samacharsecretary.com

टॉप 10 बंदरगाहों में चीन का दबदबा, भारत की मौजूदगी गायब

नई दिल्ली 
आज समुद्री बंदरगाह वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर रोजमर्रा के सामान तक इन्हीं के जरिए दुनिया भर में पहुंचते हैं. वैश्विक समुद्री व्यापार के मोर्चे पर एक चौंकाने वाली तस्वीर उभर रही है. जो भारत के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. साल 2024 के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों की सूची में चीन ने एकतरफा दबदबा बना लिया है. खास बात यह है कि दुनिया के सबसे बिजी पोर्ट्स की टॉप 20 लिस्‍ट में भारत का एक भी बंदरगाह शामिल नहीं है। 

विजुएल कैपिटेलिस्‍ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में दुनिया भर के बंदरगाहों ने कुल 743 मिलियन शिपिंग कंटेनरों (TEUs) की प्रोसेसिंग की. इस कुल ट्रैफिक का आधे से ज्यादा हिस्सा केवल शीर्ष 20 बंदरगाहों से होकर गुजरा. इन 20 बंदरगाहों में सबसे ज्‍यादा नाम चाइनीज पोर्ट्स के हैं। दुनिया के 10 सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से 7 अकेले चीन के पास हैं. वैश्विक कंटेनर ट्रैफिक में चीन की हिस्सेदारी 40% से भी अधिक हो चुकी है. दुनिया के सबसे बिजी 20 बंदरगाहों की सूची में शंघाई बंदरगाह 51.5 मिलियन TEUs की प्रोसेसिंग के शीर्ष पर है। सिंगापुर बंदरगाह ने 2024 में 41.1 मिलियन TEUs का प्रबंधन कर दूसरा स्‍थान हासिल किया. यह शंघाई की तुलना में 10 मिलियन से भी कम है. तीसरे स्थान पर चीन का निंगबो-झोउशान पोर्ट है, जिसने 39.3 मिलियन TEUs का ट्रैफिक संभाला. यानी टॉप 3 में से दो पायदान केवल चीन के पास हैं। 

चीन का शेनझेन 33.4 मिलियन TEUs के साथ चौथे और क़िंगदाओ पोर्ट 30.9 मिलियन TEUs के साथ पांचवें स्थान पर काबिज है. छठे नंबर पर भी चीन का ही ग्वांगझोउ बंदरगाह है, जिसने 26.1 मिलियन TEUs का व्यापार संभाला। सातवें स्थान पर दक्षिण कोरिया का बुसान पोर्ट जरूर आता है, लेकिन आठवें स्थान पर फिर से चीन का तियानजिन बंदरगाह 23.3 मिलियन TEUs के साथ अपनी जगह पक्की कर चुका है. मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों ने भी इस शीर्ष सूची में अपनी जगह बनाई है, लेकिन उनकी संख्या चीन के मुकाबले नगण्य है। 

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का जेबेल अली बंदरगाह 15.5 मिलियन TEUs के साथ नौवें और मलेशिया का पोर्ट क्लांग 14.6 मिलियन TEUs के साथ दसवें स्थान पर है।  इन देशों की मौजूदगी के बावजूद, पहले से दसवें पायदान तक चीन की सात बंदरगाहों की मौजूदगी वैश्विक समुद्री मार्ग पर उसके 'कब्जे' को ही बयां करती है। 

यूरोप के गौरव माने जाने वाले बंदरगाह भी अब एशियाई बंदरगाहों की तुलना में काफी पीछे छूटते नजर आ रहे हैं. नीदरलैंड का रॉटरडैम पोर्ट 13.8 मिलियन TEUs के साथ 11वें स्थान पर है, जबकि इसके ठीक बाद चीन का हांगकांग बंदरगाह 13.7 मिलियन TEUs के साथ 12वें स्थान पर मौजूद है. बेल्जियम का एंटवर्प-ब्रुग्स पोर्ट 13.5 मिलियन TEUs के साथ 13वें पायदान स्‍थान पर है। 

चीन का शियामेन बंदरगाह 12.3 मिलियन TEUs के साथ 14वें स्थान पर है. मलेशिया का तंजुंग पेलेपास पोर्ट भी इतने ही ट्रैफिक के साथ बराबरी पर खड़ा है. अमेरिका, जो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा करता है, उसका लॉस एंजेलिस बंदरगाह मात्र 10.3 मिलियन TEUs के साथ 16वें स्थान पर है। 

मोरक्को के टैंगर-मेड पोर्ट ने 10.2 मिलियन TEUs के साथ टॉप पोर्ट्स की सूची में 17वें स्थान पर काबिज है. इसके ठीक बाद फिर से चीन का ताइकांग बंदरगाह 9.7 मिलियन TEUs के साथ 18वें पायदान पर खड़ा है. अमेरिका का लॉन्ग बीच पोर्ट 9.6 मिलियन TEUs के साथ 19वें और और थाईलैंड का लैम चाबांग बंदरगाह 20वें स्थान पर हैं। 
भारत के किसी भी बंदरगाह का नाम टॉप 20 की सूची में शामिल न होना यह दर्शाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स के मामले में अभी हमें एक लंबी दूरी तय करनी है.  भारत अपने बंदरगाहों के आधुनिकीकरण पर काम कर रहा है, लेकिन चीन जिस गति से समंदर पर अपनी बादशाहत कायम कर चुका है, उससे मुकाबला करना एक बड़ी चुनौती होगी।  

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here