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परंपरागत बीजों के संरक्षण में आजीविका मिशन की अनूठी पहल

भोपाल

परंपरागत बीजों के संरक्षण में आजीविका मिशन की कृषि सखियों द्वारा उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। इन्हें बीज सखी के रूप में स्थापित करने के लिये प्रशिक्षित किया गया है। जिला स्तर पर भी प्रशिक्षण का आयोजन किया जाकर प्रदेश में कुल 454 बीज सखी तैयार की गयी हैं। ये देशी बीजों के संरक्षण एवं संवर्धन पर कार्य करेंगी। वर्तमान में 29 जिलों में 99 बीज बैंक स्थापित किये जा चुके हैं। सर्वाधिक 20 बीज बैंक जिला सागर एवं 10 बीज बैंक जिला बालाघाट में स्थापित हुए हैं। देशी बीज स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार ढले होने के कारण कम पानी, खाद व कीटनाशकों में भी बेहतर पैदावार देते हैं। पोषण युक्त होते है, सूखा-रोग प्रतिरोधी होते हैं, इन्हें दोबारा बोया जा सकता है, जो किसानों को आत्मनिर्भर और खेती को किफायती व टिकाऊ बनाते हैं।

पारंपरिक बीज संरक्षण के गुर सीख रहीं बीज सखियां

बीज सखियों को प्रशिक्षण पद्म  बाबूलाल दहिया, जिला सतना, उद्यानिकी विभाग से  दीनानाथ धोटे, कृषि विभाग से  जितेंद्र सिंह परिहार द्वारा दिया जा रहा है। विगत 16 वर्षों से देशी बीजों का संरक्षण करने वाली जिला डिंडोरी की फुलझरिया बाई द्वारा भी बीज संरक्षण के तरीके भी बताए गये हैं। कर्नाटक राज्य की बी.बी. जान जो विगत 9 वर्षों से परंपरागत बीज संरक्षण का कार्य कर रही हैं, उनके द्वारा भी प्रतिभागियों को बीज संरक्षण के लिये प्रशिक्षण दिया गया है।

बीज बैंक के माध्यम से किसानों को मिल रहे निःशुल्क देशी बीज

जिला बालाघाट की बीज सखी सुनीता सिहोरे बताती हैं कि उनके द्वारा लगभग 70 प्रकार के देशी बीजों का संरक्षण किया गया है जिनमें सब्जी, अनाज, दलहन आदि शामिल हैं। उनके द्वारा कृषकों को नि:शुल्क देशी बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उत्पादन आने पर कृषक द्वारा जितना बीज लिया गया है बस उसका दो गुना बीज बैंक में जमा करना होगा जिससे और कृषकों को भविष्य में देशी बीज उपलब्ध कराया जा सके। आगामी खरीफ मौसम के लिये कृषक यदि देशी बीज लगाना चाहते हैं तो अपने विकास खण्ड के ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय से बीज सखियों की सूची प्राप्त कर उनसे संपर्क कर सकते हैं।

 

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