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दुनिया के 8 देशों में सड़कों पर उतरी जनता, कहीं महंगाई तो कहीं शिक्षा बजट में कटौती के खिलाफ प्रदर्शन

नई दिल्ली आज के समय में दुनिया के कई देशों में असंतोष और गुस्से का एक नया दौर देखने को मिल रहा है. भारत से लेकर यूरोप और अमेरिका तक, जगह-जगह बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर आई है. फ्रांस, इटली,और अल्बानिया से लेकर अर्जेंटीना और तुर्किये तक, लोग महंगाई, बेरोजगारी, आवास संकट को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं. फ्रांस और अल्बानिया में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की वजह से बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले जनता का गुस्सा फूट पड़ा है. फ्रांस- बढ़ती महंगाई और ईंधन के दामों को लेकर प्रदर्शन फ्रांस में इन प्रदर्शनों की दो मुख्य वजहें हैं- एक तरफ जहां बढ़ती महंगाई और ईंधन के दामों को लेकर जनता में आक्रोश है, वहीं दूसरी तरफ स्टूडेंट और टीचर स्कूल की बदहाल स्थिति और शिक्षा बजट में कटौती का विरोध कर रहे हैं. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के लिए ये चुनाव उनका कार्यकाल खत्म होने से पहले एक बड़ा इम्तिहान बन गया है. फ्रांस में ये छात्र आंदोलन पिछले महीने पेरिस में स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ था, जो धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया. फ्रांस 24 को जानकारी देते हुए फ्रांसीसी आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि घटती क्रय शक्ति (Purchasing Power) के खिलाफ हुए इन प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें पेरिस की सड़कों पर 1.10 लाख लोग उतरे थे. इस दौरान कई जगहों पर हिंसक झड़पें भी हुईं. बेल्जियम- यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाने का विरोध पड़ोसी देश बेल्जियम में भी कुछ ऐसा ही हाल है. सार्वजनिक खर्चों में कटौती और बढ़ते घरेलू खर्चों के बीच छात्रों ने उच्च शिक्षा और यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाने का विरोध किया है. ब्रसेल्स और लिएज में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों के बाद पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा. पुर्तगाल- बढ़ती महंगाई और कम सैलरी के विरोध में मार्च पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने बढ़ती महंगाई, कम सैलरी और सस्ते मकान मिलने में हो रही मुश्किलों के खिलाफ मार्च निकाला. लिस्बन और कई दूसरे शहरों में 2017 के बाद से संपत्ति की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं, जबकि किराए में भी भारी बढ़ोतरी हुई है. इससे कम आय वाले परिवारों और युवा कामगारों पर भारी आर्थिक दबाव आ गया है. इटली- महंगाई के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन वहीं, इटली में भी यूरोप के दूसरे हिस्सों जैसे ही हालात देखने को मिल रहे हैं. मिलान में स्थिर वेतन, महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में आ रही दिक्कतों को लेकर लोगों ने प्रदर्शन किए और झड़पों की खबरें भी सामने आईं, हालांकि इटली के प्रदर्शन फ्रांस के मुकाबले छोटे थे. अल्बानिया और तुर्किये में सुलगता असंतोष अल्बानिया में भी छात्र विश्वविद्यालयों की बद्तर स्थिति, पढ़ाई में ज्यादा खर्च और ग्रेजुएशन के बाद रोजगार के मौकों की कमी को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. 13 अक्टूबर को तिराना में शिक्षा मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन हिंसक हो गया, जब छात्रों ने इमारत पर ईंटें और कंक्रीट के ब्लॉक फेंके, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की. उधर, तुर्किये में पिछले महीने पेंशनभोगियों और मजदूर संगठनों ने लगातार बढ़ती महंगाई और अपर्याप्त पेंशन भुगतान के खिलाफ प्रदर्शन किए. अंकारा में संवैधानिक अदालत के बाहर जमा हुए पेंशनभोगियों ने गरिमा के साथ जिंदगी जीने के अपने अधिकार की मांग की. अर्जेंटीना और अमेरिका में भी विरोध की गूंज लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में बजट में भारी कटौती करने वाले राष्ट्रपति जेवियर माइली की उच्च शिक्षा नीति के खिलाफ इस हफ्ते की शुरुआत में प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हो गई. संसद के बाहर हजारों विश्वविद्यालय के छात्रों, कर्मचारियों और ट्रेड यूनियन के सदस्यों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया. माइली के सत्ता में आने के बाद से शिक्षा फंडिंग संकट को लेकर ये पांचवां बड़ा विरोध प्रदर्शन है. संयुक्त राज्य अमेरिका में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 'नो किंग्स' नेटवर्क ने देश भर के शहरों में रैलियां कीं. इसका मकसद मध्यावधि चुनावों में लोगों को जल्दी मतदान करने के लिए प्रोत्साहित करना था. हालांकि इन्हें गैर-पक्षपाती बताया गया, लेकिन ये ट्रंप की नीतियों से असंतुष्ट लोगों के दो साल के लंबे विरोध का ही एक हिस्सा था. भारत में पहले से ही वोटर लिस्ट के SIR में गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन जारी है. ऐसे में साफ है कि देश से विदेश तक में सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता में विरोध की आग सुलग रही है और लोग अपने हक के लिए आवाज उठा रहे हैं.    

