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गोल्डन टेंपल में समर्पण, कुब्रासैत ने कहा—आशीर्वाद मिला, जिंदगी बदल गई

अमृतसर  अपने लगातार व्यस्त शूटिंग शेड्यूल, ट्रैवल और निजी ज़िंदगी के बीच अभिनेत्री कुब्रा सैत ने हाल ही में आध्यात्मिक सुकून के कुछ पल बिताए। जी हाँ, कुब्रा ने अमृतसर के प्रसिद्ध गोल्डन टेंपल पहुंचकर न सिर्फ माथा टेका, बल्कि वहां से अपनी एक शांत और खूबसूरत तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की, जिसने फैंस का दिल जीत लिया है। इस तस्वीर में सादगी भरे पारंपरिक लुक में, सिर ढके हुए कुब्रा बेहद शांत और भावुक नजर आ रही हैं। पवित्र स्थल पर खिंचवाई गई तस्वीर के साथ उन्होंने एक दिल छू लेने वाला कैप्शन भी लिखा है, “समर्पण करने आई थी… लेकिन जिंदगी की सबसे बड़ी नेमत मिल गई। ऐसा हमेशा होता है!” इसके साथ ही उन्होंने वाहेगुरु, गोल्डन टेम्पल और पवित्र जैसे हैशटैग भी इस्तेमाल किए हैं, जिससे उनके शब्दों में आस्था, शांति और आध्यात्मिक संतोष साफ झलक रहा था। गौरतलब है कि अपने दमदार अभिनय और बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली कुब्रा अक्सर फैंस के साथ अपनी निजी जिंदगी की झलकियां साझा करती रहती हैं। लेकिन इस बार उनका एक बेहद शांत, भावुक और आध्यात्मिक रूप देखने को मिला है। साथ ही फैंस ने भी कुब्रा की पोस्ट पर खूब प्यार बरसाया है। किसी ने तस्वीर को 'डिवाइन' बताया है, तो किसी ने 'शांतिपूर्ण' और 'आत्मिक' कहा है। कई लोगों ने उनकी इस बात से खुद को जोड़ा कि सच्चे मन से समर्पण करने पर अक्सर उम्मीद से कहीं ज्यादा मिलता है। अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल, जिसे श्री हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है, देश के सबसे पवित्र और लोकप्रिय धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां हर धर्म और हर वर्ग के लोग शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक सुकून की तलाश में पहुंचते हैं। फिलहाल कुब्रा सैत की यह यात्रा एक बार फिर याद दिलाती है कि भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच अध्यात्म ही वह ताकत है, जो इंसान को भीतर से स्थिर और शांत बनाती है।

