बॉबी देओल की नई फिल्म बंदर का माहौल ट्रेलर आने के बाद से ही बनने लगा था. अब फिल्म की रिलीज, यानी 5 जून में बहुत दिन नहीं बचे हैं और एडवांस बुकिंग भी जल्द ही खुलने वाली है. अब सबसे बड़ा इंतजार इस बात का है कि बंदर की सोशल मीडिया वाली चर्चाएं, एडवांस बुकिंग के दमदार आंकड़ों में बदलेंगी या नहीं. क्योंकि लॉकडाउन के बाद से ही बॉबी देओल का करियर एक दमदार आर्क पर बढ़ता नजर आ रहा था, मगर इसमें एनिमल (2023) के बाद कुछ स्पीड ब्रेकर आ गए.
एक पीछे छूट गए हीरो के शानदार कमबैक की कहानी, बॉबी के बड़े भाई सनी देओल ने तो गदर 2 के साथ बड़े ही शानदार तरीके से पूरी की है. लेकिन बॉबी के लिए बंदर की सक्सेस, उनके कमबैक आर्क का सबसे बड़ा धमाका बन सकती है. हालांकि, बंदर के इस खेल में एक बड़ा रिस्क भी छिपा है.
बॉबी के फैंस को 'बंदर' से क्यों है बड़े खेल की उम्मीद?
बॉबी देओल अब सिर्फ जनता में पॉपुलर हीरो नहीं हैं, वो अपने-आप में एक 'पॉप-कल्चर एलीमेंट' बन गए हैं. 90s के अंत और 2000s की शुरुआत में बॉबी एक स्टार थे— अपने नाम पर फिल्म चलाने वाले स्टार, जिनका करियर और फिल्में चमक-दमक से भरी थीं.
स्टारडम की खासियत और बुराई, दोनों यही है कि स्टार के एक्टिंग टैलेंट पर बहुत ध्यान नहीं दिया जाता, मैटर करती है तो बस थिएटर्स में भीड़ खींचने की उसकी पावर. 2010 के आसपास उनका स्टारडम फीका पड़ने लगा तो सामने आने वाले प्रोजेक्ट्स की क्वांटिटी और क्वालिटी दोनों कमजोर हो गई. 2018 में रेस 3 से सलमान खान ने दोबारा उन्हें एक 'स्टार' की तरह पेश किया और बॉबी का नेचुरल ऑरा लोगों को फिर दिखने लगा. लेकिन अपने कमबैक के लिए बॉबी सिर्फ स्टार वाले भौकाल पर डिपेंड होकर नहीं आए थे, वो अपने एक्टिंग वाले हुनर को भी धार दे रहे थे, ये बात उन्होंने खुद मानी है.
इसी का कमाल था कि प्रकाश झा ने उन्हें अपनी वेब सीरीज आश्रम में लिया और अतुल सभरवाल ने Class of 83 में उन्हें एक यंग पुलिस एनकाउंटर टीम के मेंटोर का रोल दिया. ये दोनों प्रोजेक्ट अगस्त 2020 में लोगों के सामने आए और बॉबी की एक्टिंग परफॉर्मेंस वाली साइड देखकर लोगों का मुंह खुला रह गया.
आश्रम के चार सीजन्स, लव हॉस्टल, और एनिमल से बॉबी का भौकाल बढ़ता ही चला गया. दर्शकों की एक पूरी नई जेनरेशन ने 'लॉर्ड बॉबी' को डिस्कवर किया. लेकिन एनिमल के बाद बॉबी के भौकाल का असर खुलकर धमाके करने से थोड़ा चूक रहा है. उन्होंने साउथ में तमिल फिल्म कंगुवा, तेलुगु में डाकू महाराज और हरिहर वीर मल्लू जैसी फिल्में ट्राई कीं, लेकिन कुछ खास भला नहीं हुआ. आखिरकार आर्यन खान की वेब सीरीज द बैड्स ऑफ बॉलीवुड ने बॉबी की चमक थोड़ी बढ़ाई, लेकिन धीरे-धीरे वो मिडिल एज्ड सपोर्टिंग हीरो या विलेन के रोल में फंसते जा रहे हैं.
क्यों धमाका कर सकती है 'बंदर'?
लॉर्ड बॉबी को लगातार सेलिब्रेट करने वाली जनता को अब उनकी सोलो हिट का इंतजार है— एक ऐसी फिल्म जिसमें बॉबी लीड रोल में दिल जीत लें, सपोर्टिंग या नेगेटिव रोल में न हों. और बंदर का ट्रेलर दिखा चुका है कि इस फिल्म में वो बात है. इसके डायरेक्टर अनुराग कश्यप हैं, जिनके साथ काम करना भर ही एक एक्टर के दमदार होने की पहचान है. उनकी फिल्मों का संसार बहुत रियलिस्टिक होता है और बॉबी जैसे 'स्टार' एक्टर को अनुराग के सिनेमा-संसार में देखना ही ऑडियंस को एक एक्साइटिंग पॉइंट लग रहा है. ट्रेलर में ही बॉबी की परफॉर्मेंस दमदार नजर आ रही है. फिल्म को जनता का पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ मिल गया, तो कमाल होना तय है. मगर इस कमाल के रास्ते में एक रिस्क भी है.
कैसे 'बंदर' के लिए स्पीड ब्रेकर बन सकता है अनुराग का नाम?
अनुराग कश्यप, भारत के सबसे उम्दा फिल्ममेकर्स में से एक हैं, इस बात पर कभी किसी को कोई शक नहीं रहा. मगर गैंग्स ऑफ वासेपुर के बाद से ही जनता उनकी फिल्मों के लिए थिएटर में पहले जैसी एक्साइटमेंट नहीं दिखा रही. अनुराग की फिल्मों पर दर्शकों का रिस्पॉन्स अब कुछ ऐसा हो चुका है कि 'ओटीटी पर देखो और सोशल मीडिया पर तारीफों की झड़ी लगा दो', लेकिन टिकट खरीद कर थिएटर्स में देखने के नाम पर दर्शक पीछे सरक लेते हैं. अनुराग की डायरेक्ट की हुई पिछली कई फिल्मों के साथ यही हुआ है— मुक्काबाज, मनमर्जियां, दोबारा, केनेडी और निशानची के दोनों पार्ट्स इसका उदाहरण हैं.
अनुराग की फिल्मों को मिलने वाला ये 'ओटीटी फ्रेंडली' रिस्पॉन्स ही बंदर के लिए सबसे बड़ी दिक्कत बन सकता है. हालांकि, बॉबी के लिए फैंस का प्यार दर्शकों को थिएटर तक खींचने का दम रखता है. शुक्रवार, 5 जून को बंदर रिलीज होगी और तभी पता चलेगा कि अनुराग और बॉबी का ये अनोखा कॉम्बो बॉक्स ऑफिस पर क्या खेल दिखाता है.





