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गया में सिर्फ पिंडदान नहीं, ये 15 जगहें भी हैं घूमने लायक; देखें पूरी लिस्ट

गया
 बिहार का Gaya Ji जिला  केवल पितृपक्ष में पिंडदान और मोक्ष पाने के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह प्राचीन इतिहास, स्थापत्य कला (Architecture) और प्राकृतिक सुंदरता का एक अद्भुत संगम है।

पहाड़ियां, कलकल बहती नदियां और घने जंगलों के बीच बसे गया में हिंदू, बौद्ध और सूफी संस्कृति की एक गहरी छाप देखने को मिलती है।

अगर आप पिंडदान के साथ-साथ गया जी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो केवल Vishnupad Temple या बोधगया तक ही सीमित न रहें। आइए आपको बताते हैं गया की उन 15 खास जगहों के बारे में, जहां आस्था के साथ-साथ आपको प्रकृति के शानदार सीन भी देखने को मिलेंगे:

1. सीता कुंड: जहां माता सीता ने किया था बालू से पिंडदान
फल्गु नदी के पूर्वी तट पर स्थित सीता कुंड पौराणिक और धार्मिक रूप से बेहद पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि वनवास के दौरान माता सीता ने राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए यहीं फल्गु की रेत से पिंडदान किया था।

यह विष्णुपाद मंदिर के ठीक सामने स्थित है और पितृ पक्ष के दौरान पिंडदान करने के लिए विशेष महत्व रखता है।

2. तपोवन कुंड: औषधीय गुणों वाले गर्म पानी के झरने
तपोवन पहाड़ियों के बीच स्थित यह स्थल ऋषि कण्व और रामायण काल से जुड़ा हुआ है। यहां प्रकृति की गोद में गर्म पानी के कुंड (गंडक युक्त जल) हैं। मान्यता है कि इस पानी में नहाने से त्वचा सम्बन्धी बीमारियां (Skin Diseases) ठीक होती हैं।

3. ब्रह्मयोनि पहाड़ी: पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति का द्वार
गया शहर के दक्षिण में स्थित ब्रह्मयोनि पहाड़ी की चोटी पर एक प्राचीन मंदिर है। यहां 'ब्रह्मयोनि' नामक प्राकृतिक गुफा है, जिसे भगवान ब्रह्मा का प्रतीक माना जाता है।
ऐसी आस्था है कि इस गुफा रूपी द्वार से गुजरने पर व्यक्ति को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।

4. दुखरनी मंदिर: सांप्रदायिक सद्भाव की अनोखी मिसाल
लगभग 450 वर्ष पूर्व टिकारी महाराजा मोदक सिंह द्वारा बनाया गया यह मंदिर बेहद खास है। इसकी एक दीवार गया की जामा मस्जिद से सटी हुई है, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का बड़ा संदेश देती है। माना जाता है कि यहां आने वाले हर भक्त के दुख-दर्द दूर होते हैं।

5. डुंगेश्वरी हिल्स: जहां बुद्ध ने की थी 6 वर्षों की कठिन तपस्या
बोधगया से करीब 12-15 किलोमीटर दूर फल्गु नदी के किनारे स्थित ये पहाड़ियां आंखों के सुकून के साथ आत्मीय शांति का भी अहसास कराती हैं। ज्ञान प्राप्ति से पहले सिद्धार्थ गौतम ने इन्हीं गुफाओं में कठिन तपस्या की थी।

6. बाबा बैजुधाम मंदिर: बाढ़ में मिला विशाल शिवलिंग
मोरहार नदी के किनारे, पहाड़ियों और जंगलों से घिरा बैजुधाम मंदिर बेहद घूमने लायक जगह है। सितंबर 2000 में आई भीषण बाढ़ के दौरान यहां एक विशाल काला शिवलिंग मिला था। सावन और महाशिवरात्रि में यहां भारी भीड़ उमड़ती है।

7. भूरा साइट (दुर्वासा नगर): ऋषि दुर्वासा की तपोभूमि
यह स्थल हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों का संगम है। मान्यता है कि यहां ऋषि दुर्वासा ने ध्यान लगाया था। यहां प्राचीन बुद्ध प्रतिमाएं, स्तूप के अवशेष, दुब्बा किला और प्राकृतिक जल स्रोत मौजूद हैं। पुराने सिक्के, मुहरें और मिट्टी के बर्तन जैसी पुरातात्विक खोजें इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को साबित करती हैं।

8. कोंचेश्वर महादेव मंदिर: 105 फीट ऊंचा ईंटों का अजूबा
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित यह मंदिर उत्तर भारत के दुर्लभ मंदिरों में से एक है। गुप्त काल के बाद की वास्तुकला से बना यह मंदिर विशेष आकार की ईंटों से निर्मित है।

मंदिर का शिखर लगभग 105 फीट ऊंचा है। मंदिर की बाहरी दीवारें ऊपर से नीचे तक सीधी नहीं हैं, बल्कि घुमावदार हैं यहां भगवान विष्णु, गणेश, सूर्य और बुद्ध की 85 से अधिक प्राचीन मूर्तियां संरक्षित हैं

बोधगया के प्रमुख आकर्षण (Bodh Gaya Attractions)
9. 80 फुट की बुद्ध प्रतिमा: भारत की सबसे ऊंची बुद्ध प्रतिमाओं में से एक है। यहां भगवान बुद्ध ध्यान मुद्रा में कमल पर विराजमान हैं।

इसे भारत और जापान की सांस्कृतिक दोस्ती का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि इसका निर्माण जापानी बौद्ध संगठन दाइजोक्यो के सहयोग से किया गया था।

10. सुजाता गढ़: बकराउर गांव में स्थित यह गढ़ गौतम बुद्ध से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार, ज्ञान प्राप्ति से पहले सिद्धार्थ गौतम ने कठोर तपस्या की थी, जिससे उनका शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया था। उस समय बकराउर गांव की सुजाता नामक एक महिला ने उन्हें मिट्टी के कटोरे में खीर भेंट की थी।

11. मुचलिंडा सरोवर: महाबोधि मंदिर के पास स्थित यह सरोवर उस कथा से जुड़ा है, जब नागराज मुचलिंडा ने भीषण बारिश में अपने फन से भगवान बुद्ध की रक्षा की थी। परंपरा के अनुसार, भगवान बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त करने के छठे सप्ताह में यहां ध्यान किया था।

आस्था और शक्ति के अन्य पवित्र स्थल
12. मां तारा देवी मंदिर (केसपा): पाल कालीन मूर्तियों और पुरातात्विक अवशेषों से घिरा यह मंदिर बौद्ध और हिंदू संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।

13. गुरुपसी माता मंदिर (गुरपा): 'कुक्कुटपाद गिरि' पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता से भरा है। यहीं बुद्ध के शिष्य महाकश्यप की गुफा भी स्थित है।

14. बंगला स्थान मंदिर: गया शहर के केंद्र में स्थित यह शिव मंदिर अपनी शांत वास्तुकला और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है।

15. रेवाई गांव (सूर्य व जौहर मंदिर): टिकारी का यह गांव अपने सदियों पुराने प्राचीन सूर्य मंदिर (छठ पूजा का प्रमुख केंद्र) और जौहर मंदिर (सती स्थान) की ऐतिहासिक लोककथाओं के लिए जाना जाता है।

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