सर्वे में खुलासा: ऑफिस रोमांस में 40% लोग बेवफाई करते हैं

  नई दिल्ली ऑफिस रोमांस अब सिर्फ फिल्मों की कहानी नहीं रह गया है. एक ऐसी जगह, जहां हर शख्स अपने दिन के करीब 9 घंटे बिताता है, वहां किसी से लगाव होना आम बात मानी जाती है. लेकिन हाल ही में सामने आया एक सर्वे वाकई चौंकाने वाला है।  फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 60 फीसदी से ज्यादा लोग अपने वर्कप्लेस पर किसी न किसी रोमांटिक रिश्ते में रह चुके हैं. लंबे ऑफिस घंटे, रोजाना साथ काम करना और प्रोफेशनल प्रेशर को समझने वाला साथी मिलने की वजह से कई लोग अपने ही ऑफिस में पार्टनर ढूंढ लेते हैं. फोर्ब्स का ये सर्वे वायरल है, लोग इस पर अपना-अपना अनुभव भी बता रहे हैं।  सर्वे के मुताबिक, 65 फीसदी लोगों ने कहा कि 'कंफर्टेबल फील' होना ऑफिस रिलेशनशिप की सबसे बड़ी वजह है. वहीं 61 फीसदी लोगों का कहना था कि ऑफिस के बाहर नए लोगों से मिलने का समय ही नहीं मिलता. दिलचस्प बात यह रही कि सिर्फ 38 फीसदी लोगों ने माना कि ऑफिस रोमांस से काम मजेदार बनता है, यानी ज्यादातर लोगों के लिए भावनात्मक समझ ज्यादा अहम है।  सबसे ज्यादा ब्रेकअप का डर हालांकि, इन रिश्तों का असर सिर्फ पर्सनल लाइफ तक सीमित नहीं रहता. कई लोगों ने माना कि ब्रेकअप का डर ऑफिस रिलेशनशिप में ज्यादा होता है, क्योंकि रोजाना उसी व्यक्ति का सामना करना पड़ सकता है. लगभग 54 फीसदी लोगों ने कहा कि ऑफिस में डेटिंग से उनका वर्क-लाइफ बैलेंस प्रभावित हुआ।  सर्वे में यह भी सामने आया कि ऑफिस रोमांस जल्दी छिप नहीं पाता. आधे से ज्यादा लोगों ने कहा कि रिलेशनशिप सामने आने के बाद सहकर्मियों का व्यवहार बदल गया. करीब 60 फीसदी लोगों ने माना कि ऑफिस अफेयर अक्सर गॉसिप का विषय बन जाते हैं।  ऑफिस रिलेशनशिप में 40 फीसदी लोगों ने पार्टनर को दिया धोखा रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह था कि ऑफिस में रिलेशनशिप रखने वाले 40 फीसदी लोगों ने माना कि उन्होंने अपने पार्टनर को किसी सहकर्मी के साथ चीट किया. वहीं 43 फीसदी लोग ऐसे भी थे जिन्होंने आखिरकार अपने ऑफिस पार्टनर से शादी कर ली।  सर्वे के अनुसार, कई कंपनियां अब ऑफिस रोमांस को पूरी तरह गलत मानने के बजाय उसे मैनेज करने की कोशिश कर रही हैं. करीब 62 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने रिश्ते की जानकारी HR को दी थी। 

