samacharsecretary.com

खोया-पनीर में लापरवाही पड़ी भारी, नियम तोड़ने पर खाद्य पदार्थ जब्त और नष्ट कर सकता है FSSAI

नई दिल्ली खोया, पनीर, मांस और मछली जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ( FSSAI ) ने गाइडलाइन जारी की है। इसमें खाद्य कारोबारियों को इन उत्पादों की खरीद, भंडारण और ढुलाई से लेकर ग्राहकों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में निर्धारित तापमान बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण ने साफ-सफाई, सुरक्षित पैकेजिंग और खाद्य पदार्थों को दूषित होने से बचाने पर भी जोर दिया है। एडवाइजरी में कही गई ये बात एडवाइजरी में कहा है कि खोया, पनीर, मांस और मछली जैसे खाद्य पदार्थों को उचित तापमान पर नहीं रखने से उनमें सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं और वे जल्दी खराब हो सकते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों का गलत तरीके से भंडारण या परिवहन खाद्य सुरक्षा और लोगों की सेहत के लिए खतरा बन सकता है। खरीद से डिलीवरी तक तापमान का ध्यान जरूरी FSSAI के मुताबिक, खाद्य कारोबारियों को पूरी सप्लाई चेन में निर्धारित तापमान बनाए रखना होगा। इसमें सामान की खरीद या स्रोत से प्राप्त करने, भंडारण, परिवहन और वितरण के सभी चरण शामिल हैं। यानी सिर्फ दुकान या गोदाम में सामान को सही तरीके से रखना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि रास्ते में भी जरूरी तापमान बनाए रखना होगा। साफ और ढके वाहनों में ही ढुलाई गाइडलाइन में खाद्य पदार्थों को ले जाने के लिए साफ, ढके हुए और स्वच्छ वाहनों का इस्तेमाल करने को कहा गया है। कारोबारियों को ऐसे पैकेजिंग मटीरियल का उपयोग करना होगा जो खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने के लिए सुरक्षित हों। जूट की बोरियों या दूसरे ऐसे कवर में खाद्य पदार्थों को पैक करने या ले जाने से बचना होगा जो उनकी सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। धूल, नमी और कीड़ों से बचाना होगा खाद्य पदार्थों को भंडारण, लोडिंग, अनलोडिंग और परिवहन के दौरान धूल, नमी, कीड़ों, भौतिक नुकसान और दूसरे खाद्य पदार्थों से होने वाले संभावित संक्रमण से बचाना होगा। कारोबारियों को सामान की खेप और उससे जुड़े बिलों या अन्य दस्तावेजों का उचित रिकॉर्ड भी रखना होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उत्पाद की जानकारी और उसकी सप्लाई चेन का पता लगाया जा सके। नियम तोड़ने पर जब्ती और नष्ट करने की कार्रवाई संभव FSSAI ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों, भारतीय रेलवे और अपने क्षेत्रीय निदेशकों को निर्देश दिया है कि वे निरीक्षण और परिवहन की जांच के दौरान नियमों के पालन पर कड़ी निगरानी रखें। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। एडवाइजरी में उल्लंघन के मामलों में खाद्य पदार्थों को जब्त करने और नष्ट करने जैसी कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है।  

रूसी तेल खरीदने पर भारत पर टैरिफ का खतरा, मार्को रूबियो बोले- रातोंरात निर्भरता खत्म करना मुश्किल

वाशिंगटन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और अन्य देशों पर भारी टैरिफ थोपने से पहले 60 दिनों का समय लेकर इसके वैश्विक और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करना चाहते हैं। उज्बेकिस्तान और भारत यात्रा पर रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि भारत जैसे अहम साझेदार देश के लिए रातों-रात रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता खत्म करना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर का 60 दिन अध्ययन करेंगे ट्रंप रुबियो के अनुसार, प्रस्तावित कानून केवल रूस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रूस से ऊर्जा खरीदने वाले भारत जैसे देशों पर भी टैरिफ लगाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति यह समझना चाहते हैं कि इन कदमों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और खुद अमेरिका पर क्या होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट के तहत प्रतिबंधों और टैरिफ पर अस्थायी छूट दी है। भारत की स्थिति को समझना जरूरी विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति पहले से ही दबाव में है, चाहे वह अमेरिका-ईरान तनाव हो, सऊदी अरब पर हूती हमले हों या रूस-यूक्रेन युद्ध। इन कारणों से वैश्विक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। रुबियो ने कहा कि भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने की कोशिश की है, लेकिन वह अब भी रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात करता है। भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार और सहयोगी भी है, इसलिए कोई भी सख्त कदम उठाने से पहले सही संतुलन बनाना आवश्यक है। रूस से कच्चा तेल क्यों खरीदता है भारत? फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए, जिसके बाद मॉस्को ने एशियाई देशों को भारी छूट पर कच्चा तेल देना शुरू किया। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता भारत, युद्ध से पहले रूस से 2% से भी कम तेल खरीदता था। लेकिन सस्ती दरों के चलते भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से खरीद बढ़ाई, जिससे रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया। पिछले महीने भी भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 35% रही। अमेरिकी कानून पर भारत का रुख अमेरिकी कांग्रेस में इस विधेयक के पारित होने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि वह अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत ने दो टूक कहा था कि वह बाजार की परिस्थितियों और स्रोतों के विविधीकरण के आधार पर फैसले लेता रहेगा। साथ ही, भारत ने अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह बात साफ कर दी है कि वह अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।

