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मध्यप्रदेश को बड़ी रेल सौगात, नई लाइन से गुजरात की दूरी होगी कम

झाबुआ मध्य प्रदेश में जून महीने तक नई रेल लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। सांसद अनिता चौहान की अध्यक्षता में हुई झाबुआ जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति (दिशा) की बैठक में जिले के विकास को नई रफ्तार देने पर चर्चा की गई। बैठक का मुख्य आकर्षण इंदौर-दाहोद रेल परियोजना रही। इसके तहत रेलवे अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि गुजरात के कतवारा से झाबुआ के मध्य रेल लाइन (Katwara-Jhabua railway line) निर्माण का कार्य जून 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इंदौर-दाहोद परियोजना का हिस्सा है ये रेल लाइन बता दें कि, गुजरात के कतवारा से मध्य प्रदेश के झाबुआ तक बन रही रेल लाइन महत्वाकांक्षी इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट ( Indore-Dahod railway line project) का हिस्सा। इस परियोजना के तहत 204.76 किलोमीटर तक ब्रॉडगेज रेलवे लाइन का निर्माण किया जाना है। इस परियोजना की कुल लागत 1873 करोड़ रुपए है जिसके अंतर्गत प्रदेश के धार और झाबुआ जैसे अन्य आदिवासी जिलों में पहली बार रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इससे गुजरात तक की दूरी कम होगी। बैठक में शामिल वरिष्ठ अधिकारी और जन प्रतिनिधि कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम घरसट की मौजूदगी में हुई बैठक में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। ताकि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंच सके। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष सोनल जसवंत भाबोर, भाजपा जिलाध्यक्ष भानू भूरिया, थांदला विधायक वीरसिंह भूरिया, एएसपी प्रतिपाल सिंह महोबिया सहित सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और जन प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इन मुद्दों पर विशेष रूप से फोकस किया जल संरक्षणः जिले में गहराते जल संकट के स्थायी समाधान पर चर्चा करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग की समीक्षा की गई। जिला पंचायत सीईओ जितेन्द्रसिंह चौहान ने बताया स्वीकृत 1233 खेत तालाबौ में से 260 पूर्ण हो चुके हैं, शेष 30 मई तक पूरे होंगे। डगवेल रिचार्ज के 4071 कार्यों में से 2244 पूर्ण हो चुके है, शेष 15 मई तक पूरे करने का लक्ष्य है। जिले के 147 पुराने अमृत सरोवरी मैं से 112 लबालब है। अमृत 2.0 के तहत 14 नए तालाबों का निर्माण जारी वाले 1,748 हैंडपंपों के पास अनिवार्य रूप से रिचार्ज पिट बनाए जाएं ताकि भूजल स्तर सुधारा जा सके। कृषि एवं तकनीक: कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान उप संचालक एनएस रावत ने आगामी खरीफ सीजन के लिए बीज और उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा दिलाया। किसानों को ई-विकास प्रणाली से जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष सोनल जसवंत भाबीर ने किसानों की सहायता के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी करने का सुझाव दिया। सांसद ने जल संकट को देखते हुए कम पानी वाली और सूखा प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। बुनियादी ढांचा और बिजली व्यवस्थाः प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत मजरा-टोला योजना में 181 सड़कों की डीपीआर तैयार की जा रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत क्षतिग्रस्त ग्वाली ब्रिज का मुद्दा विधायक वीरसिह भूरिया ने उठाया, जिस पर अधिकारियों ने बताया कि पुराने ठेकेदार का अनुबंध निरस्त कर नई निविदा प्रक्रिया शुरू सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत जिले में 435 घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। सांसद ने इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। शिक्षा और स्वास्थ्यः टीबी मुक्त झाबुआ का संकल्प : सांसद ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए एक भावुक अपील की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से निक्षय मित्र बनने और टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें फूड बास्केट उपलब्ध कराने का आग्रह किया। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया जिले के विद्यार्थियों को 5,933 साइकिलें वितरित की जा चुकी हैं और 'अपार आईडी' निर्माण का कार्य प्रगति पर है। महिला विकासः प्रधानमंत्री मातृ वंदना और लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से 350 से अधिक नए हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। पारदर्शी भुगतान और उपार्जनः जिला आपूर्ति अधिकारी ने जानकारी दी कि अब तक 19,368 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है, जिसका 31.52 करोड़ रुपए का भुगतान सीधे किसानों के खातों में पीएम-किसान हितग्राहियों की ई-केवाईसी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