कैंसर की महंगी दवाएं होंगी सस्ती, सरकार ने 137 दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तक किया सीमित

नई दिल्ली  कैंसर के मरीजों सरकार ने बड़ी राहत दी है। 9 नवंबर से 137 दवाओं की कीमतों में 70% तक की कमी होने जा रही है, क्योंकि सरकार ने ट्रेड मार्जिन को 30% तक सीमित कर दिया है। दवाओं की कीमतों पर नजर रखने वाली संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 137 नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर-रोधी दवाओं के बारे में अधिसूचना जारी की। यह कदम अत्यधिक ट्रेड मार्जिन की समस्या को दूर करने के लिए उठाया गया है, जिसके तहत DPCO, 2013 के पैराग्राफ 19 को लागू किया गया है। खास बात यह है कि इस सूची में पेटेंट वाली दवाएं भी शामिल हैं। हमारे सहयोगी टीओआई को मिले NPPA की बैठक के मिनट्स के मुताबिक GST को छोड़कर MRP के 30% पर ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाने का मतलब है कि स्टॉकिस्ट/डिस्ट्रीब्यूटर को दी जाने वाली कीमत (PTS/PTD) पर 42.9% का मार्क-अप जोड़ा गया है। आसान शब्दों में कहें तो PTS/PTD वह पहला बिंदु है जहां दवा की बिक्री होती है। MRP कीमत में भारी अंतर यह सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के बाद हुआ है, जिसमें कोर्ट ने रिटेलर को बेची जाने वाली दवाओं की कीमत और मरीजों से वसूले जाने वाले MRP के बीच के भारी अंतर की ओर इशारा किया है। कुछ मामलों में तो यह अंतर 10 गुना तक है। कुछ दवाओं की एमआरपी प्रति शीशी/पैक 5 लाख रुपये तक हैं। इनमें पर्टुजुमैब + ट्रैस्टुजुमैब, एटेजोलिजुमैब, टेक्लिस्टामैब, इनोटुजुमैब ओजोगैमिसिन और डाराटुमुमैब शामिल हैं। NPPA को बतानी होंगी कीमतें सभी निर्माताओं को राजपत्र अधिसूचना (गजट नोटिफिकेशन) जारी होने के सात दिनों के भीतर NPPA को अपनी संशोधित कीमतों के बारे में सूचित करना होगा। निर्माताओं को अपनी वेबसाइट पर मूल्य सूची प्रदर्शित करनी होगी और इसे सभी खुदरा विक्रेताओं (रिटेलर्स) और अस्पतालों तक व्यापक रूप से पहुंचाना होगा। इन खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को भी अपनी वेबसाइटों पर संशोधित कीमतों को प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। MRP की गणना को मंजूरी अथॉरिटी ने मार्च 2026 को आधार महीना मानते हुए PTS/PTD के आधार पर संशोधित MRP की गणना को मंजूरी दे दी है। NPPA ने कहा कि ट्रेड-मार्जिन कैपिंग के लिए PTS/PTD और MRP की गणना करते समय 'पेशेंट असिस्टेंस प्रोग्राम' (मरीज सहायता कार्यक्रम) के तहत दी जाने वाली दवाओं की मात्रा को बाहर रखा जा सकता है। इन कार्यक्रमों के तहत दवाएं मुफ्त में दी जाती हैं, और इन्हें आमतौर पर MNCs (बहुराष्ट्रीय कंपनियों) द्वारा चलाया जाता है। सीधे अस्पतालों को आपूर्ति NPPA ने कहा कि चूंकि कैंसर-रोधी दवाओं की एक बड़ी आपूर्ति सीधे अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को की जाती है, इसलिए इन दवाओं की लागू होने की तारीख से संशोधित कीमतें सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी। इसमें आगे कहा गया है कि राज्य औषधि नियंत्रक यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे कि निर्माता, डीलर (खुदरा विक्रेताओं सहित), अस्पताल और चिकित्सा संस्थान इन नियमों का पालन करें। NPPA ने क्या कहा     दायरे में आने वाली दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।     कोई निर्माता प्रोडक्शन कम करना चाहता है तो पहले मंजूरी लेनी होगी।     कीमतें जांचने के लिए 'फार्मा सही दाम' ऐप और NPPA की वेबसाइट देख सकते हैं। 137 में कौन सी दवाएं? बता दें कि 137 चिह्नित दवाओं में 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवाएं, ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली डेनोसुमैब, कैंसर रोगियों में न्यूट्रोपेनिया को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पेगफिलग्रास्टिम और कोलन, अंडाशय और सर्वाइकल कैंसर के इलाज के लिए स्वीकृत बेवासिजुमैब शामिल हैं।

