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ग्वालियर प्रदेश के एजुकेशन हब के रूप में नई पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर प्राचीन काल से ही वीरता, विद्वता और कला का शिखर रही है। ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही ग्वालियर प्रदेश के एजुकेशन हब के रूप में नई पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर है। एक विश्वविद्यालय शिक्षा का केन्द्र होने के साथ ही राष्ट्र निर्माण का भी स्थल होता है। ऋषि गालव के नाम पर बनने वाला यह संस्थान हमारी आने वाली पीढ़ियों को संस्कार, संस्कृति और कौशल से सुसज्जित कर राष्ट्र निर्माण का अग्रदूत बनाएगा। मध्य भारत शिक्षा समिति के संस्थापक श्रद्धेय सदाशिव गणेश गोखले का त्याग पूजनीय है, उन्होंने 85 वर्ष पहले 21 जुलाई 1941 को इस समिति नींव रख पराधीनता के कठिन काल में शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प लिया। एक स्कूल से शुरू हुआ यह सफर चार महाविद्यालयों, पांच विद्यालयों और एक खेल अकादमी तक पहुंचा। वर्तमान में विभिन्न संस्थाओं में 5 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। ऋषि गालव विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परम्परा के साथ आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी की शिक्षा भी छात्रों को मिलेगी। इसका लक्ष्य ऐसा नागरिक तैयार करना है, जो ज्ञानवान, चरित्रवान, नवाचारी और समाज के लिए उत्तरदायी हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों में योग्यता, दक्षता और चरित्र निर्माण पर दिया जा रहा है विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण, कंस वध के बाद शिक्षा ग्रहण करने उज्जैन पधारे और इस दौरान उन्होंने सुदामा से मित्रता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की। यह इस बात का संकेत है कि गरीब-अमीर के बीच कोई परदा नहीं होना चाहिए। इसी समय हमें द्रोणाचार्य और द्रुपद के संदर्भ से शिक्षा के दुरूपयोग का उदाहरण भी प्राप्त होता है, परंतु नालंदा, तक्षशिला विश्वविद्यालयों के माध्यम से मानवता के मूल्यों के प्रसार का उदाहरण भी भारतीय ज्ञान परम्परा में विद्यमान है। इसी भाव का अनुसरण करते हुए प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों में योग्यता, दक्षता और चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का संदर्भ देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश की सीमाओं तक राष्ट्रवादी विचारों का विस्तार लगातार जारी है। काले कोट के स्थान पर साफे के साथ भारतीय वेशभूषा में दीक्षांत समारोह की परम्परा की गई आरंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऋषि गालव विश्वविद्यालय सरकार और समाज के साझा प्रयासों का एक सजीव उदाहरण बनेगा। राष्ट्रवादी विचारों को समर्पित इस विश्वविद्यालय की पूर्ण गौरव और गरिमा के साथ स्थापना में राज्य सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी पूंजी इै, इसे आधार मानकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं। इस क्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति को कुलगुरू का सम्मानजनक और श्रद्धापूर्ण संबोधन प्रदान किया गया है। संपूर्ण प्रदेश में गुरू पूर्णिमा का आयोजन भी इसी क्रम का नवाचार है। काले कोट के स्थान पर साफे के साथ भारतीय वेशभूषा में दीक्षांत समारोह की परम्परा आरंभ की गई। पहले कई-कई वर्षों तक दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं होते थे, अब हर साल हर विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह किए जा रहे हैं। तात्या टोपे, क्रांतिसूर्य टंट्या भील और रानी अवंतीबाई लोधी के नाम पर आरंभ किए गए विश्वविद्यालय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुना में तात्या टोपे विश्वविद्यालय और खरगोन में क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय स्थापित किया गया। सागर में केन्द्रीय विश्वविद्यालय पहले से ही था, इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय आरंभ किया गया। प्रदेश के सभी 55 जिलों में पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना कर इन्हें नई शिक्षा नीति के अनुरूप बहुसंकाय कॉलेजों के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य भारत शिक्षा समिति को ऋषि गालव की गौरवशाली परम्परा को विश्वविद्यालय के रूप में पुनर्जीवित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अगले साल गुरूपूर्णिमा तक आरंभ करने का संकल्प पूर्ण हो यही कामना है। मनुष्य के साथ परिवेष का विकास ही वास्तविक