छत्तीसगढ़ के पहले अत्याधुनिक बकरी ब्रीडिंग एवं रिसर्च सेंटर की तैयारी

रायपुर छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से धमतरी जिले का भटगांव एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बनने जा रहा है। कलेक्टर की विशेष पहल पर यहाँ राज्य का पहला “रिसर्च कम इंटीग्रेटेड प्रोडक्शन एडवांसमेंट ब्रीडिंग सेंटर” स्थापित किया जा रहा है। यह केंद्र न केवल पशुपालन के पारंपरिक स्वरूप को बदलेगा, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्यमिता का एक ग्लोबल मॉडल पेश करेगा। वैज्ञानिक पशुपालन- परंपरा और तकनीक का संगम          यह केंद्र पारंपरिक बकरी पालन की सीमाओं को तोड़कर इसे आधुनिक और लाभप्रद व्यवसाय में बदलेगा। केंद्र में कृत्रिम गर्भाधान, पैथोलॉजी जांच और त्वरित रोग निदान के लिए हाई-टेक प्रयोगशाला होगी। रिसर्च यूनिट के माध्यम से बकरी की उन्नत नस्लों का संरक्षण और प्रजनन किया जाएगा, जिससे पशुपालकों को बेहतर गुणवत्ता के पशु मिल सकें। पशुओं के लिए टिकाऊ आहार और विभिन्न प्रकार के हरे चारे के उत्पादन की वैज्ञानिक पद्धतियों का प्रदर्शन किया जाएगा। कौशल विकास- पशु सखियों और युवाओं को मिलेगा नया मंच           कलेक्टर धमतरी के विजन के अनुसार, यह केंद्र केवल एक ब्रीडिंग सेंटर नहीं बल्कि एक लर्निंग सेंटर भी होगा। युवाओं और किसानों के लिए हॉस्टल की सुविधा के साथ ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। प्रथम चरण में ही 10-12 स्थानीय युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जाएगा। पशु सखियों को तकनीकी प्रशिक्षण देकर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर उद्यमी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भविष्य का रोडमैप- माणिकस्तु के साथ ग्लोबल विजन          परियोजना की सफलता के लिए ओडिशा की प्रतिष्ठित फर्म माणिकस्तु (डंदपोजन) के विशेषज्ञों का तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में उन्नत नस्लों की खरीद-बिक्री के लिए एक पारदर्शी मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। भविष्य में यहाँ राज्य की सबसे आधुनिक समर्पित पशुधन मंडी और पशु चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की योजना है।

10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम स्पर्धाओं में देशभर के निशानेबाजों ने दिखाया दम

भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में आयोजित “24वीं कुमार सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल शूटिंग चैंपियनशिप (राइफल इवेंट्स)” के अंतर्गत आज 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम सीनियर, जूनियर एवं यूथ वर्ग की स्पर्धाओं का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में देशभर से आए खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम सीनियर वर्ग में राजस्थान की जोड़ी ने जीता स्वर्ण 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम सीनियर स्पर्धा में राजस्थान के दिव्यांश एस पंवार एवं मनीषा की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 503.6 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया। रेलवे की अर्जुन बाबूता एवं सोनम उत्तम की टीम ने 502.5 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि पश्चिम बंगाल के अभिनव शॉ एवं इस्मिता की जोड़ी ने 438.3 अंक अर्जित कर कांस्य पदक प्राप्त किया। जूनियर वर्ग में हरियाणा का दबदबा 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम जूनियर स्पर्धा में हरियाणा की अमीरा एवं रोहित कन्यन की जोड़ी ने 501.9 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पश्चिम बंगाल के अभिनव शॉ एवं स्वास्तिका ने 501.0 अंक के साथ रजत पदक प्राप्त किया। महाराष्ट्र की अवनी राठौड़ एवं प्रीतम केंद्रे की टीम ने 432.8 अंक अर्जित कर कांस्य पदक हासिल किया। यूथ वर्ग में महाराष्ट्र की जोड़ी रही अव्वल 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम यूथ वर्ग में महाराष्ट्र की शाम्भवी एवं वेदांत वाघमारे की जोड़ी ने 496.6 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया। उत्तरप्रदेश के अंश डबास एवं कोपल ने 496.1 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि पश्चिम बंगाल के स्वास्तिका एवं अभिनव शॉ ने 434.7 अंक अर्जित कर कांस्य पदक जीता। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में खिलाड़ियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों, रेलवे, सेना एवं अन्य संस्थानों के खिलाड़ियों ने सहभागिता करते हुए उच्च स्तरीय प्रदर्शन किया। यह आयोजन युवाओं में शूटिंग खेल के प्रति रुचि, अनुशासन एवं प्रतिस्पर्धात्मक भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 15 मई तक आयोजित होंगी विभिन्न स्पर्धाएँ उल्लेखनीय है कि यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता 03 मई 2026 से 15 मई 2026 तक म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता के अंतर्गत आगामी दिनों में विभिन्न राइफल स्पर्धाओं का आयोजन किया जाएगा। खेल मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएँ सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती हैं।  सारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना एवं अकादमियों के माध्यम से देश को भविष्य के श्रेष्ठ खिलाड़ी मिलते रहेंगे। 

