samacharsecretary.com

CM मोहन यादव ने भोपाल से रवाना की ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026’

भोपाल  धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक स्मृति, इन तीनों के संगम के रूप में ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026' ने भोपाल से अपनी पहली यात्रा शुरू की. रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से रवाना हुई यह विशेष तीर्थ यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि हजार वर्षों की आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक चेतना की यात्रा के रूप में देखी जा रही है. मध्यप्रदेश से पहली बार रेल मार्ग के जरिए शुरू हुई इस यात्रा में प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से आए श्रद्धालु शामिल हैं. सोमनाथ मंदिर, जो भारतीय इतिहास और सनातन परंपरा का सशक्त प्रतीक माना जाता है, इस यात्रा का केंद्र बिंदु है।  रानी कमलापति स्टेशन से दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है. हेली सेवा के बाद अब रेल मार्ग से इस तरह की विशेष तीर्थ यात्रा श्रद्धालुओं की सुविधा और पहुंच को और आसान बनाएगी. मुख्यमंत्री ने सोमनाथ मंदिर को स्वाभिमान, आस्था और सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक बताते हुए इसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान पर प्रतिष्ठित बताया।  गंगोत्री से गंगा सागर तक बिखर रहा आनंद : CM मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधु जिनके चरण पखारता है, मस्तक पर जिनके चंद्र देव बिराजे हैं, अक्षय स्वाभिमान के ज्योतिर्लिंग, भगवान सोमनाथ के चरणों में कोटि-कोटि वंदन. सोमनाथ का संबंध देश के स्वाभिमान के साथ है. द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्ण ने जब अधर्म के खिलाफ लड़ाई लड़ी, तब पूरा समय चक्र ही बदल गया. हम सभी जानते हैं कि एक हजार साल पहले भारत को काली छाया का ग्रहण लग गया था. उस समय बाबा सोमनाथ ने इस ग्रहण को नष्ट किया था. सोमनाथ हमारे विकास का पर्याय भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विरासत से विकास की यात्रा प्रारंभ हुई.  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल, पुल, पुलिया, सड़क, नगर, कारखाने के साथ-साथ सनातन संस्कृति को भी लेकर चल रही है. इस सनातन संस्कृति पर हमें गर्व है. प्रधानमंत्री मोदी के मन में भी सनातन धर्म के साथ सबको लेकर चलने की भावना है. यह भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. हमें अयोध्या और मथुरा में जो आनंद आता है, वही आनंद पश्चिम बंगाल के काली घाट पर आता है. आज भगवान की दया से गंगोत्री से गंगा सागर तक आनंद बिखर रहा है. लोकतंत्र की नई बयार पूरे देश को उत्साह-उमंग से भर रही है।  हमले के बाद भी लहराती रही सनातन संस्कृति की ध्वजा : मोहन यादव सीएम डॉ. यादव ने लोगों से कहा कि इस यात्रा के जरिये आपको बाबा सोमनाथ के दर्शन का लाभ मिलेगा. मेरी ओर से सभी यात्रियों को बधाई. वहीं, पास में चार पीठों में से एक द्वारका पीठ भी है. यहां भगवान कृष्ण ने लीलाएं कर हमारे हृदय में छवि बनाई. सोमनाथ मंदिर पर दुश्मनों ने 17 बार आक्रमण किए थे. लेकिन, हमारी सनातन संस्कृति की ध्वजा लहराती रही. एक हजार साल बाद सोमनाथ का शिखर आसमान से बात कर रहा है. दुश्मन लाख चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो बाबा सोमनाथ चाहें. उन्होंने तीर्थयात्रियों से कहा कि आप बाबा सोमनाथ से आशीर्वाद लेना कि दुनिया में चारों ओर खुशहाली हो. यह सांस्कृतिक जानगरण राष्ट्रीय एकता को और सुदृढ़ करे. उन्होंने कहा कि जीवन भी एक यात्रा है. जीवन की इस यात्रा में हम आते हैं और शरीर छोड़ते हैं. लेकिन, इस बीच परमात्मा ने हमें जो मौका दिया है, इस मौके का उपयोग हम परोपकार में करें।  देवलोक बनने से बदल जाती है अर्थव्यवस्था : मुख्यमंत्री सीएम डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने धार्मिक स्थानों पर हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू की है. हमारी सरकार कई देवलोक बनवा रही है. महाकाल लोक बनने के बाद आर्थिक रूप से पूरा इको-सिस्टम बदल गया. साल 2022 से पहले उज्जैन में एक वर्ष में 25-30 हजार लोग आते थे, आज रोज डेढ़ लाख लोग दर्शन करने उज्जैन आ रहे हैं. इस तरह पूरा माहौल बदल रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह के देवलोक बनने के बाद होटल वालों, ठेले वालों, ऑटो वालों, दुकान वालों के जीवन में बदलाव आता है. भारतवासी जब एक-दूसरे के क्षेत्र में जाते हैं, तो एक-दूसरे को अपनी-अपनी संस्कृति से परिचित कराते हैं. इससे आंतरिक एकता का निर्माण होता है. यही एकता एकात्मवाद में परिवर्तित होती है।  मेरी अपनी ओर से सभी तीर्थयात्रियों को बधाई श्रद्धालुओं का बड़ा कारवां मध्यप्रदेश से पहली बार निकल रही इस यात्रा में 1,100 श्रद्धालुओं का दल शामिल है. यह विशेष रेलगाड़ी भोपाल के साथ-साथ उज्जैन रेलवे स्टेशन से भी यात्रियों को लेकर सोमनाथ के लिए रवाना हुई. यात्रा के दौरान श्रद्धालु सोमनाथ पहुंचेकर दर्शन, पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे. साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सोमनाथ से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक कथाओं को साझा किया जाएग।  धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक जुड़ाव सरकार और संस्कृति विभाग के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य केवल दर्शन तक सीमित नहीं है. यह पहल धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूत करने का प्रयास है. रेलवे के माध्यम से सामूहिक तीर्थ यात्रा ने बुजुर्गों, परिवारों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को सरल बनाया है. यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं, आवास और कार्यक्रमों का समन्वय संस्कृति विभाग द्वारा किया जा रहा है।  ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' की पृष्ठभूमि संस्कृति संचालनालय के निदेशक एन.पी. नामदेव के अनुसार, ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का मूल उद्देश्य देशभर में भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान, आस्था और ऐतिहासिक संघर्षों की स्मृति को जीवंत करना है. यह पर्व राष्ट्र की गौरवमयी विरासत के उत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीकात्मक महाकुंभ है, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का कार्य करता है।  इतिहास से भविष्य तक की यात्रा सोमनाथ मंदिर को भारत की सांस्कृतिक दृढ़ता और अटूट श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है. हजार वर्षों के उतार-चढ़ाव के बावजूद इस मंदिर का पुनर्निर्माण और उसकी निरंतर परंपरा भारतीय सांस्कृतिक जीवटता को दर्शाती है. ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा' … Read more

