samacharsecretary.com

विज्ञान के प्रति नई दृष्टि हुई विकसित

भोपाल

मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा आयोजित 18वीं विज्ञान मंथन यात्रा का समापन सोमवार को नेहरू नगर स्थित विज्ञान भवन भोपाल में उत्साहपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में हुआ। 21 से 27 अप्रैल तक आयोजित इस ज्ञानयात्रा में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों ने सहभागिता करते हुए विज्ञान के प्रति नई दृष्टि विकसित की।यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक कक्षा शिक्षा से आगे बढ़ाकर विज्ञान के व्यावहारिक एवं अनुप्रयुक्त स्वरूप से परिचित कराना था। इस दौरान प्रतिभागियों ने देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों का शैक्षणिक भ्रमण किया, जिसमें श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, बेंगलुरु स्थित इसरो के उन्नत अनुसंधान प्रतिष्ठान, इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क और चेन्नई के वैज्ञानिक संग्रहालयों एवं प्लेनेटेरियम का अवलोकन शामिल रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिवकुमार शर्मा ने ‘विज्ञान’ एवं ‘मंथन’ की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि विज्ञान सत्य की खोज की सतत प्रक्रिया है, जबकि मंथन निरंतर चिंतन एवं आत्मविश्लेषण का प्रतीक है। दोनों के समन्वय से नवाचार एवं सृजन की संभावनाएँ विकसित होती हैं। इस अवसर पर मैपकास्ट के निदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि विज्ञान केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रयोग एवं अनुभव के माध्यम से जीवन में उतरने वाली प्रक्रिया है। कार्यक्रम में डॉ. वी.के. कटारे, मिशन एक्सीलेंस प्रभारी डॉ. सुनील गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न समूहों के चयनित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने बताया कि रॉकेट प्रक्षेपण स्थल, उपग्रह नियंत्रण प्रणाली तथा अंतरिक्ष अनुसंधान की जटिल प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष देखने से उनके ज्ञान, जिज्ञासा एवं आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।ग्रुप हेड डॉ. रामानुज पाठक, डॉ. राजकुमार शर्मा एवं सीमा अग्निहोत्री सहित शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस यात्रा से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, अनुशासन, टीमवर्क एवं जिज्ञासा का विकास हुआ है तथा कक्षा-कक्ष से बाहर सीखने की यह पद्धति अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है।कार्यक्रम के अंत में मिशन एक्सीलेंस प्रभारी डॉ. सुनील गर्ग ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी प्रतिभागियों, आयोजकों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

समापन अवसर पर यह स्पष्ट हुआ कि विज्ञान मंथन यात्रा केवल एक शैक्षणिक भ्रमण नहीं, बल्कि एक प्रभावी ज्ञानयात्रा है, जो विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर उन्हें भविष्य में नवाचार एवं अनुसंधान के लिए प्रेरित करती है। 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here