नई दिल्ली
गृह मंत्रालय (MHA) ने लोगों को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भ्रामक विज्ञापनों के जरिये होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी को लेकर आगाह करते हुए एक एडवाइजरी जारी की है. इन विज्ञापनों में प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और मुख्यमंत्रियों सहित प्रमुख जाने-माने लोगों और राजनीतिक हस्तियों के छेड़छाड़ किए गए या डीपफेक वीडियो का उपयोग करके फर्जी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार किया जाता है और वित्तीय सहायता का वादा किया जाता है।
MHA की राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई (NCTAU) ने सोमवार को यह एडवाइजरी जारी की, जिसमें बताया गया है कि जालसाज लोगों को झूठे टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन चार्ज और अन्य खर्चों का भुगतान करने के लिए धोखा देते हैं, ताकि वे वादा किए गए फायदों को हासिल कर सकें।
एडवाइजरी में कहा गया है कि कुछ मामलों में, पीड़ितों को नकली कैशबैक रिवॉर्ड और स्क्रैच-कार्ड या स्पिन-एंड-विन प्रतियोगिताओं के जरिये ललच दिया जाता है और धोखे से उनसे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) कलेक्ट रिक्वेस्ट को मंजूर करवा लिया जाता है, जिससे उनके खातों से पैसे कट जाते हैं।
एडवाइजरी में लोगों को इंटरनेशनल नंबरों, विशेष रूप से +92 (पाकिस्तान का कंट्री कोड) से शुरू होने वाले नंबरों से आने वाले फोन कॉल के प्रति अत्यधिक सावधानी बरतने की चेतावनी भी दी गई है, जिनमें कॉल करने वाले व्यक्ति सार्वजनिक हस्तियों या उनके कार्यालयों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं।
एडवाइजरी के मुताबिक, धोखेबाज मुख्य रूप से मेटा प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे विज्ञापनों का प्रसार कर रहे हैं जिनमें छेड़छाड़ किए गए वीडियो शामिल हैं. इन वीडियो में फर्जी तरीके से सार्वजनिक हस्तियों को जरूरतमंद लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा करते या उनका प्रचार करते हुए दिखाया जाता है. कुछ विज्ञापनों में फोन नंबर होते हैं, जबकि अन्य उपयोगकर्ताओं को कथित लाभ या पुरस्कार का दावा करने के लिए धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों पर ले (redirect) जाते हैं।
एडवाइजरी में कहा गया है कि पीडितों से फोन कॉल या व्हाट्सएप चैट के जरिये संपर्क किया जाता है, या उन्हें नकली स्क्रैच-कार्ड और स्पिन-एंड-विन प्रतियोगिताएं पेश करने वाली वेबसाइटों पर रीडायरेक्ट किया जाता है. कई मामलों में, अंतरराष्ट्रीय नंबरों (खासकर +92 पाकिस्तान वाले नंबरों) से कॉल करने वाले यह दावा करते हैं कि पीड़ितों को वित्तीय मदद पाने के लिए रैंडम तरीके से चुना गया है. इसके बाद धोखेबाज वादा किए गए फंड को जारी करने से पहले टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन चार्ज, वेरिफिकेशन फीस या अन्य प्रशासनिक खर्चों के बहाने बार-बार पैसों की मांग करते हैं।
एडवाइजरी में बताया गया है कि कुछ मामलों में, पीड़ितों को पेमेंट ऐप्स पर भेजा जाता है और इनाम की राशि प्राप्त करने के बहाने उनसे उनका ट्रांजेक्शन पिन (PIN) दर्ज करने के लिए कहा जाता है. इसके बजाय, यह ट्रांजेक्शन पीड़ित के खाते से जालसाज के खाते में पेमेंट की मंजूरी देता है, जिससे उन्हें वित्तीय नुकसान होता है।
NCTAU ने लोगों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया पर विज्ञापनों का जवाब देने से पहले संबंधित सरकारी विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों के जरिये कल्याणकारी योजनाओं की पुष्टि करें. उन्हें सरकारी लाभ से संबंधित किसी भी भुगतान के उद्देश्य और प्राप्तकर्ता की भी जांच करनी चाहिए।
एडवाइजरी में लोगों से कहा गया है कि अगर कोई खुद को सरकारी विभाग का अधिकारी या प्रतिनिधि बताता है, तो ऑफिशियल तरीकों से उसकी पहचान की जांच जरूर करें और शक होने पर खुद उस दफ्तर में जाकर पुष्टि करें।
MHA ने अज्ञात लोगों के साथ आधार और PAN डिटेल्स, बैंक अकाउंट की जानकारी, वन-टाइम पासवर्ड (OTPs) और UPI PINs जैसी संवेदनशील व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी साझा करने के खिलाफ भी चेतावनी दी है. लोगों को सलाह दी गई है कि वे सरकारी अधिकारियों के वीडियो और वॉयस रिकॉर्डिंग में किए गए दावों को सत्यापित करें और किसी भी UPI कलेक्ट रिक्वेस्ट को मंजूरी देने से पहले ट्रांजैक्शन डिटेल्स को ध्यान से चेक करें।
एडवाइजरी में इस बात पर जोर दिया गया है कि UPI PIN का इस्तेमाल पेमेंट को ऑथराइज करने के लिए किया जाता है, पैसे लेने के लिए नहीं. जिन लोगों को फ्रॉड एप्लीकेशन मिलते हैं या वे ऐसे स्कैम का शिकार होते हैं, उनसे कहा गया है कि वे तुरंत 1930 पर कॉल करके या www.cybercrime.gov.in पर जाकर घटना की रिपोर्ट करें।





