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ग्वालियर HC सख्त, NHAI और PWD की बदहाल सड़कों पर अफसरों की जवाबदेही तय

 ग्वालियर
खराब सड़कों के लिए कुख्यात नगर निगम की सड़कों की गुणवत्ता फेल सामने आई लेकिन अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) जैसी एजेंसियों की सड़कें भी मानकों पर खरी नहीं उतर पाईं।

नगर निगम के बाद अब एनएचएआई की मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहा तक और पीडब्ल्यूडी की एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री की सड़क के अधिकांश नमूने फेल सामने आए।

शहर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर दायर जनहित याचिका में सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।

सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट में एनएचएआई के अधीन मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहा मार्ग के अधिकांश नमूने फेल पाए गए हैं।

आयोग की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार भी सड़क निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं मिली।

इसी तरह पीडब्ल्यूडी के अधीन एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री मार्ग से लिए गए अधिकांश नमूनों का भी यही हाल मिला।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने की। कोर्ट ने दोनों रिपोर्ट संबंधित विभागों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं और जवाब के लिए समय दिया है।

कोर्ट ने आयोग के पूरे कार्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि अब संबंधित अधिकारियों और विभागों को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ग्वालियर शहर के हित में काम करना चाहिए।

कोर्ट ने उम्मीद जताई कि अलग-अलग विभागों में पदस्थ अधिकारी भी शहर के हित में काम करने के लिए आगे आएंगे।

छह माह में होना था सर्वे, दस्तावेज ही नहीं मिला
एनएचएआई के अधीन सड़क की रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से बताया गया कि एनएचएआई को प्रत्येक छह माह में सड़क का असंयोजित सर्वे कराना आवश्यक है। हालांकि, जांच के दौरान ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि संबंधित सड़क का एनएसवी सर्वे कभी कराया गया था।

रिपोर्ट में वार्षिकी भुगतान से संबंधित विभिन्न खामियां भी सामने आने की बात कही गई। हाई कोर्ट ने आयोग को रिपोर्ट की प्रति एनएचएआई के अधिवक्ता आशीष सरस्वत को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सरस्वत ने जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।

सीलबंद लिफाफे में आई मूल जांच रिपोर्ट
18 सितंबर के आदेश के पालन में सोमवार को राजनंदिनी एंटरप्राइज एंड कंसल्टेंसी की मूल जांच रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की गई।

अधिवक्ता गौरव मिश्रा ने सीलबंद लिफाफे में बिटुमिन टेस्ट रिपोर्ट, आरईसी क्रमांक 202409/07/13, दिनांक 11 जुलाई 2024 तथा डिजाइन मिक्स (डीबीएम) टेस्ट रिपोर्ट, आरईसी क्रमांक 202409/16/45, दिनांक 16 सितंबर 2024 पेश की।

कोर्ट में सीलबंद लिफाफा खोला गया। इसके बाद कार्यालय को निर्देश दिया गया कि दोनों दस्तावेजों की छायाप्रति सड़क जांच आयोग को उपलब्ध कराई जाए और मूल दस्तावेजों को दोबारा सीलबंद कर सुरक्षित रखा जाए। आयोग को इन रिपोर्टों पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

निगम को पैचवर्क पूरा करने के लिए 24 घंटे
नगर निगम की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि सड़कों पर किए गए पैचवर्क को सही ठहराने का प्रयास किया गया है, लेकिन उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे का समय मांगा कि आयोग द्वारा नमूने लेने के लिए सड़क खोदे जाने के कारण जहां पैचवर्क किया गया है, वह निर्धारित मापदंडों के अनुसार हो।

कोर्ट ने निगम को 24 घंटे का समय देते हुए निर्देश दिया कि आयोग द्वारा नमूने लेने के लिए खोदी गई सड़क के सभी हिस्सों का पैचवर्क निर्धारित विनिर्देशों के अनुसार किया जाए।