मिशन 2027 के लिए यूपी में कैबिनेट फेरबदल, योगी की नई टीम की झलक

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में अगले कुछ घंटे बेहद हलचल भरे रहने वाले हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का विस्तार अब किसी भी वक्त हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलने के बाद संभावित मंत्रियों को आज शाम तक लखनऊ मुख्यालय पहुंचने के निर्देश दे दिए गए हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं, जिसके बाद शपथ ग्रहण की तारीख और समय पर आधिकारिक मुहर लग जाएगी।  2027 का ‘प्लान’ और विकास के साथ हिंदुत्व बीजेपी हमेशा 24X7 चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी मानी जाती है. अब पार्टी की निगाहें 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं. बीजेपी यूपी में जीत की ‘हैट्रिक’ लगाने की तैयारी में है. इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए पार्टी न केवल सरकार का चेहरा बदलेगी, बल्कि बोर्ड, निगम और आयोगों में भी कार्यकर्ताओं को जगह देकर संगठन को मजबूती देगी. रणनीति साफ है, पश्चिम बंगाल की तर्ज पर ‘विकास और हिंदुत्व’ के साथ-साथ मजबूत जातिगत समीकरणों को साधना।  महिला कोटे पर विशेष फोकस, अखिलेश के PDA को जवाब इस बार के विस्तार में सबसे खास बात ‘नारी शक्ति’ पर फोकस है. बीजेपी महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष, खासकर सपा को घेरने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी नारी शक्ति के अपमान पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते रहे हैं. ऐसे में योगी कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा रही है।      कृष्णा पासवान: फतेहपुर से तीन बार की विधायक कृष्णा पासवान का नाम सबसे आगे है. उनके जरिए बीजेपी न केवल महिला कार्ड खेलेगी, बल्कि दलित (पासी) समाज को भी साधेगी. यह अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट माना जा रहा है।      पूजा पाल: सपा की बागी विधायक पूजा पाल को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है. सपा के बागी और पुराने दिग्गजों की एंट्री मंत्रिमंडल में 6 नए चेहरों को जगह मिलने की पूरी संभावना है. इसमें जातिगत संतुलन का खास ख्याल रखा गया है:     मनोज पांडेय: सपा से आए ब्राह्मण चेहरा मनोज पांडेय को मंत्री बनाकर बीजेपी अवध क्षेत्र में अपना आधार मजबूत करना चाहती है.     चौधरी भूपेंद्र सिंह: पश्चिम यूपी के बड़े जाट नेता भूपेंद्र सिंह का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है.     अशोक कटारिया: गुर्जर समाज में पैठ रखने वाले पूर्व मंत्री और एमएलसी अशोक कटारिया को एक बार फिर मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है.     रोमी साहनी: खीरी क्षेत्र में सिखों और पंजाबी खत्री बिरादरी की नाराजगी दूर करने के लिए रोमी साहनी को मौका मिल सकता है. प्रमोशन और विभागों में फेरबदल की तैयारी सूत्रों का कहना है कि सिर्फ नए चेहरे ही शामिल नहीं होंगे, बल्कि पुराने मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर भी काम होगा. कुछ राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) को उनकी बेहतर परफॉर्मेंस, खासकर बंगाल चुनाव के दौरान किए गए कार्यों के लिए कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोट किया जा सकता है. साथ ही कई मंत्रियों के विभागों में बड़े बदलाव की भी चर्चा है।  बुजुर्ग मंत्रियों को नहीं हटाएगी पार्टी? सियासी गलियारों में चर्चा थी कि कुछ उम्रदराज मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, लेकिन पार्टी के एक धड़े का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले ऐसा करने से गलत संदेश जा सकता है. चूंकि यह विस्तार कुछ ही समय के लिए है और जल्द ही आचार संहिता लागू हो जाएगी, इसलिए बीजेपी क्षेत्रीय क्षत्रपों और बुजुर्ग नेताओं को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती। 

