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अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में गड़बड़ी के आरोप, SIT जांच में कई खामियां उजागर

अयोध्या
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा की चोरी के लिए बनाई गई एसआईटी ने छह दिनों तक लगातार जांच के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। 15 जून को अयोध्या आई एसआईटी शनिवार की शाम लखनऊ लौट गई। सोमवार की सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी जाएगी। बताया जा रहा है कि छह दिनों की जांच और करीब डेढ़ सौ लोगों से पूछताछ के बाद एसआईटी को यहां कदम कदम पर गड़बड़ियां और खामियां मिली हैं। हालत यह रही कि व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव ने एसआईटी के सामने ही एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ा है।

एसआईटी को सीसीटीवी फुटेज तक डिलीट मिले हैं। सोना-चांदी के ब्योरे में तो बड़ी गड़बड़ी मिली है। बताया जा रहा है कि इसका ब्योरा ही नहीं रखा जाता था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट से पहले ही निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी कई संगीन आरोप यहां की व्यवस्था पर लगा दिए हैं। उन्होंने तो चढ़ावे में हुई चोरी को डाका तक करार दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि सीएम योगी को रिपोर्ट मिलते ही बड़ी कार्रवाई हो सकती है।ट्रस्ट में बड़े स्तर पर बदलाव या पूरी व्यवस्था ही बदलने की संभावना जताई जा रही है।

अखिलेश यादव के आरोपों के बाद गरमाया मामला
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले राम मंदिर के चढ़ावा में चोरी का आरोप लगाकर सनसनी फैलाई थी। सात जून को अखिलेश ने एक्स पर लिखा कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पाई गई है। उन्होंने कोर्ट से मामले के स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों को नकार तो दिया लेकिन कुछ भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इस पर अखिलेश के हमले और तेज हो गए। अखिलेश के बाद आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और कांग्रेस ने भी इसे लेकर हमले तेज कर दिए।

पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह के आरोपों से बना दबाव
अखिलेश यादव के आरोपों के बीच राम मंदिर में चढ़ावा की गिनती करने वाले पूर्व लेखा प्रभारी और विश्व हिंदू परिषद के नेता महिपाल सिंह ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए सीधे चंपत राय और गोपाल राव को निशाने पर ले लिया। महिपाल सिंह ने 2021 से ही चढ़ावा में चोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने खुद पांच लाख की चोरी पकड़ी थी। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह से नोटों की गड्डियों की गलत गिनती करके चोरी हो रही थी। महिपाल सिंह ने दावा किया कि उन्होंने इस चोरी के बारे में गोपाल राव और चंपत राय को बताया। इसके बाद महिपाल को ही वहां से हटा दिया गया। सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट करा दिए गए।

अचानक अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्रा
अखिलेश यादव और महिपाल सिंह के आरोपों ने श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के साथ ही भाजपा पर भी दबाव बढ़ा दिया। चढ़ावा में गड़बड़ी को लेकर कई खबरें मीडिया में आने लगीं। महिपाल के वीडियो वायरल होने लगे तो चौतरफा दबाव बढ़ा। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा अचानक अयोध्या पहुंचे। उन्होंने मामले को देखा, समझा। कहा गया कि दिल्ली से विशेष निर्देश पर नृपेंद्र मिश्रा यहां आए थे। उन्होंने इशारों में गड़बड़ी की बात भी मानी। बाद में खुलकर बोला तो खबली मच गई।

विनय कटियार और संतों के हमले से बैकफुट पर आया ट्रस्ट
इसी बीच राम मंदिर आंदोलन के हीरो रहे यहीं के पूर्व सांसद विनय कटियार और कई संतों ने भी ट्रस्ट पर हमला बोल दिया। जांच की मांग कर दी। इससे बैकफुट पर आए ट्रस्ट ने सेना के पूर्व अधिकारी को मामले की जांच सौंप दी। विनय कटियार का सीधा हमला चंपत राय पर भी था। ऐसे में ट्रस्ट की भूमिका पर ही प्रश्नचिह्न लगने लगा। कई और संत भी मैदान में खुलकर सामने आ गए। संतों ने भी ट्रस्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राम मंदिर आंदोलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने वाले संतोष दुबे ने तो ऐसे आरोप लगाए जिसका जवाब किसी के पास नहीं था।