तालिबान की चौकी और बेस कैंप पर पाकिस्तान का हमला, सीमा पर बढ़ा तनाव

काबुल पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर हुई गोलीबारी में अफगान सुरक्षा बलों (तालिबान) के कई जवानों के मारे जाने की खबर है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की ओर से यह कार्रवाई सीमा क्षेत्र में हुई घटनाओं के जवाब में की गई। समाचार एजेंसी सिन्‍हुआ की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक, पाकिस्तानी सेना ने शनिवार को पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर अफगान बलों की ओर से की गई गोलीबारी का जवाब दिया। इससे पहले ऐसी रिपोर्ट थी कि तालिबान की गोलीबारी में पाकिस्तानी सेना के 7 जवान मारे गए हैं। हालांकि, पाकिस्तान ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पाकिस्तानी हमले में तालिबान लड़ाकों की मौत सूत्रों के अनुसार, यह गोलीबारी कथित तौर पर विदेशी आतंकवादियों की पाकिस्तान में घुसपैठ को समर्थन देने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने दावा किया कि इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने कार्रवाई करते हुए अफगानिस्तान की ओर स्थित कई संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाया। सिन्‍हुआ के अनुसार, सूत्रों का दावा है कि इस गोलीबारी में अफगान सुरक्षा बलों के कई जवान मारे गए। साथ ही उनका एक चौकी (पोस्ट) और एक बेस कैंप भी निशाने पर लिया गया। तालिबान ने सीमा चौकी खाली की जवाबी कार्रवाई के दौरान वह बेस कैंप पूरी तरह नष्ट हो गया। इसके बाद अफगान पक्ष ने अपनी सीमा चौकी खाली कर दी। सिन्‍हुआ के अनुसार, इलाके में दोनों तरफ से गोलीबारी का सिलसिला जारी था। पाकिस्तानी सेना पूरी तरह सतर्क है और देश की सीमाओं की रक्षा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष का कारण क्या है? अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। दोनों के बीच बार-बार होने वाली झड़पों के पीछे की मुख्‍य वजह आतंकवादी गतिविधियां, सीमा पार हमलों और सैन्य ठिकानों को लेकर मतभेद हैं। अफगानिस्तान का मानना है कि पाकिस्तान उसके देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए 'एकमात्र खतरा' है। अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समर्थित और प्रशिक्षित आतंकवादियों की सीमा पार घुसपैठ की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अफगानिस्तान में आतंकवाद फैला रहा पाकिस्तान रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में तालिबान ने कहा कि उसकी सेना ने नूरिस्तान में 41 आतंकवादियों को मार गिराया और 62 अन्य को पकड़ा है, जो आईएसआईएस से जुड़े समूहों से संबंधित थे और पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा समर्थित थे। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सेना के "प्रत्यक्ष मार्गदर्शन और सहयोग" से अफगानिस्तान में घुसपैठ करने की कोशिश की।  

