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अंबाला में जनता का मूड बदला, विकास नहीं तो वोट नहीं का रुख पानी निकासी और

अंबाला

 हरियाणा में अंबाला नगर निगम चुनाव से पहले शहर का सियासी माहौल पूरी तरह गरमा चुका है. दरअसल आगामी 10 मई को मेयर और पार्षद पदों के लिए मतदान होना है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के साथ-साथ कई निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. सभी दल अपने-अपने वादों और योजनाओं के साथ जनता को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस बार शहर की जनता का रुख साफ तौर पर बदला हुआ नजर आ रहा है.

बता दे कि स्थानीय स्तर पर किए गए सर्वे और लोगों से बातचीत से यह स्पष्ट हुआ है कि मतदाता अब केवल वादों पर भरोसा करने के बजाय बीते पांच वर्षों के कार्यों का हिसाब मांग रहे हैं.वही अंबाला शहर के वार्ड नंबर 4 स्थित बलदेव नगर क्षेत्र में लोगों की प्रतिक्रियाएं इसी बदलाव की ओर इशारा करती हैं, क्योंकि यहां के कई निवासी पिछले कार्यकाल से असंतुष्ट दिखाई दिए और उन्होंने साफ कहा कि इस बार वोट केवल काम के आधार पर ही दिया जाएगा.

पानी निकासी है सबसे बड़ा मुद्दा
वही स्थानीय निवासी कस्तुरीलाल वर्मा ने लोकल 18 को बताया कि उनकी उम्र 80 साल की हो गई है लेकिन पानी की निकासी बलदेव नगर में काफी ज्यादा एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है. उन्होंने कहा कि जब भी बाढ़ आती है तो कोई भी नेता दिखाई नहीं देता है और वह उस समस्या से खुद ही जूझते हैं, जबकि पानी निकासी को सही ढंग से ठीक किया जाए तो यह समस्या बिल्कुल भी उत्पन्न नहीं होगी. उन्होंने बताया कि वह तो इस बार वोट पानी निकासी के मुद्दे को लेकर ही करेंगे और इस समस्या को हर उम्मीदवार के सामने रखेंगे. स्थानीय निवासी परमानंद ने बताया कि सफाई व्यवस्था उनके इलाके में काफी ज्यादा चरमराई हुई है ओर वह चाहते हैं कि जो भी पार्षद बने वह इन मुद्दों पर कार्य जरूर करें. उन्होंने कहा कि पिछले 5 साल में सड़के और लाइट की व्यवस्था तो ठीक रही है लेकिन जल निकासी काफी ज्यादा प्रभावित रही है.

आवारा पशुओं का करें खास इंतजाम
गौरव बख्शी ने कहा कि इस बार के निकाय चुनाव में लोगों की जो सबसे बड़ी मांग है वह आवारा पशुओं की सही जगह पर व्यवस्था करना हैं ओर साफ सफाई की सुचारू रूप से करवाना है. उन्होंने बताया कि पिछले 5 साल स्ट्रीट लाइट्स अगर खराब हो जाती थी तो उसे ठीक करने में काफी दोनों का समय लगता था,ऐसे में वह चाहते की इस बार जो भी उम्मीदवार इन लोगों की जरूरत पर काम करेगा, तो वह उसे ही चुनेंगे.क्योंकि चुनाव खत्म होने के बाद अक्सर स्थानीय नेता अपने वादे भूल जाते है ओर फिर आम जनता काफी दिनों तक परेशान रहती है. वहीं अमित कुमार ने बताया कि पिछले 5 सालों में जो वादे किए गए थे वह बिल्कुल भी पूरे नहीं हुए हैं.

कहा कि जब लोगों को पार्षदों से कम होता है तो वह फोन तक नहीं उठाते हैं और फिर चुनावों में किए गए वादे अक्सर भूल जाते हैं. इसलिए वह चाहते हैं कि यह निकाय चुनावों में जिस मर्जी पार्टी का पार्षद बने,लेकिन लोगों से किए गए वादों पर बस खरा उतारे.वही कुछ ओर स्थानीय निवासियों ने बताया कि आवारा पशु सबसे बड़ा मुद्दा क्षेत्र के लिए बने हुए हैं क्योंकि आए दिन आम जनता घायल होती है,ओर बहुत से एक्सीडेंट होते हैं.कई बार बच्चों को कुत्ते काट लेते हैं जिसकी वजह से उन्हें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है लेकिन पिछले 5 सालों में इस पर किसी प्रकार का कोई काम नहीं हो पाया है जबकि शहर में लोग इन समस्याओं को लेकर काफी ज्यादा परेशान है.

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