के विरुद्ध अभियोजन की कार्रवाई की गई है। होटल, मिठाई दुकान से लेकर ऑनलाइन स्टोर तक जांच अभियान के तहत होटल, रेस्तरां, मिठाई दुकान, डेयरी, फास्ट फूड सेंटर, पैकेज्ड पेयजल इकाइयों और ऑनलाइन खाद्य सामग्री बेचने वाले स्टोर की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, रसोई की स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण और वैध लाइसेंस की पड़ताल की। अनियमितता मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों को सुधार के नोटिस भी दिए गए हैं। पटना में हजारों किलो मिठाई और खाद्य सामग्री पर कार्रवाई पटना में जांच के दौरान मिल्क केक, गुलाब जामुन, रसगुल्ला, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों पर कार्रवाई की गई। संपतचक, गौरीचक और आसपास के इलाकों में बिना वैध लाइसेंस संचालित पैकेज्ड पेयजल इकाइयों की भी जांच हुई। विभाग ने संदिग्ध उत्पादों के नमूने प्रयोगशाला भेजे और नियमों के उल्लंघन पर संबंधित इकाइयों के संचालन पर कार्रवाई की। बड़े होटल और फास्ट फूड आउटलेट भी जांच के दायरे में होटल मौर्या, द पनाश, बारबेक्यू नेशन, केएफसी और पिज्जा हट समेत विभिन्न प्रतिष्ठानों में रसोई की साफ-सफाई और खाद्य भंडारण की जांच की गई। कुछ जगहों पर दुर्गंधयुक्त पनीर, कीड़े लगे ब्रेड पैकेट और जला हुआ तेल मिलने की जानकारी दी गई। ब्लिंकिट स्टोर से एक्सपायरी दूध और अन्य स्टोर से घी, आटा, मसाले तथा मैदा जब्त कर नष्ट कराए गए। पटना के बाहर भी कई जिलों में कार्रवाई पटना के अलावा रोहतास, सारण, गोपालगंज, सीवान, गया और वैशाली समेत कई जिलों में निरीक्षण किए गए। वैशाली में बिना वैध लाइसेंस वाली इकाइयों से 22,992 लीटर पैकेज्ड पेयजल जब्त किया गया। बिदुपुर में दो प्रतिष्ठानों से 328 किलोग्राम पनीर जब्त कर नष्ट किया गया। मुजफ्फरपुर, सुपौल, समस्तीपुर और पश्चिम चंपारण में भी खराब या एक्सपायरी खाद्य सामग्री पर कार्रवाई हुई। नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई खाद्य संरक्षा विभाग ने कारोबारियों को स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और वैध लाइसेंस से जुड़े नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को निरीक्षण और कार्रवाई की रिपोर्ट FoSCoS पोर्टल पर अपलोड करने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

बिहार में रिलायंस, फ्लिपकार्ट और बिग बास्केट के वेयरहाउस में मिलीं खामियां, खाद्य सुरक्षा विभाग सख्त