‘अपनी पार्टी का रिजीम चेंज नहीं रोक पाए उद्धव’, CM फडणवीस का तीखा हमला

मुंबई महाराष्ट्र में ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) वाले बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रिजीम चेंज की वकालत करते हुए भाजपा पर कटाक्ष किया, जिस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार किया है। फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे अपनी ही पार्टी में रिजीम चेंज को नहीं रोक पाए और अब वे किस सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं, यह समझ से बाहर है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने का फैसला सड़क पर नहीं, बल्कि चुनाव के जरिए होता है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) समेत अन्य संगठनों के विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन प्रदर्शनों के बीच ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की बहस भी तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे पर फडणवीस का करारा पलटवार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे अपनी ही शिवसेना में सत्ता परिवर्तन को नहीं रोक पाए। उन्होंने कहा, “पहली बात तो यह है कि उद्धव ठाकरे अपनी शिवसेना में रिजीम चेंज नहीं रोक पाए। वे अब किस दूसरे रिजीम चेंज की बात कर रहे हैं, मुझे नहीं पता।” फडणवीस ने शिवसेना में 2022 में हुए बगावत का जिक्र करते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी ने जब हिंदुत्व और शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के विचारों को छोड़ दिया, तब बालासाहेब के विचारों पर चलने की इच्छा रखने वाले लोगों ने असली शिवसेना बनाई 'सड़क पर नहीं, चुनाव के जरिए होगा फैसला' मुख्यमंत्री फडणवीस ने दो टूक शब्दों में कहा कि संविधान को चुनौती देना बंद किया जाना चाहिए। देश में फैसले संसद और संविधान के दायरे में होंगे, सड़कों पर नहीं। लोकतंत्र में चुनाव के जरिए निर्णय होता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "यदि कोई नेपाल और बांग्लादेश की तरह भारत के संविधान को नकारने का सपना देख रहा है, तो वे भूल जाएं। भारत में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिया गया ऐसा मजबूत संविधान है, जो ऐसे सभी मंसूबों को खत्म कर देगा।" उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा, अभी नरेंद्र मोदी की सरकार है और वह फिर से चुनी जाएगी। उद्धव ठाकरे ने किया था 'रिजीम चेंज' का समर्थन इससे पहले शनिवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि यदि सरकार लोगों से मतदान के जरिए अपनी राय व्यक्त करने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार छीन रही है, तो ऐसी सरकार को बदलने की जरूरत है। ठाकरे ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के ‘रिजीम चेंज’ संबंधी बयान का समर्थन करते हुए कहा था कि विपक्ष सत्ता परिवर्तन के लिए आवाज उठा रहा है। अखिल भारतीय मराठी पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए ठाकरे ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा था, “जो लोग राम को लाने का दावा करते हैं, वे आज कॉकरोच से डरते हैं।” प्रशांत भूषण के बयान पर गरमाई सियासत वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में सत्ता परिवर्तन को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में किसी सरकार के प्रति असंतोष व्यक्त करना अपराध नहीं है। भूषण ने यह भी कहा था कि फिलहाल संघर्ष का उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है, लेकिन यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बर्बरता जारी रहती है, तो सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा हो सकती है। इन बयानों के बाद भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। जहां विपक्ष मतदान और विरोध प्रदर्शन के अधिकारों का मुद्दा उठा रहा है, वहीं फडणवीस ने चुनाव और संविधान को सरकार बदलने का लोकतांत्रिक माध्यम बताया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय का दौरा किया और संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की। हालांकि इस बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फडणवीस का नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के समर्थन में विभिन्न सभाओं को संबोधित करने का कार्यक्रम भी है। इससे पहले वे नागपुर के महाल क्षेत्र स्थित संघ मुख्यालय पहुंचे थे। 23 अक्टूबर को पांच MLC सीटों पर चुनाव महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) की पांच सीटों के लिए 23 अक्टूबर को द्विवार्षिक चुनाव होना है। इनमें तीन स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं। महाराष्ट्र विधान परिषद में कुल 78 सीटें हैं। इन चुनावों के मद्देनजर राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।  

गिद्धों के संरक्षण की बड़ी पहल, बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में खुलेगा नया केंद्र

 बेतिया  वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में बाघ, तेंदुआ, हिरण और गौर के साथ अब गिद्धों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियों वाले रिजर्व में संकटग्रस्त गिद्धों के संरक्षण और संवर्धन के लिए गोनौली वन प्रक्षेत्र में पहल शुरू हुई है। इसके तहत उनकी सुरक्षा, अनुकूल वातावरण तैयार करने और संख्या बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। वीटीआर प्रशासन के अनुसार, फिलहाल गिद्धों के घोंसले मुख्य रूप से कोर क्षेत्र में पाए जा रहे हैं। संरक्षण के प्रयास सफल रहे तो आने वाले चार-पांच वर्षों में बफर क्षेत्र में भी उनकी मौजूदगी बढ़ने की उम्मीद है। इस काम में वीटीआर के फील्ड बायोलाजिस्ट और पशु चिकित्सक की भूमिका महत्वपूर्ण है। मृत वन्यजीवों के अवशेषों पर नजर गिद्धों के अस्तित्व को सुरक्षित रखने के लिए उनके भोजन की उपलब्धता और गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पहले पशुओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कुछ प्रतिबंधित दवाओं के कारण गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसी दवाओं के अवशेष वाले मृत पशुओं को खाने से गिद्धों के लिए गंभीर खतरा पैदा हुआ। इसे देखते हुए वीटीआर में गिद्धों को प्राकृतिक रूप से मृत वन्यजीवों के शव उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर है। बाहरी पशुओं के शवों और अवशेषों पर भी निगरानी रखी जा रही है, ताकि गिद्धों को जहरीले खाद्य पदार्थों से बचाया जा सके। देश में अब तक आठ संरक्षण केंद्र वीटीआर के अलावा देश में गिद्ध संरक्षण केंद्र हरियाणा के पिंजौर, पश्चिम बंगाल के राजाभातखावा, असम के रानी, मध्य प्रदेश के केरवा, गुजरात के सक्करबाग चिड़ियाघर और जूनागढ़, ओडिशा के नंदनकानन चिड़ियाघर, भुवनेश्वर, तेलंगना के नेहरू प्राणि उद्यान, हैदराबाद और झारखंड के मुटा, रांची में स्थापित हैं। वीटीआर देश का नौवां गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र बनेगा। वीटीआर में गिद्धों के संरक्षण पर काम किया जा रहा है। पहले चरण में उनकी संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान है। फिर आगे की पहल होगी। -गौरव ओझा, क्षेत्र निदेशक, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व