विशंकर जलाशय की सुरक्षा के लिए गेटों की मरम्मत एवं आवश्यक कार्यों हेतु 65.50 करोड़ रुपए की मिली प्रशासनिक स्वीकृति

रायपुर प्रदेश में सिंचाई संरचनाओं की सुरक्षा और जल प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा लगातार प्रभावी कदम उठाया जा रहा है। इसी कड़ी में जल संसाधन विभाग द्वारा धमतरी जिले में स्थित रविशंकर सागर जलाशय (गंगरेल बांध) के गेटों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के लिए 65 करोड़ 50 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई है।          जारी स्वीकृति के अनुसार जलाशय में एपॉक्सी ग्राउटिंग, फ्लेक्सिबल शाफ्ट हाई प्रेशर वाटर जेट से चोक व्हीपीडी की सफाई सहित अन्य आवश्यक मरम्मत एवं संरक्षण कार्य कराए जाएंगे। यह कार्य जलाशय की संरचनात्मक मजबूती, संचालन क्षमता और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।            राज्य शासन द्वारा महानदी परियोजना के मुख्य अभियंता को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। कार्यों में वित्तीय अनुशासन, तकनीकी मापदंडों तथा पारदर्शी निविदा प्रक्रिया का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही कार्य की नियमित मॉनिटरिंग एवं गुणवत्ता परीक्षण भी किए जाएंगे, ताकि निर्माण कार्य उच्च मानकों के अनुरूप संपन्न हो सके।            उल्लेखनीय है कि रविशंकर सागर जलाशय प्रदेश की बहुत पुरानी और प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में से एक है, जिससे कृषि, जलापूर्ति और क्षेत्रीय विकास को व्यापक लाभ मिलता है। स्वीकृत कार्यों के पूर्ण होने से जलाशय की कार्यक्षमता और सुरक्षा में और अधिक मजबूती आएगी, जिससे किसानों एवं आमजन को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा। जल संसाधन विभाग द्वारा यह भी निर्देशित किया गया है कि कार्यों के क्रियान्वयन में सभी तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रावधानों पालन सुनिश्चित किया जाए तथा कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।