CM मोहन यादव का बुरहानपुर को विकास का तोहफा, निमाड़ में इन्वेस्टर्स समिट की घोषणा

बुरहानपुर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को बुरहानपुर पहुंचे। यहां उन्होंने परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में उद्योगपतियों से संवाद किया और निमाड़ में इन्वेस्टर्स समिट कराने की बड़ी घोषणा की। इसके बाद सीएम भाजपा के 'विजय उत्सव' में शामिल हुए. मुख्यमंत्री सुबह 10:30 बजे रेणुका माता हेलीपैड से सीधे ऑडिटोरियम पहुंचे थे। यहां उद्योगपतियों ने अपनी समस्याओं और मांगों से उन्हें अवगत कराया। डॉ. यादव ने कहा, “हमने निमाड़ में इन्वेस्टर्स समिट कराने का वादा किया था और हम इसे जरूर पूरा करेंगे। व्यापारिक कल्याण बोर्ड बनाने पर भी कैबिनेट में चर्चा हुई है, जो आगे चलकर जिला स्तर तक काम करेगा।” केला किसानों और औद्योगिक क्लस्टर पर फोकस सीएम ने कहा कि इस साल को किसान कल्याण वर्ष के रूप में समर्पित किया गया है, जिसमें बुरहानपुर के केला किसानों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि बुरहानपुर का व्यापार 400 करोड़ से बढ़कर 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार ने निंबोला औद्योगिक क्लस्टर के लिए 350 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी दे दी है। इसके अलावा देश में 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आए हैं, क्योंकि सरकार का मकसद लोगों की जिंदगी बदलना है। जीत के जश्न में खाई झालमुड़ी, कार्यकर्ताओं को बांटी उद्योगपतियों से संवाद के बाद मुख्यमंत्री ऑडिटोरियम में ही नीचे आयोजित 'विजय उत्सव' और 'जन विश्वास उत्सव' में शामिल हुए। यह कार्यक्रम बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस की ओर से पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की जीत की खुशी में आयोजित किया गया था। इस दौरान सीएम ने मंच पर झालमुड़ी खाई। उन्होंने अपने हाथों से जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, नेपानगर विधायक मंजू दादू, पूर्व विधायक सुमित्रा देवी कास्डेकर और भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने सहित अन्य कार्यकर्ताओं को भी झालमुड़ी बांटी। कांग्रेस पर राम मंदिर और बंटवारे को लेकर साधा निशाना विजय उत्सव को संबोधित करते हुए सीएम ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "देशभक्त लोगों के बीच जहर फैलाने और देश के बंटवारे का पाप कांग्रेस ने किया है। वंदे मातरम को बांटने और भगवान राम के मंदिर में ताला लगाने का पाप भी कांग्रेस के ही सिर पर है।" मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर को हिंदू और मुसलमान, सभी ने आनंद के साथ स्वीकार किया, लेकिन कांग्रेस के नेता आज तक वहां दर्शन करने नहीं गए। 'बंगाल को 75 साल बाद सही मायनों में मिली आजादी' डॉ. यादव ने अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा, "केजरीवाल जेल जाने के बाद भी पद नहीं छोड़ते। वहीं, इतनी बड़ी हार के बाद भी ममता बनर्जी निर्ममता के साथ पेश आती हैं और पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं।" सीएम ने कहा कि बंगाल और असम के चुनाव में मुस्लिम समुदाय ने भी बड़े पैमाने पर भाजपा का साथ दिया है। 17वें मुख्यमंत्री गुरु रबींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर शपथ लेने जा रहे हैं। आज 75 साल बाद बंगाल सही मायनों में आजाद हुआ है और अब वह देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगा।