बिहार के भागलपुर को मिलेगी बड़ी सौगात, डिजिटल तारामंडल के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू

भागलपुर  Bhagalpur Digital Planetarium: भागलपुर में शिक्षा, विज्ञान, शोध और नवाचार को नई ऊंचाई देने के लिए सरकार की ओर से ऐतिहासिक पहल की गई है। रेशमी नगरी में अब लोग अपनी आंखों से ब्रह्मांड के रहस्यमयी दृश्यों का सजीव नजारा देख सकेंगे। शहर में अत्याधुनिक 'डिजिटल तारामंडल सह स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी एजुकेशन सेंटर' स्थापित करने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। बिहार सरकार का विज्ञान, प्रावैधिकी व तकनीकी शिक्षा विभाग इस भव्य केंद्र का निर्माण कराएगा। जमीन चिह्नित कर विभाग को हस्तांतरित होते ही निर्माण कार्य धरातल पर उतरेगा। इस केंद्र की स्थापना को भागलपुर ही नहीं, बल्कि पूरे अंग क्षेत्र के शैक्षणिक और पर्यटन परिदृश्य में मील का पत्थर माना जा रहा है। इस संबंध में विज्ञान, प्रावैधिकी व तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव हिमांशु शर्मा ने प्रमंडलीय आयुक्त एवं जिलाधिकारी को आधिकारिक पत्र भेजकर दो एकड़ उपयुक्त भूमि चिह्नित कर विभाग के नाम हस्तांतरित करने का अनुरोध किया है। जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया तेज परियोजना को गति देने के लिए सदर अनुमंडल प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। सदर एसडीओ ने अनुमंडल के सभी अंचल अधिकारियों (सीओ) को पत्र जारी कर तारामंडल निर्माण के लिए न्यूनतम दो एकड़ उपयुक्त, हस्तांतरण योग्य, अतिक्रमण मुक्त और विवादरहित सरकारी भूमि का चयन करने का निर्देश दिया है। 7 दिनों में मांगी रिपोर्ट सभी अंचलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे जमीन के मौजा, थाना नंबर, खाता, खेसरा, रकबा, भूमि की प्रकृति और वर्तमान स्थिति की स्पष्ट जानकारी के साथ सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं, ताकि आगे की प्रक्रिया बिना देरी शुरू हो सके। क्या होता है डिजिटल तारामंडल? डिजिटल तारामंडल एक ऐसा अत्याधुनिक केंद्र होता है, जहां 3D या 4D डिजिटल प्रोजेक्टर, डोम स्क्रीन और अत्याधुनिक साउंड सिस्टम के जरिए ब्रह्मांड के दृश्यों का सजीव और रोमांचक अनुभव कराया जाता है। यहां दर्शक कृत्रिम रात के आकाश के नीचे बैठकर तारों, ग्रहों, आकाशगंगाओं (गैलेक्सी), ब्लैक होल और उपग्रहों की गति को बेहद करीब से देख और समझ सकते हैं। 3D/4D में दिखेगा ब्रह्मांड यह महज सिनेमा की तरह फिल्म देखने की जगह नहीं होती, बल्कि यहां खगोल विज्ञान (एस्ट्रोनॉमी) और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी प्रदर्शनियां, लाइव मॉडल्स, इंटरैक्टिव कियोस्क और कार्यशालाओं का आयोजन भी नियमित रूप से किया जाता है। स्थानीय रोजगार और पर्यटन को मिलेगी नई संजीवनी इस केंद्र की स्थापना से शहर के आर्थिक और पर्यटन ढांचे को नया विस्तार मिलेगा। छात्रों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे किताबों में पढ़ी जाने वाली खगोलीय घटनाओं जैसे चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण और सौरमंडल की जटिल संरचना को अपनी आंखों के सामने सजीव रूप में समझ सकेंगे। भागलपुर डिजिटल तारामंडल परियोजना     परियोजना का नाम: डिजिटल तारामंडल सह स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी एजुकेशन सेंटर     नोडल विभाग: विज्ञान, प्रावैधिकी व तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार सरकार     आवश्यक भूमि: न्यूनतम 02 एकड़ (विवादरहित व अतिक्रमण मुक्त सरकारी भूमि)     अंचल अधिकारियों को डेडलाइन: 7 दिनों के अंदर मौजा, खाता, खेसरा, रकबा और स्थिति की रिपोर्ट उपलब्ध कराना     प्रमुख तकनीकी सुविधाएं: 3D/4D डिजिटल प्रोजेक्टर, डोम स्क्रीन, सराउंड साउंड सिस्टम, इंटरैक्टिव कियोस्क, प्रदर्शनी गैलरी और टेलीस्कोप से रात्रि अवलोकन     लाभान्वित जिले: भागलपुर, बांका, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, खगड़िया और मधेपुरा यह तारामंडल जिले का प्रमुख आकर्षण केंद्र बनेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और होटल, परिवहन व पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा। यहां समय-समय पर स्पेस क्विज, साइंस फेयर और टेलीस्कोप के जरिए रात्रि-आकाश अवलोकन (नाइट स्काई वॉचिंग) जैसे वैज्ञानिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अंग व सीमांचल के छात्रों को नहीं जाना पड़ेगा पटना डिजिटल तारामंडल का सबसे बड़ा लाभ स्कूली छात्र-छात्राओं, विज्ञान प्रेमियों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को मिलेगा। अब तक भागलपुर, बांका, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, खगड़िया और मधेपुरा के बच्चों को खगोल व अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियां समझने के लिए पटना या कोलकाता जैसे महानगरों का रुख करना पड़ता था। भागलपुर में ही यह विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध होने से स्थानीय प्रतिभाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का शानदार मंच मिलेगा |