इसमें 150 मिलीमीटर तक की गहराई में पैचवर्क करने संबंधी तकनीकी विनिर्देश का पालन करने को कहा गया। इस निर्देश के साथ संबंधित आवेदन का निराकरण कर दिया गया।

स्मार्ट सिटी की सड़कों पर भी उठे सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने स्मार्ट सिटी की सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाते हुए स्मार्ट सिटी ग्वालियर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को मामले में पक्षकार बनाए जाने की मांग की। इस संबंध में अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया गया था।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि स्मार्ट सिटी के अधीन सड़कों की स्थिति भी खराब होने का आरोप लगाया गया है, लेकिन अभी तक स्मार्ट सिटी के स्वामित्व और नियंत्रण वाली सड़कों से नमूने नहीं लिए गए हैं।

इस बिंदु का उल्लेख आवेदन में नहीं होने पर कोर्ट ने तोमर को आवेदन में संशोधन के लिए एक सप्ताह का समय दिया।

हर सड़क की जांच के लिए जनहित याचिका का दायरा नहीं बढ़ाएंगे
सचिन तेंदुलकर मार्ग से भगवान सिंह माथुर सिटी एन्क्लेव को जोड़ने वाली संपर्क सड़क की खराब स्थिति को लेकर हस्तक्षेप आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था।

इसमें सड़क की स्थिति पूरी तरह खराब होने का आरोप लगाया गया, कोर्ट ने कहा कि नगर निगम को ग्वालियर शहर की सभी सड़कों के निर्माण और मरम्मत की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है।

कोर्ट प्रत्येक सड़क को लेकर अलग-अलग जांच कराकर उसका निर्माण कराने की स्थिति में नहीं है। कोर्ट ने हस्तक्षेप आवेदन को खारिज कर दिया।

आयोग के काम की कोर्ट ने की सराहना
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सड़क जांच आयोग के काम की विशेष रूप से सराहना की। बता दें कि इस आयोग में अध्यक्ष गौरव समाधिया, सदस्य पवन रघुवंशी और हिमांशु शर्मा हैं।

कोर्ट ने कहा कि पहले एक सड़क से नमूने लेने में आयोग को 12 से 13 घंटे तक सड़क पर काम करना पड़ा था।
बाद में आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों से स्पष्ट हुआ कि सदस्यों ने केवल मौके पर जाकर निर्धारित मानकों के अनुसार नमूने ही नहीं लिए, बल्कि तकनीकी पहलुओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को समझने के लिए भी काफी मेहनत की। कोर्ट ने कहा कि शहर के हित में आयोग ने जिस स्तर पर मेहनत की है, वह सराहनीय है।

सिकरौदा में हाईवे से सटी शराब दुकान पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया ने सिकरौदा चौराहा स्थित शराब दुकान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि नियमानुसार शराब दुकान हाईवे से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए, लेकिन सिकरौदा चौराहे पर शराब दुकान हाईवे के बिल्कुल पास संचालित हो रही है।

दुकान पर ‘हर सेलिब्रेशन हमारा है’ टैगलाइन भी प्रदर्शित होने की बात कोर्ट को बताई गई। इस पर शासकीय अधिवक्ता जीके अग्रवाल ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा।

कोर्ट ने उन्हें यह स्पष्ट करने के लिए समय दिया कि हाईवे से 500 मीटर से कम दूरी पर शराब दुकान का लाइसेंस किन परिस्थितियों में जारी किया गया। वहीं स्थानांतरित करने का समय भी पूछा गया।

एनएसवी की अंतिम रिपोर्ट पर आज सुनवाई
आयोग के अध्यक्ष ने कोर्ट को बताया कि एनएसवी की अंतिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत किया जाना बाकी है। इस पर कोर्ट ने एनएसवी की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए मामले को 22 सितंबर के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। विभिन्न रिपोर्टों पर विचार के लिए मामले की अगली सुनवाई आठ अक्टूबर के लिए निर्धारित की गई है।

 

 

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