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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट: अमेरिका के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर ईरान का सख्त रुख

 नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने सोमवार को अमेरिकी सेना को चेतावनी दी है कि यदि वे होर्मुज में प्रवेश करते हैं, तो उन पर हमला कर दिया जाएगा। ईरान के मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने कहा, 'हम चेतावनी देते हैं कि किसी भी विदेशी सशस्त्र बल, विशेष रूप से आक्रामक अमेरिकी सेना पर हमला किया जाएगा, यदि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने का इरादा रखते हैं।'

ईरान ने यह भी दावा किया कि इस जलमार्ग की सुरक्षा पूरी तरह उसके नियंत्रण में है और किसी भी जहाज के सुरक्षित मार्ग के लिए ईरानी सशस्त्र बलों के साथ समन्वय करना अनिवार्य है।

अमेरिका का प्रोजेक्ट फ्रीडम
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ईरान क्यों भड़का हुआ है? दरअसल, सोमवार को अमेरिका ने होर्मुज में फंसे जहाजों को मुक्त कराने के लिए सैन्य अभियान चलाने की घोषणा की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन को प्रोजेक्ट फ्रीडम का नाम दिया। ट्रंप ने कहा कि कई देशों ने अमेरिका से मदद मांगी है क्योंकि उनके व्यापारिक जहाज इस संघर्ष में बिना किसी गलती के फंसे हुए हैं। ट्रंप ने कहा, 'कई जहाजों पर भोजन और आवश्यक सामग्री खत्म हो रही है। ईरान, पश्चिम एशिया और अमेरिका की भलाई के लिए हम इन जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालेंगे।'

100 विमान और 15 हजार सैनिकों की तैनाती
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस सैन्य तैनाती की पुष्टि कर दी है। इस ऑपरेशन में गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक, 100 से अधिक विमान और लगभग 15,000 सैनिक शामिल किए गए हैं। पेंटागन के नेतृत्व में यह मिशन सोमवार सुबह से शुरू हुआ है, जिसका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करना है। अमेरिका के इस घोषणा के बाद ईरान ने चेतावनी दी है। पिछले कुछ दिनों से पश्चिम एशिया में शांति है, लेकिन इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति के एलान ने आग में घी डालने का काम किया है।

14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर टिकी दुनिया की नजरें
इस बीच यह भी खबर आई है कि पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है, जो अमेरिका के 9-सूत्रीय प्रस्ताव के जवाब में तैयार किया गया है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर संदेह जताया है, लेकिन वे इसकी समीक्षा करने को तैयार हैं। 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच शुरू हुए भीषण संघर्ष के बाद आठ अप्रैल से जारी युद्धविराम ने कूटनीति के लिए दरवाजे खोल दिए हैं।

शांति की आखिरी उम्मीद इस्लामाबाद वार्ता
पाकिस्तान ने 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच पहले दौर की सीधी बातचीत की मेजबानी की थी। हालांकि उस समय कोई ठोस समझौता नहीं हो सका, लेकिन स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए 21 अप्रैल को राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया। इशाक डार और अब्बास अराघची की ताजा बातचीत इसी कड़ी का हिस्सा है, जहां पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता हासिल की जा सकती है।

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