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कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा पर सख्ती, फीस से लेकर फायर सेफ्टी तक बनेंगे नियम

नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली के कोचिंग सेंटर्स को चलाने के लिए सरकार नए नियम-कानून बनाने जा रही है। नई नीति के ड्राफ्ट को तैयार करने के लिए सरकार ने नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है। राजधानी में चल रहे कोचिंग संस्थानों के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने शुरू भी कर दी है। दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार कोचिंग संस्थानों के मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और स्टूडेंट्स सुरक्षित हों, इसके लिए गाइडलाइंस तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि देशभर से बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स दिल्ली में कोचिंग के लिए आते है, इसलिए दिल्ली इस क्षेत्र में व्यापक नियम-कानून लागू करने वाला अग्रणी राज्य बनने जा रहा है।
गुरुवार को शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने इसके लिए एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई

गुरुवार को शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने इसके लिए एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई। इस बैठक में नगर निगम, दिल्ली फायर सर्विस, हायर एजुकेशन डायरेक्टोरेट, दिल्ली पुलिस, श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग और शहरी विकास विभाग सहित विभिन्न एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में फैसला लिया गया कि एक मल्टी-डिसिप्लिनरी कमिटी कोचिंग संस्थानों के लिए दिशानिर्देश तैयार करेगी। इनमें फीस स्ट्रक्चर, स्टूडेंट सेफ्टी और वेलफेयर, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परामर्श व्यवस्था, बिल्डिंग और बुनियादी ढांचे के सुरक्षा मानक, फायर सेफ्टी और इमरजेंसी के लिए तैयारियां, शिक्षकों और कर्मचारियों के वेलफेयर और काम की परिस्थितियों को सिस्टमैटिक करना शामिल है

इसके अलावा कोचिंग कर्मचारियों और स्टूडेंट्स के लिए ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम, नियमित निरीक्षण और अनुपालन की निगरानी की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित ढांचा कोचिंग संस्थानों में सुरक्षित, पारदर्शी, जवाबदेह और स्टूडेंट फ्रेंडली एनवायरमेंट सुनिश्चित करेंगे।

क्यों जरूरी है नियम ?
2024 में ओल्ड राजेद्र नगर में एक कोचिंग सेटर के बेसमेंट में पानी भरने से हुई तीन स्टूडेंट्स की मौत के बाद तमाम कोचिंग सेंटर्स में सुरक्षा के लिए आसपास ड्रेनेज सिस्टम, तारों के जंजाल, कोचिंग सेंटर्स की मनमानी की ओर भी ध्यान दिलाया गया था। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने जस्टिस (सेवानिवृत्त) आर.सी. गौबा की अध्यक्षता में हाई लेवल कमिटी कमियों की पहचान की और कड़े रेगुलेशंस और निगरानी का सुझाव दिया था। दिल्ली मे करीब 600 कोचिंग सेंटर्स है, जो रजिस्टर्ड है और कर्मशल तौर पर चलते है। बाकी कम संख्या वाले कोचिंग सेंटर्स की संख्या काफी ज्यादा है

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