गोल्डन टेंपल में समर्पण, कुब्रासैत ने कहा—आशीर्वाद मिला, जिंदगी बदल गई

अमृतसर  अपने लगातार व्यस्त शूटिंग शेड्यूल, ट्रैवल और निजी ज़िंदगी के बीच अभिनेत्री कुब्रा सैत ने हाल ही में आध्यात्मिक सुकून के कुछ पल बिताए। जी हाँ, कुब्रा ने अमृतसर के प्रसिद्ध गोल्डन टेंपल पहुंचकर न सिर्फ माथा टेका, बल्कि वहां से अपनी एक शांत और खूबसूरत तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की, जिसने फैंस का दिल जीत लिया है। इस तस्वीर में सादगी भरे पारंपरिक लुक में, सिर ढके हुए कुब्रा बेहद शांत और भावुक नजर आ रही हैं। पवित्र स्थल पर खिंचवाई गई तस्वीर के साथ उन्होंने एक दिल छू लेने वाला कैप्शन भी लिखा है, “समर्पण करने आई थी… लेकिन जिंदगी की सबसे बड़ी नेमत मिल गई। ऐसा हमेशा होता है!” इसके साथ ही उन्होंने वाहेगुरु, गोल्डन टेम्पल और पवित्र जैसे हैशटैग भी इस्तेमाल किए हैं, जिससे उनके शब्दों में आस्था, शांति और आध्यात्मिक संतोष साफ झलक रहा था। गौरतलब है कि अपने दमदार अभिनय और बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली कुब्रा अक्सर फैंस के साथ अपनी निजी जिंदगी की झलकियां साझा करती रहती हैं। लेकिन इस बार उनका एक बेहद शांत, भावुक और आध्यात्मिक रूप देखने को मिला है। साथ ही फैंस ने भी कुब्रा की पोस्ट पर खूब प्यार बरसाया है। किसी ने तस्वीर को 'डिवाइन' बताया है, तो किसी ने 'शांतिपूर्ण' और 'आत्मिक' कहा है। कई लोगों ने उनकी इस बात से खुद को जोड़ा कि सच्चे मन से समर्पण करने पर अक्सर उम्मीद से कहीं ज्यादा मिलता है। अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल, जिसे श्री हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है, देश के सबसे पवित्र और लोकप्रिय धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां हर धर्म और हर वर्ग के लोग शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक सुकून की तलाश में पहुंचते हैं। फिलहाल कुब्रा सैत की यह यात्रा एक बार फिर याद दिलाती है कि भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच अध्यात्म ही वह ताकत है, जो इंसान को भीतर से स्थिर और शांत बनाती है।

सर्वे में खुलासा: ऑफिस रोमांस में 40% लोग बेवफाई करते हैं

  नई दिल्ली ऑफिस रोमांस अब सिर्फ फिल्मों की कहानी नहीं रह गया है. एक ऐसी जगह, जहां हर शख्स अपने दिन के करीब 9 घंटे बिताता है, वहां किसी से लगाव होना आम बात मानी जाती है. लेकिन हाल ही में सामने आया एक सर्वे वाकई चौंकाने वाला है।  फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 60 फीसदी से ज्यादा लोग अपने वर्कप्लेस पर किसी न किसी रोमांटिक रिश्ते में रह चुके हैं. लंबे ऑफिस घंटे, रोजाना साथ काम करना और प्रोफेशनल प्रेशर को समझने वाला साथी मिलने की वजह से कई लोग अपने ही ऑफिस में पार्टनर ढूंढ लेते हैं. फोर्ब्स का ये सर्वे वायरल है, लोग इस पर अपना-अपना अनुभव भी बता रहे हैं।  सर्वे के मुताबिक, 65 फीसदी लोगों ने कहा कि 'कंफर्टेबल फील' होना ऑफिस रिलेशनशिप की सबसे बड़ी वजह है. वहीं 61 फीसदी लोगों का कहना था कि ऑफिस के बाहर नए लोगों से मिलने का समय ही नहीं मिलता. दिलचस्प बात यह रही कि सिर्फ 38 फीसदी लोगों ने माना कि ऑफिस रोमांस से काम मजेदार बनता है, यानी ज्यादातर लोगों के लिए भावनात्मक समझ ज्यादा अहम है।  सबसे ज्यादा ब्रेकअप का डर हालांकि, इन रिश्तों का असर सिर्फ पर्सनल लाइफ तक सीमित नहीं रहता. कई लोगों ने माना कि ब्रेकअप का डर ऑफिस रिलेशनशिप में ज्यादा होता है, क्योंकि रोजाना उसी व्यक्ति का सामना करना पड़ सकता है. लगभग 54 फीसदी लोगों ने कहा कि ऑफिस में डेटिंग से उनका वर्क-लाइफ बैलेंस प्रभावित हुआ।  सर्वे में यह भी सामने आया कि ऑफिस रोमांस जल्दी छिप नहीं पाता. आधे से ज्यादा लोगों ने कहा कि रिलेशनशिप सामने आने के बाद सहकर्मियों का व्यवहार बदल गया. करीब 60 फीसदी लोगों ने माना कि ऑफिस अफेयर अक्सर गॉसिप का विषय बन जाते हैं।  ऑफिस रिलेशनशिप में 40 फीसदी लोगों ने पार्टनर को दिया धोखा रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह था कि ऑफिस में रिलेशनशिप रखने वाले 40 फीसदी लोगों ने माना कि उन्होंने अपने पार्टनर को किसी सहकर्मी के साथ चीट किया. वहीं 43 फीसदी लोग ऐसे भी थे जिन्होंने आखिरकार अपने ऑफिस पार्टनर से शादी कर ली।  सर्वे के अनुसार, कई कंपनियां अब ऑफिस रोमांस को पूरी तरह गलत मानने के बजाय उसे मैनेज करने की कोशिश कर रही हैं. करीब 62 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने रिश्ते की जानकारी HR को दी थी। 

