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CGPSC घोटाले की जांच तेज, ED ने सोनवानी, ध्रुव और वासनिक के घरों पर मारी रेड

रायपुर/दुर्ग.

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के भर्ती घोटाले में सीबीआई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो चुकी है. ईडी की टीम ने आज एक के बाद एक पांच जगहों पर दबिश दी है. इनमें आयोग के मामले में पूर्व चेयरमैन टामन सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, पूर्व परीक्षा नियंत्रण आरती वासनिक, राज्यपाल के पूर्व सचिव आईएएस अमृत खलको के अलावा एक और आरोपी ललित गणवीर के भाई भूपेंद्र गनवीर का निवास शामिल है.

जानकारी के अनुसार, ईडी की पांच टीम भर्ती घोटाले में आरोपी पूर्व चेयरमैन टामन सोनवारी के ग्राम सरबदा में दबिश दी है. वहीं दो टीमों ने पूर्व सचिव जेके ध्रुव के भिलाई सेक्टर-10 स्थित निवास पर और अन्य टीम ने पूर्व परीक्षा नियंत्रण आरती वासनिक के रायपुर स्थित निवास पर दबिश दी है. इसके साथ एक अन्य आरोपी ललित गणवीर के भाई कृषि विस्तार अधिकारी भूपेंद्र गणवीर के राजनांदगांव के शिक्षक कॉलोनी स्थित निवास और राज्यपाल के पूर्व सचिव आईएएस अमृत खलको के तालपुरी, भिलाई स्थित आवास पर ईडी की टीम ने दबिश दी है. टीम परिवार के सदस्यों से पूछताछ करने के साथ दस्तावेजों को खंगालने में जुटी है.

बता दें कि अमृत खलको की की बेटी नेहा और बेटा निखिल का डिप्टी कलेक्टर के रूप में चयन हुआ था. अमृत खलको बालोद जिले के कलेक्टर, बस्तर संभाग के कमिश्नर, आयुक्त समाज कल्याण, एमडी बीज निगम जैसे पदों पर पदस्थ रहे हैं. इसके अलावा राज्यपाल के सचिव थे, उनके रिटायरमेंट के बाद फिर से उन्हें संविदा नियुक्ति दी गई थी. सीजीपीएसपी भर्ती घोटाले में नाम सामने आने के बाद पद से उन्हें हटा दिया गया था.

वर्ष 2020 से 2022 के बीच का है मामला
यह घोटाला 2020 से 2022 के बीच सामने आया था, जब सीजीपीएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और साक्षात्कार प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं. अधिकारियों ने कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों और परिचितों को फायदा पहुंचाने के लिए योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी की. परिणामस्वरूप, डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी जैसे प्रतिष्ठित पदों पर चयनित होने वाले कई नाम सवालों के घेरे में आ गए. इस प्रक्रिया ने न केवल भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, बल्कि राज्य की प्रशासनिक पारदर्शिता को भी चुनौती दी.

इस दिशा में जुलाई 2023 में कार्रवाई शुरू हुईं, जब छत्तीसगढ़ सरकार ने 2020-22 की परीक्षाओं में पक्षपात के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंप दी. सीबीआई की जांच के अनुसार, पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने नियमों में हेरफेर कर अपने परिजनों को लाभ पहुंचाया. उदाहरण के तौर पर, भतीजे के चयन को सुनिश्चित करने हेतु ‘रिश्तेदार’ शब्द को ‘परिवार’ में बदल दिया गया. इसी तरह, प्रश्न पत्रों का लीकेज कर परीक्षा पास करवाने के आरोप भी लगे हैं.

आयोग के तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, आरती वासनिक और ललित गणवीर जैसे अधिकारियों पर भी पद के दुरुपयोग का इल्जाम है. सभी आरोपी फिलहाल रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं. गिरफ्तारियों की फेहरिस्त लंबी है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने टामन सिंह सोनवानी के अलावा बजरंग पावर इस्पात कंपनी के निदेशक श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल, बहू भूमिका कटियार, उप नियंत्रक ललित गणवीर, निशा कोसले, दीपा आदिल, सुमित ध्रुव समेत कई अन्य को हिरासत में लिया था, इनमें से कई लोग जमानत पर रिहा भी हो चुके हैं.

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