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ग्रामीण विकास में बड़ा बदलाव, रेरा की तर्ज पर बनेगा नया प्राधिकरण

पटना

बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब बहुमंजिली इमारत या मकान के निर्माण के पूर्व इसका नक्शा पास कराना अनिवार्य होगा। जल्द ही यह प्रावधान लागू हो सकता है। पंचायती राज विभाग ने इसके लिए नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया है। इस पर विधि विभाग और उच्चस्तरीय कमेटी से मंजूरी ली जाएगी। नियमावली के प्रारूप को राज्य मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद विधानमंडल से पारित कराया जाएगा। शहरों से सटे ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में अपार्टमेंट निर्माण को देखते हुए यह तैयारी की जा रही है।

नियमावली में रेरा (रियल एस्टेट विनिमय और विकास अधिनियम) की तर्ज पर प्राधिकार गठित करने का प्रावधान है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली बहुमंजिली इमारत के नक्शे को स्वीकृति देगा। यह बिल्डरों को परियोजना रजिस्टर करने (500 वर्गमीटर से अधिक) पर खरीदार की राशि का 70 फीसदी अलग खाते में रखने और समय पर कब्जा देने के लिए बाध्य करेगा। जमा कराए गए 70 फीसदी कोष का भी इस्तेमाल सिर्फ उसी परियोजना के निर्माण में किया जा सकेगा। खरीदारों को समय पर कब्जा नहीं देने की स्थिति या देरी होने पर उन्हें ब्याज सहित हर्जाना देना पड़ सकता है।

प्राधिकार में बिल्डर को प्रोजेक्ट का लेआउट, योजना, सरकारी मंजूरी और काम की प्रगति की जानकारी साझा करनी होगी। इसमें निर्माण का संपूर्ण एरिया (बिल्डप एरिया) और वास्तविक जगह (कॉरपेट एरिया) भी स्पष्ट रहेगा, ताकि बिल्डर धोखे से खरीदारों से ज्यादा कीमत नहीं वसूल सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में बहुमंजिला भवन में पांच साल में दोषपूर्ण निर्माण या संरचनात्मक कमी मिलने पर बिल्डर को उसे मुफ्त में ठीक करना होगा। खरीदार संबंधित संस्था के पास बिल्डर के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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