विकास है-  सुरेश सोनी मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य  सुरेश सोनी ने कहा कि सड़क, भवन व अन्य अधोसंरचनाओं का निर्माण एवं आविष्कार केवल परिवेश का विकास है। वास्तविक विकास वह होता है जिसमें मनुष्य के साथ परिवेश का भी विकास हो। मनुष्य अधिक संवेदनशील, विचारवान व व्यापक दृष्टिकोण वाले हों। इसी पुनीत उद्देश्य को लेकर मध्यभारत शिक्षा समिति द्वारा ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। विश्वविद्यालय द्वारा रोजगारपरक शिक्षा के साथ-साथ मनुष्य के चरित्र निर्माण पर भी जोर दिया जायेगा। साथ ही भरोसा जताया कि यहाँ पढ़कर निकले विद्यार्थी नालंदा व तक्षशिला विश्वविद्यालय की तरह विश्वभर में भारतीय ज्ञान का परचम लहरायेंगे। उन्होंने कहा कि खुशी की बात है सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति भी इसी भावना के साथ बनाई गई है कि ज्ञान, चरित्र व संस्कार के साथ युवा अपने पैरों पर खड़े हों। साथ ही दूसरों को भी रोजगार व नौकरी देने वाले बनें।  सोनी ने उपकरण एवं गैजेट्स इत्यादि पर अत्यधिक निर्भरता पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि चेतन व अचेतन के समन्वय से हम आगे बढ़ेंगे तो अच्छा परिवार, अच्छा समाज व अच्छा देश तैयार कर सकेंगे। साथ ही पर्यावरण जैसी समस्याओं के समाधान का मार्ग भी हम निकाल सकेंगे। उन्होंने कहा हमारी दृष्टि ऐसी होना चाहिए जो आधुनिकता व मूल परंपरा के साथ समन्वय बनाकर विकास का मार्ग प्रशस्त करती हो।  सोनी ने कहा कि एआई का उपयोग तो करें पर अपने बौद्धिक कौशल को कम न होने दें। केवल सैन्य शक्ति की बदौलत देश महान नहीं बनते :  अशोक पाण्डे कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मध्यभारत प्रांत के संघचालक  अशोक पाण्डे ने कहा कोई भी देश केवल सैन्य शक्ति की बदौलत महान नहीं बन सकता। महान बनने के लिए शिक्षा व संस्कारों की जरूरत होती है। ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना इसी भाव के साथ की जा रही है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य श्रेष्ठतम जीवन मूल्यों की स्थापना है : उच्च शिक्षा मंत्री  परमार उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि श्रेष्ठतम जीवन मूल्यों को स्थापित करना शिक्षा का मुख्य उद्देश्य होता है। … Read more

सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर निवेश क्षेत्र तक विकसित होगा एकीकृत इंडस्ट्रियल कॉरिडोर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 3 मई को इन्दौर में इस परियोजना के प्रथम चरण का भूमि-पूजन करेंगे। यह पहल प्रदेश में अधोसंरचना, उद्योग और शहरी विकास को एकीकृत रूप में आगे बढ़ाने की रणनीति को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है। मध्यप्रदेश को सुदृढ़ औद्योगिक आधार और आदर्श निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर (IPEC) महत्वपूर्ण साबित होगा। कार्यक्रम में शॉर्ट फिल्म के माध्यम से कॉरिडोर के स्वरूप, संभावनाओं और क्षेत्रीय प्रभावों को दिखाया जाएगा। यह कॉरिडोर इन्दौर एयरपोर्ट के समीप स्थित सुपर कॉरिडोर को पीथमपुर निवेश क्षेत्र से जोड़ते हुए एक सुव्यवस्थित औद्योगिक धुरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से न केवल औद्योगिक इकाइयों को बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स, परिवहन और बाजार तक पहुंच भी अधिक प्रभावी बनेगी। यह परियोजना इन्दौर क्षेत्र में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स को एकीकृत कर निवेश के लिए एक संगठित और सक्षम वातावरण तैयार करेगी। इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के माध्यम से पीथमपुर निवेश क्षेत्र, लॉजिस्टिक हब, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को एकीकृत कनेक्टिविटी प्राप्त होगी। इससे उत्पादन और वितरण तंत्र अधिक प्रभावी बनेगा और उद्योगों के लिए संचालन की प्रक्रिया सरल होगी। यह परियोजना प्रदेश में निवेश प्रवाह को सुदृढ़ करने और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होगी। परियोजना की प्रमुख विशेषताएं परियोजना के अंतर्गत सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर निवेश क्षेत्र तक लगभग 20.28 किलोमीटर लंबाई का मार्ग विकसित किया जा रहा है। लगभग 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में नियोजित विकास का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए कुल 2360 करोड़ रु. की लागत निर्धारित की गई है। अधोसंरचना के तहत 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क तथा उसके दोनों ओर विकसित होने वाला बफर ज़ोन इस कॉरिडोर को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विस्तार योग्य बनाएगा। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-47 और राष्ट्रीय राजमार्ग-52 के बीच प्रभावी कनेक्टिविटी स्थापित करते हुए औद्योगिक परिवहन को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाएगा। साथ ही, यह परियोजना इन्दौर क्षेत्र में संतुलित शहरीकरण और अधोसंरचना आधारित विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।  