15 जून से शुरू होंगी इंडिगो की उड़ानें, लेकिन किराया सुनकर यात्रियों के उड़े होश

नोएडा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से कमर्शियल उड़ानों का आगाज़ 15 जून 2026 से होने जा रहा है। इंडिगो (IndiGo) इस नए एविएशन हब से अपनी सेवाएं शुरू करने वाली पहली एयरलाइन होगी। हालांकि, परिचालन शुरू होने से पहले ही यह एयरपोर्ट एक चौंकाने वाली वजह से चर्चा में है। जेवर एयरपोर्ट से कई प्रमुख रूटों का हवाई किराया दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट की तुलना में काफी अधिक पाया गया है। शुरुआत में इस एयरपोर्ट को दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों के लिए एक किफायती विकल्प के रूप में प्रचारित किया गया था, लेकिन मौजूदा कीमतों ने यात्रियों को हैरान कर दिया है। किराये में बड़ा अंतर: लखनऊ रूट सबसे महंगा इंडिगो के बुकिंग प्लेटफॉर्म के अनुसार, जेवर से कई घरेलू रूटों का किराया दिल्ली के मुकाबले काफी ज्यादा है: लखनऊ: जेवर से लखनऊ का टिकट लगभग 5,401 रुपये है, जबकि IGI एयरपोर्ट से यह केवल 3,394 रुपये में उपलब्ध है (2,000 रुपये से ज्यादा का अंतर)। कोलकाता: जेवर से किराया 7,123 रुपये है, जबकि IGI से यह 5,894 रुपये और हिंडन से 5,930 रुपये के करीब है। नवी मुंबई: जेवर से 7,256 रुपये बनाम IGI से 6,760 रुपये। बेंगलुरु: जेवर से 8,979 रुपये बनाम IGI से 8,910 रुपये। हैदराबाद: जेवर से 6,198 रुपये बनाम IGI से 6,129 रुपये। टैक्सी का खर्च भी बढ़ाएगा बोझ     जेवर एयरपोर्ट की दूरी दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों से अधिक होने के कारण यात्रियों पर टैक्सी के किराये का अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा।     नोएडा सेक्टर-18 से जेवर: लगभग 834 रुपये।     नोएडा सेक्टर-18 से IGI दिल्ली: लगभग 625 रुपये।     ग्रेटर नोएडा (परी चौक) से जेवर: लगभग 559 रुपये।     कई यात्रियों का मानना है कि वर्तमान में IGI एयरपोर्ट पहुंचना न केवल सस्ता है बल्कि अधिक सुविधाजनक भी है।     सरकार ने दी थी टैक्स में भारी छूट     हवाई किराये को कम रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने कई कदम उठाए थे:     हवाई ईंधन (ATF) पर वैट (VAT) को 25% से घटाकर मात्र 1% कर दिया गया।     शुरुआती तीन महीनों के लिए यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) में 25% तक की कटौती की गई।     इन भारी रियायतों के बावजूद, एयरलाइंस की ओर से अभी तक शुरुआती किराये में कोई बड़ी कटौती नहीं देखी गई है। दो चरणों में शुरू होंगी उड़ानें इंडिगो अपनी सेवाओं को चरणों में विस्तार देगी- पहला चरण (15 जून): बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, मुंबई, गोवा, लखनऊ, पटना, कोलकाता, चेन्नई, वाराणसी, जयपुर, देहरादून और चंडीगढ़ जैसे शहरों के लिए उड़ानें शुरू होंगी। दूसरा चरण (1 जुलाई): उड़ानों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जाएगी और सुबह से देर शाम तक सेवाएं उपलब्ध होंगी। चुनौतियां: विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सड़क और सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी में सुधार नहीं होता और किराया प्रतिस्पर्धी नहीं बनता, तब तक यात्रियों को दिल्ली के बजाय जेवर एयरपोर्ट की ओर आकर्षित करना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी

सालों से अटकी योजनाओं का होगा आरंभ, बंगाल में डबल इंजन सरकार की योजना

 कोलकाता पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन में भले अभी कुछ समय हो, लेकिन चुनाव परिणाम सामने आते ही केंद्र सरकार ने राज्य में सालों से अटकी केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों से उन योजनाओं और परियोजनाओं की सूची मांगी है जो पिछले लगभग 12 सालों से ममता बनर्जी सरकार के विरोध, देरी या प्रशासनिक अड़चनों के कारण लंबित पड़ी थीं।  सूत्रों का कहना है कि इस पूरी कवायद की जिम्मेदारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सौंपी गई है. उन्होंने कई मंत्रालयों से ऐसी योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा मांगा है, जो पश्चिम बंगाल में बाधित रही हैं. मंत्रालयों ने संबंधित सूचनाएं भेजना भी शुरू कर दिया है. केंद्र सरकार का उद्देश्य नई सरकार के गठन के तुरंत बाद इन परियोजनाओं के रास्ते की बाधाएं दूर कर तेज गति से काम शुरू करना है।  पिछले एक दशक में केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच कई योजनाओं को लेकर लगातार टकराव देखने को मिला. कई केंद्रीय योजनाएं राज्य में लागू नहीं की गईं या फिर उनके नाम बदलकर लागू किया गया. कई परियोजनाओं को जमीन आवंटन, प्रशासनिक अनुमति या अन्य कारणों से लंबे समय तक रोके रखा गया. अब केंद्र सरकार इन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।  कई प्रमुख योजनाओं का मिलेगा लाभ सबसे प्रमुख योजना आयुष्मान भारत है जिसे पश्चिम बंगाल सरकार ने लागू करने से इनकार कर दिया था. इस योजना के तहत पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा मिलता है. ममता बनर्जी सरकार का कहना था कि राज्य की ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना बेहतर है, केंद्र की 60:40 फंडिंग व्यवस्था और प्रधानमंत्री की तस्वीर वाले स्वरूप पर भी आपत्ति थी।  पीएम मोदी पहले ही कह चुके हैं कि नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत योजना को मंजूरी दी जाएगी।  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर भी लंबे समय तक केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद रहा. ममता सरकार अपनी ‘कृषक बंधु’ योजना को प्राथमिकता देती रही. हालांकि बाद में इसे आंशिक रूप से लागू किया गया, लेकिन लाभार्थियों के सत्यापन को लेकर खींचतान जारी रही. अब केंद्र सरकार इसे पूरी क्षमता के साथ लागू कराने की तैयारी में है।  इसी तरह  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी एक्ट यानी मनरेगा के फंड को कथित अनियमितताओं के कारण केंद्र ने रोक दिया था. इसे लेकर राज्य सरकार ने केंद्र पर आर्थिक नाकेबंदी का आरोप लगाया था. अब केंद्र इसे नए ढांचे के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में है।  प्रधानमंत्री आवास योजना नाम बदलकर ‘बांग्ला आवास योजना’ किए जाने और उसमें कथित अनियमितताओं के बाद 2022 से फंडिंग रुकी हुई थी. अब इस योजना को दोबारा सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है।  केंद्र सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को पश्चिम बंगाल में काफी देर से लागू किया गया और आवंटित राशि का सीमित उपयोग हुआ. वहीं जल जीवन मिशन के तहत आवंटित फंड के बेहतर उपयोग और प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया जाएगा।  शिक्षा क्षेत्र में पीएम श्री स्कूल नई शिक्षा एवं भाषा नीति और ‘उल्लास’ जैसी योजनाओं को लागू करने की तैयारी है. साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत रुकी परियोजनाओं को भी मंजूरी मिलने की संभावना है. नमामि गंगे प्रोग्राम के तहत गंगा सफाई से जुड़े कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भूमि उपलब्ध न होने के कारण वर्षों से लंबित हैं।  केंद्र सरकार कई बार संसद में यह मुद्दा उठा चुकी है कि पश्चिम बंगाल में जमीन नहीं मिलने से परियोजनाओं में देरी हुई. अब इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की तैयारी है।  इसी तरह अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संवेदनशील क्षेत्रों में बॉर्डर फेंसिंग को लेकर भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद रहा. केंद्र का आरोप था कि आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई. अब इसे प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को छोड़कर पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी ‘बांग्ला शस्य बीमा’ योजना शुरू की थी. राज्य सरकार का तर्क था कि उसका मॉडल किसानों के लिए अधिक लाभकारी है, जबकि केंद्र ने इसे राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश बताया।  मृदा स्वास्थ्य कार्ड, और पीएम-प्रणाम जैसी योजनाओं को लागू करने की गति को लेकर भी केंद्र ने राज्य सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया।  केंद्र सरकार की रणनीति साफ है कि लंबे समय से रुकी परियोजनाओं को तेज गति से पूरा कर जमीन पर ‘डबल इंजन सरकार’ का असर दिखाया जाए. साथ ही केंद्रीय योजनाओं का दायरा बढ़ाकर लाभार्थियों की संख्या में विस्तार किया जाए, ताकि केंद्र सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। 

