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पीएमओ जैसी कार्यप्रणाली पर मोहन यादव का सचिवालय, फैसलों का केंद्र बना

भोपाल   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सचिवालय पीएमओ और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की तर्ज पर धीरे-धीरे सिंगल पावर सेंटर के रूप में विकसित हो गया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा में 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नीरज मंडलोई ने दो महीने पहले मुख्यमंत्री सचिवालय के अपर मुख्य सचिव का कार्यभार संभाला और इस छोटी सी समयावधि में उन्होंने मुख्यमंत्री का विश्वास अर्जित करने में सफलता हासिल की है। यह पहली बार हो रहा है जब नीरज मंडलोई ने मुख्यमंत्री सचिवालय की सभी शाखाओं के कार्यों को स्ट्रीमलाइन किया है। वे स्वयं इन कार्यों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करते हैं। फाइलों की ट्रैकिंग में तेजी आई है। खासतौर पर मुख्यमंत्री के समक्ष आने वाले आवेदनों में ए प्लस और मॉनिटरिंग के महत्वपूर्ण मामलों से संबंधित एक चार्ट प्रतिदिन मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, जिससे मुख्यमंत्री को यह मालूम पड़ जाता है कि कौन से कार्य लंबित हैं, कौन से महत्वपूर्ण हैं और किन कार्यों को तत्काल किया जाना है। इसके साथ ही राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी इस सचिवालय को मजबूत किया गया है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सचिवालय ही अब सिंगल पावर सेंटर बन गया है। आखिर फूट ही पड़ा दो मंत्रियों का गुस्सा, मुख्यमंत्री भी नहीं रोक पाए ग्वालियर की लगातार हो रही उपेक्षा को लेकर आखिर वहां के स्थानीय मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट का गुस्सा कैबिनेट मीटिंग में सामने आ ही गया। हुआ यह कि जब बैठक के दौरान ग्वालियर के मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, जो प्रदेश के उर्जा मंत्री भी हैं, ने यह कहा कि ग्वालियर शहर की स्थिति बदतर होती जा रही है, सड़कों पर गड्ढे बढ़ते जा रहे हैं, हालात नर्क जैसे हो गए हैं। हालत यह है कि नगर निगम कमिश्नर और कलेक्टर हमारी भी नहीं सुनते हैं। सीएम ने कहा कि इस बारे में वह अपने केबिन में बात कर सकते हैं, लेकिन तोमर माने नहीं और अपनी बात को जोरदार तरीके से प्रस्तुत करते रहे, इतना ही नहीं प्रदेश के जल संसाधन मंत्री और ग्वालियर के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट ने भी ऊर्जा मंत्री का समर्थन करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को ऊर्जा मंत्री की भावना के अनुरूप कोई कार्रवाई करनी चाहिए। बता दें, ये दोनों मंत्री सिंधिया कोटे के हैं। दोनों मंत्रियों की बात से कहीं ना कहीं यह इंगित होता है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी ग्वालियर के मामले में अंदर ही अंदर नाराज हैं और अपनी नाराजगी को न बताते हुए उन्होंने अपने मंत्रियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को संदेश देने की कोशिश की है। कलेक्टरों के तबादले अब कलेक्टर-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस के बाद मध्य प्रदेश में दो-तीन दिन पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की जारी तबादला सूची में अति आवश्यक दिखने वाले दो-तीन जिलों के कलेक्टर ही बदले गए हैं। इसका मतलब यह है कि बड़े पैमाने पर कलेक्टरों की तबादला सूची का अभी भी इंतजार