 पटना खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करने के लिए खाद्य संरक्षा विभाग की ओर से लगातार निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पटना के मौजा जेठूली और दीदारगंज स्थित रिलायंस रिटेल लिमिटेड के दो वेयरहाउस में खाद्य सुरक्षा मानकों से जुड़ी कई खामियां पाई गईं। विभाग ने दोनों प्रतिष्ठानों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32 के तहत सुधार नोटिस जारी कर 14 दिनों के भीतर कमियां दूर करने का निर्देश दिया है। जेठूली के वेयरहाउस में गंदगी, खुले में रखे मिले खाद्य पदार्थ पटना सिटी के मौजा जेठूली स्थित रिलायंस रिटेल लिमिटेड के वेयरहाउस के निरीक्षण के दौरान कोल्ड स्टोरेज में खाद्य पदार्थ खुले स्थान पर रखे मिले। फर्श पर गंदगी के साथ स्टोर में कबूतर की मौजूदगी और उससे फैली गंदगी भी पाई गई। ये खामियां खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम तथा लाइसेंसिंग एवं पंजीकरण संबंधी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। विभाग ने यहां से मलाई पनीर का नमूना लेकर जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भेजा है। दीदारगंज में खाद्य और अखाद्य सामग्री एक साथ मिली रिलायंस रिटेल लिमिटेड के दीदारगंज स्थित प्रतिष्ठान के निरीक्षण में खाद्य एवं अखाद्य पदार्थों को एक साथ रखा पाया गया। इसके अलावा खाद्य सामग्री के भंडारण के लिए आवश्यक स्वच्छ वातावरण का भी अभाव मिला। विभागीय अधिकारियों ने यहां से हल्दी पाउडर और तीखी मिर्च पाउडर के नमूने संग्रहित किए हैं। दोनों नमूनों को गुणवत्ता जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। 14 दिनों में सुधार नहीं तो लाइसेंस पर कार्रवाई खाद्य संरक्षा विभाग ने दोनों रिलायंस प्रतिष्ठानों को 14 दिनों के भीतर सभी कमियों को दूर करने और अनुपालन से संबंधित प्रमाण अभिहित पदाधिकारी के कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय में सुधार नहीं होने या अनुपालन प्रमाण प्रस्तुत नहीं करने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खाद्य लाइसेंस निलंबित किए जा सकते हैं। इसके बाद नियमानुसार लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। फ्लिपकार्ट वेयरहाउस में 293 पैकेट चाय की बिक्री पर रोक बिहटा स्थित फ्लिपकार्ट वेयरहाउस के निरीक्षण के दौरान टाटा टी गोल्ड के 500 ग्राम वाले पैकेटों पर अंकित बैच नंबर और कार्टन पर दर्ज बैच नंबर में अंतर पाया गया। इसके बाद ऐसे 293 पैकेटों की बिक्री पर रोक लगा दी गई। इनकी कुल अनुमानित कीमत 84,970 रुपये बताई गई है। चायपत्ती की गुणवत्ता जांचने के लिए वैधानिक नमूना भी लिया गया। इसके अतिरिक्त टाटा टी गोल्ड चायपत्ती और टाटा हल्दी पाउडर के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। भंडारण व्यवस्था की कमी, कई खाद्य पदार्थ नष्ट करने के लिए सौंपे लिपकार्ट वेयरहाउस में निर्धारित एवं उपयुक्त भंडारण व्यवस्था के अभाव में केक-पेस्ट्री के 31 पीस, आटे के 170 पैकेट, कुकीज के 70 पैकेट, कॉफी के 60 पैकेट, चिप्स के 24 पैकेट और सीरियल फ्लेक्स सहित अन्य खाद्य पदार्थ मिले। इनकी कुल अनुमानित कीमत 48,210 रुपये है। संबंधित एजेंसी ने इन खाद्य पदार्थों को अधिकृत कंपनी को विनष्टीकरण के लिए सौंप दिया। वहीं, 550 टोट बॉक्स यानी सर्विस बॉक्स गंदे और क्षतिग्रस्त पाए गए। इनकी अनुमानित कीमत 2,67,500 रुपये है। विभाग ने इनके इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। बिग बास्केट वेयरहाउस में भी मिलीं खामियां पटना के मंहगूपुर चिरौरा स्थित बिग बास्केट वेयरहाउस का भी खाद्य संरक्षा अधिकारियों ने निरीक्षण किया। इस दौरान वेगन टोफू गोल्ड, बारबेक्यू सॉस और जीरा पाउडर के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। निरीक्षण में वेयरहाउस में कार्यरत कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं मिले। इसके अलावा जल निकासी की समुचित व्यवस्था का भी अभाव पाया गया। इन कमियों को देखते हुए प्रतिष्ठान को 14 दिनों का इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी किया गया है। खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं खाद्य संरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षित भंडारण से जुड़े मानकों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सभी खाद्य कारोबारियों की जिम्मेदारी है। विभाग ने कहा है कि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण अभियान और आवश्यक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

