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जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश में एक निशान, एक विधान और एक कानून लागू हो, इस राष्ट्रीय भावना में कुछ भी गलत नहीं है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को देश के 3 राज्यों ने पहले ही लागू कर दिया है। हमारी सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। शीघ्र ही मध्यप्रदेश भी देश का यूसीसी लागू करने वाला राज्य बन जाएगा। इसके लिए हमने उच्चतम न्यायालय की रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति मती रंजना देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीति गठित कर दी है। यह समिति जिला स्तर पर सभी वर्गों से उनकी राय ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जनजातीय समुदाय को यूसीसी से पृथक रखा जाएगा। उन्हें अपने पारम्परिक रीति-रिवाज मानने की स्वतंत्रता होगी। गुजरात में भी इसी प्रकार का प्रावधान लागू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया@2047 कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति योग्य है, तो सरकार जाति, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर कार्य करती है। आज जनजातीय वर्ग से आने वाली मती द्रोपदी मुर्मु देश के राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए खुले विचार और खुले हृदय के साथ काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में अव्वल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की चुनौती के दौर में प्रधानमंत्री डॉ. नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर हमारी सरकार ने पर्यावरण और ईंधन को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) खरीदा है। अब वे ईवी से ही यात्रा करेंगे। यह पर्यावरण अनुकूल वाहन (ईवी) ईंधन के संरक्षण के साथ-साथ वायु प्रदूषण को भी रोकने में कारगर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। ग्रामीण आबादी को दूध उत्पादन, पशुपालन और आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए प्रयास किए गए हैं। गांव-गांव तक बिजली, पानी और सड़कों का विकास हुआ है। पिछले साल सरकार ने औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम किया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। प्रदेश के इंडस्ट्रियल पार्कों में यूनिट्स खुल गईं और लोगों को रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस -2025) में 30 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए थे। इसमें से अब तक करीब 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर नजर आ रहा है। यह राज्य सरकार का बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विकास में शिक्षा का विशेष महत्व है। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर 2002-03 तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या केवल 5 थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 30 हो गई है। इनमें से 7 नए मेडिकल कॉलेज तो हमने पिछले 2 साल के दौरान ही प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय खरगोन में टंट्या मामा, गुना में तात्या टोपे और सागर में रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर शुरू किए गए हैं। सभी 55 जिलों में नए पीएम एक्सीलेंस कॉलेज भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब कृषि संकाय की भी पढ़ाई कराई जा रही है। प्रदेश में नए-नए सांदीपनि विद्यालय तेजी से खोले जा रहे हैं। प्रदेश के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ग्लोबल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव (जीआईएस) पहले केवल इंदौर तक सीमित थी। हमारी सरकार ने इसे पहली बार राजधानी (भोपाल) में आयोजित किया। इससे पहले राज्य में संभाग और जिला स्तर पर रीवा, ग्वालियर, नर्मदापुरम, कटनी जैसे स्थानों पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) आयोजित कर निवेशकों को आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर अंचल की अलग-अलग विशेषता है। राज्य सरकार ने उद्योग केंद्रित 18 नीतियां लागू कीं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में भारी उद्योग, लघु उद्योग और एमएसएमई में देशभर से निवेश आया। कई कारखानों में उत्पादन शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल पर प्रदेश में आई औद्योगिक क्रांति से अब तक 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने पर सरकार प्रति श्रमिक 5000 रुपए महीना आर्थिक सहायता 10 वर्ष तक देगी। अन्य श्रेणी के उद्योगों को आगे बढ़ने में भी सरकार पूरी मदद दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी धर्म का अपमान करना हमारी संस्कृति नहीं है लेकिन अपने धर्म पर गर्व करने में क्या बुराई है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में अपना विशिष्ट स्थान बना रहा है। अब हमारी सरकारें माननीय न्यायालयों के निर्णयों को पूरे सदभाव और शांतिपूर्ण तरीके से लागू करा रही हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। प्रधानमंत्री  मोदी ने विरासत से विकास का घोष वाक्य दिया है। हमारा इतिहास बहुत समृद्ध है। राजा भोज की कर्मस्थली धार में स्थापत्य कला के अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं। यहां भोजशाला परिसर में ज्ञान की देवी सरस्वती (मां वाग्देवी) की प्रतिमा को वापस लाकर स्थापित किया जाएगा। हम न्यायालय के निर्णय को लागू कराते हुए यहां विकास कार्यों को भी गति देंगे। उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक पर्यटन से आर्थिक विकास को गति मिलती है और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। भोजशाला के विकास से धार में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार बहनों के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रदेश की सभी पात्र लाड़ली बहनों को प्रोत्साहन राशि की अब तक 36 किश्तें दी जा चुकी हैं। इस योजना की शुरुआत से अब तक करीब 55 हजार करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता लाड़ली बहनों को हम दे चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ विकसित मध्यप्रदेश @2047 के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है।  

गुजरात में समान नागरिक संहिता लागू, लिव-इन में रह रहे लोग रहें सावधान, शादी में धोखाधड़ी पर 7 साल की सजा