खोया-पनीर में लापरवाही पड़ी भारी, नियम तोड़ने पर खाद्य पदार्थ जब्त और नष्ट कर सकता है FSSAI

नई दिल्ली खोया, पनीर, मांस और मछली जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ( FSSAI ) ने गाइडलाइन जारी की है। इसमें खाद्य कारोबारियों को इन उत्पादों की खरीद, भंडारण और ढुलाई से लेकर ग्राहकों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में निर्धारित तापमान बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण ने साफ-सफाई, सुरक्षित पैकेजिंग और खाद्य पदार्थों को दूषित होने से बचाने पर भी जोर दिया है। एडवाइजरी में कही गई ये बात एडवाइजरी में कहा है कि खोया, पनीर, मांस और मछली जैसे खाद्य पदार्थों को उचित तापमान पर नहीं रखने से उनमें सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं और वे जल्दी खराब हो सकते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों का गलत तरीके से भंडारण या परिवहन खाद्य सुरक्षा और लोगों की सेहत के लिए खतरा बन सकता है। खरीद से डिलीवरी तक तापमान का ध्यान जरूरी FSSAI के मुताबिक, खाद्य कारोबारियों को पूरी सप्लाई चेन में निर्धारित तापमान बनाए रखना होगा। इसमें सामान की खरीद या स्रोत से प्राप्त करने, भंडारण, परिवहन और वितरण के सभी चरण शामिल हैं। यानी सिर्फ दुकान या गोदाम में सामान को सही तरीके से रखना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि रास्ते में भी जरूरी तापमान बनाए रखना होगा। साफ और ढके वाहनों में ही ढुलाई गाइडलाइन में खाद्य पदार्थों को ले जाने के लिए साफ, ढके हुए और स्वच्छ वाहनों का इस्तेमाल करने को कहा गया है। कारोबारियों को ऐसे पैकेजिंग मटीरियल का उपयोग करना होगा जो खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने के लिए सुरक्षित हों। जूट की बोरियों या दूसरे ऐसे कवर में खाद्य पदार्थों को पैक करने या ले जाने से बचना होगा जो उनकी सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। धूल, नमी और कीड़ों से बचाना होगा खाद्य पदार्थों को भंडारण, लोडिंग, अनलोडिंग और परिवहन के दौरान धूल, नमी, कीड़ों, भौतिक नुकसान और दूसरे खाद्य पदार्थों से होने वाले संभावित संक्रमण से बचाना होगा। कारोबारियों को सामान की खेप और उससे जुड़े बिलों या अन्य दस्तावेजों का उचित रिकॉर्ड भी रखना होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उत्पाद की जानकारी और उसकी सप्लाई चेन का पता लगाया जा सके। नियम तोड़ने पर जब्ती और नष्ट करने की कार्रवाई संभव FSSAI ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों, भारतीय रेलवे और अपने क्षेत्रीय निदेशकों को निर्देश दिया है कि वे निरीक्षण और परिवहन की जांच के दौरान नियमों के पालन पर कड़ी निगरानी रखें। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। एडवाइजरी में उल्लंघन के मामलों में खाद्य पदार्थों को जब्त करने और नष्ट करने जैसी कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है।  

