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अभिनेता विजय और अन्नामलाई के बीच सियासी मुकाबले के संकेत, तमिलनाडु में बढ़ी हलचल

चेन्नई  तमिलनाडु में भाजपा के फायरब्रांड नेता अन्नामलाई ने बड़ा फैसला ले लिया है. अन्नामलाई ने सस्पेंस से पर्दा हटाते हुए भाजपा से अलग होने का मन बना ही लिया है. जी हां, पूर्व तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख के. अन्नामलाई ने आज यानी मंगलवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया. हालांकि उम्मीद है कि वे शाम 4 बजे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिलेंगे. अमित शाह से मुलाकात में ही फाइनल फैसला हो पाएगा।  भाजपा चीफ नितिन नबीन और संगठन सचिव बीएल संतोष के साथ अहम बैठक में अन्नामलाई ने कथित तौर पर पार्टी से अच्छे संबंधों के साथ अलग होने की इच्छा जताई. उन्होंने पार्टी नेतृत्व से कहा कि वे अब अपना रास्ता खुद बनाना चाहते हैं. हालांकि, बीजेपी नेतृत्व उन्हें मनाने की कोशिश कर रहा है और उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर कोई भूमिका भी तय की जा सकती है. सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई को अगली सूचना तक दिल्ली न छोड़ने के लिए कहा गया है।  तमिलनाडु में बड़ा राजनीतिक उलटफेर अगर अन्नामलाई का इस्तीफा मंजूर होता है तो यह भाजपा के लिए बड़ा झटका होगा. बीजेपी से अन्नामलाई का जाना राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, खासकर अभिनेता से नेता बने विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद. अन्नामलाई के करीबी सूत्रों के मुताबिक, उनका मानना है कि विजय के राजनीतिक ताकत बनने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है. आज विजय से लड़ने के लिए कोई नेता नहीं है. द्रविड़ युग खत्म हो गया है. अब सिर्फ भाषा आधारित राजनीति नहीं चलेगी. राज्य की राजनीति बदल चुकी है।  ऐसी अटकलें तेज थीं कि अन्नामलाई सहमति से पार्टी छोड़ना चाहते हैं. रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि अब वे बीजेपी में अपना भविष्य नहीं देख रहे हैं. अन्नामलाई को नैनार नागेन्द्रन के तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख बनने के बाद से कम सक्रिय देखा जा रहा था. गौरतलब है कि तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य को लेकर बीते कुछ दिनों से अटकलों का बाजार गर्म है।  क्यों अटकलों का बाजार हुआ गर्म दरअसल कोयंबटूर में उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए विशाल पोस्टरों से अफवाहें फैल रही हैं कि वे एक अलग राजनीतिक मंच बनाने जैसी कोई महत्वपूर्ण राजनीतिक पहल करने की तैयारी कर रहे हैं. 4 जून को अन्नामलाई के जन्मदिन से पहले प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर ‘हमारे नेता, आइए और हमारा नेतृत्व कीजिए’ जैसे नारों वाले ये पोस्टर लगाए गए थे।  अन्नामलाई ने क्यों कहा था 2 दिन इंतजार कीजिए दिल्ली रवाना होने से पहले अन्नामलाई ने अपने बारे में चल रही अटकलों पर विस्तार से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में उन्होंने कहा कि कृपया प्रतीक्षा करें. हम दो दिन में बैठकर बात करेंगे. इस टिप्पणी ने संभावित घोषणा को लेकर उत्सुकता को और बढ़ा दिया है।  कौन हैं अन्नामलाई? भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी अन्नामलाई 2020 में भाजपा में शामिल हुए और तेजी से तमिलनाडु में पार्टी के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक बन गए. 2021 से 2025 तक राज्य भाजपा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कई राज्यव्यापी अभियानों का नेतृत्व किया और युवा मतदाताओं और सोशल मीडिया फॉलोअर्स के बीच एक मजबूत समर्थन आधार बनाया।  एक भी चुनाव नहीं लड़े 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गईं, जिसमें भाजपा के सबसे जाने-माने चेहरों में से एक होने के बावजूद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा. कक्षा नौ के छात्रों के लिए त्रिभाषा नीति को आगे बढ़ाने के केंद्र के फैसले की उनकी हालिया आलोचना ने भी राजनीतिक बहस छेड़ दी और पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों को लेकर नई अफवाहें पैदा कर दीं।  41 साल के अन्नामलाई के पास समय और राजनीतिक ऊर्जा दोनों हैं. जहां कुछ पर्यवेक्षकों का मानना ​​है कि अन्नामलाई भाजपा में अधिक प्रमुख भूमिका तलाश सकते हैं, वहीं अन्य का अनुमान है कि वे एक अलग राजनीतिक मंच बना सकते हैं. हालांकि, भाजपा नेताओं ने किसी भी विभाजन की अटकलों को खारिज कर दिया है, और उनका कहना है कि अन्नामलाई पार्टी के एक महत्वपूर्ण नेता बने रहेंगे. मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ उनकी बैठक निर्धारित होने के कारण, राजनीतिक विश्लेषक अन्नामलाई के अगले कदम को स्पष्ट करने वाले संकेतों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। 

