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CISF का प्रशासनिक ढांचा बदलेगा, मेट्रो से लेकर सरकारी भवनों तक सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत

नई दिल्ली
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। इसके तहत CISF एक नवंबर से अपने प्रशासनिक और परिचालन ढांचे में बड़ा पुनर्गठन लागू करेगा। इसका उद्देश्य देश भर में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और रणनीतिक प्रतिष्ठानों के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंधन को और मजबूत करना है।

गृह मंत्रालय (MHA) ने इस पुनर्गठन को मंजूर किया है। इसके तहत CISF के मौजूदा क्षेत्रीय सेक्टरों को अलग-अलग उद्योगों और प्रतिष्ठानों की खास सुरक्षा जरूरतों के मुताबिक व्यवस्थित किया जाएगा।

इन सेक्टरों के लिए बदलाव
    बिजली
    कोयला
    इस्पात
    पेट्रोलियम
    प्राकृतिक गैस
    बंदरगाह
    सरकारी इमारतें
    संग्रहालय
    स्मारक
    मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (जैसे मेट्रो)

मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम
CISF ने बताया कि संशोधित ढांचे के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सेक्टर को 'सरकारी भवन संग्रहालय और स्मारक तथा मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (GBMM & MRTS) सेक्टर, नई दिल्ली' के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा।

कहां क्या पुनर्गठित किया जाएगा
    नई दिल्ली के नॉर्थ सेक्टर और कोलकाता के नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर-II को क्रमशः पावर-I और पावर-II सेक्टर के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा।
    रांची के ईस्टर्न सेक्टर को कोल सेक्टर बना दिया जाएगा, जबकि भिलाई के सेंट्रल सेक्टर को स्टील सेक्टर में बदल दिया जाएगा।
    गुवाहाटी में स्थित नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सेक्टर बन जाएगा।
    मुंबई में स्थित वेस्टर्न सेक्टर और चेन्नई में स्थित साउथ सेक्टर को क्रमशः वेस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर और ईस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर में बदल दिया जाएगा।

यहां जारी रहेगा काम
बेंगलुरु में परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग (DAE और DoS) क्षेत्र, नई दिल्ली में एयरपोर्ट सेक्टर-I और बेंगलुरु में एयरपोर्ट सेक्टर-II, अपनी-अपनी कार्यात्मक व्यवस्थाओं के तहत काम करना जारी रखेंगे।
पुनर्गठन का ये है उद्देश्य

    परिचालन संबंधी निगरानी में सुधार करना
    क्षेत्र-विशेष की विशेषज्ञता विकसित करना
    सुरक्षा प्रक्रियाओं में अधिक एकरूपता सुनिश्चित करना
    मंत्रालयों, विभागों और प्रतिष्ठान प्रबंधन के साथ समन्वय मजबूत करना

 

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