पटना
शहरी निकायों के नागरिकों को अपनी समस्या के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें निकाय से संबंधित समस्या का समाधान अब एक क्लिक पर मिलेगा। यानी सभी नगरीय सुविधाएं एक प्लेटफार्म पर मिलेंगी। नगर विकास विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इसी पोर्टल पर राज्य के 264 निकायों से संबंधित कार्य होंगे।
वर्तमान में होल्डिंग टैक्स को छोड़कर अन्य सभी तरह की सुविधाओं के लिए नागरिकों को निकाय कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है। सभी निकायों की अपनी अलग-अलग व्यवस्था है। नियमों के पालन में एकरूपता नहीं है। इसीलिए नगर विकास विभाग ने राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन के तहत ई-गवर्नेंस मॉड्यूल्स विकसित करने का निर्णय लिया है। इसका मकसद शहरी नागरिकों को सभी तरह की सेवाओं की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है।
सॉफ्टवेयर विकसित होने के साथ ही सभी निकाय एक पोर्टल से जुड़ जाएंगे। उसी पोर्टल पर अलग-अलग 15 प्रकार की सेवाओं के विकल्प मौजूद होंगे। आम नागरिक अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प का चयन कर सकता है। संबंधित निकाय के पास उनकी समस्या भेज दी जाएगी। मुख्यालय स्तर से इसकी निगरानी की जाएगी। इससे नागरिकों की समस्या का समाधान भी सुनिश्चित होगा। इसके अलावा विकास से जुड़े कार्यों के दुहराव से भी बचा जा सकेगा।नगर विकास विभाग ने इस पर अगले पांच वर्षों में करीब 120 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है।
लोगों को 15 प्रकार की सुविधाएं प्राप्त होंगी
शहरी नागरिकों को पंद्रह प्रकार की सेवाएं ऑनलाइन मिलेंगी। इसमें प्रोपर्टी टैक्स, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, व्यापार लाइसेंस, नक्शा पास कराना, किसी समस्या की शिकायत करना, किसी काम के लिए एनओसी लेना, पेयजल और सीवरेज कनेक्शन, होर्डिंग्स या विज्ञापन, अन्य कर संग्रह, साफ-सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन से संबंधित कार्य होंगे। निकायों के लीगल, एसेट मैनेजमेंट, मैटेरियल मैनेजमेंट आदि प्रमुख कार्य शामिल हैं।
कर्मचारियों को प्रशिक्षण मिलेगा
सॉफ्टवेयर विकसित होने के साथ ही नगर विकास विभाग इस सेवा की शुरुआत कर देगा। इससे पहले नगर निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के तहत ई-गवर्नेंस को लागू कर रही है। इसके संचालन के लिए मुख्यालय स्तर पर विशेषज्ञों की एक टीम होगी।