शेयर मार्केट में तहलका मचाने की तैयारी, Coca-Cola India ने IPO लिस्टिंग प्लान का किया खुलासा

मुंबई  दुनिया की जानी-मानी कोल्ड ड्रिंक कंपनी कोका-कोला ने भारत में एक बड़ा फैसला लिया है. कंपनी साल 2027 में अपनी भारतीय बॉटलिंग इकाई की मुख्य कंपनी 'हिंदुस्तान कोका-कोला होल्डिंग्स' (HCCH) का आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है. इसका मतलब है कि 2027 में आम लोग भी शेयर बाजार के जरिए इस कंपनी के शेयर खरीद सकेंगे. कंपनी ने बताया कि वह भारत के प्रमुख शेयर बाजारों—बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होने के लिए शुरुआती काम शुरू कर चुकी है. हालांकि, यह पूरी योजना बाजार के माहौल और सरकारी मंजूरियों पर निर्भर करेगी।  इस आईपीओ के जरिए कोका-कोला कंपनी भारतीय इकाई में अपनी कुछ हिस्सेदारी आम जनता और निवेशकों को बेचेगी. यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि करीब एक साल पहले ही कोका-कोला ने अपनी इस कंपनी में 40 फीसदी हिस्सेदारी भारत के 'जुबिलेंट भारतीय ग्रुप' को बेची थी. हालांकि, उस समय यह सौदा कितने रुपये में हुआ था, इसकी जानकारी कंपनी ने छिपाई थी।  क्या है कंपनी की योजना? HCCH भारत में कोका-कोला के बोतलों में ड्रिंक भरने (बॉटलिंग) का काम करने वाली सबसे बड़ी कंपनी 'हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेज' (HCCB) की मालिक है. कोका-कोला का यह कदम उसकी दुनिया भर में चल रही 'एसेट-लाइट' रणनीति का हिस्सा है. इस रणनीति के तहत कंपनी फैक्ट्रियां चलाने और भारी मशीनें लगाने जैसे कामों में अपना पैसा और समय कम लगाना चाहती है. कंपनी का मुख्य ध्यान अब केवल अपने ब्रांड को मजबूत बनाने, विज्ञापन करने और कोल्ड ड्रिंक का मुख्य फॉर्मूला (कॉन्संट्रेट) तैयार करने पर रहेगा।  भारत में कोका-कोला का बड़ा कारोबार पूरी दुनिया में भारत कोका-कोला के लिए पांचवां सबसे बड़ा बाजार है. भारत में कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटा है—पहला 'कोका-कोला इंडिया' और दूसरा 'HCCB'. इस बॉटलिंग कंपनी (HCCB) की शुरुआत 14 फरवरी 1997 को हुई थी. आज यह कंपनी पूरे देश में 14 बड़े और आधुनिक प्लांट चलाती है, जहां कोल्ड ड्रिंक को बोतलों में भरा जाता है।  भारतीय बाजारों और घरों में कोका-कोला के प्रोडक्ट्स बहुत पसंद किए जाते हैं. कंपनी भारत में 8 अलग-अलग कैटेगरी में 37 तरह के ड्रिंक्स बनाती और बेचती है. इनमें कोका-कोला के अलावा थम्स अप, स्प्राइट, मिनट मेड, माजा, किनले पानी, लिम्का और फैंटा जैसे मशहूर नाम शामिल हैं. बाजार के जानकारों का मानना है कि जब यह कंपनी शेयर बाजार में आएगी, तो यह भारत का सबसे बड़ा और सफल आईपीओ साबित हो सकता है। 

आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में भक्तों की आस्था का अनोखा रिकॉर्ड, 12.4 लाख लोगों ने करवाया मुंडन