15 जून से शुरू होंगी इंडिगो की उड़ानें, लेकिन किराया सुनकर यात्रियों के उड़े होश

नोएडा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से कमर्शियल उड़ानों का आगाज़ 15 जून 2026 से होने जा रहा है। इंडिगो (IndiGo) इस नए एविएशन हब से अपनी सेवाएं शुरू करने वाली पहली एयरलाइन होगी। हालांकि, परिचालन शुरू होने से पहले ही यह एयरपोर्ट एक चौंकाने वाली वजह से चर्चा में है। जेवर एयरपोर्ट से कई प्रमुख रूटों का हवाई किराया दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट की तुलना में काफी अधिक पाया गया है। शुरुआत में इस एयरपोर्ट को दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों के लिए एक किफायती विकल्प के रूप में प्रचारित किया गया था, लेकिन मौजूदा कीमतों ने यात्रियों को हैरान कर दिया है। किराये में बड़ा अंतर: लखनऊ रूट सबसे महंगा इंडिगो के बुकिंग प्लेटफॉर्म के अनुसार, जेवर से कई घरेलू रूटों का किराया दिल्ली के मुकाबले काफी ज्यादा है: लखनऊ: जेवर से लखनऊ का टिकट लगभग 5,401 रुपये है, जबकि IGI एयरपोर्ट से यह केवल 3,394 रुपये में उपलब्ध है (2,000 रुपये से ज्यादा का अंतर)। कोलकाता: जेवर से किराया 7,123 रुपये है, जबकि IGI से यह 5,894 रुपये और हिंडन से 5,930 रुपये के करीब है। नवी मुंबई: जेवर से 7,256 रुपये बनाम IGI से 6,760 रुपये। बेंगलुरु: जेवर से 8,979 रुपये बनाम IGI से 8,910 रुपये। हैदराबाद: जेवर से 6,198 रुपये बनाम IGI से 6,129 रुपये। टैक्सी का खर्च भी बढ़ाएगा बोझ     जेवर एयरपोर्ट की दूरी दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों से अधिक होने के कारण यात्रियों पर टैक्सी के किराये का अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा।     नोएडा सेक्टर-18 से जेवर: लगभग 834 रुपये।     नोएडा सेक्टर-18 से IGI दिल्ली: लगभग 625 रुपये।     ग्रेटर नोएडा (परी चौक) से जेवर: लगभग 559 रुपये।     कई यात्रियों का मानना है कि वर्तमान में IGI एयरपोर्ट पहुंचना न केवल सस्ता है बल्कि अधिक सुविधाजनक भी है।     सरकार ने दी थी टैक्स में भारी छूट     हवाई किराये को कम रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने कई कदम उठाए थे:     हवाई ईंधन (ATF) पर वैट (VAT) को 25% से घटाकर मात्र 1% कर दिया गया।     शुरुआती तीन महीनों के लिए यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) में 25% तक की कटौती की गई।     इन भारी रियायतों के बावजूद, एयरलाइंस की ओर से अभी तक शुरुआती किराये में कोई बड़ी कटौती नहीं देखी गई है। दो चरणों में शुरू होंगी उड़ानें इंडिगो अपनी सेवाओं को चरणों में विस्तार देगी- पहला चरण (15 जून): बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, मुंबई, गोवा, लखनऊ, पटना, कोलकाता, चेन्नई, वाराणसी, जयपुर, देहरादून और चंडीगढ़ जैसे शहरों के लिए उड़ानें शुरू होंगी। दूसरा चरण (1 जुलाई): उड़ानों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जाएगी और सुबह से देर शाम तक सेवाएं उपलब्ध होंगी। चुनौतियां: विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सड़क और सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी में सुधार नहीं होता और किराया प्रतिस्पर्धी नहीं बनता, तब तक यात्रियों को दिल्ली के बजाय जेवर एयरपोर्ट की ओर आकर्षित करना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी

सालों से अटकी योजनाओं का होगा आरंभ, बंगाल में डबल इंजन सरकार की योजना

 कोलकाता पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन में भले अभी कुछ समय हो, लेकिन चुनाव परिणाम सामने आते ही केंद्र सरकार ने राज्य में सालों से अटकी केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों से उन योजनाओं और परियोजनाओं की सूची मांगी है जो पिछले लगभग 12 सालों से ममता बनर्जी सरकार के विरोध, देरी या प्रशासनिक अड़चनों के कारण लंबित पड़ी थीं।  सूत्रों का कहना है कि इस पूरी कवायद की जिम्मेदारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सौंपी गई है. उन्होंने कई मंत्रालयों से ऐसी योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा मांगा है, जो पश्चिम बंगाल में बाधित रही हैं. मंत्रालयों ने संबंधित सूचनाएं भेजना भी शुरू कर दिया है. केंद्र सरकार का उद्देश्य नई सरकार के गठन के तुरंत बाद इन परियोजनाओं के रास्ते की बाधाएं दूर कर तेज गति से काम शुरू करना है।  पिछले एक दशक में केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच कई योजनाओं को लेकर लगातार टकराव देखने को मिला. कई केंद्रीय योजनाएं राज्य में लागू नहीं की गईं या फिर उनके नाम बदलकर लागू किया गया. कई परियोजनाओं को जमीन आवंटन, प्रशासनिक अनुमति या अन्य कारणों से लंबे समय तक रोके रखा गया. अब केंद्र सरकार इन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।  कई प्रमुख योजनाओं का मिलेगा लाभ सबसे प्रमुख योजना आयुष्मान भारत है जिसे पश्चिम बंगाल सरकार ने लागू करने से इनकार कर दिया था. इस योजना के तहत पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा मिलता है. ममता बनर्जी सरकार का कहना था कि राज्य की ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना बेहतर है, केंद्र की 60:40 फंडिंग व्यवस्था और प्रधानमंत्री की तस्वीर वाले स्वरूप पर भी आपत्ति थी।  पीएम मोदी पहले ही कह चुके हैं कि नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत योजना को मंजूरी दी जाएगी।  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर भी लंबे समय तक केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद रहा. ममता सरकार अपनी ‘कृषक बंधु’ योजना को प्राथमिकता देती रही. हालांकि बाद में इसे आंशिक रूप से लागू किया गया, लेकिन लाभार्थियों के सत्यापन को लेकर खींचतान जारी रही. अब केंद्र सरकार इसे पूरी क्षमता के साथ लागू कराने की तैयारी में है।  इसी तरह  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी एक्ट यानी मनरेगा के फंड को कथित अनियमितताओं के कारण केंद्र ने रोक दिया था. इसे लेकर राज्य सरकार ने केंद्र पर आर्थिक नाकेबंदी का आरोप लगाया था. अब केंद्र इसे नए ढांचे के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में है।  प्रधानमंत्री आवास योजना नाम बदलकर ‘बांग्ला आवास योजना’ किए जाने और उसमें कथित अनियमितताओं के बाद 2022 से फंडिंग रुकी हुई थी. अब इस योजना को दोबारा सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है।  केंद्र सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को पश्चिम बंगाल में काफी देर से लागू किया गया और आवंटित राशि का सीमित उपयोग हुआ. वहीं जल जीवन मिशन के तहत आवंटित फंड के बेहतर उपयोग और प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया जाएगा।  शिक्षा क्षेत्र में पीएम श्री स्कूल नई शिक्षा एवं भाषा नीति और ‘उल्लास’ जैसी योजनाओं को लागू करने की तैयारी है. साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत रुकी परियोजनाओं को भी मंजूरी मिलने की संभावना है. नमामि गंगे प्रोग्राम के तहत गंगा सफाई से जुड़े कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भूमि उपलब्ध न होने के कारण वर्षों से लंबित हैं।  केंद्र सरकार कई बार संसद में यह मुद्दा उठा चुकी है कि पश्चिम बंगाल में जमीन नहीं मिलने से परियोजनाओं में देरी हुई. अब इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की तैयारी है।  इसी तरह अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संवेदनशील क्षेत्रों में बॉर्डर फेंसिंग को लेकर भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद रहा. केंद्र का आरोप था कि आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई. अब इसे प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को छोड़कर पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी ‘बांग्ला शस्य बीमा’ योजना शुरू की थी. राज्य सरकार का तर्क था कि उसका मॉडल किसानों के लिए अधिक लाभकारी है, जबकि केंद्र ने इसे राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश बताया।  मृदा स्वास्थ्य कार्ड, और पीएम-प्रणाम जैसी योजनाओं को लागू करने की गति को लेकर भी केंद्र ने राज्य सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया।  केंद्र सरकार की रणनीति साफ है कि लंबे समय से रुकी परियोजनाओं को तेज गति से पूरा कर जमीन पर ‘डबल इंजन सरकार’ का असर दिखाया जाए. साथ ही केंद्रीय योजनाओं का दायरा बढ़ाकर लाभार्थियों की संख्या में विस्तार किया जाए, ताकि केंद्र सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। 