रूसी तेल खरीदने पर भारत पर टैरिफ का खतरा, मार्को रूबियो बोले- रातोंरात निर्भरता खत्म करना मुश्किल

वाशिंगटन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और अन्य देशों पर भारी टैरिफ थोपने से पहले 60 दिनों का समय लेकर इसके वैश्विक और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करना चाहते हैं। उज्बेकिस्तान और भारत यात्रा पर रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि भारत जैसे अहम साझेदार देश के लिए रातों-रात रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता खत्म करना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर का 60 दिन अध्ययन करेंगे ट्रंप रुबियो के अनुसार, प्रस्तावित कानून केवल रूस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रूस से ऊर्जा खरीदने वाले भारत जैसे देशों पर भी टैरिफ लगाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति यह समझना चाहते हैं कि इन कदमों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और खुद अमेरिका पर क्या होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट के तहत प्रतिबंधों और टैरिफ पर अस्थायी छूट दी है। भारत की स्थिति को समझना जरूरी विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति पहले से ही दबाव में है, चाहे वह अमेरिका-ईरान तनाव हो, सऊदी अरब पर हूती हमले हों या रूस-यूक्रेन युद्ध। इन कारणों से वैश्विक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। रुबियो ने कहा कि भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने की कोशिश की है, लेकिन वह अब भी रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात करता है। भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार और सहयोगी भी है, इसलिए कोई भी सख्त कदम उठाने से पहले सही संतुलन बनाना आवश्यक है। रूस से कच्चा तेल क्यों खरीदता है भारत? फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए, जिसके बाद मॉस्को ने एशियाई देशों को भारी छूट पर कच्चा तेल देना शुरू किया। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता भारत, युद्ध से पहले रूस से 2% से भी कम तेल खरीदता था। लेकिन सस्ती दरों के चलते भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से खरीद बढ़ाई, जिससे रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया। पिछले महीने भी भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 35% रही। अमेरिकी कानून पर भारत का रुख अमेरिकी कांग्रेस में इस विधेयक के पारित होने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि वह अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत ने दो टूक कहा था कि वह बाजार की परिस्थितियों और स्रोतों के विविधीकरण के आधार पर फैसले लेता रहेगा। साथ ही, भारत ने अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह बात साफ कर दी है कि वह अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।

पाकिस्तान के डेरा इस्माइल खान में रामलीला मंदिर पर लगा ताला, हिंदू समुदाय ने जताया विरोध

खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत स्थित डेरा इस्माइल खान के रहीम बाजार में स्थित ऐतिहासिक 'राम लीला मंदिर' को स्थानीय प्रशासन ने शनिवार को ताला लगाकर पूरी तरह सील कर दिया है। मंदिर की ऐतिहासिक इमारत को ध्वस्त कर वहां कमर्शियल प्लाजा बनाने की कथित साजिश के सामने आने के बाद नागरिक समाज और अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के कड़े विरोध के बाद प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ा है। ACP हामिद सिद्दीकी के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद मंदिर परिसर में जारी हर तरह के निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। तोड़फोड़ और कमर्शियल प्लाजा के खिलाफ नागरिक समाज का विरोध मंदिर को ध्वस्त कर व्यापारिक परिसर में बदलने की कोशिशों की खबर मिलने के बाद स्थानीय नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और हिंदू समुदाय के नेताओं की एक आपातकालीन संयुक्त बैठक सुहैल अहमद आजमी (स्थानीय नागरिक समाज संगठन के अध्यक्ष) के कार्यालय में की गई। इस बैठक में पूर्व प्रांतीय असेंबली सदस्य (MPA) और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधि किशोर कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद नौमान सहित नागरिक समाज के कई नेता शामिल हुए। बैठक में शामिल नेताओं ने मंदिर की जमीन को अवैध तरीके से कमर्शियल प्लाजा के लिए आवंटित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और पाकिस्तानी सांसदों से इस मामले को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में उठाने की अपील की। 400 सांस्कृतिक विरासत इमारतों में शामिल है राम लीला मंदिर बैठक में वक्ताओं ने राम लीला मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर जोर देते हुए बताया कि यह ऐतिहासिक मंदिर डेरा इस्माइल खान की उन लगभग 400 ऐतिहासिक इमारतों में शामिल है, जिन्हें 'इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड' की ओर से सांस्कृतिक विरासत संपत्ति के रूप में शामिल किया गया है। नागरिक समाज ने चेतावनी दी कि ऐतिहासिक धरोहरों को ध्वस्त कर व्यापारिक परिसरों में तब्दील करने से शहर की सदियों पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान पूरी तरह मिट जाएगी। नागरिक समाज, व्यापारिक समुदाय, साहित्यिक हलकों और विरासत संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर ऐतिहासिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध करने का संकल्प लिया। अधिकारियों की शक्तियों और कानूनी वैधता पर सवाल नागरिक समाज और हिंदू नेताओं ने सवाल उठाया कि संबंधित अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर मंदिर की जमीन पर कमर्शियल प्लाजा निर्माण की अनुमति कैसे दे दी। प्रतिभागियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जिला प्रशासन, नेशनल असेंबली के अध्यक्ष, पुरातत्व विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायत दर्ज कराई जाएगी।

FPI Sell-Off: विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से दूरी, 2026 में अब तक ₹3.12 लाख करोड़ की निकासी का दावा

नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) से विदेशी निवेशकों का मूड लगातार खराब चल रहा है और इसका अंदाजा एफपीआई की बिकवाली (FPIs Sell Off) के बढ़ते आंकड़े को देखकर लगाया जा सकता है. सितंबर महीने में तगड़ी निकासी के बाद अक्टूबर में भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इंडियन इक्विटी से 52000 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल लिए हैं और ये आंकड़ा पूरे सितंबर महीने में की गई बिकवाली के पार निकल गया है.   लगातार दूसरे महीने दनादन बिकवाली विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार के पैसे निकालने का ये लगातार दूसरा महीना है. पीटीआई की रिपोर्ट में डिपॉजिटरी के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि प्रतिकूल ग्लोबल परिस्थितियों के बीच अक्टूबर महीने में अब तक एफपीआई ने 52,100 करोड़ रुपये की बिकवाली की है. इससे पहले सितंबर महीने में भी एफपीआई ने Indian Stock Market से 35,861 करोड़ रुपये की नेट निकासी की थी. 2026 में अब तक 2.13 लाख करोड़ साफ सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो सितंबर और अक्टूबर महीने में बिकवाली से पहले जुलाई और अगस्त महीने में विदेशी निवेशकों का निवेश आया था. एफपीआई ने भारतीय शेयरों में जुलाई महीने के दौरान 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जबकि इसके अगले अगस्त महीने में 29,631 करोड़ रुपये लगाए थे. हालांकि, इससे पहले लगातार बिकवाली का सिलसिला जारी थी. कुल मिलाकर हालिया बिकवाली के बाद एफपीआई के आउटफ्लो पर नजर डालें, तो 2026 में अब तक FPI ने भारतीय इक्विटी से 3.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो कि पूरे 2025 के दौरान निकाले गए 1.66 लाख करोड रुपये से कहीं ज्यादा है. FPIs का मूड क्यों है खराब? विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार के प्रति मूड खराब होने के पीछे के कारणों की बात करें, तो रिपोर्ट में इसके पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार जारी वृद्धि और मजबूत डॉलर को बताया गया है, जिनसे विदेशी निवेशकों के सेंटीमेंट पर निगेटिव इम्पैक्ट डाला है. हालांकि, 16 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने मामूली खरीदारी की थी. इसे लेकर जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटिजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 5.3 फीसदी से घटकर 5.08 फीसदी तक की मामूली गिरावट और डॉलर के मुकाबले रुपये का मजबूत होना एफपीआई के रुख में अस्थायी बदलाव के पीछे रहे. लंबे समय से शेयर मार्केट में भारी-उतार चढ़ाव का सामना कर रहे निवेशकों को बीते सप्ताह जोरदार फायदा हुआ. मार्केट में तेजी के बीच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2,256.94 अंक या 3.11 फीसदी की बढ़त में रहा, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 625.7 अंक या 2.77 फीसदी चढ़ा.