CM मोहन यादव ने कहा: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम सदी का सबसे क्रांतिकारी कदम’

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश की शताब्दी की सबसे बड़ी घटना बताया है. उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय ऐतिहासिक और क्रांतिकारी है, जिससे पूरे देश में उत्साह का माहौल है. उन्होंने कहा कि यह वह समय है जब देश की बहनों को राजनीति में बराबरी का अवसर मिलने जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह बड़ा निर्णय लिया गया है और सरकार इसका स्वागत करती है।  विपक्ष की आपत्तियों पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस को इस बिल का समर्थन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी पहले महिला आरक्षण लागू करने की बात कही थी और अब जब सरकार इसे आगे बढ़ा रही है तो सभी को इसका समर्थन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी दलों को पत्र लिखकर समर्थन की अपील की है, इसलिए विपक्ष को राजनीतिक विरोध छोड़कर इसे लागू कराने में सहयोग करना चाहिए।  33% महिला आरक्षण पर विपक्ष से समर्थन की अपील राहुल गांधी के इस आरोप पर कि ओबीसी, दलित और आदिवासी महिलाओं का हिस्सा छीना जा रहा है, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह गलत धारणा है. उन्होंने कहा कि सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के सिद्धांत पर काम कर रही है और सभी वर्गों को साथ लेकर चल रही है. उन्होंने कहा कि संसद में इस पर चर्चा का पूरा अवसर है और विपक्ष को अपनी बात वहीं रखनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं कर रही है।  दक्षिण भारत और छोटे राज्यों के साथ अन्याय के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल राजनीतिक भय और भ्रम है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का समाधान संसद के फ्लोर पर चर्चा से ही होगा और सभी को मिलकर इस ऐतिहासिक बिल को पास कराना चाहिए।  उन्होंने कहा कि नारी शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए सरकार पहले भी कई कदम उठा चुकी है, जैसे ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून और अन्य योजनाएं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का काम किया है, चाहे वह स्टार्टअप हो या सशस्त्र बल. मोहन यादव ने यह भी कहा कि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सर्वोच्च पद पर पहुंचना भी इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  OBC-दलित महिलाओं के अधिकार पर बोले CM उन्होंने कहा कि यह अधिनियम वास्तव में शताब्दी की सबसे बड़ी घटना है और यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा. मध्यप्रदेश की तैयारी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री मोदी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है और प्रदेश में नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा भी मनाया जा रहा है। 

वंदे मातरम के अपमान पर भड़के सीएम मोहन यादव, कांग्रेस से इस्तीफा मांगा: ‘नहीं गाऊंगी’ का बयान बड़ी बेशर्मी