है। माना जा रहा है कि अब यह तबादला सूची कलेक्टर-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस और दशहरे के बाद ही आ सकती है। बता दें कि त्योहारी मौसम के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस 17 सितंबर से गांधी जयंती 2 अक्टूबर तक प्रदेश में सेवा पखवाड़ा अभियान चलाया जाएगा। राज्य सरकार के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले इस अभियान को सफल बनाने की जवाबदारी कलेक्टरों को दी गई है। इसी अभियान के बाद मुख्यमंत्री द्वारा कलेक्टर-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जानी है। माना जा सकता है कि इसमें कलेक्टरों के कार्यों का आकलन किया जाएगा और उसके बाद ही कलेक्टरों के तबादला आदेश जारी होंगे। पहली बार जनसंपर्क आयुक्त बने इंदौर संभाग के आयुक्त मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था का अगर इतिहास देखा जाए तो अभी तक यह होता आया है कि इंदौर के कलेक्टर रहे आईएएस अधिकारी बाद में संचालक या आयुक्त जनसंपर्क विभाग बनाए जाते हैं। यह परंपरा भागीरथ प्रसाद, ओपी रावत से लेकर मनीष सिंह तक देखी जा सकती है। ऐसा भी हुआ है जब जनसंपर्क संचालक को कलेक्टर बनाया गया है। ऐसे उदाहरण पूर्व में डॉ. राजेश राजौरा और गोपाल रेड्डी के रूप में देखे जा सकते हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है जब जनसंपर्क आयुक्त को इंदौर संभाग का आयुक्त बनाया गया है। माना जा सकता है कि आयुक्त जनसंपर्क हमेशा से मुख्यमंत्री के अति विश्वसनीय अधिकारियों में शामिल रहे हैं और सुदाम खाड़े भी उसी परंपरा के अधिकारी हैं। ऐसे में सुदाम को प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण संभाग इंदौर की जवाबदारी दिया जाना नए संदेश दे रहा है।  

दिल जीतने वाला पल: बहन की मांग पर मोहन यादव ने लिया भुट्टे का मज़ा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव राजधानी भोपाल और प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर सामान्य नागरिकों के साथ संवाद अवश्य करते हैं। चाहे चाय की छोटी सी दुकान पर रुककर चाय पीने का प्रसंग हो या खुद चाय बनाने की बात हो या मूंगफली खरीदना,भुट्टा  खरीदना और ऑनलाइन पेमेंट करना, उनके सहज स्वभाव में शामिल हैं। इस बीच वे अपनी सौम्य मुस्कान के साथ छोटा-मोटा संवाद भी नागरिकों से कर लेते हैं। रविवार की शाम भी ऐसा ही हुआ। अटल बिहारी वाजपेयी  सुशासन संस्थान के नजदीक मुख्यमंत्री डॉ यादव ने अपनी सहजता सरलता से राह चलते लोगों का भी मन मोह लिया। भदभदा पुल से जब वे कार्यवश निकल रहे थे तो काफिला रुकवा कर भुट्टे का स्वाद लिया।  दरअसल एक बहन ने उन्हें आवाज दी थी और सामान्य नागरिक मानकर उनसे कहा,साहब भुट्टे लेते जाओ तो उन्होंने अपना वाहन रुकवाया। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने बिना ट्रैफिक अवरुद्ध किये  बहन के  साथ भुट्टा भी खाया। वे भुट्टा अपने साथ भी ले गए। उपस्थित नागरिकों के साथ उन्होंने तसल्ली से छायाचित्र  भी खिंचवाए ।  

नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में रोल मॉडल बनकर उभरा मध्यप्रदेश

