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जेसीबी से खुदाई के दौरान निकली मूर्ति, ग्रामीणों ने बनाया अस्थायी मंदिर

चाईबासा

 पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर और आनंदपुर के सीमावर्ती इलाके में स्थित कोयल नदी में पानी के लिए जेसीबी से चार फीट गहरा गड्ढा खोदा जा रहा था. अचानक दोपहर डेढ़ बजे एक तेज आवाज के साथ खुदाई कर रही मशीन का पंजा किसी बेहद कठोर वस्तु से टकराकर ठिठक गया. ड्राइवर ने कोशिश की, लेकिन मशीन आगे बढ़ने को तैयार नहीं थी. पहले लगा कि कोई बड़ा पत्थर या चट्टान है, लेकिन जैसे ही वहां से बालू हटाई गई, वहां मौजूद लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं. अंधेरी गहराइयों से भगवान राधा-कृष्ण की युगल प्रतिमा मुस्कुराती हुई प्रकट हुई.

ग्रामीण इसे अद्भुत घटना मान रहे हैं. कोयल नदी के गर्भ से भगवान राधा-कृष्ण की एक अत्यंत सुंदर प्रतिमा बालू के करीब चार फीट नीचे दबी थी. खुदाई में यह सुंदर मूर्ति जैसे ही बाहर निकली, पूरे इलाके में यह खबर आग की तरह फैल गई. देखते ही देखते नदी का तट एक अस्थायी मंदिर के रूप में तब्दील हो गया है. लोग इसे एक मूर्ति की खोज नहीं, बल् एक साक्षात सनातन चमत्कार मान रहे हैं जिसने पल भर में नदी के सूखे तट को भक्ति के सरोवर में बदल दिया है.

जेसीबी की खुदाई के दौरान मिली प्रतिमा
मिली जानकारी के अनुसार, भीषण गर्मी के कारण कोयल नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है. ग्रामीणों की प्यास बुझाने और पास के गांव तक पानी पहुंचाने के लिए नदी में जेसीबी मशीन से खुदाई का काम चल रहा था. रविवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे, खुदाई के दौरान मशीन अचानक किसी ठोस चीज से टकराकर रुक गई. जब सावधानी से उस जगह की दोबारा खुदाई की गई तो बालू के नीचे से राधा-कृष्ण की युगल प्रतिमा निकली. मूर्ति के निकलते ही वहां मौजूद लोग जयकारे लगाने लगे.
झारखंड चमत्कार: खुदाई के दौरान कोयल नदी से निकली भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा, ग्रामीणों ने बनाया अस्थायी मंदिर.

श्रद्धालुओं ने बनाया अस्थायी दरबार
मूर्ति मिलने की सूचना मिलते ही मनोहरपुर और आनंदपुर प्रखंड के गांवों से सैकड़ों की संख्या में लोग कोयल नदी के तट पर पहुंचने लगे. लोगों की आस्था इतनी गहरी है कि उन्होंने तुरंत उस स्थान पर भगवा झंडा गाड़ दिया. भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से भगवान को बचाने के लिए ग्रामीणों ने लकड़ी और पेड़ों की टहनियों से एक अस्थायी छत (शेड) भी बना दी है. अब यहां सुबह से शाम तक पूजा-अर्चना और कीर्तन का दौर चल रहा है.

मंदिर स्थापना की तैयारी में ग्रामीण
नदी के बीचों-बीच मिली इस प्रतिमा को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह है. कई ग्रामीणों का मानना है कि यह कोई साधारण घटना नहीं बल्कि ईश्वरीय संकेत है. गांव की प्रबंध समिति और बुजुर्ग अब इस प्रतिमा को विधि-विधान के साथ किसी सुरक्षित स्थान या नवनिर्मित मंदिर में स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. फिलहाल, वनशक्ति देवी मंदिर के पास स्थित यह नदी क्षेत्र एक तीर्थ स्थल बन गया है.

 

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