त्योहारों से पहले फूड सेफ्टी विभाग अलर्ट, मिलावटी खाद्य पदार्थों की होगी सख्त जांच

  नई दिल्ली फेस्टिव सीजन में मिलावटी मिठाई, मावा, दूध, मसाले और तेल बेचने वालों पर नकेल कसने के लिए फूड सेफ्टी विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। खाने-पीने की चीजों के सैंपल की जांच में देरी रोकने के लिए विभाग सरकारी और प्राइवेट लैब को सूचीबद्ध कर रहा है। फूड सैंपलों की यहां होगी जांच इसके लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) से अधिसूचित और एनएबीएल से मान्यता प्राप्त लैब में भी फूड सैंपलों की जांच होगी। नई व्यवस्था के तहत लैब को सैपल मिलने के 2 से 5 दिनों में जांच रिपोर्ट देनी होगी। जांच में देरी की आशंका वहीं, गंभीर मामलों में 24 से 48 घंटे के भीतर शुरुआती रिपोर्ट देने का प्रावधान किया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग त्योहारों के दौरान विशेष जांच अभियान, अचानक छापेमारी, नियमित निगरानी और लोगों की शिकायतों के आधार पर खाद्य पदार्थों के सैंपल लेता है। ऐसे समय में सैंपल की संख्या बढ़ने से जांच में देरी की आशंका रहती है। जांच का काम बांटने की योजना इससे मिलावटी या असुरक्षित खाद्य पदार्थो की बिक्री पर समय रहते रोक लगाने में मुश्किल आती है। नई व्यवस्था में सरकारी और निजी लैब के बीच जांच का काम बांटने की योजना है। लैब को त्योहारों, आपात जांच अभियानों और जन शिकायतों से जुड़े सैंपल को प्राथमिकता देनी होगी, ताकि रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने और नियमानुसार कार्रवाई करने में देरी न हो। क्या कहता है विभाग का सर्कुलर विभाग के सर्कुलर के मुताबिक, दिल्ली में स्थित सूचीबद्ध लैब को विभाग की सूचना मिलने पर उसी दिन अपने खर्च पर सैंपल लेने की सुविधा भी देनी होगी। इससे सैंपल को लैब तक पहुंचाने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिलेगी। नामचीन रेस्टोरेंट के टॉयलेट में साफ कराए जा रहे थे बर्तन विभाग ने लैब को दिए ये निर्देश विभाग ने लैब को जांच के नतीजों की गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं। उसकी लिखित अनुमति के बिना जांच रिपोर्ट या संबंधित जानकारी किसी बाहरी व्यक्ति अथवा खाद्य कारोबार संचालक के साथ साझा नहीं की जा सकेगी। असुरक्षित सैंपल की तुरत देनी होगी सूचना अगर कोई खाद्य पदार्थ मिलावटी, तय मानको से कम गुणवत्ता वाला या स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाया जाता है, तो लैब को इसकी रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा आयुक्त को सीधे भेजनी होगी। रिपोर्ट की हार्ड कॉपी भेजने के साथ निर्धारित पोर्टल पर भी जांच के नतीजे अपलोड करना होगा। इसके लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने एफएसएसएआई के फूड सेफ्टी कंप्लायंस सिस्टम (FoSCOS) और इन्फोलनेट (INFOLNET) पोर्टल का उल्लेख किया है। कम समय में सटीक रिपोर्ट देने वाली लैब को प्राथमिकता देने की व्यवस्था भी की गई है।  

खाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, असुरक्षित तेल उत्पादों की बिक्री पर रोक