तबादला नीति में बड़ा बदलाव, स्वैच्छिक ट्रांसफर को प्राथमिकता देने की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश में इस बार स्वेच्छा से स्थानांतरण मांगने वालों को प्राथमिकता मिल सकती है। कर्मचारी विभिन्न कारणों से स्वैच्छिक आधार पर स्थानांतरण चाहते हैं जबकि विभागों की प्राथमिकता प्रशासनिक आधार रहता है। स्थानांतरण नहीं होने से कार्य प्रभावित होता है। इसे देखते हुए ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछली कैबिनेट की बैठक में स्वयं यह बात उठाई और कहा कि स्वैच्छिक स्थानांतरण तो अधिक होने चाहिए। अब सामान्य प्रशासन विभाग आगामी मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में जो स्थानांतरण नीति प्रस्तावित करने जा रहा है, उसमें स्वेच्छा से स्थानांतरण चाहने वालों को प्राथमिकता दी जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि प्रति वर्ष बड़ी संख्या में अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा व्यक्तिगत कारण बताकर स्वैच्छिक स्थानांतरण की मांग की जाती है। किसी भी संवर्ग में 20 प्रतिशत से अधिक स्थानांतरण करने की अनुमति नहीं होती है। इसके कारण अधिकांश आवेदनों का निराकरण नहीं हो पाता है। स्वैच्छिक तबादलों के लाभ और प्रस्तावित नीति स्वैच्छिक स्थानांतरण में प्रशासनिक व्यय भी नहीं देना होता है। इसका दूसरा लाभ यह है कि ऐच्छिक स्थान पर पहुंचने से कर्मचारी की उत्पादकता बढ़ती है, क्योंकि वह मन लगाकर काम कर सकता है। इस व्यावहारिक पक्ष को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वैच्छिक स्थानांतरण को प्राथमिकता देने की बात कही। इसके आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग स्थानांतरण नीति-2026 में यह प्रस्तावित कर रहा है कि स्वैच्छिक आवेदनों को गुण-दोष के आधार पर पहले निराकरण किया जाएगा। यदि संभव होगा तो पहले इनके ही तबादले किए जाएंगे, फिर प्रशासनिक आधार को देखा जाएगा। स्थानांतरण से प्रतिबंध 15 मई से 15 जून तक के लिए हटाया जा सकता है। निर्धारित किए जा सकते हैं ये प्रविधान अखिल भारतीय सेवा, न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा एवं मंत्रालय सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों पर यह नीति लागू नहीं होगी।     शिक्षा विभाग की अलग नीति रहेगी, जिसका आधार सामान्य प्रशासन विभाग की नीति को सुनिश्चित किया जाएगा।   जिला संवर्ग एवं राज्य संवर्ग के तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिले के अंदर स्थानांतरण कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद होंगे।     प्रथम श्रेणी अधिकारियों के स्थानांतरण विभागीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री के समन्वय से होंगे।     पिछले एक वर्ष में स्थानांतरित कर्मचारियों को सामान्यतः दोबारा स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।     उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के माध्यम से होंगे।     गंभीर बीमारी, न्यायालयीन आदेश, गंभीर शिकायत या अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसी परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि में भी स्थानांतरण किए जा सकेंगे।  

