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राज्य में 100 नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर लाने का लक्ष्य, निवेश को मिलेगा बढ़ावा

 चंडीगढ़
 हरियाणा सरकार ने राज्य को वैश्विक सेवा एवं अनुसंधान केंद्रों का प्रमुख स्थल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) नीति-2026 तैयार की है। इस नीति का उद्देश्य गुरुग्राम को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की “ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर कैपिटल” के रूप में स्थापित करना है।

नई नीति के तहत अगले कुछ वर्षों में 100 से अधिक नए वैश्विक क्षमता केंद्रों को हरियाणा में आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा दूसरे देशों में स्थापित की गई अपनी ही पूर्ण स्वामित्व वाली रणनीतिक इकाइयां या केंद्र हैं। ये मुख्य रूप से तकनीकी सहायता, अनुसंधान एवं विकास, डेटा एनालिटिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य वैश्विक परिचालन कार्यों का प्रबंधन करते हैं।

वैश्विक कंपनियां अब केवल बैक-आफिस संचालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, वित्तीय सेवाओं और उत्पाद विकास जैसे उच्च मूल्य वाले कार्य भी भारत स्थित जीसीसी के माध्यम से संचालित कर रही हैं। ऐसे में हरियाणा की यह नीति राज्य को वैश्विक निवेश मानचित्र पर और मजबूत स्थिति दिला सकती है।

नई नीति मौजूदा ताकत को और विस्तार देने का प्रयास
भारत में वर्तमान में करीब 1,700 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिनमें लगभग 19 लाख पेशेवर कार्यरत हैं। हरियाणा विशेष रूप से गुरुग्राम, इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बन चुका है और राज्य में पहले से 270 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) काम कर रहे हैं। नई नीति इस मौजूदा ताकत को और विस्तार देने का प्रयास है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में हाल ही में इस नीति को मंजूरी प्रदान की गई है। उद्योग विभाग के आयुक्त एवं सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल की देखरेख में तैयार हुई इस नीति के तहत गुरुग्राम में समर्पित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर मिशन स्थापित किया जाएगा।

इसके अंतर्गत निवेशकों को सभी अनुमतियों और सेवाओं के लिए सिंगल विंडो डेस्क उपलब्ध होगी। साथ ही इन्वेस्टर मैचमेकिंग प्लेटफार्म और एडवाइजरी काउंसिल का गठन किया जाएगा, जिससे उद्योग, सरकार और विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

निवेश प्रक्रिया को सरल बनाना मुख्य उद्येश्य
हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़ाव, उत्कृष्ट सड़क एवं हवाई संपर्क, कारपोरेट इकोसिस्टम, उच्च गुणवत्ता वाली कार्यालय सुविधाएं और कुशल मानव संसाधन हरियाणा को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) निवेश के लिए स्वाभाविक विकल्प बनाने के लिए पर्याप्त हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को सरल बनाना और कंपनियों को त्वरित निर्णय एवं सहायता प्रदान करना है।

हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) नीति-2026 की विशेषता यह है कि इसमें केवल गुरुग्राम ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी जीसीसी निवेश को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन प्रविधान किए गए हैं।

सरकार का लक्ष्य आर्थिक गतिविधियों को कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित रखने की बजाय पूरे राज्य में फैलाना है। इससे फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत, करनाल, हिसार और अन्य उभरते शहरी केंद्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।

पांच से नौ वर्ष तक अधिकत 15 करोड़ की वित्तीय सहायता
नई नीति के तहत कंपनियों को पांच से नौ वर्षों तक परिचालन सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता अधिकतम 15 करोड़ रुपये प्रति वर्ष तक हो सकती है। सरकार का मानना है कि शुरुआती वर्षों में मिलने वाला यह सहयोग कंपनियों को हरियाणा में दीर्घकालिक निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगा।

इसके अतिरिक्त डीएसआइआर/सीएसआइआर मान्यता प्राप्त अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) केंद्रों को भी पूंजीगत और परिचालन सहायता देने का प्रविधान रखा गया है। इससे राज्य में नवाचार, शोध और तकनीकी विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

जीसीसी क्षेत्र में होने वाला निवेश केवल कार्यालय खोलने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे उच्च वेतन वाली नौकरियां, स्टार्टअप सहयोग, तकनीकी प्रशिक्षण और स्थानीय सेवा क्षेत्र का विस्तार भी होता है। नई नीति के जरिए आइटी, इंजीनियरिंग, वित्त, डेटा साइंस, एआइ और अनुसंधान क्षेत्रों में युवाओं के लिए बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं।

हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) नीति-2026 की प्रमुख बातें
    – गुरुग्राम को वैश्विक क्षमता केंद्रों की राजधानी बनाने का लक्ष्य
    – हरियाणा में 100 से अधिक नए जीसीसी आकर्षित करने की योजना
    – राज्य में पहले से 270 से अधिक जीसीसी संचालित
    – सिंगल विंडो डेस्क, निवेशक मंच और सलाहकार परिषद का गठन
    – पांच से नौ वर्ष तक परिचालन सहायता में अधिकतम 15 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तक सहायता
    – डीएसआइआर/सीएसआइआर मान्यता प्राप्त आरएंडडी केंद्रों को विशेष प्रोत्साहन
    – उच्च कौशल रोजगार और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
    – गुरुग्राम के साथ अन्य जिलों में भी निवेश विस्तार पर जोर।

 

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