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मानक के विपरीत बिक्री पर 14 फर्मों के खाद्य तेलों एवं अन्य उत्पादों पर पाबंदी लगा दी गई है। ये फर्में खाद्य तेल और वसायुक्त किसी भी उत्पाद को नहीं बना सकेंगी। इनके उत्पाद की बिक्री, भंडारण और वितरण प्रतिबंधित किया गया है। यह प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त डा. रोशन जैकब ने लगाया है। प्रदेश में खाद्य तेलों में मिलावट की शिकायत पर 23 फरवरी को प्रदेशभर में 58 टीमों ने 64 खाद्य तेल इकाइयों की जांच की। इसमें 56 इकाइयों से 206 नमूने लिए गए। नमूनों की जांच भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा अधिकृत प्रयोगशालाओं में कराई गई। जांच में संबंधित नमूने असुरक्षित और अधोमानक पाए गए हैं। कुछ उत्पादों में लेड तत्व की अधिक मात्रा पाई गई है, जो मानव जीवन के लिए खतरनाक है। कई उत्पादों में अनधिकृत रूप से एक से अधिक खाद्य तेलों का मिश्रण किया गया। फोर्टिफाइड तेलों में विटामिन की मात्रा कम पाई गई, जिससे उपभोक्ताओं को धोखा दिया जा रहा था। ऐसे में इन कंपनियों के तेल और वसायुक्त उत्पादों पर प्रतिबंध लगा लगा दिया गया है। इन कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध     हिंद वेज ऑइल प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ     संकट मोचन एंटरप्राइसेस, लखनऊ     भीम श्री, प्रोडक्ट कानपुर एनआर उद्योग, कानपुर     कटारिया एडिबल्स, कानपुर     वैभव एडिबल्स, कानपुर देहात     मंटोरा ऑयल प्रोडक्शन प्राइवेट लि., कानपुर देहात     आगरा ऑयल जनरल इंडस्ट्री लि, हाथरस     एनएम ऑयल कॉरपॉरेशन, आगरा     जीएस एग्रो फूड्स, मेरठ     जेपी एग्रो ऑयल, मेरठ     राजेन्द्र कुमार सुशील चंद, मेरठ     केएल वेजिटेबल ऑयल प्रोडक्ट, प्रा लि, हापुड़     जय लक्ष्मी सोलवेंटस प्रा लि, गोरखपुर सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं खाद्य पदार्थ एवं वसा तेल में लेड तत्व की अधिक मात्रा सेहत के लिए हानिकारक है। इसी तरह अलग- अलग पैरामीटर पर अधोमानक पाए गए उत्पादों की फर्मों पर प्रतिबंध लगाया गया है। डॉ. रोशन जैकब, आयुक्त एफएसडीए  