दिलजीत दोसांझ: राजनीति नहीं, लेकिन सुर्खियों में हमेशा

चंडीगढ़ पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) ने हाल के समय में कई संवेदनशील सिख मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी है। चाहे अलगाववादी राजनीति से दूरी बनाने की बात हो या विदेशों में बसे पंजाबी सिख प्रवासियों की संघर्षपूर्ण सफलता को पहचान देने की, दिलजीत ने अपनी अलग पहचान बनाई है। हालांकि, अब तक उन्होंने राजनीति में आने का कोई संकेत नहीं दिया है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में दोसांझ ने लिखा कि वह कभी भी राजनीति में नहीं आएंगे। दिलजीत दोसांझ ने लिखा, राजनीति में कभी नहीं… मेरा काम एंटरटेनमेंट करना है। मैं अपने क्षेत्र में बहुत खुश हूं। इसके बावजूद पंजाब में एक वर्ग ऐसा है जो उन्हें मौजूदा समय में राज्य के लिए संभावित राजनीतिक विकल्प के रूप में देख रहा है। आर्थिक चुनौतियों और नशे की समस्या से जूझ रहे पंजाब में कुछ सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि दिलजीत जैसे चेहरे की राजनीति में जरूरत है। ‘जागो पंजाब मंच’ नामक एक समूह, जिसमें पूर्व सैन्य अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं, ने सार्वजनिक रूप से दिलजीत दोसांझ से राजनीति में आने की अपील की है। सेवानिवृत्त नौकरशाह एस.एस. बोपाराय के नेतृत्व वाले इस समूह का मानना है कि दिलजीत मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व से अलग हैं, क्योंकि उन्होंने कभी सत्ता की इच्छा जाहिर नहीं की। दिलजीत आज सिर्फ एक वैश्विक कलाकार नहीं, बल्कि पंजाबी अस्मिता के प्रतीक बन चुके हैं। उनकी पहचान किसी राजनीतिक विचारधारा से नहीं, बल्कि “पंजाबी पहचान” से जुड़ी मानी जाती है। वह अपने देसी अंदाज को खुलकर अपनाते और प्रदर्शित करते हैं। हाल ही में मेट गाला में महाराजा शैली के हार और पंजाबी लिपि से सजी पोशाक पहनकर पहुंचे दिलजीत ने वैश्विक मंच पर पंजाबी संस्कृति को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। वहीं सोशल मीडिया पर भी वह खुद को एक साधारण ‘देसी बॉय’ के रूप में पेश करते हैं, जो उनके प्रशंसकों को उनसे जोड़ता है। साल 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान दिलजीत ने खुलकर किसानों का समर्थन किया था। हालांकि, उस समय भी उन्होंने साफ किया था कि वह किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं हैं। पिछले वर्ष उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) से मुलाकात की थी, जिसे राजनीतिक रूप से संतुलित रुख के तौर पर देखा गया। हाल के दिनों में कनाडा में अपने कार्यक्रम के दौरान खालिस्तानी झंडे लहराए जाने पर आपत्ति जताकर दिलजीत ने खुद को अलगाववादी राजनीति से भी अलग दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कनाडा में पंजाबी प्रवासियों की यात्रा कोमागाटा मारू घटना से लेकर आज वहां प्रभावशाली समुदाय बनने तक को गर्व के साथ प्रस्तुत किया। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दिलजीत दोसांझ कभी राजनीति में कदम रखेंगे? और अगर ऐसा होता है, तो क्या पंजाब की जनता उन्हें एक राजनीतिक नेता के रूप में स्वीकार करेगी? इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।

आवास निर्माण के लिए DPR की मंजूरी, PM Awas Yojana के तहत 10 हजार फ्लैट बनेंगे

इंदौर   प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत नगर निगम ने विभिन्न स्थलों पर आवास निर्माण करने के लिए कुल 5 डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी थी। सरकार के 5 में से 2 डीपीआर मंजूर करते ही निगम फ्लैट निर्माण के काम पर लग गया है, जो कि ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा) और बढिय़ा कीमा में बनेंगे। सबके पास खुद का आवास हो और मकान की कीमत भी कम हो इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई है। योजना के पहले चरण में इंदौर शहर और आसपास 13 जगहों पर मिली सरकारी जमीन पर 18606 फ्लैट बनने के साथ लोगों को आबंटित होना शुरू हो गए हैं। अब प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 पर काम शुरू किया गया है। भेजी गई डीपीआर मंजूरी इसके चलते ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा), सनावदिया, बढिय़ा कीमा और उमरीखेड़ा में 10 हजार फ्लैट बनाने की डीपीआर मंजूरी के लिए राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी गई। निगम अफसरों के अनुसार ताप्ती परिसर और बढिया कीमा की डीपीआर मंजूर हो गई है। अब जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।  इसके लिए पिछले दिनों निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और प्रधानमंत्री आवास योजना के अपर आयुक्त अर्थ जैन ने स्थल निरीक्षण किया था। साथ ही अफसरों को निर्देशित किया गया कि योजना के अंतर्गत प्रस्तावित सभी आवासीय परियोजनाओं से पात्र हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके, इसके लिए फ्लैट का निर्माण जल्द से जल्द शुरू किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 पर एक नजर     6048 वन बीएचके के फ्लैट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए बनेंगे।     1368 टू बीएचके के फ्लैट बनेंगे। 720 थ्री बीएचके के फ्लैट बनेंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना क्या है… प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों, निम्न आय वर्ग (LIG), और मध्यम आय वर्ग (MIG) के परिवारों को 2022 (और अब 2.0 के तहत आगे) तक पक्का घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत सरकार घर बनाने या खरीदने के लिए सब्सिडी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना के तहत, पात्र लाभार्थियों को नया घर बनाने या कच्चे घर को पक्का करने के लिए लगभग 1.20 लाख से 2.50 लाख तक की वित्तीय सहायता/सब्सिडी मिलती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक के पास पहले से कोई पक्का घर नहीं होना चाहिए। यह योजना मुख्य रूप से EWS (आर्थिक रूप से कमजोर), LIG (निम्न आय वर्ग) और MIG (मध्यम आय वर्ग) के लिए है।