तिरुपति  आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर को बाल चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।मंदिर प्रबंधन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के अनुसार, 1 से 27 मई तक कुल 12,43,063 श्रद्धालुओं ने अपने बाल अर्पित किए। यह आंकड़ा पिछले वर्षों को पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड बना है। पिछले सालों से तुलना मई 2024 में यह संख्या लगभग 10.65 लाख थी, जबकि इससे पहले की अवधि में 10.18 लाख भक्तों ने बाल चढ़ाए थे। मंदिर अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों की छुट्टियों, हफ्ते के आखिरी मे भीड़ और देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों के आने से इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक दिन का रिकॉर्ड 18 से 23 मई के बीच रोजाना 50,000 से अधिक भक्तों ने मुंडन करवाया। खासतौर पर 23 मई को 57,580 बाल चढ़ावे दर्ज किए गए, जो हाल के वर्षों में एक दिन का सबसे अधिक आंकड़ा है। 24 घंटे मुंडन सेवाएं भीड़ को ठीक तरीके से संभालने के लिए TTD ने मुख्य कल्याणकट्टा सहित 11 मिनी मुंडन केंद्रों पर सेवाएं 24 घंटे चालू रहती हैं। 1,150 से अधिक नाई (जिनमें 269 महिला नाई शामिल हैं) शिफ्ट में काम कर रहे हैं ताकि भक्तों को बिना इंतजार के समय में सेवा मिल सके। 167 करोड़ के बाल धार्मिक आस्था के साथ-साथ ये बाल TTD के लिए बड़े राजस्व का स्रोत भी बन गए हैं। इन्हें 'काला सोना' कहा जाता है। इकट्ठा किए गए बालों को सॉर्टिंग और ग्रेडिंग के बाद चीन, इटली, अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों में नीलाम किया जाता है, जहां इनका उपयोग विग, हेयर एक्सटेंशन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में होता है। आंकड़ों के मुताबिक, 2020-21 में बाल नीलामी से 67 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी, जो 2023-24 में बढ़कर 167 करोड़ रुपये हो गई। 2024-25 में यह 190 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है और अगले वित्तीय वर्ष में 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है। भक्तों की सुविधा पर जोर TTD ने मुंडन केंद्रों पर स्वच्छता, स्टरलाइज्ड ब्लेड, गर्म पानी, पीने का पानी, बैठने की व्यवस्था और टोकन सिस्टम जैसी सुविधाएं बढ़ा दी हैं ताकि भक्तों को सुरक्षित और आरामदायक अनुभव मिले।

विश्व पर्यावरण दिवस पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की पोस्टर प्रतियोगिता, युवाओं को मिलेगा मंच

विश्व पर्यावरण दिवस पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल आयोजित करेगा पोस्टर प्रतियोगिता प्रकृति से प्रेरित होकर जलवायु और भविष्य का संरक्षण करें विषय पर होगी प्रतियोगिता चार आयु वर्गों में आकर्षक नगद पुरस्कार, 5 जून को होटल बेबिलॉन इंटरनेशनल रायपुर में आयोजन रायपुर  विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 5 जून 2026 को प्रातः 10 बजे से होटल बेबिलॉन इंटरनेशनल, वीआईपी रोड, रायपुर में पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता का विषय प्रकृति से प्रेरित होकर जलवायु और भविष्य का संरक्षण करें रखा गया है। प्रतियोगिता चार आयु वर्गों में आयोजित होगी, जिसमें प्रथम वर्ग 12 वर्ष तक, द्वितीय वर्ग 13 से 17 वर्ष, तृतीय वर्ग 18 से 21 वर्ष तथा चतुर्थ वर्ग दिव्यांगजनों के लिए निर्धारित किया गया है।           प्रतियोगिता में प्रत्येक वर्ग के लिए पृथक-पृथक आकर्षक नगद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रथम पुरस्कार 5 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 4 हजार रुपये, तृतीय पुरस्कार 3 हजार रुपये तथा दो सांत्वना पुरस्कार एक -एक रुपये के होंगे।         छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव राजु अगसिमनि ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम क्लाइमेट एक्शन निर्धारित की गई है। इसी परिप्रेक्ष्य में आयोजित यह प्रतियोगिता युवाओं एवं आम नागरिकों में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन तथा सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को अपना पहचान पत्र एवं आयु प्रमाण-पत्र की छायाप्रति साथ लानी होगी। प्रतियोगिता स्थल पर ही पंजीयन की व्यवस्था की गई है, जिसके लिए प्रतिभागियों को प्रातः 9.30 बजे तक उपस्थित होना अनिवार्य होगा।        प्रतियोगिता के विजेताओं को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम, संगोष्ठी एवं पुरस्कार वितरण समारोह में सम्मानित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने विद्यार्थियों एवं दिव्यांगजनों से अधिक से अधिक संख्या में प्रतियोगिता में भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आग्रह किया है।

IPL 2026 में 72 छक्के मारने वाले वैभव सूर्यवंशी पर IIM इंदौर की खास स्टडी, सफलता का राज खोजेगा संस्थान

