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डॉक्टरी छोड़ UPSC में हासिल की रैंक 1, हरियाणा की शेना अग्रवाल बनीं IAS

चंडीगढ़ 

यूपीएससी और नीट यूजी को देश की दो सबसे ज्यादा कड़े मुकाबले वाली परीक्षाएं माना जाता है। यूपीएससी में जहां 8-9 लाख युवाओं में से सिर्फ करीब हजार का चयन हो पाता है, वहीं नीट यूजी देने वाले 20 लाख बच्चों में से सिर्फ 1.30 लाख को ही एमबीबीएस मिल पाता है। लाखों अभ्यर्थी सालों साल इन परीक्षाओं की तैयारी करते रहते हैं और बार बार अटेम्प्ट देते हैं। लेकिन इन्हीं में से कुछ ऐसे होनहार छात्र भी होते हैं जो इन दोनों परीक्षाओं को अच्छी रैंक के साथ क्रैक करते हैं। यहां हम एक ऐसी अद्भुत प्रतिभा वाली शख्सियत के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने न सिर्फ एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा सीबीएसई पीएमटी (अब इसका नाम नीट यूजी हो गया है) में टॉप किया बल्कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में भी टॉप किया। ये कहानी है हरियाणा की आईएएस बेटी डॉ. शेना अग्रवाल की जिन्होंने देश की दोनों सबसे चुनौतिपूर्ण परीक्षाओं में टॉप कर साबित कर दिया कि छोरियां भी किसी से कम नहीं।

अपनी कामयाबी से शेना ने हरियाणा के उन लोगों को उन लोगों को कड़ा संदेश दिया जो बेटियों को गर्भ में मार देते हैं और उन्हें बोझ समझते हैं। बेहद खराब लिंगानुपात के लिए बदनाम हरियाणा की बेटी ने अपने टैलेंट से यह बता दिया कि बेटियों को किसी भी तरह से बोझ नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि वह परिवार, समाज और राष्ट्र का गौरव हैं। लड़कियां हर वह मुकाम हासिल कर सकती हैं जो लड़के कर सकते हैं। आज शेना अग्रवाल पंजाब कैडर की 2012 बैच की आईएएस अफसर हैं। वर्तमान में वह जॉइंट डेवलपमेंट कमिश्नर, IRD और एडिशनल कमिश्नर, NREGA के तौर पर काम कर रही हैं।

यमुनानगर की रहने वाली, पिता डॉक्टर
आईएएस शेना अग्रवाल मूल रूप से हरियाणा के यमुनानगर की रहने वाली हैं। उनके पिता डॉ. केसी अग्रवाल एक डेंटिस्ट हैं।

बचपन से ही पढ़ाई में होनहार
शेना स्कूल दिनों से ही पढ़ाई में काफी तेज थीं। उन्होंने अपनी 10वीं की पढ़ाई संत निश्चल सिंह पब्लिक स्कूल (यमुनानगर) से की। 10वीं में उनके 95 फीसदी अंक आए। फिर 12वीं की पढ़ाई दयानंद पब्लिक स्कूल (नाभा) से की जिसमें 92 फीसदी अंक हासिल किए।

एमबीबीएस एंट्रेस में टॉपर
शेना ने 2004 में सीबीएसई प्री मेडिकल टेस्ट में पूरे देश में टॉप किया। एम्स (AIIMS) प्रवेश परीक्षा में उनकी 19वीं रैंक आई। उन्होंने दिल्ली एम्स से एमबीबीएस किया और डॉक्टर बन गईं। एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद प्रैक्टिस शुरू की। लेकिन उन्हें जल्द ही महसूस हुआ कि गरीबी से बड़ी कोई बीमारी नहीं है।

डॉक्टरी छोड़ी, यूपीएससी करने का फैसला
एम्स से एमबीबीएस करने के बाद जब शेना एक गांव में अपनी इंटर्नशिप कर रही थीं, तो उन्होंने देखा कि देश में गरीबी स्वास्थ्य समस्याओं से भी बड़ी बीमारी है। उन्हें लगा कि एक डॉक्टर के रूप में वे सीमित इलाज कर सकती हैं, जबकि आईएएस अधिकारी बनकर वे सामाजिक और आर्थिक स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकती हैं। उन्हें अहसास हुआ कि जब तक वे किसी बड़े प्रशासनिक पद पर नहीं होंगी, तब तक वे इस सामाजिक समस्या का व्यापक इलाज नहीं कर सकतीं। इसी सोच के साथ उन्होंने आईएएस बनने का संकल्प लिया।

दूसरे प्रयास में यूपीएससी क्रैक, तीसरे प्रयास में टॉपर
उन्होंने एमबीबीएस की इंटर्नशिप करते हुए साल 2009 में पहली बार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी। इसमें वे प्रीलिम्स भी पार नहीं कर सकीं इसे उन्होंने निराश होने के बजाय परीक्षा को समझने का एक अवसर माना।

दूसरा अटेम्प्ट साल 2010 में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर काम करते हुए दिया। इस बार वह कामयाब रहीं और भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में सेलेक्शन हुआ। दूसरे प्रयास में उन्होंने 305वीं रैंक हासिल की और उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में हुआ।

तीसरे प्रयास में यूपीएससी ऑल इंडिया टॉप
शेना अग्रवाल आईआरएस की ट्रेनिंग के लिए नागपुर जाने की तैयारी कर ही रही थीं कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2011 का रिजल्ट आ गया। अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की।

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