भोपाल  इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान शुरू हुआ 'वंदे मातरम' विवाद अब पूरे प्रदेश की राजनीति का केंद्र बन गया है। कांग्रेस पार्षदों द्वारा सार्वजनिक रूप से राष्ट्रगीत गाने से इनकार करने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने इसे देशभक्तों का अपमान बताते हुए कहा कि अगर कांग्रेस नेतृत्व इस पर कार्रवाई नहीं कर सकता, तो पूरी प्रदेश इकाई को इस्तीफा दे देना चाहिए। सीएम ने बताई बेशर्मी की राजनीति इंदौर नगर निगम में कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने धर्म का हवाला देकर 'वंदे मातरम' गाने से मना कर दिया था। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने भोपाल में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि 'बड़े दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि कांग्रेस की पार्षद ने बेशर्मी के साथ कहा कि मैं नहीं गाऊंगी। यह केवल एक पार्षद का बयान नहीं, बल्कि कांग्रेस के उस चरित्र को दर्शाता है जो हमेशा से राष्ट्र प्रतीकों के खिलाफ रहा है।' जीतू पटवारी और राहुल गांधी से सीधे सवाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि हर छोटी बात पर मुखर रहने वाले प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी इस 'राष्ट्रद्रोह' जैसे कृत्य पर चुप क्यों हैं? सीएम ने कहा कि राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे इस तरह की मानसिकता को पार्टी में प्रोत्साहित कर रहे हैं। हजारों देशभक्तों ने भारत माता की जय बोलते-बोलते अपने प्राणों की आहुति दे दी। जब कांग्रेस पार्षद भगवान राम और हिंदुओं की निंदा करते हैं, तब पार्टी चुप रहती है। लेकिन अब राष्ट्रगीत के अपमान पर मौन रहना यह बताता है कि वे देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश पुरानी है वंदे मातरम की खींचतान? मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के इतिहास को कुरेदते हुए कहा कि यह पार्टी आजादी के पहले से ही वंदे मातरम पर बखेड़ा खड़ा करती रही है। डॉ. यादव के अनुसार, कांग्रेस की पुरानी सरकारों ने राष्ट्रगीत के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि चुनाव से पहले राष्ट्रवाद के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरकर बीजेपी अपनी पैठ और मजबूत करना चाहती है, खासकर तब जब मामला सीधे तौर पर राष्ट्रगीत के सम्मान से जुड़ा हो।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिजिटल गवर्नेंस में मध्यप्रदेश को देश में दूसरा स्थान मिलने पर दी बधाई

सुशासन और जनहितैषी नीतियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मिली राष्ट्रीय मान्यता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डिजिटल गवर्नेंस में मध्यप्रदेश के देश में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे सद्प्रयासों को अब राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है। यह उपलब्धि सुशासन, पारदर्शिता, जनहितैषी और नागरिक-केंद्रित नीतियों के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन के मानकों के अनुसार यह महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने 1,752 ई-सेवाओं के साथ डिजिटल सेवाएं प्रदान करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल होकर पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद गर्व का विषय है कि प्रदेश में 59 अनिवार्य सेवाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है।  