 इंदौर  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) इंदौर क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी (15) को केस स्टडी में शामिल करने जा रहा है। ‘वैभव मॉडल’ पर देश की पहली मल्टी-डिसिप्लिनरी स्टडी होगी। जिसमें खेल-मनोविज्ञान-प्रबंधन के एक्सपर्ट मिलकर छोटी उम्र में बड़ी सफलता का फॉर्मूला खोजेंगे। राजस्थान रॉयल्स के ओपनर वैभव एक सीजन में सर्वाधिक (72) छक्के मारकर क्रिस गेल (59) का 14 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं। उनकी हैरतंगेज बैटिंग की दुनिया कायल है। ऐसे में आईआईएम इंदौर अब उनके ‘सक्सेस फॉर्मूले’ को डिकोड करने पर काम शुरू कर रहा है। IIM डायरेक्टर हिमांशु रॉय ने कहा- यह स्टडी वैभव की उपलब्धियों का विश्लेषण करने के साथ उन सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, पारिवारिक व संस्थागत कारकों को भी गहराई से समझेगी जो कम उम्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं को आकार देते हैं। वैभव की क्रिकेट जर्नी अद्भुत प्रो. राय ने कहा कि IIM का मानना है कि वैभव की क्रिकेट जर्नी अद्भुत है। इसके पीछे व्यक्तिगत क्षमता के अलावा कड़ी मेहनत, परिवार का त्याग, समर्पण, मेंटर का योगदान भी अहम है। उन्होंने कहा कि प्रतिभा उपहार हो सकती है, पर उसे स्थायी उत्कृष्टता में बदलने के लिए सही मूल्य, संतुलित सोच, मजबूत समर्थन तंत्र व दूरदर्शी नेतृत्व जरूरी है। मैनेजमेंट फैकल्टी डॉ. आरती चोपड़ा कहती हैं कि वैभव पर स्टडी भविष्य के प्रबंधकों व नीति-निर्माताओं के लिए अत्यंत मूल्यवान है। 5’7 हाइट और 55 किलो वजन के वैभव अपनी जबर्दस्त बैट स्पीड और टाइमिंग के दम पर गेंद को बाउंड्री पार भेजते हैं। 0.3 सेकंड में डिसीजन बचपन के कोच मनीष ओझा द्वारा तराशे गए वैभव की तकनीक और बैट स्पीड पर अब राजस्थान रॉयल्स के जुबिन भरूचा काम कर रहे हैं। कोच विक्रम राठौर भी इनके बैलेंस के कायल हैं। महज 0.3 सेकंड के डिसीजन टाइम के कारण गेंदबाजों को सेट होने का मौका नहीं मिलता। राहुल द्रविड़ ने जब इन्हें संभलकर खेलने को कहा, तो इनका बेबाक जवाब था- सर, गेंदबाज मुझे देखे। आउट होने के डर से मुक्त इनका शेप प्रेशर में भी नहीं बिगड़ता। रॉय बोले- कॉरपोरेट जगत को टैलेंट का नया मॉडल मिलेगा IIM डायरेक्टर हिमांशु रॉय ने कहा कि स्टडी में ‘डार्क साइड’ पर भी फोकस होगा। कम उम्र में प्रसिद्धि, करोड़ों के ऑफर व सोशल मीडिया का दबाव टैलेंट को विचलित कर देता है। कई बच्चे मानसिक थकान और अपेक्षाओं के बोझ के कारण पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाते। उन्होंने कहा कि कोशिश ऐसे सहयोगी तंत्र का ब्लूप्रिंट बनाने की है, जो प्रतिभा को हालिया उपलब्धियों तक सीमित न रखे। इससे कॉरपोरेट जगत को भी ‘टैलेंट मैनेजमेंट’ का नया मॉडल मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस उम्र में जिस आत्मविश्वास, कौशल व परिपक्वता के साथ वैभव खेल रहे हैं, वह असाधारण प्रतिभा ही कर सकती है। ऐसे में समझना जरूरी है कि ऐसे टैलेंट को लंबे वक्त तक कैसे संभालें और वह औरों को कैसे प्रेरित करे। सूर्यवंशी ने बनाया एक सीजन में 72 छक्कों का रिकॉर्ड वैभव ने सीजन में सबसे ज्यादा 237.30 के स्ट्राइक रेट से भी रन बनाए और 'सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन' का अवार्ड अपने नाम किया। आईपीएल के इतिहास में इतने स्ट्राइक रेट से किसी भी खिलाड़ी ने 700 या उससे ज्यादा रन नहीं बनाए। वहीं, सूर्यवंशी ने इस सीजन में रिकॉर्ड 72 छक्के लगाए। वह एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले खिलाड़ी बने। इससे पहले ये रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम था, जिन्होंने 59 छक्के लगाए थे। इस सीजन में जोरदार प्रदर्शन करने वाले सूर्यवंशी को 'इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन' भी चुना गया है। IPL 2026 में वैभव ने ऑरेंज कैप समेत 5 अवॉर्ड जीते वैभव ने 16 पारियों में 48.50 के औसत और 237.30 के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए। इसमें एक शतक और पांच अर्धशतक शामिल रहे। वे इस सीजन के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी रहे। उन्हें ऑरेंज कैप मिली।

