samacharsecretary.com

‘डॉक्टर’ बनकर चला रहा था फर्जीवाड़ा का धंधा, 12वीं पास आरोपी गिरफ्तार

कानपूर

उत्तर प्रदेश के कानपुर में फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट तैयार करने वाले बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद जांच में एक के बाद एक चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं. फरवरी में पुलिस ने शहर में फर्जी मार्कशीट तैयार करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था. अब इसी मामले की जांच के दौरान पुलिस ने ऐसे सरगना को गिरफ्तार किया है, जो हैदराबाद से बैठकर बड़े पैमाने पर इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था.

12वीं पास था 'डॉक्टर मनीष कुमार'
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान मनीष कुमार के रूप में हुई है, जो खुद को 'डॉक्टर मनीष कुमार' बताता था, जबकि जांच में सामने आया कि उसकी शैक्षणिक योग्यता केवल 12वीं तक है. आरोप है कि वह 'ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड यूके लंदन' नाम से देश के अलग-अलग शहरों में कार्यक्रम आयोजित कर खुद की अलग पहचान बना रहा था. वह मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में कई कार्यक्रम कर चुका था, जहां समाजसेवियों और अन्य लोगों को सम्मानित करने के नाम पर अपनी पहुंच और प्रभाव बढ़ा रहा था.

फर्जी मार्कशीट गिरोह से संपर्क
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के मुताबिक, मनीष मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला था. बाद में वह बिहार में रहा और फिर हैदराबाद जाकर कंपनी और कॉल सेंटर संचालित करने लगा. जांच में पता चला कि उसका संपर्क कानपुर में पकड़े गए फर्जी मार्कशीट गिरोह से था.

पुलिस के अनुसार, मनीष ने 80 से अधिक फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट तैयार कर लोगों तक पहुंचाए थे. बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए दस्तावेज तैयार करने के बदले 80 से 90 हजार रुपये तक वसूले जाते थे. पुलिस का दावा है कि यह पूरा काम व्हाट्सएप के माध्यम से संचालित किया जाता था, जहां लोगों से डिटेल लेकर नकली दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते थे.

देश के कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि उन्नाव में अर्जुन यादव नाम के युवक को फ्रेंचाइजी दी गई थी, जो कोचिंग सेंटर संचालित करता था. पुलिस ने मनीष कुमार और अर्जुन यादव को गिरफ्तार कर लिया है. पूछताछ के दौरान कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं. पुलिस का मानना है कि इस गिरोह का नेटवर्क देश के कई राज्यों तक फैला हुआ था और जांच अभी जारी है.

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here