सागर
वैसे तो लहसुन में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. लेकिन लहसुन में पाए जाने वाले एंटी कैंसर गुण का फायदा लहसुन को सीधे खाने से नहीं मिलता. सागर यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के रिसर्च स्कॉलर मनीष कुमार मांझी ने लहसुन में ऐसे कंपाउंड की खोज की है, जो कैंसर के इलाज में कारगर साबित हुआ है. खास बात ये है कि मुंबई के ACTREC (Advanced Centre for Treatment, Research and Education in Cancer) ने इस रिसर्च पर मुहर लगाई है।
रिसर्च का स्तन कैंसर की कोशिकाओं पर टारगेटेड थेरेपी के जरिए सफल प्रयोग भी किया गया. ये कैंसर के अलावा दूसरी स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचाता है. अब बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च का यूके पेटेंट लेने की तैयारी कर रहा है. वहीं इसका मेडिसिन के रूप में उपयोग हो सके, इसलिए क्लिनिकल ट्रायल की भी तैयारी की जा रही है।
बॉयोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की रिसर्च
डॉ. हरीसिंह गौर यूनिवर्सिटी के बॉयोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के रिसर्च स्कॉलर मनीष कुमार मांझी ने रिसर्च डिपार्टमेंट के असि. प्रोफेसर डॉ सी पी उपाध्याय के मार्गदर्शन में की है. इस रिसर्च की खासियत ये है कि इसमें लहसुन के एंटी कैंसर गुणों का उपयोग कर ऐसा बसायुक्त नैनो पार्टिकल तैयार किया गया, जो टारगेट डिलीवरी के जरिए सीधा कैंसर कोशिकाओं पर काम करता है और दूसरी स्वस्थ कोशिकाओं को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता है, ये पूरी तरह से जैविक है।
रिसर्च स्कॉलर मनीष मांझी बताते हैं कि, ''स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लहसुन का उपयोग सदियों से होता रहा है. लहसुन में कई तरह के बायोटेक कंपाउंड पाए जाते हैं. हमने उन कंपाउंड को एक्सट्रैक्ट करके उसकी एंटी कैंसर प्रॉपर्टी पर काम किया है. स्तन कैंसर की कोशिकाओं पर इसका परीक्षण किया गया, इसके काफी अच्छे परिणाम सामने आए हैं।
एंटी कैंसर गुणों से भरपूर लहसुन
कई बीमारियों के इलाज में कारगर लहसुन में एंटी कैंसर गुण भी पाए जाते हैं. लेकिन जब इसे भोजन में उपयोग करते हैं, तो इसके एंटी कैंसर गुणों का फायदा शरीर को नहीं मिलता है. क्योंकि मानव शरीर लहसुन में पाए जाने वाले एंटी कैंसर कंपाउंड को अवशोषित नहीं कर पाता है. इस रिसर्च में इसी एंटी कैंसर कंपाउंड की खोज कर एक वसायुक्त नैनो पार्टिकल तैयार किया गया. जिसे टारगेट डिलीवरी के जरिए कैंसर कोशिकाओं तक पहुंचाया जाता है. ये कंपाउंड शरीर की दूसरी स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने का काम करता है।
सागर यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की रिसर्च का मुंबई की ACTREC (Advanced Centre for Treatment, Research and Education in Cancer) में परीक्षण किया गया, जो पूरी तरह सफल पाया गया. रिसर्च स्कॉलर मनीष कुमार मांझी बताते हैं कि, ''स्तन कैंसर के लिए जो दवाएं उपयोग होती हैं, वह कैंसर के साथ-साथ शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं. लेकिन हमने नैनो टेक्नोलॉजी के जरिए लहसुन का ऑर्गेनिक कंपाउंड वाला नैनोपार्टिकल बनाया, जो ज्यादा प्रभावी है. ये शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को प्रभावित किए बिना कैंसर की कोशिकाओं पर काम करता है।
पेटेंट और क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी
रिसर्च गाइड असि. प्रोफेसर डॉ. सी पी उपाध्याय बताते हैं कि, ''लहसुन काफी गुणकारी है. लेकिन इसमें ऐसे कई तत्व होते हैं, जो मानव शरीर सीधे अवशोषित नहीं कर पाता है. जिससे लहसुन के गुणों का फायदा शरीर को नहीं मिल पाता है. ऐसी स्थिति में हमारा उद्देश्य था कि हमारे पास लहसुन के बारे में जो जानकारी है, उसके आधार पर ये पता लगाएं कि लहसुन में ऐसे कौन-कौन से कंपाउंड हैं. जिस पर काम कर सकते हैं. विशेष तौर पर हमने एंटी कैंसर कंपाउंड पर काम किया, जिसमें तीन तरह के कंपाउंड मिले. लेकिन एक कंपाउंड Diallyl Disulfide मिला, जो विशेष रूप से स्तन कैंसर (Breast Cancer) और कैंसर कोशिकाओं में जहरीलेपन को बढ़ाकर उन्हें खत्म करने और कैंसर सिग्नल्स को रोकने में मदद करता है।
डॉ. उपाध्याय बताते हैं कि, ''ये कंपाउंड लहसुन में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, लेकिन शरीर में अवशोषित नहीं होने के कारण हमने इसे आइसोलेट किया और वसायुक्त नैनो पार्टिकल बनाकर उस पर Diallyl Disulfide कंपाउंड को लोड किया. मुंबई में ACTREC में इसका परीक्षण कराया,तो पाया कि ये कैंसर की कोशिकाओं पर ही काम करता है और स्तन कैंसर को बड़ी तेजी से और प्रभावित तरीके से कम करता है. अब हम इसका यूके पेटेंट लेने की तैयारी कर रहे हैं और भविष्य में इसका उपयोग मेडिसिन के तौर पर हो सके, उसके लिए भी ट्रायल की तैयारी कर रहे हैं।