खनिज माफियाओं पर प्रशासन का शिकंजा, अवैध परिवहन में लगे चार वाहन पकड़े गए

रायपुर अवैध रेत और ईंट परिवहन मामले में एक माजदा व 3 ट्रैक्टर जब्त राजनांदगांव जिले में खनिजों के अवैध परिवहन के के मामले में खनिज विभाग ने एक माजदा वाहन और तीन ट्रैक्टर जब्त किया हैं। कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से ईंट और रेत का परिवहन करते पाए गए वाहनों को संबंधित थानों के सुपुर्द किया गया है। प्रकरणों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर जितेन्द्र यादव के निर्देश पर खनिज विभाग की टीम ने जिले के चांदो, बंशीबंजारी, खुज्जी, कुमरदा, साल्हे, छुरिया, बाबूटोला, चिचोला, तुमड़ीबोड़, सुकुलदैहान समेत विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण अभियान चलाया। निरीक्षण के दौरान ग्राम टप्पा में मडियान निवासी घनश्याम वर्मा के स्वामित्व वाले माजदा वाहन क्रमांक सीजी 08 एल 3103 से अवैध रूप से ईंट परिवहन किया जा रहा था। वाहन को जब्त कर थाना तुमड़ीबोड़ के सुपुर्द किया गया। इसी प्रकार ग्राम बाबूटोला क्षेत्र में तीन अलग-अलग ट्रैक्टरों से बिना वैध अनुमति रेत का परिवहन करते पाए जाने पर कार्रवाई की गई। जब्त किए गए ट्रैक्टरों में सोनालिका ट्रैक्टर के मालिक एवं चालक टेकराम पाल, ट्रैक्टर क्रमांक सीजी एआर 6853 के मालिक एवं चालक मनीष कुमार पाल तथा स्वराज ट्रैक्टर के मालिक एवं चालक रितेश सिन्हा शामिल हैं। सभी वाहनों को जब्त कर थाना चिचोला को सौंप दिया गया है। खनिज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए लगातार गश्त और निगरानी की जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

नई राफेल डील में ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर, 50% स्वदेशी पुर्जों के साथ भारत में तैयार होंगे 90 विमान

