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मध्य प्रदेश में शराब कारोबार पर सख्ती, छतरपुर की 20 बड़ी शराब दुकानों के ठेके रद्द

छतरपुर

छतरपुर जिले में आबकारी विभाग ने बड़े शराब ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए जिले के 20 बड़ी शराब दुकानों के ठेके निरस्त कर दिए हैं। जिले के सबसे महत्वपूर्ण और व्यावसायिक रूप से लाभकारी छतरपुर, खजुराहो और हरपालपुर समूहों के शराब ठेकेदारों द्वारा निर्धारित लाइसेंस ड्यूटी जमा नहीं करने पर विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। इस कार्रवाई से शराब ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है और साथ ही सरकार को लगने वाले करोड़ों रुपए के राजस्व घाटे पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

ठेकेदार नवीन पांडेय पर 85 करोड़ बकाया- सूत्र
सूत्रों के अनुसार, इन समूहों का संचालन कर रहे ठेकेदार नवीन पांडेय पर कुल मिलाकर लगभग 85 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि बकाया है। यह राशि उस निर्धारित लाइसेंस ड्यूटी का हिस्सा है, जिसे ठेकेदार को तय समय-सीमा के भीतर सरकारी खजाने में जमा करना था। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ठेकेदार को बकाया राशि जमा करने के लिए बार-बार औपचारिक नोटिस दिए गए थे। कई बार चेतावनी देने के बावजूद, जब ठेकेदार की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो विभाग के पास कठोर कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

पहली बार ऐसे हालात
छतरपुर जिले के आबकारी इतिहास में यह पहली बार है जब इतने बड़े समूहों के ठेकेदारों ने बोली लगाने के मात्र तीन-चार महीनों के भीतर ही घुटने टेक दिए हैं। यह स्थिति न केवल ठेकेदार की वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाती है, बल्कि आबकारी विभाग की टेंडर प्रक्रिया और पार्टी की आर्थिक साख की जांच की प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। विशेषज्ञ इसे एक प्रणालीगत विफलता के रूप में देख रहे हैं, जहां ऊंची बोली लगाकर ठेका तो हासिल कर लिया गया, लेकिन बाद में राजस्व की भरपाई करने में ठेकेदार पूरी तरह असफल रहे।

छत्रसाल और भोले विश्वनाथ के लाइसेंस रद्द
कठोर प्रशासनिक कार्रवाई के तहत,
विभाग ने छत्रसाल बेवरेजेज और भोले विश्वनाथ एसोसिएट्स नामक कंपनियों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। ये वही कंपनियां थीं जो इन 20 प्रमुख शराब दुकानों का संचालन कर रही थीं। लाइसेंस रद्द होने के तुरंत बाद, विभाग ने इन दुकानों को अपने पूर्ण नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्रभावित दुकानें और तत्काल प्रभाव
इस निर्णय से जो 20 दुकानें प्रभावित हुई हैं, उनमें शहर की 8 बड़ी दुकानें शामिल हैं, उनमें राजनगर, खजुराहो, बमीठा, गंज बसारी, चंद्रनगर, टौरिया टेक और गठेवरा-सारंगपुर और हरपालपुर क्षेत्र की दो अन्य प्रमुख दुकानें भी इस कार्रवाई के दायरे में आई हैं।

आगे का रास्ता: नया टेंडर और सरकारी कब्जा
    सरकारी नियंत्रण: सहायक आबकारी आयुक्त ने पुष्टि की है कि तत्काल प्रभाव से सभी 20 दुकानें अब विभाग के सीधे नियंत्रण में आ गई हैं। जब तक कोई नया स्थायी इंतजाम नहीं हो जाता, इन दुकानों का संचालन सरकारी कर्मचारी करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि शराब की बिक्री पूरी तरह बंद न हो और सरकार को कुछ राजस्व मिलता रहे, साथ ही शराब माफिया पर भी नकेल कसी जा सके।

    पुनः नीलामी : विभाग बहुत जल्द इन सभी 20 दुकानों के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है। जल्दी ही नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि दुकानों का संचालन सुचारू रूप से पुनः प्रारंभ किया जा सके।

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