जन-जन को जोड़ा जाए जल संरचनाओं के संरक्षण से 25 मई को गंगा दशहरा पर करें सभी श्रमदान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 27 अप्रैल को विधानसभा में प्रस्तुत नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने के संकल्प के लिए मंत्रि-परिषद की महिला सदस्यों ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अभिनंदन किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके, महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, नगरीय‍विकास एवं आवास राज्य मंत्री मती प्रतिमा बागरी तथा पंचायत और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री मती राधा सिंह ने पुष्प-गुच्छ भेंटकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया। प्रदेश में बढ़ा गेहूं उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश में गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया। मध्यम और बड़े किसानों को स्लॉट बुकिंग की सुविधा दी गई। इस श्रेणी के 1 लाख 60 हजार 261 किसानों ने स्लॉट बुक किए हैं। स्लॉट बुकिंग की अवधि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई तक की गई है। प्रदेश में अब तक कुल 9.49 लाख स्लॉट बुक हुए हैं जिनमें 4.49 लाख किसानों ने अपनी फसल बेची है। अब तक कुल 19.31 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन हो चुका है, जिसके लिए 2 हजार 547 करोड़ रूपए की राशि भुगतान की जा चुकी है। प्रत्येक शनिवार के अवकाश दिवस में भी स्लॉट बुकिंग और उपार्जन जारी रहेगा। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 प्रति केन्द्र की गई है। किसान को तहसील के स्थान पर जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा दी गई। किसानों को राहत देते हुए एफए क्यू मापदण्ड को शिथिल करते हुए चमकविहीन गेहूं की सीमा 50% तक, सूकड़े दाने की सीमा 06% से बढ़ाकर 10% तक और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा बढ़ाकर 06% तक की गई। जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक, स्वयंसेवी संस्थायें जल संरक्षण में करें सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 19 मार्च से प्रारंभ जल गंगा संवर्धन अभियान 30 जून तक चलेगा। सभी जिलों में कई गतिविधियां और नवाचार हो रहें है। इसी अभियान के मध्य 25 मई को गंगा दशहरा है। इस दिन पूरे प्रदेश में एक साथ जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत विभिन्न गतिविधियां वृहद स्तर पर आयोजित की जायें। अधिक से अधिक व्यक्ति अपने आस-पास की जल संरचनाओं की बेहतरी के लिए श्रमदान करें। जन-जन को जल संरचनाओं के संरक्षण से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देशित किया अभियान नगरीय एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एक साथ गतिविधियां आयोजित की जायें। जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक, स्वयंसेवी संस्थायें, स्व-सहायता समूह, व्यापारी संगठन एवं अन्य शासकीय, अशासकीय संस्थाओं को भी जोड़ा जाये। मंत्रीगण अपने-अपने प्रभार के जिलों में अभी से ही इस कार्यक्रम की तैयारी की रूपरेखा बनाएं। मंत्रीगण अपने-अपने क्षेत्र में नागरिकों को जनगणना में भाग लेने के लिए करें प्रोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 26 अप्रैल को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 133वें संस्करण में भारत की जनगणना 2027 पर केन्द्रित चर्चा की। इस बार जनगणना का अनुभव अलग रहने वाला है क्योंकि यह पूरी तरह से डिजिटल है। गणना करने वाले कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप है। नागरिक खुद भी अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकते हैं। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा जनगणना का महत्व बताते हुये जनगणना की प्रक्रिया में सभी के भाग लेने का आव्हान किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से अपने-अपने क्षेत्र में नागरिकों को जनगणना के महत्व के बारे में जागरूक करते हुए उन्हें प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण परिणामोन्मुख शिक्षा का मॉडल बन रहें हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य शासन की अपेक्षाओं के अनुरूप सांदीपनि विद्यालयों से बेहतर परिणाम आने लगे हैं। हाल के ही दसवी एवं बारहवीं बोर्ड परीक्षा के नतीजों में इन विद्यालयों के 58 छात्र-छात्राओं ने मेरिट में स्थान बनाया। दसवीं की मेरिट सूची में 41 विद्यार्थी सांदीपनि विद्यालयों से हैं वही बारहवीं में 17 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। विगत 4 वर्षों में सांदीपनि विद्यालयों में कक्षा दसवीं में उत्तीर्ण विद्यालयों का प्रतिशत 68 से बढ़कर 88 हो गया। कक्षा बारहवीं का परिणाम इस अवधि में बढ़कर 59 प्रतिशत से 89 प्रतिशत हो गया। सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण परिणामोन्मुख शिक्षा का मॉडल बन रहें हैं। कान्हा में आए जंगली भैसे मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वन्य जीव संरक्षण और जैव विविधता सहयोग का नया केन्द्र बन गया है। प्रदेश में एक सदी से अधिक समय से जंगली भैस प्रजाति विलुप्त हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि आज 28 अप्रैल को कान्हा नेशनल पार्क बालाघाट के सूपखार में जंगली भैंसे का पुनर्स्थापन किया गया। चार जंगली भैंसों को उनके नये प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। यह जंगली भैंसें असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाये गये हैं। मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्य जीवों के आदान-प्रदान का नया अध्याय शुरू हो रहा है। असम से गैडें/रायनों के 2 जोड़े लाने की भी योजना है। जंगली भैंसों के आने से मध्यप्रदेश में जैव विविधता का नया आयाम जुड़ा है।  

लोधी समाज वीरता और‍किसान योद्धा परंपरा का प्रतीक

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नई ऊर्जा दे रहा है। आज राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि पर शौर्य यात्रा के माध्यम से हम, भूले-बिसरे उन नायकों को समाज के सामने ला रहे हैं, जिन्होंने अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ सबसे पहले संगठित विद्रोह किया। राजा हिरदेशाह को नर्मदा टाइगर के नाम से भी जाना जाता है। वे 1842 की क्रांति के महानायक थे, जिनकी शौर्य गाथा आज भी बुंदेला, लोधी और जनजातीय समाज के नाटकों, लोक गीतों और लाखों-लाख हृदय में जीवित है। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी और आदर्श है। समाज के महापुरुषों के संघर्ष को भी याद करने की आवश्यकता है। जो संघर्षों से लड़ना जानता है, समाज उसका अभिनंदन करता है। राज्य शासन राजा हिरदेशाह के संघर्ष और देश की आजादी में उनके योगदान पर शोध कराएगी। इतिहास के गौरवशाली पृष्ठ पुन: खुलने चाहिए। राजा हिरदेशाह के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाएगा। नर्मदा के किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से एक तीर्थ स्थल का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1842 की क्रांति के महानायक राजा हिरदेशाह लोधी की स्मृति में जंबूरी मैदान पर हुए ऐतिहासिक आयोजन और शौर्य यात्रा को संबोधित किया। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह, सांसद  फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद  दर्शन सिंह चौधरी तथा राजा हिरदेशाह लोधी और गोंड राजा नरवर शाह के वंशज उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा टाइगर राजा हिरदेशाह पुस्तक का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1842 की क्रांति के नायक नर्मदा टाइगर राजा हिरदेशाह पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का राजा हिरदेशाह पर शोध और उनके संघर्ष को पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा के लिए समाज के प्रतिनिधियों द्वारा अभिवादन किया गया। राज्य सरकार प्रदेश की विरासत और महान हस्तियों के सम्मान में कर रही है निरंतर गतिविधियां संचालित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोधी समाज वीरता और‍किसान योद्धा परंपरा का प्रतीक है। अंग्रेजों की बढ़ती दखलअंदाजी, करों के भारी बोझ और किसानों के शोषण ने राजा हिरदेशाह को विद्रोह के लिए प्रेरित किया। राजा हिरदेशाह की कहानी केवल युद्ध की नहीं, बल्कि एकता, साहस और देशभक्ति की गाथा है। आज के युवाओं के लिए उनका स्पष्ट संदेश है कि अत्याचार के खिलाफ खड़े होना, हर भारतीय का कर्तव्य है। राज्य सरकार प्रदेश की विरासत और महान हस्तियों के सम्मान में निरंतर गतिविधियां संचालित कर रही है। रानी