तबादला नीति में बड़ा बदलाव, स्वैच्छिक ट्रांसफर को प्राथमिकता देने की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश में इस बार स्वेच्छा से स्थानांतरण मांगने वालों को प्राथमिकता मिल सकती है। कर्मचारी विभिन्न कारणों से स्वैच्छिक आधार पर स्थानांतरण चाहते हैं जबकि विभागों की प्राथमिकता प्रशासनिक आधार रहता है। स्थानांतरण नहीं होने से कार्य प्रभावित होता है। इसे देखते हुए ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछली कैबिनेट की बैठक में स्वयं यह बात उठाई और कहा कि स्वैच्छिक स्थानांतरण तो अधिक होने चाहिए। अब सामान्य प्रशासन विभाग आगामी मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में जो स्थानांतरण नीति प्रस्तावित करने जा रहा है, उसमें स्वेच्छा से स्थानांतरण चाहने वालों को प्राथमिकता दी जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि प्रति वर्ष बड़ी संख्या में अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा व्यक्तिगत कारण बताकर स्वैच्छिक स्थानांतरण की मांग की जाती है। किसी भी संवर्ग में 20 प्रतिशत से अधिक स्थानांतरण करने की अनुमति नहीं होती है। इसके कारण अधिकांश आवेदनों का निराकरण नहीं हो पाता है। स्वैच्छिक तबादलों के लाभ और प्रस्तावित नीति स्वैच्छिक स्थानांतरण में प्रशासनिक व्यय भी नहीं देना होता है। इसका दूसरा लाभ यह है कि ऐच्छिक स्थान पर पहुंचने से कर्मचारी की उत्पादकता बढ़ती है, क्योंकि वह मन लगाकर काम कर सकता है। इस व्यावहारिक पक्ष को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वैच्छिक स्थानांतरण को प्राथमिकता देने की बात कही। इसके आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग स्थानांतरण नीति-2026 में यह प्रस्तावित कर रहा है कि स्वैच्छिक आवेदनों को गुण-दोष के आधार पर पहले निराकरण किया जाएगा। यदि संभव होगा तो पहले इनके ही तबादले किए जाएंगे, फिर प्रशासनिक आधार को देखा जाएगा। स्थानांतरण से प्रतिबंध 15 मई से 15 जून तक के लिए हटाया जा सकता है। निर्धारित किए जा सकते हैं ये प्रविधान अखिल भारतीय सेवा, न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा एवं मंत्रालय सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों पर यह नीति लागू नहीं होगी।     शिक्षा विभाग की अलग नीति रहेगी, जिसका आधार सामान्य प्रशासन विभाग की नीति को सुनिश्चित किया जाएगा।   जिला संवर्ग एवं राज्य संवर्ग के तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिले के अंदर स्थानांतरण कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद होंगे।     प्रथम श्रेणी अधिकारियों के स्थानांतरण विभागीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री के समन्वय से होंगे।     पिछले एक वर्ष में स्थानांतरित कर्मचारियों को सामान्यतः दोबारा स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।     उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के माध्यम से होंगे।     गंभीर बीमारी, न्यायालयीन आदेश, गंभीर शिकायत या अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसी परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि में भी स्थानांतरण किए जा सकेंगे।