विधानसभावार कृषि सम्मेलन के लिए कृषि विभाग देगा 5 लाख रुपए

प्रत्येक विधानसभा में आयोजित होंगे कृषि सम्मेलन डेढ़ साल में प्रदेश का दूध संकलन 25 प्रतिशत बढ़कर हुआ 12.50 लाख लीटर प्रतिदिन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ कृषि अभिमुखीकरण कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में विभिन्न विभाग मिलकर कृषि विकास और कृषक कल्याण योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करेंगे। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी उपायों पर क्रियान्वयन तेज किया जाएगा। कृषक कल्याण वर्ष का लाभ किसानों के परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश, देश का इकलौता राज्य है, जो 5 रुपए में किसानों को बिजली का कनेक्शन उपलब्ध करवा रहा है। ये किसानों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में कृषक कल्याण वर्ष में सक्रिय सहभागिता जुटाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए कृषि अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री द्वय श्री जगदीश देवड़ा और श्री राजेन्द्र शुक्ल सहित किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत, राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यप, संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पवार सहित मंत्रीगण, विधायक, जनप्रतिनिधि एवं किसान संगठनों के प्रतिनिधि, एफपीओ के पदाधिकारी एवं प्रबुद्धजन शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे सभागार मध्यप्रदेश के पुराने विधानसभा भवन का पवित्र स्थान है। इस स्थान पर कृषक कल्याण योजनाओं पर केन्द्रित कार्यशाला राज्य सरकार के कृषि क्षेत्र को दी जा रही प्राथमिकता का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कार्यक्रम के लिए आयोजकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दूध उत्पादन और पशुपालन की व्यापक संभावनाएं हैं।उन्हें साकार करने के प्रयास सफल हो रहे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले डेढ़ साल में प्रदेश का दूध कलेक्शन 25 प्रतिशत बढ़ा है। अब प्रदेश में प्रतिदिन 12.50 लाख लीटर दूध कलेक्शन किया जा रहा है। दूध का मूल्य भी 5 रुपए प्रति लीटर बढ़ा है। इससे दुग्ध उत्पादकों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्र में नरवई प्रबंधन के लिए राज्य सरकार ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसे की मशीन उपलब्ध करवा रही है। राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए नि:शुल्क दूध वितरण के लिए माता यशोदा योजना शुरू करने की पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। टूरिज्म डिपार्टमेंट ने होम स्टे की योजना शुरू की है। होम स्टे संचालकों के लिए 20 लाख रुपये तक की आय जीएसटी से मुक्त रखी गई है। लघु-कुटीर उद्योग के क्षेत्र में शहद उत्पादन से किसान लाभ कमा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यशाला में लगभग सभी प्रमुख विभाग शामिल हुए हैं। राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आ जाता है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर करने के लिए निरंतर कार्य हो रहा है। प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र में कृषि यंत्रों की दुकानें खुलेंगी, जिनसे लघु कृषकों को खेती के लिए किराये पर यंत्र उपलब्ध करवाए जाएंगे। विधायक अपने क्षेत्र में 4 से 5 कृषि सम्मेलन करें, इसके लिए कृषि विभाग ने प्रति विधानसभा क्षेत्र 5 लाख रुपए आवंटित करने का निर्णय किया है। इन प्रयासों से कृषि कल्याण के लिए सकारात्मक वातावरण बनेगा। किसान सौर बिजली उत्पादन की सभी योजनाओं का लाभ उठाएं। लघु-कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए भी कार्य करें। प्रदेश प्रभारी श्री महेंद्र सिंह ने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश अब हजार और लाख में नहीं, मिलियन, बिलियन और ट्रिलियन में बात करने के लिए तैयार है। मध्यप्रदेश क्षेत्रफल के हिसाब से कृषि में चौथे स्थान पर है। इसके बावजूद मध्यप्रदेश कई खाद्यान्नों के उत्पादन में देश में, पहले और दूसरे स्थान पर हैं। मध्यप्रदेश चौथे स्थान पर भी रहते हुए देश के खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश के किसानों को सस्ती दरों पर बिजली और सिंचाई के लिए पम्प उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 54 लाख हैक्टेयर है। राज्य सरकार ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के सपने को साकार करते हुए सिंचाई का रकबा आगामी वर्षों में 100 लाख हैक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में दूध एवं डेयरी क्षेत्र में आगे बढ़ने की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदेश की कृषि विकास दर तेजी के साथ बढ़ी है। इसी प्रकार प्रदेश का बजट वर्ष 2003-24 में 23 हजार था, जो अब 4 लाख 38 हजार करोड़ से अधिक हो गया है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- जल है तो कल है का नहीं है कोई विकल्प, बूंद-बूंद बचाने के करेंगे हर संभव प्रयास

म.प्र. नदियों का मायका, जल आत्मनिर्भरता से ही बनेगा समृद्ध प्रदेश नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन में होगा राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ वृहद् अभियान के लिए सरकार कर रही व्यापक तैयारियाँ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को जल संरक्षण के कार्यों से जोड़ना चाहते हैं। समाज और सरकार जब साथ मिलकर काम करेंगे, तो मध्यप्रदेश समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ना होगा, इससे मध्यप्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संबंधी जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर जल गंगा संवर्धन अभियान शुरु करने जा रही है। भारतीय नववर्ष प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा) के शुभ अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन की शिप्रा नदी तट से इस राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक अनवरत् चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बनाना है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान प्रदेश में जल संवर्धन की नई मिसाल स्थापित करेगा। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की परम्परा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावड़ियां सिर्फ़ जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परम्परा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाने के साथ ही प्रदेश में जल संरक्षण की संस्कृति को समृद्ध करना भी है। अभियान से गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है। जनभागीदारी है अभियान की सबसे बड़ी शक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करे। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इसके दूरगामी पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी होंगे। इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के लिए बेहतर जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का यह अभियान इसी दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया था। इसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कामों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है। दूसरे चरण के काम भी हो रहे तेजी से वर्ष-2025 में चलाए गए जल संरक्षण अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।  