सेहत पर खतरा: धौलपुर से आ रहा मिलावटी दूध टैंकर पकड़ा गया

 आगरा  अगर आप दूध खरीद रहे हैं तो एक बार उसे अच्छी तरीके से जांच लीजिए। कहीं मिलावटी दूध आपकी सेहत को खराब न कर दे। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने शनिवार दोपहर करहरा (किरावली)गांव के पास न्यू दक्षिणी बाईपास से एक टैंकर से 1200 लीटर मिलावटी मिश्रित दूध जब्त किया। मिलावटी दूध की आपूर्ति धौलपुर से हुई थी। दूध में रिफाइंड की मिलावट की पुष्टि हुई। दूध से दुर्गंध आ रही थी। शहर की विभिन्न डेरी में 45 से 50 रुपये प्रति लीटर में बेचा जाना था। टीम ने दूध का एक नमूना लेने के बाद उसे नष्ट करा दिया। चालक से पूछताछ के बाद संबंधित डेरी का पता लगाया जा रहा है। न्यू दक्षिणी बाईपास के करहरा गांव के पास एफएसडीए टीम ने की कार्रवाई धौलपुर से हर दिन शहर में कई टैंकर दूध, घी, पनीर भेजा जाता है। यह सब ऑन डिमांड आता है। सबसे अधिक आपूर्ति शहर और उसकी सीमा से सटे डेरी में होती है। शनिवार सुबह धौलपुर से एक टैंकर शहर आना था। एफएसडीए टीम ने न्यू दक्षिणी बाईपास स्थित करहरा गांव के पास जांच शुरू कर दी। एक टैंकर को रोका गया। जांच में उसमें दूध मिला। धौलपुर, राजस्थान के वाहन चालक प्रेम नारायण के पास कोई भी वैध दस्तावेज नहीं मिला। बिल की रसीद नहीं थी। न ही दूध की जांच रिपोर्ट थी। यह वीडियो भी देखें डेरी में 45 से 50 रुपये प्रति लीटर होने जा रही थी बिक्री मिलावटी मिश्रित दूध से दुर्गंध आ रही थी। टैंकर में थर्मोस्टेट भी नहीं लगा था। इससे दूध को सुरक्षित तापमान पर नहीं रखा जा रहा था। मोबाइल लैब से दूध का नमूना लिया गया और जांच की गई तो उसमें रिफाइंड की पुष्टि हुई। टैंकर से 1200 लीटर मिलावटी मिश्रित दूध जब्त किया गया। एक नमूना लेने के बाद दूध को कराया नष्ट सहायक खाद्य आयुक्त महेंद्र प्रताप ने बताया कि मिलावटी दूध की कीमत 60 हजार रुपये है। इसे शहर की डेरी में बिक्री के लिए ले जाया जा रहा था। दूध में रिफाइंड की पुष्टि हुई है। यह है दूध की पहचान का तरीका कुछ मात्रा में दूध लें। उसे धीमी आंच में उबाल लें। अगर दूध पीला पड़ जाए तो उसमें यूरिया की मिलावट की गई है। दूध को हाथ में लेने पर उसमें साबुन जैसी चिकनाहट आ सकती है। दूध को उबाल लें। उसमें कुछ नींबू की बूंद डाल दें। मिलावटी दूध को फटने में अधिक समय लगता है। असली दूध का स्वाद हल्का मीठा और मिलावटी दूध का कड़वा होता है। पेट संबंधी हो सकती हैं बीमारियां वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर मनीष बंसल ने बताया कि लंबे समय तक मिलावटी दूध का प्रयोग करने से पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। जिस मकसद से दूध को पिया जा रहा है। उसके उलट स्थिति सामने आने लगी।इससे उल्टी और दस्त भी हो सकती है।  