अहमदाबाद  गुजरात विधानसभा ने  'गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक 2026' पारित कर दिया। इसमें शादी-विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के बारे में एक समान कानूनी ढांचा प्रस्तावित किया गया है। इसी के साथ गुजरात यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बन गया है। गुजरात विधानसभा की 182 सीटों में से 161 सीटों पर भारी बहुमत होने के कारण बीजेपी के कई सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कानून पर अपने विचार रखने के बाद यह विधेयक बहुमत से पारित कर दिया गया। उत्तराखंड के बाद गुजरात दूसरा ऐसा भारतीय राज्य बन गया है, जिसने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए विधेयक पारित किया है। हालांकि, इस विधेयक के कोई भी प्रावधान अनुसूचित जनजातियों के लोगों पर लागू नहीं होंगे। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून संविधान के मूल सिद्धांतों और न्याय के विचार पर आधारित है. उनके अनुसार इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों और दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों के कानूनों का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है। विधानसभा में तकरीबन 8 घंटे से अधिक समय तक चली बहस के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया गया. गुजरात में सत्तारूढ़ भाजपा ने इसे सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसका विरोध करते हुए इसे विधानसभा की सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग की. विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने इसे जल्दबाजी में पेश किया है और यह कुछ समुदायों के अधिकारों पर असर डाल सकता है. ‘गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड-2026’ नामक यह कानून पूरे राज्य में लागू होगा और गुजरात के उन निवासियों पर भी लागू होगा जो राज्य के बाहर रहते हैं. हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और संविधान द्वारा संरक्षित कुछ पारंपरिक समूहों (Traditional Groups) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। फर्जी तरीके से विवाह करने पर जेल विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में विवाह का अनिवार्य पंजीकरण, लिव-इन रिलेशंस का रजिस्‍ट्रेशन, तलाक के लिए समान नियम और बेटियों व बेटों को उत्तराधिकार में समान अधिकार शामिल हैं. कानून के अनुसार, विवाह का रजिस्‍ट्रेशन 60 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा. ऐसा न करने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, जबरन, धोखाधड़ी या दबाव में कराए गए विवाह के मामलों में 7 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है. बहुविवाह या एक से अधिक विवाह करने पर भी समान सजा का प्रावधान किया गया है. तलाक के मामलों में भी नया प्रावधान किया गया है. इसके अनुसार अदालत की मंजूरी के बाद ही तलाक को वैध माना जाएगा और बिना ज्‍यूडिशियल प्रोसेस के किया गया तलाक अमान्य होगा. ऐसे मामलों में तीन साल तक की सजा का प्रावधान है. इसके साथ ही महिलाओं को बिना शर्त दोबारा विवाह करने का अधिकार भी सुनिश्चित किया गया है। गुजरात UCC: 10 प्‍वाइंट में जानें सबकुछ     गुजरात विधानसभा में पारित: गुजरात विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल को बहुमत से पारित कर दिया, जिससे राज्य इसे लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया (पहला उत्तराखंड).     समान कानून का उद्देश्य: बिल का मकसद सभी धर्मों और समुदायों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों पर एक समान कानूनी ढांचा लागू करना है।     सीएम भूपेंद्र पटेल का बयान: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इसे समानता और न्याय पर आधारित कानून बताया, जो सभी नागरिकों पर बिना भेदभाव लागू होगा।     शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: विवाह के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा, नहीं करने पर 10,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।     जबरन या धोखाधड़ी से शादी पर सजा: जबरन, धोखे या दबाव में की गई शादी पर अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान रखा गया है. साथ ही बहुविवाह/पॉलिगैमी पर भी प्रतिबंध लगाया है।     तलाक के नियम सख्त: तलाक केवल अदालत की मंजूरी और रजिस्ट्रेशन के बाद ही मान्य होगा, अन्यथा 3 साल तक की सजा हो सकती है. महिलाओं को दोबारा शादी का अधिकार सुनिश्चित किया गया है।     लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन: लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य होगा; उल्लंघन पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 रुपये तक जुर्माना लग सकता है।     महिलाओं और बच्चों के अधिकार: बिल में महिलाओं के भरण-पोषण, बच्चों की पहचान, विरासत और सुरक्षा को कानूनी रूप से मजबूत करने का प्रावधान है।     राजनीतिक प्रतिक्रिया: बीजेपी ने इसे ऐतिहासिक और समानता की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि कांग्रेस और AAP ने इसका विरोध करते हुए इसे चयन समिति को भेजने की मांग की और इसे संविधान विरोधी बताया।     संवैधानिक आधार: बिल को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत लाया गया है, जो राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है। लिव-इन में रहने वालों हो जाएं सावधान विधेयक में लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को भी अनिवार्य बनाया गया है. यदि कोई जोड़ा इसका पंजीकरण नहीं कराता है तो तीन महीने तक की कैद या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. यदि लिव-इन में रहने वाले व्यक्तियों की उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच है, तो उनके माता-पिता को इसकी सूचना दी जाएगी. नाबालिगों से जुड़े मामलों में पॉक्सो कानून लागू होगा, जबकि विवाहित व्यक्ति द्वारा लिव-इन संबंध बनाने पर कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है. मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा करना है. उनके अनुसार विवाह और संबंधों का पंजीकरण कानूनी मान्यता सुनिश्चित करेगा, महिलाओं को परित्याग से बचाएगा और बच्चों को पहचान, भरण-पोषण और उत्तराधिकार से जुड़े अधिकारों की बेहतर सुरक्षा देगा. विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री ने X पर इसे गुजरात और देश के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया. उन्होंने कहा कि इस कानून से सभी धर्मों और समुदायों के लोगों के लिए समान कानूनी ढांचा लागू होगा और महिलाओं के अधिकारों को और मजबूती मिलेगी. बता दें … Read more