मुरैना में होगा 600 मेगावॉट ऊर्जा का भंडारण भोपाल मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में रोल मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रदेश में स्थापित की गई अनेक अभूतपूर्व परियोजनाओं से सौर ऊर्जा की आपूर्ति न केवल प्रदेश में, बल्कि दिल्ली मेट्रो एवं भारतीय रेल को भी की जा रही है। ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी पर विश्व की सबसे बढ़ी फ्लोटिंग सौर परियोजना स्थापित की है। मुरैना में भी एक अभिनव सौर परियोजना स्थापित की जा रही है, जिसमें ऊर्जा भण्डारण कर सुबह और शाम के व्यस्ततम समय (पीक ऑवर्स) में भी प्रदेश को हरित ऊर्जा प्रदाय की जाएगी। इस परियोजना की ऊर्जा भंडारण क्षमता 600 मेगावॉट होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। उनके संकल्प की पूर्ति के लिये मध्यप्रदेश प्रतिबद्ध है और लक्ष्य प्राप्ति के लिये नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर नवाचार भी कर रहा है। मुरैना में स्थापित होने जा रही अनूठी परियोजना के लिए निवादा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस परियोजना में सलाहकार आईएफसी की सेवाएं ली गई हैं। साथ ही डेवलपर और निवेशकों के सुझाव भी सम्मिलित किये गए हैं। मुरैना सोलर पार्क में प्राप्त विद्युत् दर भविष्य की सौर ऊर्जा भण्डारण आधारित परियोजनाओं के लिए मानक होगी। परियोजना से प्रदेश में लगभग 4 हजार करोड़ रूपये का निवेश अपेक्षित है। इससे चंबल क्षेत्र का विकास होगा, साथ ही स्थानीय युवाओं के लिये रोज़गार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। मुरैना में विश्व-स्तरीय सौर ऊर्जा भण्डारण परियोजना की स्थापना गर्व का विषय है। इस परियोजना से प्रदेश नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक और कीर्तिमान स्थापित करेगा। मुरैना परियोजना से सौर ऊर्जा केवल दिन में ही नहीं बल्कि सूर्यास्त के बाद भी प्रदाय की जाएगी। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला का कहना है कि मुरैना परियोजना राज्य सरकार की सकारात्मक सोच एवं प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इस परियोजना और ऐसी अन्य आगामी परियोजनाओं से मध्यप्रदेश, देश ही नहीं बल्कि विश्व के लिए अक्षय ऊर्जा का एक रोल मॉडल होगा। प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के अधिक उपयोग एवं ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऊर्जा भण्डारण आवश्यक है। प्रदेश में दिन के समय हरित एवं सस्ती सौर ऊर्जा उपलब्ध है, परन्तु शाम के पीक ऑवर्स में विद्युत् आपूर्ति कोयला आधारित और महंगी है। मुरैना सोलर पार्क और ऊर्जा भण्डारण, प्रदेश की पीक ऊर्जा आवश्यकताओं को सौर ऊर्जा से पूरा करने की दिशा में पहला कदम है। यह सोलर प्लस बैटरी आधारित परियोजना है, जिसके अंतर्गत शाम 6 से रात 10 बजे तथा सुबह 6 से 9 बजे तक मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) की 440 मेगावॉट तक की पीक आवश्यकताएँ पूरी की जाएँगी। मुरैना का 600 मेगावॉट का सोलर पार्क शाम के पीक ऑवर्स में आपूर्ति के लिए दिन में बैटरी को चार्ज करेगा एवं रात के समय एमपीपीएमसीएल द्वारा सुबह के पीक ऑवर्स की आपूर्ति के लिए बैटरी चार्ज की जाएगी। मध्यप्रदेश विद्युत उत्पादन में अग्रणी है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगभग पौने 6 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। इन निवेशों से 1 लाख 85 हजार नए रोज़गार सृजित होंगे। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत ऊर्जा, अक्षय स्रोतों से प्राप्त करना है। प्रदेश में 24 हजार 600 से अधिक मेगावॉट बिजली बनाने की वर्तमान में क्षमता मौजूद है। इसे चालू वर्ष 2 हजार मेगावॉट से अधिक बढ़ाने का लक्ष्य है। ओंकारेश्वर में देश की सबसे बड़ी-फ्लोटिंग सौर परियोजना के पहले चरण में 278 मेगावॉट बिजली बनने लगी है। आगर और नीमच में भी बड़े सौर प्लांट शुरू हुए हैं। मुरैना में 800 मेगावॉट की सोलर परियोजना विकसित की जा रही है, जिसमें 600 मेगावॉट की ऊर्जा भंडारण क्षमता भी होगी।