पाकिस्तान के डेरा इस्माइल खान में रामलीला मंदिर पर लगा ताला, हिंदू समुदाय ने जताया विरोध

खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत स्थित डेरा इस्माइल खान के रहीम बाजार में स्थित ऐतिहासिक 'राम लीला मंदिर' को स्थानीय प्रशासन ने शनिवार को ताला लगाकर पूरी तरह सील कर दिया है। मंदिर की ऐतिहासिक इमारत को ध्वस्त कर वहां कमर्शियल प्लाजा बनाने की कथित साजिश के सामने आने के बाद नागरिक समाज और अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के कड़े विरोध के बाद प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ा है। ACP हामिद सिद्दीकी के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद मंदिर परिसर में जारी हर तरह के निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। तोड़फोड़ और कमर्शियल प्लाजा के खिलाफ नागरिक समाज का विरोध मंदिर को ध्वस्त कर व्यापारिक परिसर में बदलने की कोशिशों की खबर मिलने के बाद स्थानीय नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और हिंदू समुदाय के नेताओं की एक आपातकालीन संयुक्त बैठक सुहैल अहमद आजमी (स्थानीय नागरिक समाज संगठन के अध्यक्ष) के कार्यालय में की गई। इस बैठक में पूर्व प्रांतीय असेंबली सदस्य (MPA) और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधि किशोर कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद नौमान सहित नागरिक समाज के कई नेता शामिल हुए। बैठक में शामिल नेताओं ने मंदिर की जमीन को अवैध तरीके से कमर्शियल प्लाजा के लिए आवंटित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और पाकिस्तानी सांसदों से इस मामले को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में उठाने की अपील की। 400 सांस्कृतिक विरासत इमारतों में शामिल है राम लीला मंदिर बैठक में वक्ताओं ने राम लीला मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर जोर देते हुए बताया कि यह ऐतिहासिक मंदिर डेरा इस्माइल खान की उन लगभग 400 ऐतिहासिक इमारतों में शामिल है, जिन्हें 'इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड' की ओर से सांस्कृतिक विरासत संपत्ति के रूप में शामिल किया गया है। नागरिक समाज ने चेतावनी दी कि ऐतिहासिक धरोहरों को ध्वस्त कर व्यापारिक परिसरों में तब्दील करने से शहर की सदियों पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान पूरी तरह मिट जाएगी। नागरिक समाज, व्यापारिक समुदाय, साहित्यिक हलकों और विरासत संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर ऐतिहासिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध करने का संकल्प लिया। अधिकारियों की शक्तियों और कानूनी वैधता पर सवाल नागरिक समाज और हिंदू नेताओं ने सवाल उठाया कि संबंधित अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर मंदिर की जमीन पर कमर्शियल प्लाजा निर्माण की अनुमति कैसे दे दी। प्रतिभागियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जिला प्रशासन, नेशनल असेंबली के अध्यक्ष, पुरातत्व विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायत दर्ज कराई जाएगी।

FPI Sell-Off: विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से दूरी, 2026 में अब तक ₹3.12 लाख करोड़ की निकासी का दावा

नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) से विदेशी निवेशकों का मूड लगातार खराब चल रहा है और इसका अंदाजा एफपीआई की बिकवाली (FPIs Sell Off) के बढ़ते आंकड़े को देखकर लगाया जा सकता है. सितंबर महीने में तगड़ी निकासी के बाद अक्टूबर में भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इंडियन इक्विटी से 52000 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल लिए हैं और ये आंकड़ा पूरे सितंबर महीने में की गई बिकवाली के पार निकल गया है.   लगातार दूसरे महीने दनादन बिकवाली विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार के पैसे निकालने का ये लगातार दूसरा महीना है. पीटीआई की रिपोर्ट में डिपॉजिटरी के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि प्रतिकूल ग्लोबल परिस्थितियों के बीच अक्टूबर महीने में अब तक एफपीआई ने 52,100 करोड़ रुपये की बिकवाली की है. इससे पहले सितंबर महीने में भी एफपीआई ने Indian Stock Market से 35,861 करोड़ रुपये की नेट निकासी की थी. 2026 में अब तक 2.13 लाख करोड़ साफ सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो सितंबर और अक्टूबर महीने में बिकवाली से पहले जुलाई और अगस्त महीने में विदेशी निवेशकों का निवेश आया था. एफपीआई ने भारतीय शेयरों में जुलाई महीने के दौरान 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जबकि इसके अगले अगस्त महीने में 29,631 करोड़ रुपये लगाए थे. हालांकि, इससे पहले लगातार बिकवाली का सिलसिला जारी थी. कुल मिलाकर हालिया बिकवाली के बाद एफपीआई के आउटफ्लो पर नजर डालें, तो 2026 में अब तक FPI ने भारतीय इक्विटी से 3.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो कि पूरे 2025 के दौरान निकाले गए 1.66 लाख करोड रुपये से कहीं ज्यादा है. FPIs का मूड क्यों है खराब? विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार के प्रति मूड खराब होने के पीछे के कारणों की बात करें, तो रिपोर्ट में इसके पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार जारी वृद्धि और मजबूत डॉलर को बताया गया है, जिनसे विदेशी निवेशकों के सेंटीमेंट पर निगेटिव इम्पैक्ट डाला है. हालांकि, 16 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने मामूली खरीदारी की थी. इसे लेकर जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटिजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 5.3 फीसदी से घटकर 5.08 फीसदी तक की मामूली गिरावट और डॉलर के मुकाबले रुपये का मजबूत होना एफपीआई के रुख में अस्थायी बदलाव के पीछे रहे. लंबे समय से शेयर मार्केट में भारी-उतार चढ़ाव का सामना कर रहे निवेशकों को बीते सप्ताह जोरदार फायदा हुआ. मार्केट में तेजी के बीच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2,256.94 अंक या 3.11 फीसदी की बढ़त में रहा, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 625.7 अंक या 2.77 फीसदी चढ़ा.

नवरात्रि की महानवमी पर ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, जानें मंत्र, भोग और कन्या पूजन विधि

Maa Siddhidatri : नवरात्रि नौवें दिन मां सिद्धिदात्री का दिन है। इस दिन को महानवमी (Maha Navami 2026) भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर युद्ध में विजय पाई थी। इसे महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है। इस बार ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ माता की आराधना और व्रत रखने से समस्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं। माता के नाम से ही प्रकट होता है कि सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली देवी हैं। पंडित जगदीश शर्मा ने बताया कि मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना से यश, बल और धन की प्राप्ति होती है। मां सिद्धिदात्री का स्वरूप सिद्धि और मोक्ष देने वाली दुर्गा को सिद्धिदात्री कहा जाता है और सिद्धिदात्री देवी सरस्वती का भी स्वरूप है। मां देवी का वाहन सिंह है और उनकी चार भुजाएं हैं। माता के दाहिने ओर नीचे वाले हाथ में चक्र है और ऊपर वाले हाथ में गदा है। माता के बाईं ओर के नीचे वाले हाथ में कमल का फूल है और ऊपर वाले हाथ में शंख है। पूजा का मुहूर्त साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की महानवमी 19 अक्टूबर 2026 को है। नवमी की शुरुआत सुबह 10:51 बजे से शुरू होगी और अगले दिन 20 अक्टूबर की दोपहर 12:50 तक रहेगी। माता की पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 09:44 बजे से सुबह 11:32 बजे तक रहेगा। मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि     सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।     पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें     मां को गंगाजल और दूध से स्नान कराएं।     उन्हें गंध, चावल, धूप, दीप और लाल रंग के फूल (विशेषकर गुड़हल और कमल का फूल) अर्पित करें।     मां सिद्धिदात्री को तिल, हलवा, पूरी, चने, खीर, नारियल और मिष्ठान का भोग अत्यंत प्रिय है।     पूजा के दौरान मां के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः     मंत्र जाप के बाद दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। इसके बाद परिवार की परंपरा के अनुसार हवन करें।     महानवमी के दिन नौ कन्याओं का पूजन कर उन्हें आदरपूर्वक हलवा, पूरी और चने का भोजन कराएं।     अंत में मां सिद्धिदात्री की आरती उतारकर सुख-शांति की प्रार्थना करें। माता सिद्धिदात्री का भोग माता की पूजा करने के लिए नवाहन का प्रसाद और नवरस युक्त भोजन और नौ प्रकार के फल फूल आदि का अर्पण करके नवरात्र का समापन किया जाता है। माता को हलवा और चने का भोग लगाया जाता है। सिद्धिदात्री की पूजा करते समय जामुनी और बैंगनी रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।