अवंतीबाई के नाम पर सागर में राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। राज्य सरकार द्वारा सनातन संस्कृति के सभी तीज-त्यौहार धूमधाम से मनाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कृषक कल्याण वर्ष मनाने की पहल की है। महान सम्राट विक्रमादित्य पर भी शोध संस्थान बनाया गया है। प्रदेश सरकार सांस्कृतिक पुनरोत्थान के लिए संकल्पित है। इसीलिए प्रत्येक नगरीय निकाय में सर्व सुविधायुक्त भव्य गीता भवन बनाए जा रहे हैं। सभी जनपदों में एक-एक वृंदावन ग्राम भी तैयार किए जा रहे हैं। समाज के युवाओं को साहसी, सामर्थ्यवान, शिक्षित और संस्कारवान बनने की आवश्यकता है पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि यह कार्यक्रम अपने पुरखों के बलिदान को स्मरण करने का है। आज सामाजिक जीवन में शिक्षित होने के साथ संस्कारित बनने का संकल्प भी लेना चाहिए। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने देश की आजादी के गुमनाम नायकों को याद करने का आह्वान किया था। आज सवाल यह नहीं है कि 1857 की क्रांति बड़ी थी या 1842 की। राजा हिरदेशाह के द्वारा 1842 में आरंभ की गई बुंदेली क्रांति से 1942 भारत छोड़ो आंदोलन तक का कालखंड भारत के ऐतिहासिक आंदोलन में सबसे महत्वपूर्ण 100 वर्ष हैं। राजा हिरदेशाह ने 1842 से 1858 तक लगातार ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। आज राजा मेहरबान सिंह को भी याद करने का अवसर है, जिन्होंने कभी कोई लड़ाई नहीं हारी। यह आयोजन ऐसे वीरों के बलिदान को याद करने के लिए है। उनके परिवारों का सम्मान करने का दिन है। लोधी समाज सामर्थ्यवान हैं, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लिया, प्रश्न यह है कि वो पिछड़े कैसे हो गए। समाज के युवाओं को साहसी, सामर्थ्यवान, शिक्षित और संस्कारवान बनने की आवश्यकता है। आज हम सभी राजा हिरदेशाह लोधी के बलिदान को नमन कर रहे हैं। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि राजा हिरदेशाह लोधी ने 1857 की क्रांति से पहले आजादी के लिए 1842 में क्रांति का बिगुल फूंका था। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। राज्य सरकार सभी शहीदों के बलिदान को नमन कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से राजा हिरदेशाह लोधी के बलिदान और उनके कार्यों को पाठ्यक्रम में शामिल कराने का अनुरोध किया। नर्मदा के तट से आजादी की क्रांति का पहला बिगुल फूंका गया था पूज्य दादा गुरु ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में पहली क्रांति नर्मदा के तट पर 1842 में शुरू हुई थी, यह तथ्य हम सबको गौरवान्वित करने वाला है। राजा हिरदेशाह ने इसका नेतृत्व किया और अपना बलिदान दिया। इस आयोजन में जहां धैर्य है वहीं धर्म भी है। शौर्य दिवस के अवसर पर हमें सनातन धर्म के मार्ग पर चलते हुए अखंड भारत के निर्माण में योगदान का संकल्प लेना है। राजा हिरदेशाह ने बुंदेलों, जनजातियों और सकल समाज को एकजुट कर राष्ट्र के लिए लड़ने को तैयार किया था। नर्मदा के तट से आजादी की क्रांति का पहला बिगुल फूंका गया था। प्रदेश में रानी अवंतीबाई, वीरांगना दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं ने अपने राज्य की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करना आवश्यक लोधी-लोधा समाज के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक  जालम सिंह पटेल ने कहा कि लोधी समाज के गौरव राजा हिरदेशाह ने ब्रिटिश शासन के कानूनों का विरोध करते हुए 1842 की क्रांति का नेतृत्व किया। इस संघर्ष में उनके करीब 12 भाई बलिदान हुए। उनकी पूरी संपत्ति राजसात कर ली गई थी। लोधी एक किसान और योद्धाओं का समाज है।  जालम सिंह पटेल ने कहा कि लोधी समाज ने नशे के खिलाफ मुहिम शुरू की है। उन्होंने युवाओं को इस मुहिम में सहयोग करने के … Read more

विद्यार्थी परिषद की पाठशाला से निकले स्व. केलकर जी की कार्य पद्धति का स्मरण किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की कार्यप्रणाली को अद्भुत और अनुकरणीय बताते हुए कहा कि यह संगठन केवल बातों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता को व्यवहार में उतारने का कार्य करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सिलेबस के साथ-साथ अपने सांस्कृतिक गौरव को भी समझें और देश के निर्माण में आगे बढ़कर काम करें। वे घंटाघर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्चरल एंड इंर्फोमेशन सेंटर गीता भवन में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शिल्पकार स्वर्गीय यशवंत राव केलकर की जन्मशती के अवसर पर विशेष कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. यशवंत राव केलकर को परिषद के वर्तमान स्वरूप की 'नींव का पत्थर' बताया, जिन्होंने संगठन को गढ़ने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने छात्र जीवन के संस्मरण साझा करते हुए बताया कि परिषद एक परिवार की तरह है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को सीख दी कि यदि हम छोटा बनकर काम करेंगे, तभी जीवन में बड़े लक्ष्य प्राप्त कर पाएंगे। विद्यार्थी आज का नागरिक है। विद्यार्थियों में जोश के साथ होश का संतुलन बनाये रखने के लिए इसमें शिक्षकों की भूमिका अतुलनीय है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा स्वामी विवेकानंद और माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ किया गया। वक्ताओं ने स्व. केलकर के जीवन दर्शन और संगठन की विशिष्ट कार्य पद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला। विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष  रघुराज किशोर तिवारी ने बताया कि आज विद्यार्थी परिषद विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है, जिसका श्रेय स्व. केलकर द्वारा विकसित की गई विशिष्ट कार्य पद्धति को जाता है। उन्होंने कहा कि स्व. केलकर केवल उपदेश नहीं देते थे, बल्कि 'जीवंत आदर्श' थे, जो गरीब विद्यार्थियों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते थे और स्वयं सहायता प्रदान करते थे। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि विद्यार्थी परिषद एक ऐसी कार्यशाला है जिसने समाज के हर क्षेत्र को नेतृत्व दिया है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह, सांसद मती सुमित्रा बाल्मिक, सांसद  आशीष दुबे, विधायक  अजय विश्नोई, डॉ. अभिलाष पांडे,  नीरज सिंह,  रत्नेश सोनकर,  राजकुमार पटेल,  अखिलेश जैन सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि मंत्री के निवास पर पहुंचकर वर-वधू को दिया आशीर्वाद

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुरैना में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंषाना के निवास पहुंचकर उनकी नातिनी आयुष्मति दीपिका (पुत्री स्वर्गीय भूरा सिंह कंषाना) एवं आयुष्मान यतेन्द्र (पुत्र राव राजेश्वर सिंह, निवासी सिरसौद दयेली, ग्वालियर) को विवाह अवसर पर आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवदंपति को शुभाशीष देते हुए उन्हें उपहार भी भेंट किए और उनके सुखद एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की। इस अवसर पर वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, सांसद शिव मंगल सिंह तोमर, महापौर श्रीमती शारदा सोलंकी सहित जनप्रतिनिधि एवं परिजन उपस्थित थे।  

पानी बचाना हमारी जरूरत भी है और जिम्मेदारी भी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से प्रदेश में जल संरक्षण को मिली नई गति राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुंचा मध्यप्रदेश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। पानी बचाना बेहद जरूरी है। यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी है, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के इस अनमोल वरदान से कभी भी कमी महसूस नहीं करें। इसके लिए हमें अपने वर्तमान जल स्रोतों के साथ सूख चुके जल स्रोतों को संरक्षित करना ही होगा। उन्होंने कहा कि पानी बचाने के लिए प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। सरकार और समाज के साझा प्रयासों से हो रहे इस अभियान में बीते एक माह में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है। प्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ ने अल्प समय में ही उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विगत 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हुआ यह अभियान जल संरक्षण, जल संरचनाओं के संवर्धन और जनभागीदारी का एक व्यापक जन-आंदोलन बनता जा रहा है। इस अभियान के प्रभाव से ही मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग सुधारकर अब तीसरे स्थान पर आ गया है। अभियान से पहले मध्यप्रदेश नेशनल रैंकिंग में छठवें स्थान पर था। राज्य सरकार द्वारा आगामी 30 जून तक चलाए जा रहे इस अभियान में 16 विभागों की 58 गतिविधियां नियत की गई हैं। इसके लिए लगभग 6 हजार 278 करोड़ रुपये का वित्तीय लक्ष्य तय किया गया है। इस अभियान में कुल 2 लाख 44 हजार से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों को चिन्हित कर लगभग 6 हजार 236 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्यों का क्रियान्वयन