बड़वानी जिले के जनजातीय बहुल ग्राम नागलवाड़ी में होगी कृषि केबिनेट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में मनाए जा रहे किसान कल्याण वर्ष में किसानों के हित में लगातार कार्य किया जा रहा है। हमारा यह संकल्प है कि प्रदेश के अन्नदाताओं को आत्म-निर्भर बनाते हुए उनकी आय को दोगुना किया जाये। इसी क्रम में सोमवार 2 मार्च को जनजातीय बहुल जिले बड़वानी के नागलवाड़ी में किसान कल्याण वर्ष की पहली कृषि केबिनेट होने जा रही है। इस दिन नागलवाड़ी से ही सरकार किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेगी। राज्य सरकार का मंत्री-मंडल पूरा दिन नागलवाड़ी में रहेगा, जहाँ कृषि केबिनेट सहित प्रबुद्धजन एवं किसानों के साथ संवाद होगा और कृषि एवं जनजातीय कल्याण पर केन्द्रित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। लगभग 6 हजार की जनसंख्या वाला ग्राम नागलवाड़ी जनजातीय बहुल ग्राम है। यहाँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में होने वाली कृषि केबिनेट न केवल बड़वानी जिले अपितु पूरे निमाड़ क्षेत्र के विकास के लिए निर्णायक साबित होगी। नागलवाड़ी स्थित 800 वर्ष पुराना प्राचीन भिलट देव मंदिर जनजातीय आस्था में विशेष महत्व रखता है। कृषि केबिनेट के बाद पूरा मंत्री-मंडल इस मंदिर में दर्शन भी करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि केबिनेट के बाद किसानों और प्रबुद्धजन से संवाद भी करेंगे। संवाद के दौरान एक ओर प्रदेश एवं किसानों के हित में किये जा रहे कार्यों एवं योजनाओं को साझा किया जायेगा, वहीं क्षेत्र विकास के लिये किसानों एवं प्रबुद्धजन के विचारों और उनकी अपेक्षाओं को जाना जायेगा। कार्यक्रम स्थल पर जनजातीय विकास और कृषि आधारित विकास प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं मंत्रि-परिषद के सदस्य जनजातीय समाज के जुलवानिया में आयोजित भगोरिया हाट की परम्परा में भी शामिल होंगे। केबिनेट के अलावा होने वाले सभी कार्यक्रमों में जनजातीय परम्परा की स्पष्ट झलक दिखाई देगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- समावेशी विकास के साथ तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था वाला राज्य बना मप्र