इंदौर में मुख्यमंत्री को मिलेगी फिल्म स्टार्स जैसी सुविधा, मोहन यादव की नई रहन-सहन व्यवस्था

इंदौर   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब फिल्म स्टार्स की तरह वैनिटी वैन में नजर आएंगे. दरअसल, क्लीन और ग्रीन शहर इंदौर में फिल्म स्टार्स की तरह सीएम के लिए वैनिटी वैन फैसिलिटी उपलब्ध होगी. दरअसल, इंदौर नगर निगम ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के दौरान व्यक्तिगत चर्चा, आराम और प्रसाधन जैसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए एक अत्याधुनिक वैनिटी वैन बनाई है. मध्य प्रदेश के इंदौर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के दौरान हर समय ये वैनिटी वैन उपलब्ध रहेगी. मोहन यादव का चलता फिरता घर इंदौर में नगर निगम द्वारा तैयार किया गया यह वीआईपी कक्ष किसी फाइव स्टार होटल के कमरे की तरह नजर आता है. इसे खास तौर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यक्रमों के लिए तैयार किया गया है, जिसमें वे कार्यक्रमों के दौरान बिना कहीं जाए आराम करने से लेकर प्रसाधन जा सकें. इस वैनिटी वैन में मीटिंग रूम भी तैयार किया गया है, जहां सीएम लोगों से चर्चा कर सकते हैं. प्रोटोकॉल ध्यान रखकर तैयार की गई लग्जरी वैनिटी वैन इंदौर नगर निगम द्वारा तैयार की गई ये वैनिटी वैन सर्वसुविधा युक्त, एयर कंडीशन्ड, लग्जरी और ईको फ्रेंडली है. इसमें लग्जरी फर्नीचर, बाथरूम के अलावा अन्य एमेनिटीज मौजूद हैं. वैनिटी वैन को लेकर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया, '' प्रदेश के किसी नगर निगम में मुख्यमंत्री के लिए तैयार हुई यह पहले वैनिटी वैन है. प्रोटोकॉल के तहत हर बार मुख्यमंत्री के लिए जो टेंट रूम तैयार किया जाता है, उस पर एक बार का खर्च 5 लाख से भी ज्यादा आता है. ऐसी स्थिति में नगर निगम वर्कशॉप के प्रभारी मनीष पांडे को ख्याल आया कि हर बार मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान टेंट रूम बनाने से बेहतर है कि तमाम सुविधाओं के साथ एक वैनिटी वैन बना दी जाए. इस वैन को बनाने में 5 लाख रु खर्च आया है, लेकिन अब ये सीएम के हर दौरे में उपलब्ध रहेगी.'' इस वैनिटी वैन को मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल के तहत तैयार कराया गया है और इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है. नगर निगम वर्कशॉप के प्रभारी मनीष पांडे के मुताबिक इंदौर के राजवाड़ा में कैबिनेट बैठक के बाद हाल ही में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में इसी वैनिटी वैन का उपयोग किया गया, जिसे आगे भी मुख्यमंत्री की जरूरत के लिए उपयोग में लाया जाएगा. फिल्म स्टार रखते हैं वैनिटी वैन दरअसल, वैनिटी वैन रखने का ट्रेंड फिल्म स्टार्स का है, जो अपनी शूटिंग साइट पर वैनिटी वैन में ही रहने, सजने संवरने और आराम के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. इसी कॉन्सेप्ट पर आधारित यह वैनिटी वैन अब मुख्यमंत्री को भी फिल्म स्टार्स की तरह आराम और सुविधाएं देगी. बता दें कि इस वैनिटी वैन को महज 9 दिन में तैयार किया गया था और इसे सबसे पहले इंदौर में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान इस्तेमाल किया जा चुका है.