किया जा रहा है। अभियान की मॉनिटरिंग एकीकृत डैश बोर्ड से आयुक्त, मनरेगा ने बताया कि अभियान की एक ही प्लेटफार्म पर नियमित मॉनिटरिंग के लिए एक एकीकृत डैश बोर्ड तैयार किया गया है, जिससे सभी विभाग अपनी-अपनी विभागीय गतिविधियों की प्रगति दर्ज कर रहे हैं। इस डैश बोर्ड से जिलेवार रैंकिंग भी सुनिश्चित की जा रही है। इस डैश बोर्ड से प्रशासनिक एवं विभागीय पारदर्शिता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिल रहा है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। अभियान अंतर्गत 39 हज़ार 977 खेत तालाबों का निर्माण, 59 हज़ार 577 कूप-रीचार्ज संरचनाओं तथा 21 हज़ार 950 से अधिक पहले से निर्मित जल संरचनाओं को पुनर्जीवित भी किया गया है। इसके साथ ही अमृत सरोवरों के निर्माण और उनके उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। नगरीय क्षेत्रों में जल संरक्षण नगरीय क्षेत्रों में भी जल संरक्षण को लेकर व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा तालाब, कुएं और पुरानी बावड़ियों के संवर्धन, नालों की सफाई और सौंदर्यीकरण तथा रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना जैसे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त तेज़ गर्मी को देखते हुए नगरीय निकायों द्वारा विभिन्न स्थानों पर प्याऊ की स्थापना भी की गई है। म.प्र. जन अभियान परिषद चला रही जनजागरूकता गतिविधियाँ म.प्र. जन अभियान परिषद के माध्यम से राज्य में जल संरक्षण को लेकर व्यापक जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में 5 लाख 25 हजार से अधिक व्यक्तियों की सक्रिय सहभागिता दर्ज की गई। साथ ही प्रदेश के विभिन्न विकासखंडों में 2 हज़ार 682 जल मंदिर (प्याऊ) स्थापित किए गए हैं। स्कूलों में जागरूकता गतिविधियां स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भी इस अभियान में व्यापक तौर पर भागीदारी की जा रही है। राज्य के हजारों विद्यालयों में जल रैलियां, निबंध, पोस्टर प्रतियोगिताएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों और अभिभावकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया है। तकनीकी नवाचार अंतर्गत वॉटरशेड विकास कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऑनलाइन स्वीकृति और मोबाइल ऐप आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की गई है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो रही है। वन और पर्यावरण विभाग द्वारा भी जल संरक्षण के साथ पारिस्थितिकीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विभिन्न फील्ड गतिविधियां की जा रही हैं। नदियों के जल की गुणवत्ता का परीक्षण, जल संरचनाओं का निर्माण तथा पौधरोपण की तैयारी जैसे कार्य इसमें शामिल किए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा सतत् मॉनिटरिंग और नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। इससे धरातल पर मौजूद व्यावहारिक कमियों को दूर करने में भी मदद मिल रही है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से मध्यप्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में ठोस परिणाम मिलने शुरू हो गए है। मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल देश के दूसरे राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनती जा रही है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का रीवा में हुआ आत्मीय स्वागत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लखनऊ से विमान द्वारा रीवा एयरपोर्ट पहुंचे। रीवा एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत किया गया। रीवा एयरपोर्ट पर विधायक त्योंथर श्री सिद्धार्थ तिवारी, कमिश्नर बीएस जामोद, आईजी गौरव राजपूत, डीआईजी हेमंत सिंह चौहान, प्रभारी कलेक्टर सपना त्रिपाठी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मेहताब सिंह गुर्जर ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री रीवा में स्थानीय कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रीवा एयरपोर्ट से सुबह 10:05 बजे रीवा से तमिलनाडु के कोयंबटूर के लिए रवाना होंगे।  

मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं का हो रहा है निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