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था समावेशी विकास के साथ अत्यंत गतिशील अर्थव्यवस्था बन गई है। वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी प्रशासन और दूरदर्शी नीतियों के साथ मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। मध्यप्रदेश विधान सभा में मंगलवार को प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध रूप से संतुलित और परिणामोन्मुखी है। प्रमुख बिंदु 1. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित मूल्यों पर ₹16,69,750 करोड़ अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹15,02,428 करोड़ की तुलना में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 2. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद स्थिर (2011-12) मूल्यों पर ₹7,81,911 करोड़ अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹7,23,724 करोड़ की तुलना में 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है। 3. वित्तीय वर्ष 2011-12 से वित्तीय वर्ष 2025-26 की अवधि के दौरान मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति शुद्ध आय प्रचलित मूल्यों पर ₹38,497 से बढ़कर ₹1,69,050 हो गई तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर ₹38,497 से बढ़कर ₹76,971 हो गई, जो वास्तविक आय स्तर में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है। 4. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) की क्षेत्रीय संरचना प्रचलित मूल्यों पर इस प्रकार रही—प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत। 5. स्थिर (2011-12) मूल्यों पर इनकी हिस्सेदारी क्रमशः प्राथमिक क्षेत्र 33.54 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र 26.18 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र 40.28 प्रतिशत रही। 6. वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 43.09 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 33.54 प्रतिशत रही। प्रचलित मूल्यों पर इस क्षेत्र का कुल मूल्य वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹6,33,532 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹6,79,817 करोड़ हो गया, जो 7.31 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 7. वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत फसलों का सर्वाधिक योगदान 30.17 प्रतिशत रहा, इसके बाद पशुधन 7.22 प्रतिशत, वानिकी 2.13 प्रतिशत, मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि 0.61 प्रतिशत तथा खनन एवं उत्खनन 2.96 प्रतिशत रहा। 8. वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 19.79 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 26.18 प्रतिशत रही। द्वितीयक क्षेत्र का कुल GSVA वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹2,84,125 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹3,12,350 करोड़ हो गया, जो प्रचलित मूल्यों पर 9.93 प्रतिशत तथा स्थिर मूल्यों पर 6.87 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 9. वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र के अंतर्गत निर्माण क्षेत्र का सर्वाधिक योगदान 9.22 प्रतिशत रहा, इसके बाद विनिर्माण का 7.22 प्रतिशत तथा विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगिता सेवाओं का 3.35 प्रतिशत योगदान रहा। 10. वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीयक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 37.12 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 40.28 प्रतिशत रही। तृतीयक क्षेत्र का कुल GSVA वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹5,05,679 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹5,85,588 करोड़ हो गया, जो प्रचलित मूल्यों पर 15.80 प्रतिशत तथा स्थिर मूल्यों पर 12.07 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 11. वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीयक क्षेत्र के अंतर्गत व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट का सर्वाधिक योगदान 10.35 प्रतिशत रहा। इसके पश्चात अन्य सेवाएँ 7.80 प्रतिशत, अचल संपत्ति, आवास स्वामित्व एवं व्यावसायिक सेवाएँ 4.98 प्रतिशत, लोक प्रशासन 4.96 प्रतिशत, वित्तीय सेवाएँ 3.73 प्रतिशत, परिवहन एवं भंडारण 2.80 प्रतिशत, संचार एवं प्रसारण संबंधी सेवाएँ 1.68 प्रतिशत तथा रेलवे का 0.82 प्रतिशत योगदान रहा। अन्य क्षेत्रों में प्रमुख उपलब्धियाँ लोक वित्त, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थान वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹2,618 करोड़ के राजस्व आधिक्य का अनुमान है। राजकोषीय घाटा GSDP का 4.66 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि राजस्व प्राप्तियाँ GSDP के 17.16 प्रतिशत के बराबर आंकी गई हैं। कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत वृद्धि अपेक्षित है तथा ऋण–GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कृषि एवं ग्रामीण विकास वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 7.66 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उद्यानिकी क्षेत्र 28.39 लाख हेक्टेयर रहा, जिसमें 425.68 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुँचा। कुल 72,975 किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया तथा 40.82 लाख ग्रामीण आवास पूर्ण किए गए। औद्योगिक विकास, एमएसएमई एवं अधोसंरचना द्वितीयक क्षेत्र में 9.93 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र में 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिनमें ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश से लगभग 1.7 लाख रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सहायता ₹22,162 करोड़ रही। राज्य में 1,723 स्टार्टअप तथा 103 इनक्यूबेशन केंद्र संचालित हैं। सीएसआर व्यय ₹2,600.47 करोड़ रहा तथा पर्यटन आगमन 13.18 करोड़ रहा। नगरीय विकास अमृत 2.0 के अंतर्गत ₹24,065 करोड़ का आवंटन किया गया, जिसमें 1,134 परियोजनाएँ स्वीकृत हुईं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 8.75 लाख आवास पूर्ण किए गए। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राज्य को आठ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) 2021-22 के अनुसार कुल स्वास्थ्य व्यय ₹34,112 करोड़ रहा, जो GSDP का 3 प्रतिशत है। नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। मातृ मृत्यु अनुपात 379 (2001-03) से घटकर 142 (2021-23) प्रति लाख जीवित जन्म हो गया। शिक्षा एवं कौशल विकास वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल बजट का 10.37 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.00 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है, जबकि कक्षा 6-8 में यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को SWAYAM पोर्टल पर मॉडल राज्य घोषित किया गया। तकनीकी संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई है। मुख्यमंत्री मेधावी योजना के अंतर्गत 45,668 विद्यार्थियों को ₹500 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया भवन विकास निगम के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम 2.0 पोर्टल लाँच

