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भोपाल में बढ़े महिला अपराध और अपहरण के मामले, आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

भोपाल.

राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं। शहर के पुलिस स्टेशनों से जुटाए गए आधिकारिक डेटा के अनुसार, साल 2026 के पहले नौ महीनों यानी 1 जनवरी से 30 सितंबर के बीच में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में पिछले साल की तुलना में लगभग 26% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

आंकड़ों के मुताबिक, इस साल के शुरुआती नौ महीनों में कुल 2,801 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल (2025) इसी अवधि में यह आंकड़ा 2,216 और साल 2024 में 2,482 था। इस प्रकार पिछले साल के मुकाबले इस बार 585 मामले अधिक सामने आए हैं।

किस कैटेगरी में कितनी बढ़ी बढ़ोतरी?
डेटा पर नजर डालें तो विभिन्न श्रेणियों के अपराधों में काफी उछाल आया है:

  • अपहरण: अपहरण के मामलों में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है, जो पिछले साल के 337 मामलों से बढ़कर इस साल 505 पर पहुंच गए यानी इनमें लगभग 50% की बढ़ोतरी हुई है।
  • बलात्कार: रेप के मामलों में 9.1% की वृद्धि हुई है, जो 2025 में 276 से बढ़कर 2026 में 301 हो गए। साल 2026 में गैंगरेप का एक मामला दर्ज किया गया, जबकि 2025 में ऐसा कोई मामला नहीं था (2024 में 3 मामले थे)।
  • छेड़छाड़: छेड़छाड़ के मामले 289 से बढ़कर 323 हो गए, जो 11.8% की बढ़ोतरी को दर्शाते हैं।
  • हत्या और जानलेवा हमला: हत्या के प्रयास के मामले पिछले साल के 5 से बढ़कर इस साल 15 हो गए यानी इनकी संख्या तीन गुना हो गई है। वहीं हत्या के मामले 8 से बढ़कर 10 हो गए।
  • धमकी और क्रूरता: आपराधिक धमकी के सबसे ज्यादा 796 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 38.4% अधिक हैं। इसके अलावा, बीएनएस धारा 85 के तहत क्रूरता से जुड़े मामले 437 से बढ़कर 573 हो गए।
  • हालांकि, कुछ श्रेणियों में राहत भी देखने को मिली है, जैसे साधारण चोट के मामले 78 से घटकर 42 रह गए और दहेज हत्याएं 8 से घटकर 6 हो गईं।

पुलिस प्रशासन का क्या कहना है?
इस पूरे मामले पर बात करते हुए पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा के मामलों की जांच शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर की जाती है और जांच पूरी होने के बाद तुरंत अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाती है।

पुलिस कमिश्नर ने यह भी जानकारी दी कि महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा और उन्हें जागरूक करने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत पुलिसकर्मियों को भी संवेदनशील बनाने के लिए कोर्सेज कराए जा रहे हैं, साथ ही लड़कियों के लिए सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि उनकी सुरक्षा और आत्मविश्वास को बढ़ाया जा सके। इसके बावजूद, बढ़ते आंकड़े शहर में महिला सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की मांग को और तेज कर रहे हैं।

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