फिरोजिया ट्रॉफी विजेताओं के लिये अतिरिक्त पुरस्कार की घोषणा की फिरोजिया ट्रॉफी का फाइनल मैच देखा, खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। शासन का प्रयास है कि खिलाड़ियों को हर स्तर पर आधुनिक खेल संरचना, प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों। शासन के इन प्रयासों से मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाएं विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उज्जैन में भी विभिन्न खेल मैदानों में खेल व्यवस्थाओं का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। उज्जैन के क्षीर सागर मैदान को भी नगर निगम और खेल विभाग द्वारा विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को देर रात उज्जैन में फिरोजिया ट्रॉफी का फाइनल मैच देखा और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने इस अवसर पर फिरोजिया ट्रॉफी की विजेता टीम को रुपए 1 लाख और उप विजेता टीम को 51 हजार रुपए के अतिरिक्त नगद पुरस्कार की घोषणा भी की। फिरोजिया ट्रॉफी का आयोजन 12 अप्रैल से 19 अप्रैल तक उज्जैन के क्षीर सागर मैदान पर किया गया। फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों के बीच रोमांचक संघर्ष देखने को मिला, जिससे दर्शक अंत तक मैच का आनंद लेते रहे। सांसद श्री अनिल फिरोजिया ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का फिरोजिया ट्रॉफी में प्रत्येक वर्ष पधारने और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने पर आभार व्यक्त किया। फिरोजिया ट्रॉफी सांसद श्री अनिल फिरोजिया के पिता स्व. भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति में विगत 21 वर्षों से हर वर्ष आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार रुपए 5 लाख 51 हजार है और द्वितीय पुरस्कार 2 लाख 51 हजार रुपये है। प्रतियोगिता में इस वर्ष नारी शक्ति वंदन की भावना को साकार करते हुए महिला क्रिकेट मैच और मातृशक्ति सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, श्री रवि सोलंकी और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।  

पर्यटन को बढ़ावा: डॉ. मोहन यादव लॉन्च करेंगे हेली सेवा, ओरछा-चंदेरी सफर होगा आसान

भोपाल अब हवाई मार्ग से जुड़ेगा ओरछा और चंदेरी से भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश में पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को सुगम, सुरक्षित और आनंददायक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए रविवार, 19 अप्रैल को सुबह 10:45 बजे, राजधानी के स्टेट हैंगर से "पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा" के अंतर्गत नए सेक्टर (भोपाल-चंदेरी-ओरछा) का विधिवत शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस अवसर पर हेलीकॉप्टर को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे और यात्रियों को बोर्डिंग पास भी प्रदान करेंगे। धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा यह नया सेक्टर भोपाल को भगवान श्रीराम की राजनगरी ओरछा और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध चंदेरी से जोड़ेगी। इससे श्रद्धालु श्रीरामराजा मंदिर में सुगमता से दर्शन के लिये पहुँच सकेंगे और चंदेरी की सांस्कृतिक विरासत व प्रसिद्ध हस्तशिल्प (चंदेरी साड़ी) का अनुभव ले सकेंगे। एंड टू एंड सेवा का सप्ताह में 5 दिन होगा संचालन सेक्टर-2 अंतर्गत यह सेवा सप्ताह में 5 दिन (बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार) संचालित होगी। यात्रियों के लिए भोपाल से चंदेरी का किराया ₹5,500 और भोपाल से ओरछा का किराया ₹6,500 निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, ₹14,500 के विशेष पैकेज में टैक्सी, वीआईपी दर्शन और प्रसाद जैसी 'एंड-टू-एंड' सुविधाएं भी शामिल हैं। चंदेरी और ओरछा में पर्यटकों के लिए ₹3,500 में 'जॉय राइड' की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। सुविधा और सुरक्षा सर्वोपरि पीपीपी मॉडल पर संचालित इस सेवा में पर्यटकों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। यात्रा के लिए 6 सीटों वाले आधुनिक हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जा रहा है। गंतव्य पर होटल, भोजन और स्थानीय भ्रमण के लिए गाइड की व्यवस्था भी पूर्व निर्धारित रहेगी। बुकिंग के लिए पर्यटक www.flyola.in और IRCTC पोर्टल पर बुकिंग कर सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा मध्यप्रदेश स्थापना दिवस 1 नवंबर 2025 के अवसर पर पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा का शुभारंभ किया गया था। यह सेवा वर्तमान में आध्यात्मिक सेक्टर इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर के साथ वाइल्डलाइफ सेक्टर जबलपुर, कान्हा, बांधवगढ़, चित्रकूट और मैहर के बीच सफलतापूर्वक संचालित है। इस सेवा का अब तक 2 हजार 648 पर्यटकों और श्रद्धालुओं ने लाभ लिया है।