एमपी में डॉक्टरों की भर्ती का नया रिकार्ड, अस्पतालों के लिए जारी हुई सबसे बड़ी सूची

इंदौर  मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) इंदौर की ओर से मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित किया गया है। आयोग की ओर से जारी इस चयन परिणाम अब तक का सबसे बड़ा रिजल्ट माना जा रहा है, क्योंकि 1832 पदों के लिए 4 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। दो इंटरव्यू पैनल ने 45 दिनों के भीतर उम्मीदवारों का साक्षात्कार करवाया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद महीनेभर में आयोग की ओर से दो भाग में रिजल्ट बनाया गया, जिसमें 87 प्रतिशत मुख्य भाग का परिणाम निकाला है। आयोग ने मेडिकल ऑफिसर पद के लिए 27 जनवरी से इंटरव्यू रखे थे। इसमें 1832 पदों के लिए 4047 उम्मीदवार को बुलाया गया था। ये प्रक्रिया 10 अप्रैल तक चली। शुक्रवार को आयोग ने साक्षात्कार में चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें 87 फीसद (1649 पद) मुख्य भाग शामिल है। वेटिंग लिस्ट में 186 उम्मीदवार बता दें कि, 1649 उम्मीदवारों में से 384 सामान्य से हैं, जबकि 225 एससी, 642 एसटी, 197 ओबीसी और 201 ईडब्ल्यूएस पद हैं। लेकिन, 1220 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। जबकि, 186 उम्मीदवारों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया है। 13 फीसदी पदों पर दूसरी सूची में आएगा परिणाम आयोग ने स्पष्ट किया है कि, शासन के निर्देशों के तहत फिलहाल 87 प्रतिशत पदों का परिणाम घोषित किया गया है, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों की चयन प्रक्रिया अलग से पूरी होगी। इन पदों का परिणाम बाद में जारी किए जाएंगे। भर्ती में कुछ पद विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी आरक्षित रखे गए हैं। आयोग के अनुसार, चयन पूरी तरह मेरिट एवं आरक्षण नियमों के आधार पर हुआ है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद और आरक्षण का पेंच अब इस मामले में अधिकारियों का मानना है कि, मेडिकल ऑफिसर के इतने बड़े स्तर पर चयन होने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होने के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होने की संभावना बढ़ी है। आयोग के ओएसडी रवींद्र पंचभाई का कहना है कि, ओबीसी आरक्षण के चलते 13 फीसदी प्रावधिक भाग का रिजल्ट नहीं निकाला गया है। डिप्टी सीएम ने दिए थे जल्द भर्ती करने के निर्देश सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए उप स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विभाग को निर्देश दिए थे। उन्होंने बीते एक साल में कई बार विभाग की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देशित किया था कि, रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नए चिकित्सकों की भर्ती होनी चाहिए।