झुमरीतिलैया में खाद्य सुरक्षा जांच, लड्डू और खोवा के सैंपल फेल

कोडेरमा झारखंड के कोडेरमा जिले के जिले में मिलावटी खाने की चीजों की बिक्री रोकने और खाने की चीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को लेकर जिला प्रशासन के निर्देश पर लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है. खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी अभिषेक आनंद द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के तहत कुछ सैंपल को जांच के लिए राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला, रांची भेजा भी जा रहा है. जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे राज्य स्तर पर भेजे गए कुछ सैंपल की जांच रिपोर्ट सामने आई है. इसमें चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. खासकर जिले के मुख्य शहर झुमरीतिलैया में कुछ होटल संचालकों द्वारा खाने की चीजें खासकर मिठाई और खोवा की गुणवत्ता को लेकर तय मानक का पालन नहीं करने की पुष्टि हुई है. खाद्य सुरक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले भर से कुल 23 सैंपल जांच के लिए राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला रांची भेजा था, जिसमें से 12 की रिपोर्ट आई है. इसमें चार सैंपल तय मानक पर फेल पाया गया है. विभागीय जानकारी के अनुसार जिन चार सैंपल में गुणवत्ता की कमी मिली है उसमें लड्डू का एक सैंपल, खोवा का दो सैंपल और घी के लड्डू का एक सैंपल शामिल है. लगाया गया जुर्मना सैंपल फेल होने के बाद कोडरमा स्टेशन के पास संचालित नंदिनी स्वीट्स पर दो हजार और लड्डू गोपाल पर दो-दो हजार का जुर्माना लगाया गया है. नंदिनी स्वीट्स का लड्डू का सैंपल तय मानक पर फेल मिला है, जबकि लड्डू गोपाल का लड्डू और खोवा का सैंपल फेल पाया गया है. साथ ही भविष्य में गलत पाए जाने पर ठोस कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. होटल रामेश्वरम के घी के लड्डू का सैंपल फेल नंदिनी, लड्डू गोपाल स्वीट्स के अलावा होटल रामेश्वरम की एक मिठाई का सैंपल भी तय मानक पर खरा नहीं उतरा है. विभागीय पदाधिकारी के अनुसार जिन चार सैंपल को फेल पाया गया है उसमें होटल रामेश्वरम से कलेक्ट किया गया घी का लड्डू का सैंपल भी शामिल है. लड्डू में घी की जगह रिफाइन के इस्तेमाल की बात सामने आई है. साथ ही अन्य कमी पाई गई है. ऐसे में तय प्रावधान के तहत इस मामले को अपर समाहर्ता कोर्ट में फाइल किया गया है. वहां से जुर्माना सहित अन्य कार्रवाई को लेकर आदेश होगा. कई जगहों पर मिल रहा अखाद्य रंग का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी अभिषेक आनंद ने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट न हो और लोगों को गुणवत्तापूर्ण सामान मिले इसके लिए विभाग लगातार जांच अभियान के साथ जागरूकता अभियान भी चला रहा है. उन्होंने बताया कि पूरे वित्तीय वर्ष में जांच के दौरान होटलों, मिठाई दुकानों सहित अन्य जगहों पर गंदगी मिलने और अखाद्य रंग का इस्तेमाल पाए जाने पर करीब 50 हजार का जुर्माना वसूला गया है. कई ठेला वालों के द्वारा अखाद्य रंग का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आने पर उसे खत्म भी कराया गया है.

पुलिस ने स्टिंग ऑपरेशन में 900 किलो खराब खाद्य सामग्री जब्त की

नई दिल्ली दिल्ली के कपासहेड़ा इलाके में पुलिस ने एक्सपायर्ड खाद्य और कॉस्मेटिक उत्पादों के बड़े गोरखधंधे का खुलासा किया है. पुलिस ने इस मामले में एक शख्स को गिरफ्तार किया है और भारी मात्रा में खराब और एक्सपायर्ड सामान बरामद किया है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान 34 वर्षीय अब्दुल मन्नान खान उर्फ मोनू के रूप में हुई है, जो बिजवासन का रहने वाला है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ग्राहकों को सस्ते दामों पर एक्सपायर्ड या एक्सपायरी के करीब पहुंच चुके सामान बेचता था, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता था. पुलिस को 8 अप्रैल को इस मामले की सूचना मिली थी, जिसके बाद एक टीम ने स्टिंग ऑपरेशन चलाया. पुलिस ने डिकॉय ग्राहक बनाकर दुकान से सामान खरीदा. जांच में यह सामान एक्सपायर्ड पाया गया, जिसके बाद दुकान पर छापा मारा गया. कपासहेड़ा में पुलिस का स्टिंग ऑपरेशन छापेमारी के दौरान पुलिस को करीब 900 किलो एक्सपायर्ड किराना सामान मिला, जिसमें आटा, सूजी, पोहा, रवा, मसाले, पीनट बटर और बेबी फूड सप्लीमेंट शामिल थे. इसके अलावा बड़ी मात्रा में कॉस्मेटिक और पर्सनल केयर प्रोडक्ट भी बरामद किए गए. पुलिस ने बताया कि मौके पर करीब 2000 किलो डेयरी उत्पाद जैसे दही और पनीर भी पाए गए, जिन्हें बेहद खराब और अस्वच्छ स्थिति में रखा गया था. फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में इन सभी डेयरी उत्पादों को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया. एक्सपायर्ड सामान का खुलासा जांच में सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग जगहों से एक्सपायर्ड, खराब या एक्सपायरी के करीब पहुंच चुके सामान बेहद सस्ते दामों पर खरीदता था और फिर उन्हें ग्राहकों को बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाता था. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है.