 नई दिल्ली भारतीय रक्षा क्षेत्र और वायु सेना (IAF) के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है. भारत सरकार ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट्स (Rafale Fighter Jets) खरीदने की मेगा डील की दिशा में सबसे बड़ा और औपचारिक कदम उठा लिया है।  रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस सरकार को लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR – Letter of Request) जारी कर दिया है, जो सरकारी स्तर (G-to-G) पर होने वाले रक्षा समझौतों की आधिकारिक शुरुआत है. लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली यह मेगा डील भारत का अब तक का सबसे बड़ा फाइटर जेट खरीद कार्यक्रम है।  यह सौदा न केवल भारतीय वायु सेना की घटती 'स्कवाड्रन क्षमता' को मजबूत करेगा, बल्कि देश को एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के मामले में एक वैश्विक हब के रूप में स्थापित करेगा. इस सौदे की सबसे खास बात यह है कि यह 'बाय ग्लोबल, मेक इन इंडिया' नीति के तहत आ रहा है, जिसका सीधा असर भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था, रक्षा उत्पादन और रोजगार के अवसरों पर पड़ेगा।  क्यों खास है 114 राफेल की नई डील? यह नई राफेल डील साल 2016 में हुई 36 राफेल विमानों की खरीद से बिल्कुल अलग और कई गुना बड़ी है. पिछली बार भारत ने सभी 36 विमान फ्रांस से तैयार स्थिति (Fly-away condition) में खरीदे थे. लेकिन इस बार भारत सरकार की प्राथमिकता देश को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है. इस नई मेगा डील की सबसे मुख्य विशेषताएं हैं… 22 से 24 जेट्स फ्रांस से तैयार होकर आएंगे: वायुसेना की आपातकालीन जरूरतों को देखते हुए लगभग 22 से 24 राफेल लड़ाकू विमान सीधे फ्रांस में डसॉल्ट एविएशन की मैरिनेक फैक्ट्री से पूरी तरह तैयार स्थिति में उड़कर भारत आएंगे. इससे वायुसेना को तुरंत आधुनिक कॉम्बैट क्षमता मिलेगी।  90 से 94 जेट्स का निर्माण भारत में होगा: इस डील की असली ताकत यह है कि कुल 114 विमानों में से करीब 90 से 94 फाइटर जेट्स का उत्पादन भारत में किया जाएगा. यह इतिहास में पहली बार होगा जब राफेल जैसे विश्वस्तरीय 4.5 जेनरेशन के लड़ाकू विमान का निर्माण फ्रांस की धरती से बाहर किसी अन्य देश में किया जाएगा।  50% स्वदेशी पुर्जों का होगा इस्तेमाल: भारत में बनने वाले इन राफेल विमानों में कम से कम 50 प्रतिशत सामग्री, तकनीक और पुर्जे पूरी तरह से भारतीय यानी 'स्वदेशी' होंगे. इसके साथ ही, इस समझौते के तहत भारत को यह अधिकार और तकनीकी पहुंच मिलेगी कि वह अपनी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों (जैसे अस्त्र और ब्रह्मोस मिसाइल को राफेल जेट में सीधे इंटीग्रेट कर सके) . कौन सी भारतीय कंपनियां बनेंगी डसॉल्ट एविएशन की पार्टनर? फ्रांस की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन अकेले भारत में इतने बड़े पैमाने पर विमानों का निर्माण नहीं कर सकती. इसके लिए उसे भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के साथ हाथ मिलाना होगा।  साझेदारी की रेस में सबसे आगे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (Tata Advanced Systems Limited – TASL) का नाम है. जून 2025 में ही डसॉल्ट एविएशन और टाटा (TASL) ने राफेल के फ्यूजलेज (विमान का मुख्य धड़ या बॉडी) को भारत में बनाने के लिए एक बड़े रणनीतिक समझौते की घोषणा की थी।  इसके अलावा, भारत की सरकारी रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिसके पास लड़ाकू विमान बनाने का दशकों पुराना अनुभव है।  निजी क्षेत्र की अन्य बड़ी कंपनियां जैसे लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा डिफेंस और भारत फोर्ज भी इस विशाल सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकती हैं. ये भारतीय कंपनियां राफेल के विंग्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार कंपोनेंट्स, केबिन और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों के निर्माण में डसॉल्ट के साथ मिलकर काम करेंगी।  कहां होगा इन फाइटर जेट्स का प्रोडक्शन और मेंटेनेंस? 90 से अधिक राफेल विमानों का उत्पादन भारत के किन शहरों में होगा, इसे लेकर औद्योगिक गलियारों में भारी उत्साह है. सबसे बड़ा हब हैदराबाद बनने जा रहा है, जहां टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और डसॉल्ट एविएशन मिलकर राफेल के फ्यूजलेज और मुख्य बॉडी पार्ट्स के निर्माण के लिए एडवांस्ड फैसिलिटी स्थापित कर रहे हैं।  इसके अलावा, विमानों की अंतिम असेंबली लाइन (Final Assembly Line) को लेकर भी कयास जारी हैं, जिसके लिए महाराष्ट्र या कर्नाटक के रक्षा औद्योगिक पार्कों पर विचार किया जा सकता है।  उत्पादन के साथ-साथ, विमानों के रख-रखाव को लेकर भी भारत ने बाजी मार ली है. डसॉल्ट एविएशन ने उत्तर प्रदेश के नोएडा के पास एक अत्याधुनिक 'मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल' (MRO) फैसिलिटी स्थापित की है, जिसका नाम DAMROI (Dassault Aviation Maintenance, Repair and Overhaul India) है।  यह सेंटर पहले से ही चालू हो चुका है. वर्तमान में भारतीय वायु सेना के पास मौजूद मिराज-2000 और 36 राफेल विमानों की सर्विसिंग का काम संभाल रहा है. भविष्य में भारत में बनने वाले 94 राफेल विमानों की सर्विसिंग और अपग्रेडेशन भी इसी एमआरओ हब के जरिए देश के भीतर ही संभव होगी।  रक्षा क्षेत्र में लगेंगी कितनी नौकरियां? यह निवेश भारतीय रोजगार बाजार के लिए एक गेम चेंजर साबित होने वाला है. रक्षा विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक इस मेगा प्रोजेक्ट से भारत में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नौकरियां पैदा होंगी।      हाई-टेक इंजीनियरिंग नौकरियां: विमान के डिजाइन, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और असेंबली के लिए हजारों एयरोस्पेस इंजीनियरों, डेटा साइंटिस्ट्स और तकनीशियनों की सीधी भर्ती होगी।      एमएसएमई (MSME) सेक्टर को बढ़ावा: 50% स्वदेशी पुर्जों की शर्त के कारण भारत की सैकड़ों छोटी और मध्यम (MSME) कंपनियों को कलपुर्जे बनाने के ऑर्डर मिलेंगे. इससे स्थानीय स्तर पर वेल्डिंग, मशीनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में काम करने वाले कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार की बाढ़ आ जाएगी।      कौशल विकास (Skill Development): फ्रांस की तकनीक भारत में ट्रांसफर (Transfer of Technology) होने से भारतीय कार्यबल को वैश्विक स्तर की हाई-टेक ट्रेनिंग मिलेगी, जो भविष्य में भारत के अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) के विकास में काम आएगी।  भारतीय वायु सेना के लिए क्यों जीवनदान है यह सौदा? वर्तमान में भारतीय वायु सेना (IAF) लड़ाकू विमानों की भारी किल्लत से जूझ रही है. दो मोर्चों (चीन और पाकिस्तान) पर एक साथ सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए वायुसेना के पास 42 लड़ाकू विमान स्क्वॉड्रन होने चाहिए. लेकिन पुराने मिग-21 जैसे … Read more