भगवान विश्वकर्मा का साक्षात् अवतार हैं इंजीनियर्स सड़क एवं भवन विकास कार्यों के लिए म.प्र. शासन के साथ हुए 4 एमओयू पीडब्ल्यूडी की प्रशिक्षण कार्ययोजना 2026-27, न्यूज लेटर सहित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान एवं बजट मॉड्यूल का भी हुआ विमोचन पिछले 2 वर्ष में लोक निर्माण विभाग ने अपने कार्यों के आधार पर बनाई विशिष्ठ पहचान   भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि निर्माण सिर्फ ईंट–पत्थर का संयोजन नहीं, एक अभिनव कला है। इसमें उत्कृष्ट दृष्टिकोण के साथ दीर्घकालिक कार्य योजना को अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप अब हर निर्माण कार्य में कन्सेप्चुअल और क्वालिटेटिव एप्रोच अनिवार्य रूप से दिखाई देना चाहिए। गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। प्रदेश के विकास के लिए हम सभी को पूरी क्षमता दक्षता से काम करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को रवीन्द्र भवन में लोक निर्माण विभाग अन्तर्गत मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा आयोजित एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक निर्माण विभाग के तकनीकी अधिकारियों, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अभियंताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैचारिक प्रतिबद्धता और कार्यशैली में जड़ता से बचने और बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को अद्यतन रखने के लिए कौशल संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। ऐसी कार्यशालाएं अभियंताओं की स्किल्स को रिफ्रेश करती हैं और उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। उन्होंने निर्माण कार्यों में दीर्घकालिक दृष्टि, नवाचार और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में पीएम गतिशक्ति योजना के माध्यम से लोक निर्माण विभाग नवाचारों को धरातल पर उतार रहा है। वर्तमान समय में हमारे इंजीनियर्स साक्षात् भगवान विश्वकर्मा के अवतार हैं। लोक निर्माण विभाग ने पिछले 2 वर्षों के कार्यों के आधार पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। इस अवधि में सराहनीय कार्य हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता के अंतिम अध्याय में ज्ञान और विज्ञान की बात कही गई है, जिसमें मन, बुद्धि और अहंकार के साथ पंच तत्वों की व्याख्या की गई है। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर्स की यह कार्यशाला आधुनिक संरचनाओं के निर्माण को गति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण पहल है। हमारे इंजीनियर्स ने सांदीपनि विद्यालय सहित बड़े-बड़े अधोसंरचनात्मक विकास के निर्माण कार्य किए हैं। सड़क, पुल, स्टेडियम और भवन जैसे निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के माध्यम से ही किये जाते हैं। विभागीय इंजीनियर्स की क्षमता संवर्धन के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण की आवश्यकता भी है। उन्होंने कहा कि इंजीनियर्स को अपना काम करने में अनेक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। आज की कार्यशाला में एमपीआईडीसी सहित देश की विभिन्न संस्थाओं के साथ समझौते हुए हैं। प्रदेश में ग्रीन बिल्डिंग के विकास को लेकर सहमति बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कार्यों और नवाचारों के लिए लोक निर्माण मंत्री एवं विभाग को बधाई दीं। तकनीक, पारदर्शिता और गुणवत्ता से बदलेगा निर्माण तंत्र : लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने क्षमता संवर्धन कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि विभाग की उस निरंतर सुधार यात्रा का प्रतीक है जिसमें नई सोच, नई प्रणाली और उच्च गुणवत्ता के साथ लोक निर्माण विभाग आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब सोच बदलती है तभी व्यवस्था बदलती है, और यह कार्यशाला विभाग के नवाचारों की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश में अधोसंरचना विकास को केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसे सुशासन, पारदर्शिता, तकनीक और नागरिक सुविधा से जोड़ा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, डिजिटल इंडिया, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, हरित विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब विकास समन्वित सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने अधोसंरचनात्मक विकास को नई गति और दिशा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट संदेश है कि निर्माण केवल संरचना नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है। समयबद्धता, गुणवत्ता, पारदर्शिता और पर्यावरणीय संवेदनशीलता अब विभाग की कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग के लिए 293 इंजीनियर्स के पद भरने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कार्य जारी है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट मैन्युअल 2.0 विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सरकारी भवन निर्माण परियोजनाओं के लिए एक समग्र मार्गदर्शिका का कार्य करेगा। मंत्री श्री सिंह ने पीएम गति शक्ति पोर्टल आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि सड़कों, पुलों और भवनों का वास्तविक आधार प्रशिक्षित एवं सक्षम मानव संसाधन होता है। इसी उद्देश्य से विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर एक वर्ष का प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किया है, जिसमें प्रत्येक त्रैमास के लिए सड़क, पुल, भवन, पर्यावरण और नवीन तकनीकों जैसी थीम निर्धारित की गई हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले भवनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप निर्मित करने के निर्देशों के पालन में त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियंताओं को इस विषय पर प्रशिक्षण देना प्रारंभ कर दिया है, जो विभाग की सकारात्मक कार्य संस्कृति का उदाहरण है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के कार्यों के लिए ट्री शिफ्टिंग की एक कार्यशाला भी बहुत जल्द आयोजित की जाएगी। भास्कराचार्य संस्थान ने लोक निर्माण विभाग के 500 से अधिक लोक कल्याण सरोवरों की कार्य योजना तैयार कर ली है। लोक निर्माण विभाग ने कार्यों का औचक निरीक्षण की शुरुआत की है, जिसे ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों ने अपनाया है। लोक निर्माण तकनीक, पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। कार्यशाला में प्रशिक्षण कैलेंडर एवं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट मैन्युअल का विमोचन किया गया तथा पी.एम.एस. पोर्टल-2.0 डिजिटल प्रबंधन प्रणाली को प्रेजेंटेशन के साथ लाँच किया गया। साथ ही, … Read more