डायल-112 जवानों की संवेदनशील कार्यवाही से घायल राष्ट्रीय पक्षी को समय पर मिला उपचार

भोपाल  शाजापुर जिले के थाना सुनेरा क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं मानवीय कार्रवाई से घायल राष्ट्रीय पक्षी मोर को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस त्वरित कार्यवाही से घायल पक्षी को आवश्यक देखभाल एवं संरक्षण मिल सका। 09 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना सुनेरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मेहंदी में एक मोर घायल अवस्था में पड़ा है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही सुनेरा थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक  बृजमोहन यादव एवं पायलट  महेंद्र सिंह जादौन ने  मौके पर पहुँचकर पाया कि वन क्षेत्र से भटककर आया मोर अज्ञात कारणों से घायल हो गया था। डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं संवेदनशीलता का परिचय देते हुए घायल मोर को सुरक्षित संरक्षण में लिया तथा एफआरव्ही वाहन की सहायता से उपचार एवं देखभाल हेतु वन केंद्र, शाजापुर पहुँचाकर वन विभाग के अधिकारियों के सुपुर्द किया। डायल-112 जवानों की मानवीय एवं संवेदनशील कार्यवाही से राष्ट्रीय पक्षी को समय पर उपचार एवं संरक्षण उपलब्ध कराया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा मानव ही नहीं बल्कि वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

कुमारी सैलजा ने कहा: हरियाणा में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हालात चिंताजनक

 चंडीगढ़  सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद जिस प्रकार हरियाणा महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में देश में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है, वह बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। सासंद कुमारी सैलजा ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश में कानून व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है। रिपोर्ट के अनुसार नाबालिग लड़कियों की तस्करी के मामलों में हरियाणा देश में सबसे आगे है और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। यह स्थिति हरियाणा जैसे प्रगतिशील प्रदेश के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। कुमारी सैैलजा ने कहा कि हरियाणा को विकास, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में देश के लिए उदाहरण बनना चाहिए था, लेकिन आज प्रदेश अपराध, भय और असुरक्षा की घटनाओं के कारण चर्चा में है। महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर आम परिवारों में चिंता का माहौल है। सांसद ने कहा कि प्रदेश में बढ़ता नशा और बेरोजगारी भी अपराधों में वृद्धि का बड़ा कारण बन रहे हैं। युवाओं के सामने रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं, जिसके कारण अपराध और गैंगवार जैसी घटनाओं में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। यह स्थिति समाज के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। कुमारी सैैैलजा ने प्रदेश सरकार से मांग की कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए सख्त और ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही नशे के नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि केवल दावे और प्रचार से स्थिति नहीं सुधरेगी, सरकार को जमीन पर परिणाम देने होंगे। सांसद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रदेश की महिलाओं, युवाओं और आम जनता की सुरक्षा एवं सम्मान के मुद्दे को मजबूती से उठाती रहेगी और सरकार को उसकी जिम्मेदारी का अहसास कराती रहेगी। सांसद ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार देश में 2024 में लडकियों की तस्करी के 1659 केस हुए इनमें सबसे ज्यादा हरियाणा में दर्ज हुए। लोकसेवकों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार के मामले में हरियाणा देश में तीसरे स्थान पर है। अवैध हथियारों के मामले में हरयिाणा देश में पांचवें स्थान पर है। बाबा केदारनाथ के दर्शन किएः कुमारी सैलजा ने आज प्रात: केदारनाथ मंदिर में बाबा केदारनाथ जी के पावन दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना की। कुमारी सैलजा ने कहा कि बाबा केदारनाथ का आशीर्वाद समस्त देशवासियों पर बना रहे तथा देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर हो। उन्होंने श्रद्धा एवं आस्था के साथ मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश और देश में शांति, भाईचारे एवं जनकल्याण की प्रार्थना भी की।