नैनो यूरिया से बदली किसान परशुराम राजवाड़े की खेती, उत्पादन और बचत दोनों में फायदा

नैनो यूरिया के इस्तेमाल से किसान परशुराम राजवाड़े को खेती में मिला फायदा नैनो यूरिया उपयोग में आसान,समय और लागत की हो रही भारी बचत रायपुर कृषि के क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर जिले के किसान अब अपनी खेती को लाभ का सौदा बना रहे हैं। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कतकालो के  रहने वाले प्रगतिशील किसान श्री परशुराम राजवाड़े ने पारंपरिक बोरी वाले खाद की जगह नैनो यूरिया (तरल) का सफल प्रयोग कर क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। पारंपरिक खाद की तुलना में नैनो यूरिया अधिक सुविधाजनक श्री राजवाड़े ने बताया कि वे वर्ष 2024 से निरंतर नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं, जिसके परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहा है। उन्होंने बताया कि पहले 45 किलो की यूरिया की बोरी खरीदने पर उसकी लागत अधिक आती थी और उसे खेत तक लाने-ले जाने (परिवहन) में भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था। अक्सर पीक सीजन में बाजार में बोरी वाले यूरिया की किल्लत हो जाती थी, जिससे खेती के कार्यों में देरी होती थी। इसके विपरीत, नैनो यूरिया की छोटी शीशी को लाना-ले जाना बेहद आसान है। यह कम लागत में मिल जाता है और बाजार में इसकी उपलब्धता भी हमेशा बनी रहती है, जिससे समय पर फसलों को पोषण मिल पाता है। धान और सब्जियों की खेती में शानदार परिणाम अपने अनुभवों को साझा करते हुए श्री राजवाड़े ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले नैनो यूरिया का प्रयोग अपनी धान की फसल में किया था। वहां मिले शानदार परिणामों से उत्साहित होकर उन्होंने इसे साग-सब्जियों की खेती में भी अपना लिया। वर्तमान में वे अपनी लगभग ढाई से तीन एकड़ कृषि भूमि पर नैनो यूरिया का सफलतापूर्वक छिड़काव कर रहे हैं। कृषकों से की अपील किसान श्री परशुराम राजवाड़े ने बताया कि तरल नैनो यूरिया न केवल उपयोग में आसान है, बल्कि यह खेती की लागत को कम कर फसल के बेहतर उत्पादन में भी सहायक है। उन्होंने जिले के किसानों से अपील की कि वे भी उन्नत कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों का अधिकाधिक उपयोग करें, ताकि खेती में लागत कम हो और मुनाफे में वृद्धि हो सके।

दिल्ली में 5 जून से दौड़ेंगी Green SM की ई-कैब्स, Uber-Ola की बढ़ेगी चुनौती

नई दिल्ली Green SM Electric Taxi: भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और अब इस क्षेत्र में एक और बड़ा विदेशी खिलाड़ी एंट्री करने जा रहा है. वियतनाम की दिग्गज कंपनी विनग्रुप (VinGroup) अपनी इलेक्ट्रिक टैक्सी सर्विस Green SM को भारत में आधिकारिक रूप से लॉन्च करने की तैयारी में है. कंपनी 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर दिल्ली के भारत मंडपम में एक स्पेशल इवेंट के दौरान इस सर्विस की औपचारिक घोषणा करेगी. माना जा रहा है कि Green SM की एंट्री से ओला, उबर और रैपिडो जैसे कैब सर्विस एग्रीगेटर्स को कड़ी चुनौती मिलेगी।  पिछले कुछ हफ्तों से दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर चमकीले हरे रंग की Green SM की गाड़ियां कई बार देखी जा चुकी हैं. इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने यह भी दावा किया है कि वे Green SM ऐप के जरिए अकाउंट बनाकर उन्होंने राइड भी बुक की है. इससे साफ है कि कंपनी लॉन्च से पहले अपने नेटवर्क और सर्विसेज की टेस्टिंग कर रही है।  VinFast की इलेक्ट्रिक MPV  ग्रीन स्मार्ट मोबिलिटी, जो पहले से वियतनाम और कुछ अन्य देशों में अपनी सर्विसेज दे रही है, भारत में VinFast Limo Green MPV का इस्तेमाल करेगी. यह इलेक्ट्रिक कार हाल ही में भारतीय बाजार में लॉन्च की गई है. इसी कार का कमर्शियल वेरिएंट इस कैब सर्विस में इस्तेमाल किया जाएगा. इसमें वही पावरट्रेन और 60.13 kWh की बैटरी दी गई है, जो MPV7 में इस्तेमाल होती है. कंपनी का दावा है कि यह एमपीवी पैसेंजर्स को कम्फर्टेबल राइड देगी।  Uber-Ola से अलग होगा बिजनेस मॉडल Green SM का बिजनेस मॉडल मौजूदा टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों से काफी अलग होगा. जहां Uber और Ola जैसे प्लेटफॉर्म ड्राइवरों और निजी वाहन मालिकों को जोड़ने का काम करते हैं, वहीं Green SM अपनी सभी गाड़ियों का मालिकाना हक खुद अपने पास रखेगी. कंपनी ड्राइवरों को सैलरी पर नियुक्त करेगी और चार्जिंग, सर्विसिंग, मेंटनेंस जैसी सभी जिम्मेदारियां खुद संभालेगी. इससे कंपनी का व्हीकल के सर्विसेज, क्वालिटी और ऑपरेशन पर पूरा कंट्रोल रहेगा।  10,000 इलेक्ट्रिक कारें होंगी शामिल दिल्ली-एनसीआर में लॉन्च के बाद कंपनी सबसे पहले उत्तर भारत के अन्य शहरों पर फोकस करेगी. इसके बाद देश के बाकी बड़े शहरों में इस सर्विस को शुरू किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक, कंपनी फेज़्ड मैनर में अपना नेटवर्क बढ़ाएगी. पहले चरण में करीब 10,000 इलेक्ट्रिक कारों को फ्लीट में शामिल किया जाएगा. इसके अलावा आने वाले समय में लगभग 1 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को भी इस सर्विस में शामिल किए जाने की चर्चा है।  VinGroup केवल टैक्सी सेवा तक सीमित नहीं रहना चाहती. कंपनी भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर और इलेक्ट्रिक बस बाजार में भी उतरने की योजना बना रही है. हाल ही में कंपनी ने तमिलनाडु में अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को बढ़ाने की घोषणा की है. इसके अलावा तेलंगाना और महाराष्ट्र में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन मोबिलिटी, टूरिज़्म और रियल एस्टेट इंफ्रा से जुड़े बड़े निवेश की भी योजना बनाई गई है। 