एसआईटी जांच का ऐलान
अयोध्या के संतों और राम भक्तों के साथ ही पूर्व सांसद विनय कटियार के भी इस मामले पर आक्रामक होते ही मामला और गंभीर हो गया। ट्रस्ट के अनुरोध पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यी एसआईटी का गठन कर दिया। लखनऊ के मंडलायुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत की अगुवाई में आईजी लखनऊ रेंज किरन एस. और विशेष सचिव वित्त नील रतन को एसआईटी का सदस्य बनाते हुए मामले की जांच की जिम्मेदारी दी गई। एसआईटी को सात दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों में फाइनल रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया। 15 जून को एसआईटी की टीम अयोध्या पहुंची और जांच शुरू कर दी।

सबसे पहले चंपत राय से जानकारी
श्रीराम मंदिर पहुंचते ही एसआईटी की टीम ने सबसे पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से पूरे मामले की जानकारी ली। गणना कक्ष में ही पूरी व्यवस्थाओं को परखा। वहां मौजूद कर्मचारियों की कार्य प्रणाली को देखा। कई अभिलेखों की जांच कर अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद एक-एक कर कर्मचारियों से पूछताछ के लिए लिस्ट बनी और अगले दिन से सभी तलब हुए। चंपत राय के सबसे करीबी टिल्लू यादव से लगातार दो दिनों तक पूछताछ हुई और उससे संपत्ति का ब्यूरो भी मांगा गया।

कर्मचारियों से पूछताछ के बाद जांच का दायरा बढ़ा
जैसे-जैसे एसआईटी ने जांच को आगे बढ़ाया गड़बड़ियां उतनी ही ज्यादा मिलने लगीं। ऐसे में जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया। जांच की जद में सामानों की आपूर्ति और ट्रस्ट की धनराशि से अलग-अलग स्थानों पर कराए गए निर्माण के अलावा जमीनों की खरीद-फरोख्त को भी शामिल कर लिया गया। आपूर्तिकर्ताओं और ठेकेदारों को भी तलब कर उनसे अभिलेख मांगे गए। छठे और अंतिम दिन शनिवार को राम मंदिर के तीनों महत्वपूर्ण पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की गई। तीनों ने एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ा।

नृपेंद्र मिश्रा के आरोपों ने घेरा, मची खलबली
एसआईटी जांच के बीच ही निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर में चढ़ावा की चोरी को डाका करार दे दिया। एक तरह से उन्होंने एसआईटी की रिपोर्ट से पहले ही विपक्ष के आरोपों को सही बता दिया। कई टीवी चैनलों पर इंटरव्यू देते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने ट्रस्ट की पूरी कार्यप्रणाली को ही संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया। हालांकि उन्होंने चंपत राय को क्लीन चिट दी लेकिन साथ ही कहा कि यहां पर बनाए गए नियमों का दस प्रतिशत भी पालन नहीं किया गया है। नृपेंद्र मिश्रा के इस तरह के आरोपों से अब तय हो गया है कि एसआईटी की रिपोर्ट भी इससे ज्यादा इतर नहीं आ रही है। ऐसे में बड़े पैमाने पर कार्रवाई और ट्रस्ट में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

सीएम योगी के फैसले पर नजरें
अब सभी की नजरें सीएम योगी के फैसले पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि सोमवार को प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के साथ ही सीएम योगी कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। जिस तरह से नृपेंद्र मिश्रा इस मामले पर हमलावर हैं, जल्द फैसले की उम्मीद बढ़ गई है। दो दिन पहले सीएम योगी खुद भी अयोध्या आए थे। इस दौरान लोगों से बयानबाजी नहीं करने की अपील भी की थी। कहा था कि एसआईटी जांच से दूध का दूध पानी का पानी होगा।

 

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