विदेश में बिकेगी चंडीगढ़ की विरासत? ऐतिहासिक वस्तुओं की नीलामी रोकने की उठी मांग

 चंडीगढ़ चंडीगढ़ की ऐतिहासिक विरासत से जुड़े फर्नीचर की विदेशों में हो रही नीलामी का मामला एक बार फिर गरमा गया है। हेरिटेज आइटम्स प्रोटेक्शन कमेटी (HIPC) के सदस्य एवं एडवोकेट अजय जग्गा ने केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर अमेरिका में 4 जून को प्रस्तावित नीलामी को रुकवाने के लिए तत्काल राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की है। अजय जग्गा ने अपने पत्र में कहा कि अमेरिका की प्रसिद्ध नीलामी संस्था राइट ऑक्शन हाउस (Wright Auction House) द्वारा चंडीगढ़ कैपिटल प्रोजेक्ट के दौरान प्रसिद्ध वास्तुकार पियरे जेनरे द्वारा डिजाइन किए गए फर्नीचर की नीलामी की जा रही है। इनमें पंजाब यूनिवर्सिटी, सेंट्रल लाइब्रेरी, एमएलए फ्लैट्स और अन्य सरकारी संस्थानों से जुड़े फर्नीचर शामिल हैं। नीलामी सूची में डाइनिंग सेट, डाइनिंग चेयर, लाउंज चेयर, लो स्टूल और क्यूब स्टूल जैसी वस्तुएं शामिल हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 68.80 लाख रुपये से 95.46 लाख रुपये के बीच आंकी गई है। सरकारी संस्थानों से जुड़े हैं फर्नीचर जग्गा ने कहा कि ये फर्नीचर केवल पुरानी वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि चंडीगढ़ की स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हें देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की परिकल्पना के तहत विकसित किए गए चंडीगढ़ कैपिटल प्रोजेक्ट के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया था। उन्होंने चिंता जताई कि विदेशी नीलामी घरों में बार-बार चंडीगढ़ की विरासत से जुड़े फर्नीचर का सामने आना इस बात का संकेत है कि सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। दूतावासों को सतर्क करने की मांग अजय जग्गा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि दुनिया भर में स्थित भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों को ऐसे मामलों में सतर्क किया जाए। साथ ही विदेश मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के बीच समन्वित तंत्र विकसित कर विदेशी नीलामियों की निगरानी की जाए और भारतीय विरासत से जुड़ी वस्तुओं की वापसी के प्रयास किए जाएं। पत्र में कहा गया है कि विदेशों में लगातार हो रही ऐसी नीलामियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भी, विरासत भी’ के विजन के विपरीत हैं। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो चंडीगढ़ और भारत की अमूल्य विरासत दुनिया भर के निजी संग्रहों में बिखर जाएगी। जग्गा ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 49 और नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय महत्व की ऐतिहासिक और कलात्मक वस्तुओं की रक्षा करना राज्य और नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने केंद्र सरकार से अमेरिका में होने वाली नीलामी पर तत्काल आपत्ति दर्ज कर चंडीगढ़ की विरासत को बचाने की अपील की है।